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	<title>shayri &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/shayri/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "shayri"</description>
	<pubDate>Sat, 10 May 2008 22:21:12 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[Yaad aayenge...]]></title>
<link>http://nuts.wordpress.com/?p=199</link>
<pubDate>Sat, 10 May 2008 12:51:07 +0000</pubDate>
<dc:creator>nuts</dc:creator>
<guid>http://nuts.wordpress.com/?p=199</guid>
<description><![CDATA[Khubiyaan itni to nahi hum me,
Ki tumhe har pal yaad aayenge,
Par itna aeitbaar hai hume khud pe,
Ki]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><em>Khubiyaan itni to nahi hum me,<br />
Ki tumhe har pal yaad aayenge,<br />
Par itna aeitbaar hai hume khud pe,<br />
Ki aap kabhi hume bhool bhi na paayenge<br />
</em></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[Auro ki tarah..]]></title>
<link>http://nuts.wordpress.com/?p=198</link>
<pubDate>Sat, 10 May 2008 12:44:53 +0000</pubDate>
<dc:creator>nuts</dc:creator>
<guid>http://nuts.wordpress.com/?p=198</guid>
<description><![CDATA[Apnaapan sikhaa kar judaa ho gaye,
Na socha Na samjha khafaa ho gaye,
Ab kisko hum apna kahenge,
Wo ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><em>Apnaapan sikhaa kar judaa ho gaye,<br />
Na socha Na samjha khafaa ho gaye,<br />
Ab kisko hum apna kahenge,<br />
Wo bhi auro ki tarah bewafaa ho gaye.</p>
<p></em></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[Pyaar karte hai...]]></title>
<link>http://nuts.wordpress.com/?p=197</link>
<pubDate>Sat, 10 May 2008 12:43:08 +0000</pubDate>
<dc:creator>nuts</dc:creator>
<guid>http://nuts.wordpress.com/?p=197</guid>
<description><![CDATA[Badalna aata nahi humko mausam ki tarah,
har roop me unka intzar karte hai,
na samet sakenge jise qa]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><em>Badalna aata nahi humko mausam ki tarah,<br />
har roop me unka intzar karte hai,<br />
na samet sakenge jise qayamat tak,<br />
kasam khuda ki unhe itna pyar karte hai.<br />
</em></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[उनका नाम ही दरियादिल हो जाता-कविता]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/?p=372</link>
<pubDate>Fri, 09 May 2008 16:16:33 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakraj.wordpress.com/?p=372</guid>
<description><![CDATA[अपने दिल का बयां कभी कभी
दूसरे के अल्फ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">अपने दिल का बयां कभी कभी</span></h3>
<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">दूसरे के अल्फाजों में नजर आता है</span></h3>
<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">वह दिल को छू जाता है</span></h3>
<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">इसलिए कहते हैं </span></h3>
<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">दर्द और खुशी दोनो ही</span></h3>
<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">बांट लिया करो दोस्तों से<br />
 <br />
जश्न का मौका हो तो </span></h3>
<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">मजा हो जाता दुगुना </span></h3>
<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">गम आधा रह जाता है </span></h3>
<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">खोये रहोगे अपने ही दिल में </span></h3>
<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">तो रोशनी कहीं से नहीं आयेगी</span></h3>
<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">जो सुनोगे किसी और की आवाज </span></h3>
<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">तभी कोई मिलेगा आसरा </span></h3>
<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">वरना कहते हैं कि </span></h3>
<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">अकेला चना कभी भाड़ नहीं फोड़ पाता है</span></h3>
<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">अपने लिये तो जिंदा हैं सब</span></h3>
<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">बांटकर खाते हैं जो लोगों से मिलकर</span></h3>
<h3 style="padding-left:60px;text-align:left;"><span style="color:#003300;">उनका नाम ही दरियादिल हो जाता है<br />
............................<br />
</span></h3>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पसीना ही कविता लिखवाता है]]></title>
<link>http://deepakbapukahin.wordpress.com/?p=520</link>
<pubDate>Wed, 07 May 2008 16:51:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakbapukahin.wordpress.com/?p=520</guid>
<description><![CDATA[बदलते मौसम के साथ
मन भी यूं बदल जाता है
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बदलते मौसम के साथ<br />
मन भी यूं बदल जाता है<br />
जैसे उसके साथ बंधे हों हाथ<br />
ग्रीष्म के जलती दोपहर में<br />
व्यग्रता इतनी बढ़ जाती है<br />
नरक लगता हो  जीवन<br />
शाम होते बहती ठंडी हवा का<br />
एक झौंका भी शीतल कर देता है<br />
मौसम और मन के पहिये<br />
घूमते देख कौन कह सकता है<br />
हमारा मन भी होता है कभी हमारे साथ<br />
..........................</p>
<p>गर्मी की दोपहर में<br />
साइकिल पर चलते हुए<br />
पसीने में नहाए मैंने उसे देखा है<br />
लिखता है कविता वह हसंते  हुए<br />
कभी  उसे रोते नहीं देखा है<br />
पूछने पर बताता है<br />
उसके दोपहर का पसीना ही<br />
