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	<title>half-pant &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
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	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "half-pant"</description>
	<pubDate>Sat, 26 Jul 2008 08:29:25 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[असल कश्मीरियत]]></title>
<link>http://samatavadi.wordpress.com/?p=304</link>
<pubDate>Thu, 03 Jul 2008 12:02:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>अफ़लातून</dc:creator>
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<description><![CDATA[
    गत दस दिनों से कश्मीर घाटी से गुजरन]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong></strong></p>
<p>    गत दस दिनों से कश्मीर घाटी से गुजरने वाले अमरनाथ यात्री 'जमीन स्थानान्तरण विवाद' के हिन्सक प्रतिरोध को शायद याद नहीं रखें , याद रखेंगे घाटी के मुसलमानों की गर्मजोशी भरी मेज़बानी को ।</p>
<p>    हिंसा के कारण होटल और भोजनालय बन्द हैं फिर भी उन्हें भोजन और आसरे की तलाश में भटकना नहीं पड़ रहा । मुसलमानों ने उनके लिए सामूहिक रसोई और रात्रि विश्राम का प्रबन्ध कर रखा है ।</p>
<p>    पवित्र गुफ़ा से लौट रहे जिन यात्रियों को पुलिस ने नुनवान और बालताल में रोका था उन्हें भी डलगेट और बूलेवार्ड के 'लंगर' देखने के बाद जाने दिया गया है ।</p>
<p>   आम जनता की साम्प्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की बात तो छोड़िए सैय्यद अली शाह गिलानी जैसे कट्टर अलगाववादी नेता भी प्रदर्शनकारियों से कह रहे हैं- " यात्रियों को नुकसान न पहुँचे , यह इस्लाम के विरुद्ध होगा।'</p>
<p>   " हमने देखा कि यात्री , महिलाएं और बच्चे यहाँ फँस गए हैं तो हमने फैसला लिया कि हम उनके लिए मुफ़्त भोजन और आश्रय का प्रबन्ध करेंगे। गागरीबल के एक स्वयंसेवक मोहम्मद सलीम ने <strong>पीटीआई </strong>को कहा ।</p>
<p>   इन लोगों ने आन्दोलन के पाँचवे दिन 'लंगर' शुरु किए तथा हर रोज़ करीब २,००० यात्रियों को वे भोजन मुहैय्या करवाते हैं । " हमने अमरनाथ गुफ़ा से लौट रहे हजारों हिन्दू श्रद्धालुओं को भोजन कराया है ।" सलीम ने कहा ।</p>
<p>    अपने पति तथा बेटों के साथ गुजरात से आईं यात्री शान्तिबाई दो बार स्थानीय लोगों द्वारा मदद किए जाने की याद करती हैं ।</p>
<p>    " मुझे भगवान शिव की गुफ़ा तक पहुँचने में एक मुसलिम तरुण ने मदद की तथा गुफ़ा से लौटते वक्त भी एक मुसलिम ने हमें भोजन और आश्रय दिया। हमने उन्हें पैसे देने चाहे परन्तु उन्होंने शलीनता से इन्कार किया ।" शान्तिबाई ने कहा ।</p>
<p>      उधमपुर जिले की १२,७५० फुट की उँचाई पर स्थित अमरनाथ गुफ़ा के कठिन सफ़र में दिल्ली के आनन्द जैन के लिए घाटी मानों नख़लिस्तान की भाँति थी ।</p>
<p><a href="http://PostURL"><img class="aligncenter size-full wp-image-305" src="http://samatavadi.wordpress.com/files/2008/07/langar.jpg" alt="सौहार्द की मिसाल" /></a></p>
<p>    " मैं कश्मीरी मुसलमानों का अत्यन्त शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने मुझे और मेरे परिवार को भूख से निजात दिलायी। तीन दिनों के बाद हमें डलगेट के 'लंगर' में काएदे का ख़ाना मिला।"उन्होंने कहा।</p>
<p>    दिल्ली से आए अन्य एक यात्री पवन शर्मा ने घाटी के लोगों द्वारा ख़ातिरदारी की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि इन लोगों ने समस्या नहीं पैदा की, इनके द्वारा चुने गए नेताओं ने की है ।</p>
<p>     डलगेट तथा बोलवार्ड के अलावा स्वयंसेवकों ने पहलगाँव तथा बालताल के रास्ते यात्रा की आधार कैम्प पर बने पर्यटन स्वागत केन्द्र पर भी   भोजनालय बनाया है ।  </p>
<p>       प्रदर्शन के हृदय स्थल पर भी स्वयंसेवकों ने ताजी सब्जियाँ , पाँव रोटी तथा दूध वितरित किया ।</p>
<p>   यात्रियों को बालताल ले जा रही एक गाड़ी पर अपवादस्वरूप हुए पथराव के अलावा जंगल की जमीन अमरनाथ श्राइन बोर्ड को हस्तांतरित करने के १० दिनव्यापी विरोध प्रदर्शनों कहीं भी यात्रियों को स्पर्श नहीं किया गया । - <strong>पीटीआई ( हिन्दी अनुवाद , अफ़लातून )</strong></p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मोदी की जीत गुजरात की शर्मनाक हार है]]></title>
