मैं अक्सर शाम के वक़्त अपने छत पर टहलता हूँ, कुछ दिनों पहले मैंने अपने पड़ोस के भाईसाहब को बहुत दिनों बात देखा ,तो मन नहीं माना और मैंने उनका हाल चाल पूछ लिया। दरअसल उनकी नौकरी हाथ से निकल गयी थी, जिसके वजह से वो परेशान थे, थोड़ी चर्चा के बाद उन्होंने सारा का सारा दोष देश की आबादी पर दाल दिया , या मैं और सटीक होकर लिखूँ तो – “ 1.143 altre parole