रात में शीतलता देकर उससे कविता लिखवाता है<br />
मैं उसे केवल आईने में ही देख पाता हूं<br />
क्योंकि वह चेहरा<br />
केवल उसी में नजर आता है </strong></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[Hindi SMS]]></title>
<link>http://shayariclub.wordpress.com/?p=5</link>
<pubDate>Sat, 03 May 2008 13:27:59 +0000</pubDate>
<dc:creator>muthukr</dc:creator>
<guid>http://shayariclub.wordpress.com/?p=5</guid>
<description><![CDATA[BANAA DIYAA HAI ZAMAANAY NAY DIL KO PATTHAR KA
Banaa diyaa hai zamaanay nay dil ko patthar kaa,
Bega]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>BANAA DIYAA HAI ZAMAANAY NAY DIL KO PATTHAR KA</strong><br />
Banaa diyaa hai zamaanay nay dil ko patthar kaa,</p>
<p>Begair mere tujhe chain aa nahin sakta,<br />
Meraa javaab kahin say tuu laa nahin sakta,</p>
<p>Hazaar pardy bhii daalo agar banaavat kay,<br />
Dilon kii baat ko chehraa chhupaa nahin sakta,</p>
<p>Banaa diyaa hai zamaanay nay dil ko patthar kaa,<br />
Sataaye koyi bhii mujh ko rulaa nahin sakta,</p>
<p>Hasiin taaj mahal kay banaanay vaalaa bhii,<br />
Dilon kay tuutay gharaunday banaa nahin sakta.<br />
<a href="http://shayaris.org"><strong>Shayari</strong></a><br />
&#60;<a href="http://keralabackwatertour.org">strong&#62;Kerala Photoblog</strong></a><br />
<a href="http://shayri.info"><strong>Sher</strong></a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क्रिकेट मैच के दौरान नृत्य कार्यक्रम:एक विचार ]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/?p=366</link>
<pubDate>Thu, 01 May 2008 14:06:41 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakraj.wordpress.com/?p=366</guid>
<description><![CDATA[अभी चल रही प्रतियोगिता में क्रिकेट मै]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>अभी चल रही प्रतियोगिता में क्रिकेट मैचों के दौरान ‘चीयर गर्ल’ की भूमिका पर अनेक लोग सवाल उठा रहे हैं।  कई लोग ऐसे देश की संस्कृति के विरुद्ध तो कई इसे क्रिकेट खेल से इतर बता रहे हैं। मुझे लगता है कि ऐसा करने वाले लोग संभवतः केवल इसमें क्रिकेट को देखना चाहते हैं-शायद यही वजह है कि वह ऐसी आपत्तियां उठा रहे है। मुझे लगता है कि ऐसी आपत्तियां उठाने की कोई वजह नहीं हैं।</p>
<p>मैं बरसों से क्रिकेट खेल देख रहा हूं और अब कभी कभार देखता हूं। पहले लगन के  साथ पूरा मैच देखता था पर अब मन में आता है और जब भारत के जीतने की आशा लगती है तब देखता हू। मतलब यह कि पहले जैसा कोई लगाव नहीं है पर अंतर्राष्ट्रीय मैचों में थोड़ी दिलचस्पी रहने के बावजूद मैने एक भी मैच नहंी देखा है। इस बारे में खबरें अक्सर समाचार पत्रों और टीवी पर दिख जातीं है और उनसे नजरे बचाना मुश्किल है। मैच के दौरान नृत्य पेश करने को लेकर अनेक  लेख मैने सब जगह देखे हैं और मुझे इसके विरोध का आधार अभी तक मजबूत नहीं दिखाई दिया।</p>
<p>अभी जब भारत ने ट्वंटी-ट्वंटी विश्व कप प्रतियोगिता में विजय हासिल की तो देश में जिस तरह  जश्न मनाया गया तो उसी समय  मैने यह अपना विचार लिख दिया था कि बाजार इसे भुनाने का प्रयास करेगा क्योंकि उसको यहां अपने लिये कमाई का एक जरिया दिख रहा है। उस प्रतियोगिता में भी ऐसे नृत्य थे और लोगोंं ने इसे देखा पर शायद राष्ट्रप्रेम के जज्बे में इसकी अनदेखी करते रहे। इसके बाद भी देश में एक ट्वंटी-ट्वंटी का मैच हुआ उसमें भी वह सब दिखाया गया-अब  चूंकि प्रतियोगिता लंबी है इसी कारण यह चर्चा का विषय बना। मतलब इस प्रतियोगिता के शुरू होने से पहले ही यह सबको पता था कि ऐसा होगा फिर अचानक उसका विरोध शुरू होना मेरी समझ से परे है। दरअसल यह नृत्य कार्यक्रम एक तरह से ट्वंटी-ट्वंटी का हिस्सा बन गया है और देखा जाये तो बिना राष्ट्रप्रेम के जज्बे के इन मैचों के लिये मैदान और टीवी चैनलों पर भीड़ जुटाना शायद बाजार वालों के लिये कठिन होता। फिर इसमें किसी प्रदेश या देश की भावना नहीं जुड़ी और इन टीमों के अंतर्राट्रीय खिलाड़ी होने के बावजूद इन मैचों का कोई खास महत्व नहीं है। ऐसे में बाजार मे मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ जानते हैं कि इन मैचों में अतिरिक्त कुछ जोड़कर ही इनको लोकप्रिय बनाया जा सकता है।<br />
प्रचार माध्यम भी कई बार टीमों के साथ फिल्मी हीरो और हीरोइन का नाम जोड़कर अप्रत्यक्ष रूप से लोगों को यह संदेश देते नजर आते हैं कि इनके साथ कोई राष्ट्रप्रेम या प्रदेशप्रेम के जज्बात जोड़ना ठीक नहीं होगा। पहले कई अवसरों अंतर्राष्ट्रीय मैचोंे में अनेक विवाद उठ चुके हैं तब देश के नाम की आड़ लेकर मुद्दा उठाया जाता था पर अब इसमें यह संभव नहीं है। यह पूर्णतः मनोरंजक क्रिकेट है और इसमें प्रतिस्पर्घा की भावना खिलाडि़यों में धन को लेकर है न कि देश के नाम को लेकर। कई क्रिकेट प्रेमी इन मैचों की परवाह नहीं कर रहे क्योंकि वह देश के नाम पर होने वाली प्रतिस्पर्धा को देखने के इतने आदी है कि उनको इसमें मजा नहीं आ सकता है।</p>
<p>कुल मिलाकर इन मैचों पर लोग विवाद खड़े कर उसे और अधिक लोकप्रिय बना रहे हैं। जहां तक सार्वजनिक रूप से नृत्य दिखाने का प्रश्न है तो कई स्टेडियमों में इस तरह के कार्यक्रम होते रहते हैं फिर इसे क्रिकेट के साथ दिखाने पर आपत्ति उठाना कोई तार्किक नहीं लगता। क्रिकेट अब दो भागों के बंट चुका है एक है प्रतिस्पर्धात्मक क्रिकेट और दूसरा है मनोरंजक क्रिकेट। यह दूसरा वाला रूप है और इसमे केवल क्रिकेट खेल पर शायद दर्शक जुटाना शायद कठिन होता इसीलिये यह मनोरंजक कार्यक्रम इसका हिस्सा बनाया गया है। जिसे देखना है वह देख रहा है जिसको नहीं देखना वह मूंह फेर रहा है। मेरा आशय यह नहीे कि  ऐसा होना ठीक है  बल्कि मेरा विचार है कि अपनी विचारधारा किसी पर नहीं थोपना चाहिए। मुझे यह मैच प्रभावित नहीं कर पाता इसलिये नहीं देख रहा और जो देख रहे उन पर  कोई आपत्ति व्यक्त करने की इच्छा भी नहीं है। इस तरह के बदलाव देखने की आदत मुझे है और मैं मानता हूं कि आगे चलकर एक दिवसीय और टेस्ट मैचों में भी यह दिखाई दे तो आश्चर्य नहीं होगा।</p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क्रिकेट मैच में एक्शन का सीन-हास्य कविता]]></title>