<link>http://samatavadi.wordpress.com/2007/12/23/%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a4-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae/</link>
<pubDate>Sun, 23 Dec 2007 14:56:57 +0000</pubDate>
<dc:creator>अफ़लातून</dc:creator>
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<description><![CDATA[Technorati tags: गुजरात, चुनाव, साम्प्रदायिकता
 ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<div style="display:inline;margin:0;padding:0;" class="wlWriterSmartContent">Technorati tags: <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4">गुजरात</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b5">चुनाव</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be">साम्प्रदायिकता</a></div>
<p>    मोदी द्वारा गुजरात की जनता का साम्प्रदायिकीकरण फिर सफलतापूर्वक प्रकट हुआ। उसका विकल्प न होना दुर्भाज्ञपूर्ण है । कांग्रेस का भोथरा सेक्यूलरवाद और मोदी की कांग्रेसी आर्थिक नीति गुजरात की जनता के लिए बुरे दूरगामी परिणाम लाएगी । हिटलर ने भी चुनाव जीता था और बहुसंख्यक की फिरकापरस्ती और उन्माद पर सवार हो कर राजीव गाँधी ने भी। एक झूठा दर्प भी हिटलर ने पैदा किया था, मोदी ने भी किया है। गनीमत है कि अभी भी हिटलर जितनी सफलता उसे नहीं मिली है । डॉ. लोहिया की बात याद आ रही है : <strong><em>गद्दार अपने आप में या गद्दारी भी खतरनाक नही होती , जनता का समर्थन न मिलने पर वह बेमानी साबित हो जाती है। गद्दारी खतरनाक तब हो जाती है जब उसको जनता का समर्थन मिल जाता है। </em></strong>राष्ट्रतोड़क राष्ट्रवाद का प्रयोग सीमित दायरे में सफल होगा- जिन सूबों में सिर्फ दो दल होंगे , लगभग एक जैसे।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कत विधि सृजी नारि जग माहि ?]]></title>
<link>http://samatavadi.wordpress.com/2007/08/07/%e0%a4%95%e0%a4%a4-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%bf-%e0%a4%b8%e0%a5%83%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf-%e0%a4%9c%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf/</link>
<pubDate>Tue, 07 Aug 2007 13:03:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>अफ़लातून</dc:creator>
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<description><![CDATA[Technorati tags: तुलसीदास, नारि, समाज, tulsidas, nari, samaj
    ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p style="display:inline;margin:0;padding:0;" class="wlWriterSmartContent">Technorati tags: <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8">तुलसीदास</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf">नारि</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c">समाज</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/tulsidas">tulsidas</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/nari">nari</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/samaj">samaj</a></p>
<p align="left">    <a href="http://samatavadi.wordpress.com/2007/08/04/tulsidas-pseudo-half-panti/"><strong>तुलसीदास का छद्म सेक्युलरवाद</strong></a> नामक पोस्ट में मैंने एक चौपाई की पहले की पंक्ति और एक की बाद की पंक्ति के बारे में पूछा था । टिप्पणियाँ आईं , जवाब नहीं आया ।कुछ ने पढ़ समझ कर टिप्पणियाँ दीं और कुछ को पढ़ने-समझने का सहूर होता ही नहीं । हिन्दी पढ़ाने वाले मित्र मसिजीवी ने 'छद्म' की अनावश्यकता पर प्रकाश डाला लेकिन चौपाइयों की पद-पूर्ति उन्होंने भी नहीं की ।</p>
<p align="left">  किसी भी तथ्य को तोड़ने-मरोड़ने का इतिहास गोबेल्स के भक्त-समूह के साथ जुड़ा है-नालबद्ध । गाँधी-हत्या के कलंक को धोने-पोछने के निष्फल चक्कर में गाँधीजी शाखा के 'प्रात: स्मरणीय' हो गए लेकिन 'शाखा-पुस्तिका' में अब तक हत्यारों द्वारा 'गाँधी-वध' की जो 'वजह' बतायी जाती है ,उसका उल्लेख भी रहता है ।</p>
<p align="left">    गोलवलकर शताब्दी के अवसर पर प्रकाशित साहित्य में गाँधीजी की तेरही पर 'गुरुजी' द्वारा भेजे गए टेलिग्राम इसका विशेष उल्लेख किया गया है - इसी पोछने वाले क्रम में । गाँधीजी की तस्वीर को जूते में रख कर चाँदमारी में निशानेबाजी करने ( हत्या से पहले ) की सूचना तत्कालीन गृहमन्त्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने गाँधीजी के सचिव प्यारेलाल को दी थी । प्यारेलाल की प्रसिद्ध पुस्तक ' पूर्णाहुति ' में इसका हवाला है ।</p>
