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Gotham Character Profile- Dr. Dollmacher a.k.a The Dollmaker

The Dollmaker is a character that has only recently came into the world of Batman with the New 52 comics, his background story and first appearance is featured in Detective Comics #1. 190 more words

Batman

Gotham: “Red Hood” Review

EYE FOR AN EYE

Note: The following review goes into detail about the episode. SPOILER ALERT!

Why Fish, why!? There are very few things that can make me feel uncomfortable while watching a TV show, but someone scooping out their eyeball with a spoon is one of them. 790 more words

YouNerded Reviews

Nanners Reviews - Gotham: Red Hood

I managed to catch up to Gotham shortly after catching back up to Flash and Arrow, and while the latter two kept me excited through my binge-watching, Gotham wasn’t able to hook me in the exact same way. 805 more words

Review

The Joker/ Red Hood Dilemma

The latest episodes of Gotham have aroused much suspicion and many fan theories among the fan base, Episode 16- The Blind Fortune Teller introduced what would seem to be a new character to the continually expanding roster of recognizable names. 715 more words

Batman

Gotham: “The Scarecrow” Review

FEARLESS

Note: The following review goes into detail about the episode. SPOILER ALERT!

“The Scarecrow” followed on straight from where we left off last week, with the deranged Doctor Crane still intent on finishing his experiment. 662 more words

YouNerded Reviews

भारतीय नारी और उसकी सुरक्षा

धरती बेचैन हैं,
बादल बेताब है.
ऐसी है मोहब्बत,
की दोनों बेलगाम हैं.
वो बरसता हैं उमड़-उमड़ के,
वो लहराती हैं मचल-मचल के.
दोनों के बीच है दूरी, लाख योजन की,
पर रिश्ता ये बेमिसाल है.
जब पतझड़ आता हैं,
सब कुछ हर जाता है.
अपने योवन में मस्त बैल,
दौड़ – दौड़ के,
सुनी धरती को सजाता हैं.
तो कोना – कोना धरती का,
सोना बनके लहलहाता हैं.
अनपढ़ – गवार, भारत का किसान,
जिसकी मुठ्ठी में, भूख और प्यास है.
जब हल लिए काँधे पे,
खेतो में जाता है,
तो सावन छा जाता है.
इठलाती है धरती दुल्हन सी,
और खेत – खलिहान भर जाता है.
ऐसी है मोहब्बत,
रिश्ता ये बेमिसाल है.

परमीत सिंह धुरंधर

Love

मैं और मेरा बैल

कल रात पड़ी कड़ाके की ठंढ,
और मेरा बैल भूखा था.
मैं बीमार, पड़ा बिस्तर पे,
और वो नम आँखों से,
मुझे निहारता था.
रोटी तोड़ कर,
दाल में, निचोरता मैं.
और उसका नाद सुनसान था.
मैं खा रहा था, लज्जति, शर्म से,
सर को झुकाएं।
वो क्रोध से तमतमाये,
मुझ पे गुर्राता था.
आते – जाते राही, पडोसी,
लगा देते, नाद में भूसा और खल्ली।
सींगों से उनको उड़ाता,
मुँह दाबे, वो बैठा था.
आज निकली है,
एक अलग, उषा की किरण।
नस – नस में स्फूर्ति मेरे,
और ऊर्जा को पाकर,
मैंने जो बाँधा सर पे मुरेठा।
देख कर मेरे हाथों में हल,
भूखा पेट भी वो, नाद पे उछला हैं.
कल रात पड़ी कड़ाके की ठंढ,
फिर भी,
भूखे पेट वो, बहने को दौड़ा हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

Bull