<link>http://rajdpk1.wordpress.com/?p=20</link>
<pubDate>Wed, 30 Apr 2008 15:31:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://rajdpk1.wordpress.com/?p=20</guid>
<description><![CDATA[बगल में अखबार दबाकर
घर आया फंदेबाज और ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color:#ff00ff;">बगल में अखबार दबाकर<br />
घर आया फंदेबाज और बोला<br />
‘दीपक बापु तुमने<br />
पहले अखबारों  और अब ब्लाग पर<br />
क्रिकेट पर ही लिखना शुरू किया<br />
फिर क्यों अब मूंह फेर लिया<br />
देखो क्रिकेट में फिल्म के एक्शन का<br />
मजा भी आ रहा है<br />
पहले पिटा  हीरो<br />
अब पीटकर बाहर जा रहा है<br />
क्यों नहीं तुम भी देखा करते<br />
बैट-बाल के खेल में<br />
मारधाड़ की भी मजा क्यों नहीं लिया करते<br />
ऐसे क्रिकेट से क्यों किनारा किया’</span></strong></p>
<p><strong><span style="color:#ff00ff;">सुनकर पहले हैरान हुए फिर बोले<br />
‘‘हम फिल्म के वक्त फिल्म और<br />
क्रिकेट के वक्त क्रिकेट देख करते हैं<br />
यह टू-इन-वन मजा तुम ही लो<br />
हमें तो अब इससे दूर ही समझ लो<br />
हमने पहले भी कहा था<br />
क्रिकेट अब कम खेली जायेगी<br />
पर उससे पहले उसकी पटकथा लिखा जायेगी<br />
फिल्म वालों ने लिया है मोर्चा<br />
क्रिकेट को चमकान का<br />
तो उनकी कला यहां भी नजर आयेगी<br />
आस्ट्रेलिया में किया था जिसने हीरो को रोल<br />
उसे अब विलेन बनाकर पेश किया<br />
उस समय के विलेन को दे रहे थें जो गालियां<br />
अब बजा रहे उनके लिये तालियां<br />
यह हीरो-हीरोइन भला कब  डायरेक्टर के<br />
 हुक्म के बिना एक्शन के कब होते है<br />
जरूर लिखी होगी किसे ने पटकथा<br />
जो झगड़े की फोटो कैमरे से लेने में रोकते हैं<br />
झगड़ा करने वाले खिलाड़ी<br />
बाद में ऐसे होकर मिलते हैं<br />
जैसे कोई बढि़या अभिनय किया<br />
कह तो रहे है सभी<br />
पर किसने देखा यह कि <br />
थप्पड़ मारने वाले ने अपना कितना नुक्सान किया<br />
हमने ने देखा न मैच न झगड़ा<br />
पर एक बात मानते हैं कि<br />
क्रिकेट खेल में एक्शन का सीन लिखकर<br />
पटकथा लिखने वाले ने कमाल किया<br />
............................</span></strong></p>
<p><strong><br />
</strong></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पटकथा लिखने वाले ने कमाल किया-हास्य कविता]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/?p=365</link>
<pubDate>Wed, 30 Apr 2008 15:01:46 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakraj.wordpress.com/?p=365</guid>
<description><![CDATA[बगल में अखबार दबाकर
घर आया फंदेबाज और ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color:#003300;">बगल में अखबार दबाकर<br />
घर आया फंदेबाज और बोला<br />
‘दीपक बापु तुमने<br />
पहले अखबारों  और अब ब्लाग पर<br />
क्रिकेट पर ही लिखना शुरू किया<br />
फिर क्यों अब मूंह फेर लिया<br />
देखो क्रिकेट में फिल्म के एक्शन का<br />
मजा भी आ रहा है<br />
पहले पिटा  हीरो<br />
अब पीटकर बाहर जा रहा है<br />
क्यों नहीं तुम भी देखा करते<br />
बैट-बाल के खेल में<br />
मारधाड़ की भी मजा क्यों नहीं लिया करते<br />
ऐसे क्रिकेट से क्यों किनारा किया’</span></strong></p>
<p><strong><span style="color:#003300;">सुनकर पहले हैरान हुए फिर बोले<br />
‘‘हम फिल्म के वक्त फिल्म और<br />
क्रिकेट के वक्त क्रिकेट देख करते हैं<br />
यह टू-इन-वन मजा तुम ही लो<br />
हमें तो अब इससे दूर ही समझ लो<br />
हमने पहले भी कहा था<br />
क्रिकेट अब कम खेली जायेगी<br />
पर उससे पहले उसकी पटकथा लिखा जायेगी<br />
फिल्म वालों ने लिया है मोर्चा<br />
क्रिकेट को चमकान का<br />
तो उनकी कला यहां भी नजर आयेगी<br />
आस्ट्रेलिया में किया था जिसने हीरो को रोल<br />
उसे अब विलेन बनाकर पेश किया<br />
उस समय के विलेन को दे रहे थें जो गालियां<br />
अब बजा रहे उनके लिये तालियां<br />
यह हीरो-हीरोइन भला कब  डायरेक्टर के<br />
 हुक्म के बिना एक्शन के कब होते है<br />
जरूर लिखी होगी किसे ने पटकथा<br />
जो झगड़े की फोटो कैमरे से लेने में रोकते हैं<br />
झगड़ा करने वाले खिलाड़ी<br />
बाद में ऐसे होकर मिलते हैं<br />
जैसे कोई बढिया अभिनय किया<br />
कह तो रहे है सभी<br />
पर किसने देखा यह कि <br />
थप्पड़ मारने वाले ने अपना कितना नुक्सान किया<br />
हमने ने देखा न मैच न झगड़ा<br />
पर एक बात मानते हैं कि<br />
क्रिकेट मैच में एक्शन का सीन लिखकर<br />
पटकथा लिखने वाले ने कमाल किया<br />
...........................</span></strong></p>
<p><strong><br />
</strong></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जब तक  अंतर्जाल की माया, रहेगी इस  ब्लाग की काया-हास्य कविता]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/?p=364</link>
<pubDate>Tue, 29 Apr 2008 14:46:45 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakraj.wordpress.com/?p=364</guid>
<description><![CDATA[ब्लाग पर लिख गया एक
कमेंट एक पाठक
‘ दीप]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color:#003300;">ब्लाग पर लिख गया एक<br />
कमेंट एक पाठक<br />
‘ दीपक बापू  जब क्रिकेट खेल फ्लाप हो चला था<br />
तब आपके ब्लाग पर हास्य कविता पढ़ने को<br />
हमारा मन मचला था<br />
अब फिर शुरू हो गया है<br />
शोरशराबे के साथ यह खेल<br />
मन हमारा कंप्यूटर की बजाय<br />
टीवी पर देता है हमको ठेल<br />
मैं तो पढ़ना चाहता हूं<br />
मैच देखते हुए आपकी कविता<br />
पर पत्नी खोल देती है वायलूम तेज<br />
बहने लगती है घर में संघर्ष सरिता<br />