<p align="left">    १९९१- '९२ के दौर में 'रामजन्मभूमि' के पक्ष गाँधीजी के फर्जी पत्र को उछालने की कोशिश हुई थी । गाँधीजी के साहित्य का कॉपीराइट धारण करने वाले नवजीवन ट्रस्ट ने इसके फर्जी होने के बारे में वक्तव्य जारी किया था । संघियों की इस नापाक साजिश के बाद इस लेखक ने गाँधीजी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ,'हिन्दू-राष्ट्र' , मस्जिदों में प्रतिमा रखने तथा सांप्रदायिकता से सम्बन्धित विचार 'धर्मयुग' में प्रकाशित एक लेख में प्रस्तुत किए । <a href="http://samatavadi.wordpress.com/2007/05/16/ganhicommunalismhindu-nationalism/">वह लेख</a> संजाल पर दो <a href="http://samatavadi.wordpress.com/2007/05/17/gandhihindu-nationalism/">हिस्सों</a> में उपलब्ध है ।</p>
<p align="left">    बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद लालकृष्ण अडवाणी ने 'धोओ-पोछो' तिकड़म के तहत नेता विरोधी दल के पद से इस्तीफा दिया था।</p>
<p align="left">    बहरहाल, "इनकी गाथा छोड़ चलें हम 'मानस' के मैदानों में " और दोनो चौपाइयों की सन्दर्भ सहित पद-पूर्ति करें ।</p>
<h3><font face="Verdana">कत विधि सृजी नारी जग माहि</font></h3>
<blockquote><p>    <strong><font color="#0000ff">" जब पार्वती का विवाह हो गया , तब उनकी माँ मैना विदाई के मौके पर दुखी हो कर समझाने-बुझाने पर संताप की वह बेजोड़ बात कहती है , जो सारे संसार की नारी हृदय की चीख है ।</font></strong></p>
<p><strong><font color="#0080c0">" कत विधि सृजी नारी जग माहीं ,</font></strong></p>
<p><strong><font color="#0080c0">   पराधीन सपनेहु सुख नाही । "</font></strong></p>
<p><strong><font color="#0000ff">" गजब है तुलसी ! क्या ममता , क्या नारी हृदय की चीख , क्या नर-नारी के आदर्श-जीवन की सूचना । आखिर उसने संसार को किस रूप में जाना है,</font></strong></p>
<p><strong><font color="#004080">" सियाराम मय सब जग माहीं । "</font></strong></p>
<p><strong><font color="#004080">                                </font><font color="#008000">- डॉ. राममनोहर लोहिया .</font></strong></p></blockquote>
<h3>चेरी छोड़ न होईंहो रानी</h3>
<blockquote><p><strong><font color="#408080">' कोऊ नृप होंय हमे का हानि ,</font></strong></p>
<p><strong><font color="#408080">चेरी छोड़ न होइहों रानी "</font></strong></p></blockquote>
<p>    यह गोस्वामीजी मन्थरा के मुँह से कहवाते हैं । मंथरा-वृत्ति आज भी व्याप्त है । इस वृत्ति के लोगों की शातिरी की यह सफलता है कि बाद की पंक्ति चर्चा पहली पंक्ति के साथ नहीं होती । पहली पंक्ति की व्याप्ति अराजनीतिकरण के व्याप्त माहौल में फ़िट बैठ जाती है ।</p>
<p>इष्ट देव सांकृत्यायन ने अपनी <a href="http://samatavadi.wordpress.com/2007/08/04/tulsidas-pseudo-half-panti/">दूसरी टिप्पणी</a> में 'मसीद' वाले पद का उल्लेख कर स्पष्ट रूप से तथ्य प्रस्तुत कर दिए हैं ।</p>
<h3></h3>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[गोस्वामी तुलसीदास का छद्म सेक्युलरवाद]]></title>
<link>http://samatavadi.wordpress.com/2007/08/04/%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9b%e0%a4%a6%e0%a5%8d/</link>
<pubDate>Sat, 04 Aug 2007 14:26:58 +0000</pubDate>
<dc:creator>अफ़लातून</dc:creator>
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<description><![CDATA[Technorati tags: तुलसीदास, छद्म सेक्युलरवाद, हाफ़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p style="display:inline;margin:0;padding:0;" class="wlWriterSmartContent">Technorati tags: <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8">तुलसीदास</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%9b%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%ae%20%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6">छद्म सेक्युलरवाद</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a5%9e%20%e0%a4%aa%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%9f">हाफ़ पैन्ट</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/tulsidas">tulsidas</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/pseudo%20secularism">pseudo secularism</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/pseudo%20half%20panti">pseudo half panti</a></p>
