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	<title>mehfils &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
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	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "mehfils"</description>
	<pubDate>Thu, 21 Aug 2008 15:09:31 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[अधूरी गजल छोड़ गए फाकिर]]></title>
<link>http://jagjitsinghnews.wordpress.com/?p=155</link>
<pubDate>Sat, 01 Mar 2008 08:37:43 +0000</pubDate>
<dc:creator>Amarjeet Singh</dc:creator>
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<description><![CDATA[माडल टाउन के आर्य समाज मंदिर में एक छो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>माडल टाउन के आर्य समाज मंदिर में एक छोटे से हाल में श्रद्धांजलि देने वाले कुछ खास लोग शामिल हुए। उन्हें देखकर ऐसा लगता नहीं था कि कोई बहुत ही नामी शायर सुदर्शन फाकिर की रस्म पगड़ी में इकट्ठे हुए हैं लोग। समुद्र से गहरे थे फाकिर बड़े ही सादा समारोह में गुलशन कुंदरा ने माइक संभाला और कहा कि वह फाकिर को उन दिनों से जानते हैं जब फाकिर फिल्म इंडस्ट्री के फाकिर नहीं, बल्कि उनके बहुत ही प्यारे दोस्त फाकिर थे। उन्होंने कहा कि वह गहरा समुद्र थे। साहिर की तरह फाकिर हैं जालंधर की पहचान दीपक जालंधरी ने बताया कि अगर लुधियाना की पहचान साहिर लुधियानवी हैं तो जालंधर की पहचान सुदर्शन फाकिर हैं। कुछ लोग अपवाद होते हैं हंस राज हंस ने अपनी बात के शुरू में ही कहा कि सुना है कल रात मर गया वो..लेकिन उन्होंने कहा यह बात फाकिर साहब पर लागू नहीं होती क्योंकि फाकिर जैसे लोग मरते नहीं बल्कि अपने पैरों के निशान छोड़ कर जाते हैं। अपनी कीमत पर जिए फाकिर सुरेश सेठ ने कहा कि फाकिर हर विधा में पारंगत था। इसमें कोई दो राय नहीं कि फाकिर अपनी कीमत पर जिया जिसका उसे कोई मलाल नहीं था। नए कलाकार को देते थे प्रोत्साहन हिंदी फिल्मों के मशहूर गायक सुरेश सहगल ने बताया कि फाकिर साहब की बात ही निराली थी। नए कलाकार को प्रोत्साहन देते थे। समारोह में प्राण शर्मा, मलिक, सतीश भाखड़ी, जानकी दास, प्रिंसिपल वीके तिवाड़ी, राही व कपिला इत्यादि ने भी फाकिर साहब के लिए प्रार्थना की। पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने दुख प्रकट किया। जरा सी आहट पर लगता था जगजीत सिंह आ गए हाल में जरा सी आहट होती थी तो लोगों की निगाह दरवाजे पर चली जाती थी, लेकिन निराशा ही हाथ लगी क्योंकि जगजीत सिंह नहीं पहुंचे। प्रो. एचके गुप्ता जो फिरोजपुर से आए थे ने बताया कि अगर जगजीत आ जाता तो यह फाकिर का नहीं जगजीत का सम्मान था। उनके जिगरी दोस्त विनोद धीर ने बताया कि जब जगजीत सिंह के बेटे की एक हादसे में मृत्यु हो गई और वे टूट गए थे। फाकिर ने टूटे हुए जगजीत सिंह के शरीर में फिर से प्राण फूंक दिए थे। अधूरा रहा किताब छपवाने का सपना फाकिर इतने अच्छे शायर होने के बावजूद अपनी किताब अपने जीते जी नहीं देख सके। इसकी सिसकियां उनके आखिरी दिनों में साफ तौर पर सुनाई देती थीं। शायद यही कारण है कि कैंसर से लंबे समय से जूझते हुए फाकिर ने अपनी पत्नी सुदेश फाकिर से कई बार कहा, 'मैं अपनी किताब छपवाना चाहता हूं। मैं देखना चाहता हूं जिन गजलों को मैंने अपने बच्चों की तरह पाला-पोसा है वे कैसी हैं।</p>
<p><i>Source: <a href="http://in.jagran.yahoo.com/news/local/punjab/4_2_4223989/">Jagran</a></i></p>
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