आपकी कविता पढ़ने को<br />
मेरा मन बहुत करता है<br />
पर पूरा घर मैच पर मरता है<br />
आप तो फ्लाप थे पहले ही<br />
हमारा आपका हिट देखने का<br />
सपना लगता है अधूरा ही रहेगा<br />
क्रिकेट अब फिर जमकर रहेगा<br />
आप ही बतायें<br />
कैसे इस मुसीबत से निजात पायें’</span></strong></p>
<p><strong><span style="color:#003300;">पढ़कर हैरान हुए<br />
अपने ब्लाग केा सुपर फ्लाप <br />
देखकर पहले ही चकराये थे<br />
लोग भाग रहे है क्रिकेट की तरफ<br />
इसी कारण हुआ है<br />
यह बद से बदतर हाल<br />
अब यह समझ पाये थे<br />
अपनी टोपी घुमाकर कहें दीपक बापू<br />
‘अपने घर से लड़कर कभी<br />
हमारी हास्य कविता तो पढ़ना भी नहीं<br />
लगे रहो क्रिकेट में<br />
अधिक दिन मन में नहीं बसेगा<br />
25 वर्ष तक रहा हमारे मन भी<br />
अब तो ख्याल भी नहीं आता है<br />
इधर हम भी मुक्त होकर लिख रहे हैं<br />
यह सोचकर कि कोई नहीं पढ़ने वाला है<br />
तो चाहे जैसे लिखते जाओ<br />
कौन रोकने टोकने वाला है<br />
फ्लाप होकर भी हम खुश हैं<br />
क्रिकेट ने किया है बुरा हाल<br />
पर फिर भी चंद पढ़ने वाले बचे हैं<br />
उनके लिये लिखते जा रहे हैं<br />
अफसोस तुमसे हिट नहीं पा रहे हैं<br />
पर तुम फिक्र न करो<br />
हमारा लिखा तो बना रहेगा अंतर्जाल पर<br />
इसलिये जब फिर ऊब जाओ<br />
तो इधर का रुख कर लेना<br />
अपने हिट का कोटा पूरा कर देना<br />
ब्याज में अपने परिवार का भी<br />
हिसाब व्यूज में भर देना<br />
हमारा यह ब्लाग कोई अखबार नहीं है<br />
जो कबाड़ में बिक जायेगा<br />
या कोई किताब नहीं है जो<br />
 अल्मारी में लगी चीजों की भीड़ में खो जायेगा<br />
बनी रहेगी इस ब्लाग की काया<br />
जब तक अंतर्जाल की है माया<br />
जिसको हमने भी अभी तक नहीं समझ पाया<br />
भला तुम्हें और क्या समझायें<br />
</span></strong></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[नकली जिंदगी की खातिर-हास्य कविता]]></title>
<link>http://deepakbapukahin.wordpress.com/?p=517</link>
<pubDate>Mon, 28 Apr 2008 16:18:58 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakbapukahin.wordpress.com/?p=517</guid>
<description><![CDATA[फिल्मों में ही होता है चक दे इंडिया
सच ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color:#003300;">फिल्मों में ही होता है चक दे इंडिया<br />
सच में तो सब जगह है<br />
एक ही नारा गूंजता है भग दे इंडिया<br />
फिल्म में हाकी की काल्पनिका कहानी ने<br />
देश में खूब नाम कमाया<br />
ओलम्पिक से हाकी टीम का<br />
‘नो एंट्री’ संदेश आया<br />
कहें दीपक बापू<br />
‘फिल्मों में नकली हीरो और<br />
नकली कहानी पर फिदा होकर लोग<br />
उसी राह पर चल रहे हैं<br />
ख्वाबों ही देख रहे हैं तरक्की की सपना<br />
पर सबका कर्म और भाग्य होता अपना<br />
आखें से देखते नजर आते हैं<br />
पर देख कहां पाते हैं<br />
कानों से सुनते तो दिखते<br />
पर कितना सुन पाते हैं<br />
अपनी अक्ल रख दी है<br />
नकली ख्वाबों की अलमारी में बंद<br />
गुलामों की तरह दूसरे के<br />
इशारे पर चले जाते हैं<br />
पर्दे पर देखते जो जिंदगी<br />
उसे ही सच करने के कोशिश में<br />
बुझा देते हैं अपनी जिंदगी का दिया<br />
............................</span></strong></p>
<p><strong><span style="color:#003300;"><br />
</span></strong></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[श्रृंगार रस में आधुनिक कवितायें-हास्य कविता ]]></title>
<link>http://rajlekh.wordpress.com/?p=399</link>
<pubDate>Mon, 28 Apr 2008 15:56:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://rajlekh.wordpress.com/?p=399</guid>
<description><![CDATA[आया एक आशिक का ईमेल
लिख था उसमें
‘‘दीप]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p style="padding-left:30px;text-align:left;"><strong>आया एक आशिक का ईमेल<br />
लिख था उसमें<br />
‘‘दीपक बापू, जिसको मैं चाहता हूं<br />
वह पढ़ती है अंतर्जाल पर आपकी हास्य कविताएं<br />
हम उसे ताकते हैं वह नहीं देखती हमारी तरफ<br />
उसके दम पर ही आप हिट पाएं<br />
हमारे सारे अंग उसे देखते हुए शिथिल हो जायें<br />
उसे प्रभावित कर सकूं<br />
ऐसी कोई हास्य कविता हमको भिजवायें’</strong></p>
<p style="padding-left:30px;text-align:left;"><strong>पढ़कर पहले चौंकें दीपकबापू<br />
फिर लड़खड़ाते हुए यह भेजा यह संदेश<br />
‘पहले तो हम तुम्हें यह समझायें<br />
हम तो हिट नहीं बल्कि  हैं फ्लाप<br />
लिख नहीं पाते कुछ और<br />
इसलिये रचते हास्य कविताएं<br />
तुम किस गफलत में हो<br />
नवयौवनाओं को भी भला कब हास्य रस से<br />
सराबोर कविताएं दिल को भाएं<br />
यह अलग बात हैं कि मजाक में<br />
कुछ देर के लिये हंस जाएं<br />
पर उससे कभी दिल न लगायें<br />
तुम तो जाओ<br />
किसी श्रृंगार रस के रचयिता के पास<br />
जो तुम्हें दे सकते हैं कुछ प्रेम कविताएं<br />
अरे, इश्क भी भला कभी बदलता है<br />
हमेशा एक जैसा ही रूप चलता है<br />
पर समय बदल गया है<br />
अब तुम किसी नवयौवना को<br />
ताजमहल जैसा नहीं<br />
किसी कार  की तरह सुंदर बोलना<br />
 चंचल और शोख बताते हुए किसी<br />
मोटर सायकल से उपमा जोड़ना<br />
वाणी को कोयल से नहीं<br />
किसी मोबाइल की ट्यून से तोलना<br />
चाहे कुछ भी हो जाये<br />
हास्य कविता भेजने की मत सोचना<br />
रच डालो श्रृंगार रस में आधुनिक कवितायें<br />
हो सकता है उसको भायें</strong></p>
<p style="padding-left:30px;text-align:left;"><strong><br />
</strong></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मालिक नहीं तो मजदूर का रोल करेगा-हास्य कविता]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/?p=362</link>
<pubDate>Mon, 28 Apr 2008 15:02:27 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakraj.wordpress.com/?p=362</guid>
<description><![CDATA[फंदेबाज आया और बोला