<p align="left">काशी के तुलसी घाट की चर्चा करते हुए मैंने तुलसीदास द्वारा अयोध्या में कही गयी :</p>
<blockquote>
<p align="left"><font color="#8000ff"><strong>' माँग के खईबो , मसीद में सोईबो '</strong></font></p>
</blockquote>
<p align="left">इस पंक्ति का <a href="http://kashivishvavidyalay.wordpress.com/2007/08/03/banarastulsi-ghatshambhoo-mallah/">जिक्र</a> किया था । 'पंगेबाज' अरुण के गले नहीं उतरा तुलसीदास का अयोध्या में मस्जिद में सोना । टीप दिया कि <a href="http://kashivishvavidyalay.wordpress.com/2007/08/03/banarastulsi-ghatshambhoo-mallah/">'मसीद' के माएने 'मस्ती'</a> होगा । यानी उस पंक्ति के माएने मित्र चिट्ठेबाज के अनुसार हो जाएँगे , ' माँग के खाऊँगा और फिर मस्ती में सो जाऊँगा , बिन्दास ! बिना किसी पंगे के ! '</p>
<p align="left">    अरुण की टीप से छद्म हाफ़ पैन्टी अनुनाद उत्साहित हो गए ।</p>
<blockquote>
<p align="left">&#160;</p>
<p>सेक्युलरिज्म के हित में यही है कि मसीद का अर्थ मसजिद मान लिया जाय।</p>
<p>जाकी रही भावना जैसी…</p></blockquote>
<p>    यानी अनुनाद को लगा कि तुलसीदास की बात का मैंने सेक्युलरीकरण कर दिया । उन्हें छद्म हाफ़ पैन्टी कह रहा हूँ चूँकि वे वास्तव में छद्म न होते तब कहते , <strong>' मसीद ' का मतलब मस्जिद ही तो है । अयोध्या की 'मसीद' में ही मर्यादापुरुषोत्तम भगवान राम प्रकट हुए थे । ऐसे में तुलसी जैसा अनन्य रामभक्त अन्यत्र शयन क्यों करता ?</strong></p>
<p><strong>   </strong> भगवान वहाँ तुलसी के जमाने में प्रकट हुए या कलेक्टर नैय्यर के जमाने में यह बहस नई हो जाएगी ।</p>
<p>    बहरहाल , तुलसीदास छद्म सेक्युलरवादी सिर्फ़ इस पंक्ति से नहीं बन जाते । तुलसी भए अक़बर के जमाने में । तब, बाबर के जमाने की तथाकथित ग़लतियों पर चुप्पी क्यों साधे रहे ? अदम गोंडवी के शेर का मिसरा याद कर के?</p>
<blockquote><p><strong><font color="#800040">ग़र ग़लतियाँ बाबर ने की जुम्मन का घर फिर क्यों जले ?</font></strong></p></blockquote>
<p>जुम्मन का घर जलाने नहीं गए, ऊपर से कह गए</p>
<blockquote><p><strong><font color="#0080c0">" परहित सरिस धरम नहि भाई ,</font></strong></p>
<p><strong><font color="#0080c0">परपीड़ा सम नहि अधमाई "</font></strong></p></blockquote>
<p>    परपीड़ा का धर्म उन्होंने हाफ़ पैन्टियों के गुरुणामगुरु हिटलर से नहीं सीखा ?</p>
<p>    यह छद्म सेक्युलरवादी नर - नारी समता और स्त्री - स्वतंत्रता की बातें भी करते हैं ! हिन्दू-राष्ट्र के कल्पना का समाज तो मनु महाराज की संकल्पना के आधार पर होगा !शूद्रों की भाँति स्त्रियों के कान में भी पिघला सीसा डालने वाला ! विद्वान अरुण या छद्म हाफ़ पैन्टी अनुनाद से पूछिए कि गोस्वामीजी <strong>' पराधीन सपनेहु सुख नाहि ' </strong>कह गए, किस सन्दर्भ में ? उसका पूवार्ध क्या है ? एक विशिष्ट सोच के धनी महापुरुषों के लिए डॉ. लोहिया कह गए , <strong>' हिन्दू नर इतना नीच हो गया है कि पहले तो इस चौपाई के पूर्वार्ध को भुला देने की कोशिश की और फिर कहीं - कहीं नया पूर्वार्ध ही गढ़ डाला - " कर विचार देखहु मन माहि " ।</strong></p>
<p><strong>    </strong>' पराधीन सपनेहु सुख नाहि ' के वास्तविक पूर्वार्ध से पता चलता है कि किसकी पराधीनता की चर्चा महाकवि ने की है । रामचरितमानस पर विचार करते वक्त 'रामायण मेला' की कल्पना करने वाले राममनोहर लोहिया की इस बात पर भी गौर करें :</p>
<blockquote><p><font color="#333333">" दोहे- चौपाई को समझते समय सामयिक परिस्थिति और चिर सत्य के भेद को दिमाग में रखना चाहिए । धार्मिक कविता का यही सबसे बड़ा दोष है कि क्षणभंगुर समाज और भ्रष्ट पात्रों की भ्रष्ट -चौपाइयों और संसार के सर्वश्रेष्ठ आनन्द अथवा नीति पर एक अच्छत-रोली ,गंगा-जल छिड़क देती हैं, सभी पवित्र हो जाते हैं । "</font></p></blockquote>
<p> अब यह अरुण बताएँगे कि ' कोऊ नृप होए हमे का हानि' किस महान चरित्र का कथन था ? इस पंक्ति को मानने वाले मौजूदा समाज में भी मौजूद हैं । वे यह भी मान कर खुश हो लेते होंगे कि मानस में यह दर्शन है !</p>
