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Viens

Viens on écrit des mots entiers

On les prend

On les noie

On en fait ce qu’on en fait.

Viens on écrit des mots qui pleurent… 289 mots de plus

Non Classé

Ces étés là...

Au fil des mois, les saisons se déshabillent, perdent de leur charme
Il n’y a plus ni printemps, ni automne, ni hiver
Il n’y a que des étés sans toi… 141 mots de plus

Photographie

आज़ाद भारत के मसले

कोई अपने कपड़ों की दुकान में बीड़ी पी रहा था 
शायद खिड़की से उसकी शाम की बीड़ियाँ गिनी जा रहीं हों
कल पंद्रह पी थी, आज सिर्फ़ छे ही पी 
आज़ाद आँखों से आज़ाद बाजुओं को हर रोज़ ताड़ा जाता हो 
फ़ोन की स्क्रीन पर सटीक नज़रें टिकाए शायद वो कोई फ़िल्म देख रहा है 
पर देखने वाले को फ़िल्म का नाम पता नहीं 
देखने वाले को उसका नाम पता नहीं 
आज़ाद आसमान से जब आज़ाद बारिश होती है 
तो हैंगर में कैद कपड़ों को अंदर खींच लिया जाता है
पानी से कपड़े आज़ाद रहते है और कपड़ों से पानी 
इस आज़ाद भारत में प्रेम का प्रमाण कैसे दिया जाए? 
Poésie

Zwischen meinem Gehirn und meinem Herzen tobt ein Kampf, Es geht darum, ob ich weitermachen oder festhalten soll.