‘दीपक बापू, मेरा छ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>फंदेबाज आया और बोला<br />
‘दीपक बापू, मेरा छोटा भाई<br />
बहुत परेशान<br />
चार वर्ष का उसका लड़का है शैतान<br />
उसे वह बड़ा आदमी बनाना चाहता है<br />
उसकी पत्नी अपने बेटे को<br />
अभिनेता या संगीतकार बनाने की करती विचार<br />
भाई उसे क्रिकेट खिलाड़ी बनाना चाहता है<br />
अब कहां से करें शुरू<br />
कौन सा ढूंढें पूछने के लिये कोई गुरू<br />
तुम ही कोई सलाह दो<br />
उन तक पहुंचा देंगे<br />
बता देंगे हमारे दोस्त हैं कितने मेहरबान’</p>
<p>सुनकर उखड़े दीपक बापू और फिर कहें<br />
‘मालुम होता है पूरा घर<br />
टीवी से आगे नहंी सोच पाता<br />
इसलिये तुम्हारे माध्यम से<br />
रोज एक सवाल हमारे पास भिजवाता<br />
अगर हम कुछ बनना-बनाना जानते तो<br />
भला क्या अपना घर कम था<br />
जहां हमारे लिये हर कदम पर गम था<br />
फिर भी अपनी अक्ल से चल रहे<br />
अपनी मेहनत से पल रहे<br />
वैसे तुम कार्यक्रम खूब देखते<br />
पर अक्ल की बात होती तो पत्थर फैंकते<br />
अब गया जमाना किसी एक हुनर में<br />
माहिर होने का<br />
हो न हो अपने अंदर कोई प्रतिभा<br />
पर किसी पर  भी यह जाहिर न होने का<br />
 तुम अपने भतीजे को<br />
संगीतकार या गायक कलाकर ही बनाओ<br />
चूंकि कोई तुम्हारे घर में फिल्मी हीरो नहीं<br />
इसलिये वह तो भूल जाओ<br />
फिर भी कुछ अपनी कुछ उसकी किस्मत आजमाओ<br />
हो सकता है कहीं<br />
कोई  आईडियल वगैरह बन जाये<br />
फिर लोगों के मन में छा जाये<br />
अगर छा गया तो फिर<br />
क्रिकेट तो उसकी जेब में होगी<br />
बल्लेबाजों के बैट उसके इशारे पर नाचेंगे<br />
तो गेंदबाज की गेंद उसके इशारे की मोहताज होगी<br />
फिर भी थोड़ी बहुत क्रिकेट<br />
खेलने को वक्त देते रहना होगा<br />
नहीं तो फिर हर खिलाड़ी की<br />
अकड़ को सहना होगा<br />
नहीं मिला फिल्म में मौका तो<br />
क्रिकेट खिलाड़ी भी ठीक होगा<br />
वह भी नही बन पाया तो<br />
कुछ नाच गाना जानते हुए<br />
मैच के इंटरवैल में भी<br />
कार्यक्रम पेश कर मिनी हीरो होगा<br />
तुम्हारी चाहत अगर<br />
उसको कैमरे में देखने की है<br />
तो बस धकियाते जाओ<br />
मालिक नहीं तो मजदूर का रोल करेगा<br />
कभी न कभी तो वक्त होगा मेरहबान<br />
..................................................................</strong></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[करते हास्य कविता की पैनी धार]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/?p=360</link>
<pubDate>Sat, 26 Apr 2008 15:40:58 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakraj.wordpress.com/?p=360</guid>
<description><![CDATA[फंदेबाज आया और बोला
‘दीपक बापू, तुम क्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#003366;"><strong>फंदेबाज आया और बोला<br />
‘दीपक बापू, तुम क्रिकेट जरूर देखा करो<br />
अरे, तुम इस बात की चिंता क्यांे करते हो कि<br />
कौन टीम जीत रही है और कौन हार<br />
तुम तो देखो उसमे नृत्य और गाने जैसे चित्रहार<br />
इसीलिये तो क्रिकेट और फिल्म को मिक्स किया है<br />
खेल भी होगा और साथ में मनोरंजन का भी व्यापार<br />
यह क्या रेडियो पर गाने सुनते हो<br />
और ठोकते हो ब्लाग पर हास्य कविता<br />
तुम्हारे पाठक तो उधर ही है<br />
जहां है क्रिकेट की बहार’’</strong></span><br />
<span style="color:#003366;"><strong>अपने चश्में और नाक के बीच से<br />
आंखों से झांकते हुए उसे घूरा<br />
और फिर कहैं दीपक बापू<br />
‘तुमने क्रिकेट कितनी खेली होगी<br />
जितनी हमने झेली होगी<br />
अगर उसमें वक्त नहीं खराब लोग नहीं करवाते<br />
तो हम आज प्रेमचंद जैसे कहलाते<br />
बैट किसी के हाथ में खेलता कोई और है<br />
बाल जिसके हाथ में होती<br />
वह फैंकता नजर आता है<br />
विकेट लेता  कोई और है<br />
जब से सुना यह हमने<br />
उतर गया क्रिकेट का नशा<br />
अब तो हास्य कविता में मन है बसा<br />
यह डांस देखने के लिये बहुत चैनल है<br />
फिर क्रिकेट के साथ क्या देखना<br />
दिखा रहे हैं जो लोग<br />
उनका खेल से क्या वास्ता<br />
उनका तो लोगों की जेब पर जोर है<br />
अब नहीं उठा सकते क्रिकेट के मनोरंजन का बोझ<br />
पाठक जब देख रहे हैं क्रिकेट<br />
तो हम ठोक देंगे कोई कविता<br />
मैच देखने के बाद सबकी हालत तो<br />
वैसे ही हो जाती है<br />
जैसे नाचने के बाद मैले पैर<br />
देखकर रोता मोर है<br />
फिर मन बहलाने के लिये हमारे पास तो<br />
अपने पास शब्दों का है बहुत भंडार<br />
लिख-लिखकर होती जा रही  अपनी<br />
हास्य कविता की पैनी धार<br />
.....................................</p>
<p></strong></span></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[Roye..]]></title>
<link>http://nuts.wordpress.com/?p=196</link>
<pubDate>Sat, 26 Apr 2008 11:10:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>nuts</dc:creator>
<guid>http://nuts.wordpress.com/?p=196</guid>
<description><![CDATA[Aaj aapki yaad ko seene se laga ke roye,
Apne sapno me aapko paas bula ke roye,
Hazaaron baar pukara]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><em>Aaj aapki yaad ko seene se laga ke roye,<br />
Apne sapno me aapko paas bula ke roye,<br />
Hazaaron baar pukara aapko tanhaiyon me,<br />
Aur har baar aapko paas na paakar roye.</em></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[Mahek Teri Aaj Bhi Meri in Saa.nso Mein Hai..]]></title>
<link>http://freesms4all.wordpress.com/?p=237</link>
<pubDate>Thu, 24 Apr 2008 08:33:49 +0000</pubDate>
<dc:creator>musicianrakshitshah</dc:creator>
<guid>http://freesms4all.wordpress.com/?p=237</guid>
<description><![CDATA[Mahek Teri Aaj Bhi Meri in Saa.nso Mein Hai..
Har Ek Adaa Teri Meri inn Aa.nkho Mein Hai..