<p>    इस देश की जनता के दिमाग में अच्छी तरह बैठा हुआ है कि राम ने गद्दी का त्याग किया , कुर्सी के लिए ख़ून-खराबा नहीं किया था ।</p>
<p>    स्वामी विवेकानन्द के ' छद्म सेक्युलर ' विचार मैंने जब <a href="http://samatavadi.wordpress.com/2007/05/20/brahminismvivekananda/#comments">अपने चिट्ठे</a> पर दिए थे तब सरस्वती शिशु मन्दिर में पढ़े एक मित्र ने लिखा था , '</p>
<blockquote><p>दिक्‍कत ये है कि दक्षिणपंथी हों या वामपंथी सभी इन मुद्दों पर ध्‍यान देने से कतराते हैं, रही बात विवेकानंद का नाम लेकर दुकान चला रहे झंडाबरदारों की, तो वो सिर्फ उतनी ही बातें सामने लाते हैं जिनसे उनकी दुकान जारी रहे । उनके लिये विवेकानंद का जिक्र उत्तिष्‍ठ जागृत से शुरू होता है और अमरीका वाले सम्‍मेलन के जिक्र पर खत्‍म हो जाता है । बस । इससे आगे विवेकानंद की बातें बताना उनके लिए असुविधाजनक हो जाता<br />
है ।</p></blockquote>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हत्यारों का गिरोह]]></title>
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<pubDate>Sat, 16 Jun 2007 16:46:42 +0000</pubDate>
<dc:creator>अफ़लातून</dc:creator>
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<description><![CDATA[हत्यारों के गिरोह का
एक सदस्य हत्या क]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="left">हत्यारों के गिरोह का</p>
<p align="left">एक सदस्य हत्या करता है</p>
<p align="left">दूसरा उसे दुर्भाग्यपूर्ण बताता है</p>
<p align="left">तीसरा मारे गए आदमी के दोष गिनाता है</p>
<p align="left">चौथा हत्या का औचित्य ठहराता है</p>
<p align="left">पाँचवाँ समर्थन में सिर हिलाता है</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">और अन्त में सब मिलकर</p>
<p align="left">बैठक करते हैं</p>
<p align="left">अगली हत्या की योजना के सम्बन्ध में ।</p>
<p align="left">                                     -<strong>  राजेन्द्र राजन .</strong></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[&quot;हिटलर के नाजियों और मुसोलिनी के फासिस्टों ने भी यही किया था&quot;]]></title>
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<pubDate>Thu, 17 May 2007 11:03:40 +0000</pubDate>
<dc:creator>अफ़लातून</dc:creator>
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<description><![CDATA[Technorati tags: hindu nationalism, communalism, gandhi
गतांश से आगे :  गा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p style="display:inline;margin:0;padding:0;" class="wlWriterSmartContent">Technorati tags: <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/hindu%20nationalism">hindu nationalism</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/communalism">communalism</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/gandhi">gandhi</a></p>
<p><a href="http://samatavadi.wordpress.com/2007/05/16/ganhicommunalismhindu-nationalism/">गतांश</a> से आगे :<strong>  गां</strong>धी जी के सचिव प्यारेलाल ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक <em>पूर्णाहुति </em>में सितम्बर , १९४७ में संघ के अधिनायक गोलवलकर से गांधीजी की मुलाकात , विभाजन के बाद हुए दंगों में तथा गांधी - हत्या में संघ की भूमिका का विस्तार से वर्णन किया है । गोलवलकर से गांधी जी के वार्तालाप के बीच में गांधी मंडली के एक सदस्य बोल उठे - ' संघ के लोगों ने निराश्रित शिविर में बढ़िया काम किया है । उन्होंने अनुशासन , साहस और परिश्रमशीलता का परिचय दिया है ।' गांधी जी ने उत्तर दिया - <strong>' परन्तु यह न भूलिये कि हिटलर के नाजियों और मुसोलिनी के फासिस्टों ने भी यही किया था ।' उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को ' तानाशाही दृष्टिकोण रखनेवाली सांप्रदायिक संस्था बताया । ( पूर्णाहुति , चतुर्थ खंड, पृष्ठ : १७)</strong></p>