Bhale Hi ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>Mahek Teri Aaj Bhi Meri in Saa.nso Mein Hai..<br />
Har Ek Adaa Teri Meri inn Aa.nkho Mein Hai..<br />
Bhale Hi Mita De Tu Mera Vajood Apne Dil Se<br />
Teri Jagah Fir Bhi 'SAAHIL' Ki Har Yaado Me Hai..</p>
<p>- s a a h i l</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[The Peace of Sleep-Sone Ka waqt:Shayari]]></title>
<link>http://ikshayar.wordpress.com/?p=80</link>
<pubDate>Wed, 23 Apr 2008 13:22:46 +0000</pubDate>
<dc:creator>ikshayar</dc:creator>
<guid>http://ikshayar.wordpress.com/?p=80</guid>
<description><![CDATA[Sleep sometimes works as a medicine. Life is full of ups and down but when you goto sleep then no ma]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>Sleep sometimes works as a medicine. Life is full of ups and down but when you goto sleep then no matter how bad your day was, after a sound sleep you wakes up fresh and again ready to fight the world with new spirit.<br />
Before going to sleep we usually thinks about whole day activities and sometimes plans for next day but rather than thinking about all this, we should remember that sleep is precious.<br />
I have compiled few simple lines which just reminds you that <strong>Sleep is Important</strong> as other necessities of life.</p>
<p>Below are small lines and I could have modified and make them little more poetic I want to see them as they are.... with no fuzz.So here they are :</p>
<blockquote><p><strong><br />
<em> Chalo so jayen,<br />
Chalo kho jayen,<br />
Bhool jayen Zindagi ki jaddhojahad,<br />
Ankhen band kar,<br />
Kuch derr k liye hi sahi,<br />
Dooor dushwarion se,<br />
Khwabon ki duniya mein,<br />
Gum ho jayen,<br />
Chalo So jayen<br />
Chalo kho Jayen !!</em></strong></p>
<p>~ikShayar</p></blockquote>
<p>So those were few lines talking about the sleep.<br />
<a title="Yoindia ShayariAdab" href="http://www.yoindia.com/shayariadab/sitemaps-home.html" target="_blank">Shayariadab</a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[From Mijal's Collections]]></title>
<link>http://mijalmistry.wordpress.com/?p=3</link>
<pubDate>Tue, 22 Apr 2008 11:19:24 +0000</pubDate>
<dc:creator>mijalmistry</dc:creator>
<guid>http://mijalmistry.wordpress.com/?p=3</guid>
<description><![CDATA[
Unhone dekha tirchi nazarose , hum madhosh ho gaye..
par jab malum hua ke nazar hi tirchi hai, toh ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li>Unhone dekha tirchi nazarose , hum madhosh ho gaye..</li>
<li>par jab malum hua ke nazar hi tirchi hai, toh hum behosh ho gaye.</li>
</ul>
<p> </p>
<ul>
<li> Nazaro jhukavini joya karo cho tame tamari, tamari e ada amne kem na game,</li>
<li>pan mann ma prasna thai che ek j mane, cho prem ma tane ke vahem ma ame.</li>
</ul>
<p> </p>
<p>Beleive where others doubt, Work where others refuse, Save where others waste, Stay where others quit.   "DARE TO DIFFER ,  WHEN YOU ARE SURE".</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[शेर के इंतजार में उम्र न निकल जाये-हास्य कविता]]></title>
<link>http://rajlekh.wordpress.com/?p=394</link>
<pubDate>Mon, 21 Apr 2008 16:12:14 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://rajlekh.wordpress.com/?p=394</guid>
<description><![CDATA[पार्क में घूमती हुई लड़कियों को
उस लड़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color:#003300;">पार्क में घूमती हुई लड़कियों को<br />
उस लड़के ने छेड़ा<br />
‘हम तुम इक कमरे में बंद हों<br />
और शेर आ जाये<br />
उससे कहूं पहले मुझे खा जाये’</span></strong></p>
<p><strong><span style="color:#003300;">एक लड़की ने उसकी हरकत देखकर कहा<br />
‘अभी तक तुम्हारी सुई चालीस बरस<br />
पहले गाने पर ही अटकी हुई है<br />
उसके बाद जमाने में बहुत तरक्की हुई है<br />
कहां आयेगा  तेरे कमरे में शेर<br />
अब तो जंगल में भी नहीं दिख पाता<br />
लगता है तुम अखबार नहीं पढ़ते<br />
तहस नहस हो रहे पर्यावरण और<br />
प्रेम के बदलते रूप को नहीं समझते<br />
कहीं और अपना दांव आजमाओ<br />
कहीं शेर के इंतजार में<br />
तुम्हारी शादी की उम्र नहीं निकल जाये<br />
...................................................................</span></strong></p>
<p><strong></strong></p>
<p><strong></p>
<p></strong></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह माया का चक्र तो चलता रहेगा-हास्य कविता ]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/?p=358</link>
<pubDate>Mon, 21 Apr 2008 15:42:57 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakraj.wordpress.com/?p=358</guid>
<description><![CDATA[फंदेबाज आया मूंह लटकाते हुए आया
और रुं]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#003300;"><strong>फंदेबाज आया मूंह लटकाते हुए आया<br />
और रुंआसा मूंह बनाकर बोला<br />
‘अब तो खुलेआम होने लगा है सट्ठा<br />
इसलिये हो गया है क्रिकेट से मन खट्टा<br />
टीवी और अखबार खुलेआम कर रहे बयान<br />
कोई नहीं दे रहा ध्यान<br />
अब तो यह खेल हम नहीं देख पाते<br />
दांव लगाने वाले ही सब जगह नजर आते<br />
देशप्रेम का मजा इस खेल में नहीं आया<br />
पूरी तरह छा गयी इस पर माया<br />
कई ऐसे दांव लगाने वाले बर्बाद होते देखे<br />
सूख गयी है उनकी काया<br />
हमें तो लगता है इससे लोग खूब कमा रहे हें<br />
और विदेश भिजवा रहे हैं<br />
राम को बताते थकते नहीं कल्पित कुछ लोग<br />
पर यहा तो मायावी लोग वर्चस्व बढ़ा रहे है<br />
एसा लगता है कि विदशी फिर छा रहे है<br />
हम आखिर कहां जा रहे हैं</strong></span><br />
<span style="color:#003300;"><strong>सुनकर गला खंखारा<br />