<p>    अपने एक सम्मेलन में गांधीजी का स्वागत करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता ने उन्हें ' हिन्दू धर्म द्वारा उत्पन्न किया हुआ एक महान पुरुष ' बताया । उत्तर में गांधी जी बोले -  'मुझे हिन्दू होने का गर्व अवश्य है । परन्तु मेरा हिन्दू धर्म न तो असहिष्णु है और न बहिष्कारवादी है । हिन्दू धर्म की विशिष्टता जैसा मैंने समझा है , यह है कि उसने सब धर्मों की उत्तम बातों को आत्मसात कर लिया है । यदि हिन्दू यह मानते हों कि भारत में अहिन्दुओं के लिए समान और सम्मानपूर्ण स्थान नहीं है और मुसलमान भारत में रहना चाहें तो उन्हें घटिया दरजे से संतोष करना होगा... तो इसका परिणाम यह होगा कि हिन्दू धर्म श्रीहीन हो जायेगा.. मैं आपको चेतावनी देता हूं कि अगर आपके खिलाफ लगाया जाने वाला यह आरोप सही हो कि मुसलमानों को मारने में आपके संगठन का हाथ है तो उसका परिणाम बुरा होगा ।' <a href="http://samatavadi.files.wordpress.com/2007/05/windowslivewriterd4369f1663f9-104abcart11.jpg"><img width="223" src="http://samatavadi.files.wordpress.com/2007/05/windowslivewriterd4369f1663f9-104abcart1.jpg" height="240" style="border:0;" /></a></p>
<p>    इसके बाद जो प्रश्नोत्तर हुए उसमें गांधी जी से पूछा गया - ' क्या हिन्दू धर्म आतताइयों को मारने की अनुमति नहीं देता ? यदि नहीं देता , तो गीता के दूसरे अध्याय में श्रीकृष्ण ने कौरवों का नाश करने का जो उपदेश दिया है , उसके लिए आपका क्या स्पष्टीकरण है ?'</p>
<p>    गांधी जी ने कहा - ' पहले प्रश्न का उत्तर 'हां' और 'नहीं' दोनों है । मारने का प्रश्न खड़ा होने से पहले हम इस बात का अचूक निर्णय करने की शक्ति अपने में पैदा करें कि आततायी कौन है ?दूसरे शब्दों में , हमें ऐसा अधिकार तभी मिल सकता है जब हम पूरी तरह निर्दोष बन जायें । एक पापी दूसरे पापी का न्याय करने अथवा फांसी लगाने के अधिकार का दावा कैसे कर सकता है ? रही बात दूसरे प्रश्न की । यह मान भी लिया जाये कि पापी को दंड देने का अधिकार गीता ने स्वीकार किया है , तो भी कानून द्वारा उचित रूप में स्थापित सरकार ही उसका उपयोग भलीभांति कर सकती है । अगर आप न्यायाधीश और जल्लाद दोनों एक साथ बन जायें , तो सरदार और पंडित नेहरू दोनों लाचार हो जायेंगे.... उन्हें आपकी सेवा करने का अवसर दीजिए , कानून को अपने हाथों में ले कर उनके प्रयत्नों को विफल मत कीजिए । <strong>( संपूर्ण गांधी वांग्मय खंड : ८९ )</strong></p>
<p><strong>    </strong>३० नवंबर '४७ के प्रार्थना प्रवचन में गांधी जी ने कहा , ' हिन्दू महासभा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विचार है कि हिन्दुत्व की रक्षा का एक मात्र तरीका उनका ही है । हिंदू धर्म को बचाने का यह तरीका नहीं है कि बुराई का बदला बुराई से । हिंदू महासभा और संघ दोनों हिंदू संस्थाएं हैं । उनमें पढ़े - लिखे लोग भी हैं । मैं उन्हें अदब से कहूंगा कि किसी को सता कर धर्म नहीं बचाया जा सकता...</p>
<p>    '.. कनॉट प्लेस के पास एक मस्जिद में हनुमान जी बिराजते हैं , मेरे लिए वह मात्र एक पत्थर का टुकड़ा है जिसकी आकृति हनुमान जी की तरह है और उस पर सिन्दूर लगा दिया गया है । वे पूजा के लायक नहीं ।पूजा के लिए उनकी प्राण प्रतिष्ठा होनी चाहिए , उन्हें हक से बैठना चाहिए । ऐसे जहां तहां मूर्ति रखना धर्म का अपमान करना है ।उससे मूर्ति भी बिगड़ती है और मस्जिद भी । मस्जिदों की रक्षा के लिए पुलिस का पहरा क्यों होना चाहिये ? सरकार को पुलिस का पहरा क्यों रखना पड़े ? हम उन्हें कह दें कि हम अपनी मूर्तियां खुद उठा लेंगे , मस्जिदों की मरम्मत कर देंगे । हम हिन्दू मूर्तिपूजक हो कर , अपनी मूर्तियों का अपमान करते हैं और अपना धर्म बिगाड़ते हैं ।</p>
<p>    ...' एक मुसलमान मेरे पास परेशान हो कर आया । वह एक आधा जला कुरान शरीफ अदब से कपड़े में लपेट कर लाया । खोल कर मुझे दिखाया और चला गया । उसकी आंखों में पानी था , पर मुंह से वह कुछ बोला नहीं । जिसने कुरान शरीफ का अपमान करने की कोशिश की , उसने अपने धर्म का अपमान किया । उसके सामने मुसलमान कहीं मारपीट करके कहीं कुरान शरीफ रखना चाहे , तो वे कुरान-शरीफ का अपमान करेंगे । '</p>
<p>    ' इसलिए हिंदू महासभा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और दूसरे जो भी मुझे सुनना चाहते हैं और सिखों को बहुत अदब से कहना चाहूंगा कि सिख अगर गुरु नानक के दिन से सचमुच साफ हो गये , तो हिन्दू अपने आप सफ हो जायेंगे । हम बिगड़ते ही न जायें , हिंदू धर्म को धूल में न मिलायें । अपने धर्म को और देश को हम आज मटियामेट कर रहे हैं । ईश्वर हमें इससे बचा ले '। <strong>( प्रार्थना प्रवचन ,खंड २ , पृ. १४४ - १५० तथा संपूर्ण गांधी वांग्मय , खंड : ९० )</strong></p>