‘जब भी मेरे घर आना<br />
इसी तरह रुंआसा थोबड़ा लेकर<br />
मुझसे हास्य कविता लिखवाना<br />
काहे तुम घबड़ाते हो<br />
देश प्रेम के जजबात का भी व्यापार था<br />
अब यह भी कोई विदेशियों से प्यार नहीं है<br />
माया का खेल हो गयी क्रिकेट तो<br />
मायावी इसे खेल पायेंगे<br />
जिनको दांव लगाकर पिटते देखा है<br />
उनकी माया भी ऐसे ही जा रही है<br />
जैसे उनके घर आ रही है<br />
विदेश तो लूट मचाते कमाने के बहाने<br />
पर अपने देश के आम लोग तोे<br />
 मेहनत से लगते हैं विदेश में भी कमाने<br />
जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया और अमेरिका तक<br />
लगे हैं इस देश के प्रतिभाशाली<br />
अपनी साख का झंडा फहराने<br />
देश-विदेश के कुछ लोग यहां<br />
माया का जाल बना रहे हैं<br />
तो अपने देश के प्रतिभाशाली लोग<br />
विदेश में राम का नाम गा रहे हैं<br />
यह चक्र तो चलता रहेगा<br />
कितना भी हो जायेगा माया का विस्तार<br />
राम को कल्पित कहने से भी<br />
उनकी महिमा रहेगी अपार<br />
उनके नाम पर कोई दांव नहीं लगता<br />
माया के नाम पर सब कोई ठगता<br />
तुम अपने जाकर ध्यान करना<br />
हम भी राम का नाम लेकर ध्यान में जा रहे हैं<br />
भूल जाओं क्रिकेट<br />
उससे हम परे होते जा रहे है<br />
</strong></span></p>
<p><span style="color:#003300;"><br />
<strong></strong></span></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[खुलकर लिखने की इच्छा पूरी हो गयी-हास्य कविता]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/?p=357</link>
<pubDate>Sun, 20 Apr 2008 14:40:04 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakraj.wordpress.com/?p=357</guid>
<description><![CDATA[टूटा हाथ लेकर आया फंदेबाज
तो पूछने पर ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color:#003300;">टूटा हाथ लेकर आया फंदेबाज<br />
तो पूछने पर बताया-<br />
‘दीपक बापू,<br />
कल रात हमने सपने में देखा<br />
आपको ब्लाग के लिये<br />
डाक्टरेट मिल गयी<br />
हम खुशी से झूम उठे और<br />
पलंग के नीचे आकर गिरे<br />
हड्डी टूट गयी लगती है<br />
एक्सरे कराने गया था<br />
बंद कर दो यह ब्लाग<br />
हम भी लाचार है चले आते हैं<br />
तुम्हीं दोस्त हो<br />
तुम्हें ब्लाग लिखते देख खुश होते है<br />
देखो हमारी कैसे हालत हो गयी</span></strong></p>
<p><strong><span style="color:#003300;">पहले देखा उसे सहानुभूति से<br />
फिर दहाड़ते हुए कहें दीपक बापू<br />
‘‘मतलब, जागते हुए भी हम पर<br />
तुम फब्तियां कसना<br />
अपने सपने में भी हमें कहीं<br />
पुरस्कार तो कहीं डाक्टरेट में<br />
फंसते देखने की चाहत रखना<br />
हड्डी टूटने का हमारे ब्लाग से क्या संबंध<br />
हम जब तक रहते यहां  फिर भूल जाते है<br />
सपना तो दूर जागते हुए भी नहीं रखते संबंध<br />
लगता है कि तुम पर भूत चढ़ गया है<br />
दोस्त तो तुम दिखावे को है<br />
भला इतना भयानक सपना कैसे<br />
देखते और हमें भी दिखाते<br />
वह तो पहले बहुत झटके खा चुके<br />
इसलिये यह भी झेल गये<br />
कितने ही लोग  सम्मान के वादे<br />
हमारी तरफ ठेल गये<br />
तब भी हम  शरमाते थे<br />
आज भी कतराते है<br />
भला हम कहां बड़े लोगों के यहां<br />
दरबार में सजने जाते है<br />
नामवालों  से लेकर अनामों तक<br />
दोस्त हैं हमारे<br />
पर स्वार्थ पूरे होने की इच्छा कहां रख पाते है<br />
अपनी पीड़ाओं का बोझ उठाते<br />
पहले ही थक गये<br />
तुम अपने सपने में भी डाक्टरेट का<br />
बोझ लादने से नहीं छोडे पाते हो<br />
ढेर सारे कागज रखे प्रशस्तिपत्र कबाडे में<br />
हम ढूंढने नहीं जाते<br />
अंतर्जाल पर जमी अपनी महफिल ऐसी<br />
दिल में पूरी तसल्ली हो गयी<br />
हम लिखते रहेंगे निष्काम<br />
देखेंगे लोगों लेते इनाम<br />
खुलकर लिखने की इच्छा<br />
अब हमारी पूरी हो गयी<br />
.....................<br />
</span></strong></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[Shayari by Mirza Ghalib]]></title>
<link>http://mirzaghalibshayari.wordpress.com/?p=6</link>
<pubDate>Sun, 20 Apr 2008 10:15:09 +0000</pubDate>
<dc:creator>sambu123</dc:creator>
<guid>http://mirzaghalibshayari.wordpress.com/?p=6</guid>
<description><![CDATA[Woh apnay chehray mein sau aaftaab rakhtay hain
Woh apnay chehray mein sau aaftaab rakhtay hain,
Isi]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Woh apnay chehray mein sau aaftaab rakhtay hain</strong></p>
<p>Woh apnay chehray mein sau aaftaab rakhtay hain,<br />
Isiliyey to woh rukh pay  nakaab rakhtay hain !<br />
Woh paas baithay to aaatee hai dilruba khushboo,<br />
Woh  apnay hothon pay khilta gulab rakhtay hain ! Har ik wark mein tum<br />
hi tum ho  jaan-e-mehboobi,<br />
Hum apnay dil ki kuch aaisee kitab rakhtay hain !  Jahan-e-ishq mein<br />
Sohni kahin dikhayee dey,<br />
Hum apni aankh mein kitnay  Chenab rakhtay hain ! Woh apnay chehray<br />
mein sau aaftaab rakhtay  hain,<br />
Isiliyey to woh rukh pay nakaab rakhtay hain</p>
<p><a title="Shayari" href="http://shayaris.org"><strong><em>Shayari</em></strong></a></p>
<p><a title="Shayri" href="http://shayri.info"><em><strong>Shayri</strong></em></a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[छद्म ब्लाग ने सास से बचाया-हास्य कविता]]></title>
<link>http://rajlekh.wordpress.com/?p=393</link>
<pubDate>Sat, 19 Apr 2008 13:55:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://rajlekh.wordpress.com/?p=393</guid>
<description><![CDATA[अंतर्जाल पर बहू ने अपना
एक ब्लाग बनाया]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color:#003300;">अंतर्जाल पर बहू ने अपना<br />
एक ब्लाग बनाया<br />
और अपनी सास को भी दिखाया<br />
हंसते हुए सास ने कह दिया<br />
‘तुम मेरे काम को देखना और<br />
बातों को ध्यान से सुनना<br />
फिर अपने लिये कुछ उसमें से चुनना<br />
लिख देना तो हिट हो जायेगी<br />