<p><strong>    </strong>अखिल भारतीय कांग्रेस समिति को अपने अंतिम संबोधन ( १८ नवंबर '४७ ) में उन्होंने कहा , ' मुझे पता चला है कि कुछ कांग्रेसी भी यह मानते हैं कि मुसलमान यहां न रहें । वे मानते हैं कि ऐसा होने पर ही हिंदू धर्म की उन्नति होगी । परंतु वे नहीं जानते कि इससे हिंदू धर्म का लगातार नाश हो रहा है । इन लोगों द्वारा यह रवैया न छोड़ना खतरनाक होगा ... काफी देखने के बाद मैं यह महसूस करता हूं कि यद्यपि हम सब तो पागल नहीं हो गये हैं , फिर कांग्रेसजनों की काफी बडी संख्या अपना दिमाग खो बैठी है..मुझे स्पष्ट यह दिखाई दे रहा है कि अगर हम इस पागलपन का इलाज नहीं करेंगे , तो जो आजादी हमने हासिल की है उसे हम खो बैठेंगे... मैं जानता हूं कि कुछ लोग कह रहे हैं कि कांग्रेस ने अपनी आत्मा को मुसलमानों के चरणों में रख दिया है , गांधी ? वह जैसा चाहे बकता रहे ! यह तो गया बीता हो गया है । जवाहरलाल भी कोई अच्छा नहीं है । रही बात सरदार पटेल की , सो उसमें कुछ है । वह कुछ अंश में सच्चा हिंदू है ।परंतु आखिर तो वह भी कांग्रेसी ही है ! ऐसी बातों से हमारा कोई फायदा नहीं होगा , हिंसक गुंडागिरी से न तो हिंदू धर्म की रक्षा होगी , न सिख धर्म की । गुरु ग्रन्थ-साहब में ऐसी शिक्षा नहीं दी गयी है । ईसाई धर्म भी ये बातें नहीं सिखाता । इस्लाम की रक्षा तलवार से नहीं हुई है । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में मैं बहुत-सी बातें सुनता रहता हूं । मैंने यह सुना है कि इस सारी शरारत की जड़ में संघ है । हिंदू धर्म की रक्षा ऐसे हत्याकांडों से नहीं हो सकती । आपको अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करनी होगी । वह रक्षा आप तभी कर सकते हैं जब आप दयावान और वीर बनें और सदा जागरूक रहेंगे, अन्यथा एक दिन ऐसा आयेगा जब आपको इस मूर्खता का पछतावा होगा , जिसके कारण यह सुंदर और बहुमूल्य फल आपके हाथ से निकल जायेगा । मैं आशा करता हूं कि वैसा दिन कभी नहीं आयेगा । हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि लोकमत की शक्ति तलवारों से अधिक होती है । '</p>
<p>    संयुक्त राष्ट्रसंघ के समक्ष तत्कालीन हिंदुस्तानी प्रतिनिधिमण्डल की नेता श्रीमती विजयलक्ष्मी पण्डित की आवाज में आवाज मिलाकर जब पाकिस्तानी प्रतिनिधिमण्डल के नेता विदेश मन्त्री जफ़रुल्ला खां , अमरीका में पाकिस्तान के राजदूत एम. ए. एच. इरफ़ानी ने भी दक्षिण अफ़्रीका में भारतीयों पर अत्याचार का विरोध किया , तब गांधीजी अत्यन्र्त प्रसन्न हुए और १६ नवंबर '४७ को प्रार्थना में उन्होंने यह कहा , ' हिंदुस्तान(अविभाजित) के हिंदू और मुसलमान विदेशों में रहने वाले हिंदुस्तानियों के सवालों पर दो राय नहीं हैं , इससे साबित होता है कि दो राष्ट्रों का उसूल गलत है ।इससे आप लोगों को मेरे कहने से जो सबक सीखना चाहिए , वह यह है कि दुनिया में प्रेम सबसे ऊंची चीज है ।अगर हिंदुस्तान के बाहर हिंदू और मुसलमान एक आवाज से बोल सकते हैं , तो यहां भी वे जरूर ऐसा कर सकते हैं , शर्त यह है कि उनके दिलों में प्रेम हो ... अगर आज हम ऐसा कर सके और बाहर की तरह हिंदुस्तान में भी एक आवाज से बोल सके , तो हम आज की मुसीबतों से पार हो जायेंगे ! <strong>( संपूर्ण गांधी वांग्मय , खण्ड : ९० )</strong></p>
<p><strong>    </strong>इन सबको याद करना उस भयंकर त्रासदायी व शर्मनाक दौर को याद करना नहीं है , बल्कि जिस दौर की धमक सुनाई दे रही है उसे समझना है । गांधीजी तब भले ही एक व्यक्ति हों , आज तो उनकी बातें कालपुरुष के उद्गार-सी लगती हैं और हमारे विवेक को कोंचती हैं । उस आवाज को तब न सुन कर हमने उस आवाज का ही गला घोंट दिया था । अब आज ? आज तो आवाज भी अपनी ही है और गला भी ! इस बार हमें पहले से भी बड़ी कीमत अदा करनी होगी ।</p>
<p>                                                    #*#</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हम इस आवाज का मतलब समझें]]></title>
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<pubDate>Wed, 16 May 2007 08:32:27 +0000</pubDate>
<dc:creator>अफ़लातून</dc:creator>
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<description><![CDATA[Technorati tags: mahatma gandhi, communalism, hindu nationalism