वैसा ही करना जैसा मैंने बताया’</span></strong></p>
<p><strong><span style="color:#003300;">बहू ने किया लिखना शुरू<br />
सास को ही बनाया अपना गुरू<br />
उसके प्रपंचों और परनिंदाओं पर लिखकर<br />
उसने पाये जोरदार हिट<br />
पर सास को कभी अपना ब्लाग नहीं पढ़ाया<br />
 <br />
एक दिन सास की पड़ौसन अपनी<br />
बहू की डींंग हांक रही थी<br />
तब उसने भी अपनी बहू के<br />
ब्लाग के बारे मे उसे बताया<br />
पड़ौसन बोली-‘पर तुमने कभी उसका<br />
ब्लाग पढ़ा है<br />
कहीं ऐसा तो नहीं<br />
तेरे खिलाफ ही कुछ लिखती हो<br />
वैसे भी तुम भोली दिखती हो<br />
उड़ाती न हो तुम्हारा मजाक<br />
जमाने भर की सासों पर बरसती हो<br />
कर  देती हो बहू की मर्यादा खाक<br />
एक बार पढ़ लो<br />
फिर आकर अपनी हांकना<br />
रोती नहीं आओ तब कहना कि<br />
मैने तुम्हें गलत बताया’<br />
इस तरह पड़ौसन ने मंथरा का रोल निभाया</span></strong></p>
<p><strong><span style="color:#003300;">सास सीधे बहू के पास आयी<br />
और बोली<br />
‘बहुत दिन से सोचती रही<br />
पर आज विचार मेरे दिल में ख्याल पक्का आया<br />
तुमने कभी मुझे अपना ब्लाग नहीं बताया<br />
आज पढ़ाओ देखूंगी कि<br />
तुमने कितना हिट पाया’</span></strong></p>
<p><strong><span style="color:#003300;">पहले बहू चैंकी फिर समझते उसे<br />
यह देर नहीं लगी कि<br />
किसी मंथरा ने उसकी  सास को भड़काया<br />
फिर भी वह सचेत थी<br />
सास को उसने अपना एक छद्म ब्लाग दिखाया<br />
जिसमें थी सास-ससुर, पति और ननदों की आरती<br />
मायके वालों का जिक्र तक नहीं था<br />
सास को वह ब्लाग भाया<br />
और बोली-‘‘पड़ौसी हमसे जलते हैं<br />
देखो पड़ौसन ने मुझे कैसा भड़काया<br />
पर तुम्हारे ब्लाग में मैने कुछ भी अपने<br />
लिये बुरा न पाया<br />
उससे भी अच्छा लगा कि<br />
इसमें तुमने मायके का नाम तक नही दिखाया’</span></strong></p>
<p><strong><span style="color:#003300;">सास चली गयी<br />
और बहुत ने अपने असली ब्लाग पर<br />
लिख डाली सासों के विरुद्ध एक पोस्ट<br />
शीर्षक लिखा<br />
‘छद्म ब्लाग ने सास से बचाया’<br />
................................................</span></strong><br />
<strong><span style="color:#003300;">नोट- यह हास्यव्यंग्य रचना काल्पनिक है तथा किसी घटना या व्यक्ति से इसका कोई संबंध नहीं है। अगर किसी कारिस्तानी से मेल खा जाये तो वही इसके लिये जिम्मेदार होगा।</span></strong></p>
<p><strong></strong></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[Aise Hi Koii "MAHAVEER" Nahi Hota..]]></title>
<link>http://freesms4all.wordpress.com/?p=229</link>
<pubDate>Fri, 18 Apr 2008 11:18:55 +0000</pubDate>
<dc:creator>musicianrakshitshah</dc:creator>
<guid>http://freesms4all.wordpress.com/?p=229</guid>
<description><![CDATA[Today is Shri Mahaveer Janma Kalyaanak
===============================
Ladne Se Koii  &#8220;VEER]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>Today is Shri Mahaveer Janma Kalyaanak<br />
===============================<br />
Ladne Se Koii  "VEER"  Nahi.n Hota<br />
Tyag Karne Se "PEER"  Nahi.n Hota<br />
Saalo Ki Ghor TapsyaKa Fal Hai Ye<br />
Aise Hi Koii "MAHAVEER" Nahi Hota</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[सत्य से पीछा छुड़ाकर कहां जायें-हास्य कविता]]></title>
<link>http://rajlekh.wordpress.com/?p=392</link>
<pubDate>Thu, 17 Apr 2008 15:07:26 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://rajlekh.wordpress.com/?p=392</guid>
<description><![CDATA[लाया फंदेबाज कई तस्वीरें
और दिखाते हु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#003300;"><strong>लाया फंदेबाज कई तस्वीरें<br />
और दिखाते हुए बोला<br />
‘‘दीपक बापू, तुम ही एक दोस्त हो<br />
जिससे हम कुछ कह पाते हैं<br />
पर जबसे किया है ब्लाग तुमने शुरू<br />
हमारे लिये हो गये गुरू<br />
भले ही अमल नहीं करते<br />
पर तुंमसे ज्ञान बहुत पाते हैं<br />
हम चाहते है चलो इस शहर में घूम आयें<br />
तो कुछ बदलाव पायें<br />
देखो यह फोटो<br />
उस शहर में कितना बड़ा होटल है<br />
और यह देखो कितना सुदर पार्क है<br />
वहां एक चमकदार शापिंग माल भी<br />
अब तुम अपने ध्यान लगाने के लिये<br />
किसी जगह का पता मत पूछ लेना<br />
क्योंकि इसका मुझे पता नहीं<br />
और भी बहुत सारी इमारतें देखने लायक हैं<br />
साथ चलो तो घूमकर आ जायें</strong></span><br />
<span style="color:#003300;"><strong>फोटो देखकर खुश हुए<br />
फिर मूंह बनाकर बोले-<br />
‘‘घूम आयेंगे<br />
कल शवासन में इन जगहों पर<br />
ही जाकर घूम आयेंगे<br />
फिर तुम्हें भी बतलायेंगे<br />
कुछ समझा करो यार<br />
शापिंग माल पर पैसे खर्च करो<br />
तो खूब माल आ जायेगा<br />
टिकिट के पैसे हों तो<br />
वाटर पार्क में भी मजा आयेगा<br />
जो होटल दिखा रहे हो<br />
वह तो हमें बाहर से ही दिख पायेगा<br />
हम देखते हैं इस मायावी दुनियां को<br />
जिसका चेहरा हमेशा चमकता नजर आता है<br />
पर इसके पीछे जो सच छिपा है<br />
वह हमें सब जगह नजर आता है<br />
कहीं पैसे के जोर पर<br />
तो कहीं तलवार के सहारे<br />
इसका रंग और निखर जाता है<br />
सच का इस मायावी चेहरे से कोई नहीं नाता<br />
तुम कहते हो कि<br />
हमारे ध्यान के लिये<br />
किसी सर्वशक्तिमान के दर का  पता नहीं<br />
पर हमें तो बस उसका ही आसरा होता<br />
जब हमारा तन और मन थक जाता है<br />
इन फोटो से जब ऊबता है मन<br />
इष्टदेव की प्रतिमा को देखकर ही<br />
प्रफुल्लित हो पाता है<br />
तुम अपने परिवार को लेकर घूम आओ<br />
हम चमकती हुई दुनियां की तस्वीरो के<br />
पीछे छिपे कठोर सत्य से पीछा<br />
छुड़ाकर जायें तो कहां जायें<br />
अपनी कविता लिखकर ही खुश हैं<br />
शब्दों भंडार के तरकस से निकलें तो<br />
अपने निशाने पर जायें<br />
कुछ समझें लोग तो कुछ समझ न पायें<br />
.....................................................<br />
 <br />
</strong></span></p>
]]></content:encoded>
</item>

</channel>
</rss>