 मेरा यह लेख ध]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p style="display:inline;margin:0;padding:0;" class="wlWriterSmartContent">Technorati tags: <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/mahatma%20gandhi">mahatma gandhi</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/communalism">communalism</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/hindu%20nationalism">hindu nationalism</a></p>
<p><u> मेरा यह लेख <strong>धर्मयुग , १६ फरवरी १९९१</strong> में छपा था<strong> </strong>।</u></p>
<p>    आज गुजरात के कई गाँवों में '<em>हिन्दू राष्ट्र नू माणसा   गाम'. हिन्दू राष्ट्र का माणसा ( </em>नाम ) <em>ग्राम </em>जैसी तख्तियाँ लगायी गयी हैं । मध्यप्रदेश के बस अड्डों पर ' हिन्दू राज्य ' में आपका स्वागत है !- पोस्टर एक अभियान के तहत लगाये जा रहे हैं । ऐसा एक दौर १९४२ में गांधी जी के समक्ष भी आया था । दिल्ली प्रदेश कंग्रेस कमिटी के तत्कालीन अध्यक्ष आसफ़ अली ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों की बाबत प्राप्त एक शिकायत गांधी जी को भेजी और लिखा था कि शिकायतकर्ता को नजदीकी तौर से जानते हैं , वे सच्चे और निष्पक्ष राष्ट्रीय कार्यकर्ता हैं । <strong>९ अगस्त , १९४२ </strong>को <strong>हरिजन </strong>( पृष्ट : २६१ ) में गांधी जी ने लिखा :</p>
<blockquote><p>     " शिकायती पत्र उर्दू में है । उसका सार यह है कि आसफ़ अली साहब ने अपने पत्र में जिस संस्था का जिक्र किया है ( राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ) उसके ३,००० सदस्य रोजाना लाठी के साथ कवायद करते हैं , कवायद के बाद नारा लगाते हैं <em>हिन्दुस्तान हिन्दुओं का है और किसी का नहीं । </em>इसके बाद संक्षिप्त भाषण होते हैं जिनमें वक्ता कहते हैं - ' पहले अंग्रेजों को निकाल बाहर करो उसके बाद हम मुसलमानों को अपने अधीन कर लेंगे , अगर वे हमारी नहीं सुनेंगे तो हम उन्हे मार डालेंगे । ' बात जिस ढंग से कही गयी है , उसे वैसी ही समझ कर यह कहा जा सकता है कि यह नारा गलत है और भाषण की मुख्य विषयवस्तु तो और भी बुरी है ।</p>
<p>    " ... नारा गलत और बेमानी है , क्योंकि हिंदुस्तान उन सब लोगों का है जो यहाँ पैदा हुए और पले हैं और जो दूसरे मुल्क का आसरा नहीं तक सकते । इसलिए वह जितना हिन्दुओं का है उतना ही पारसियों , यहूदियों , हिंदुस्तानी इसाइयों , मुसलमानों और दूसरे गैर हिंदुओं का भी है । आजाद हिंदुस्तान में राज हिंदुओं का नहीं , बल्कि हिन्दुस्तानियों का होगा , और वह किसी धार्मिक पंथ या संप्रदाय के बहुमत पर नहीं , बिना किसी धार्मिक भेदभाव के निर्वाचित समूची जनता के प्रतिनिधियों पर आधारित होगा ।</p>
<p>    " ... धर्म एक निजी विषय है , जिसका राजनीति में कोई स्थान नहीं होना चाहिए , विदेशी हुकूमत की वजह से देश में जो अस्वाभाविक परिस्थिति पैदा हो गयी है , उसी की बदौलत हमारे यहां धर्म के अनुसार इतने अस्वाभाविक विभाग हो गये हैं । जब देश से विदेशी हुकूमत उठ जायेगी तो हम इन झूठे नारों और आदर्शों से चिपके रहने की अपनी इस बेवकूफी पर खुद हंसेंगे । अगर अंग्रेजों की जगह देश में हिंदुओं की या दूसरे किसी संप्रदाय की हुकूमत ही कायम होनेवाली हो तो अंग्रेजों को निकाल बाहर करने की पुकार में कोई बल नहीं रह जाता । वह स्वराज्य नहीं होगा । "</p></blockquote>
<p>    विभाजन के बाद हुए व्यापक सांप्रदायिक दंगों के खिलाफ ' करो या मरो ' की भावना से गांधी जी दिल्ली में डेरा डाले हुए थे । २१ सितम्बर '४७ को प्रार्थना - प्रवचन में 'हिन्दू राष्ट्रवादियों ' के सन्दर्भ में उन्होंने टिप्पणी की ; <a href="http://samatavadi.files.wordpress.com/2007/05/windowslivewriterea6b107db0d0-14742img4391.jpg"><img width="240" src="http://samatavadi.files.wordpress.com/2007/05/windowslivewriterea6b107db0d0-14742img439.jpg" height="200" style="border-width:0;" /></a></p>
<blockquote><p>    ' एक अखबार ने बड़ी गंभीरता से यह सुझाव रखा है कि अगर मौजूदा सरकार में शक्ति नहीं है यानी अगर जनता सरकार को उचित काम न करने दे , तो वह सरकार उन लोगों के लिए अपनी जगह खाली कर दे , जो सारे मुसलमानों को मार डालने या उन्हें देश निकाला देने का पागलपन भरा काम कर सके । यह ऐसी सलाह है कि जिस पर चल कर देश खुदकुशी कर सकता है और हिंदू धर्म जड़ से बरबाद हो सकता है । मुझे लगता है ऐसे अखबार तो आजाद हिंदुस्तान में रहने लायक ही नहीं हैं । प्रेस की आजादी का यह मतलब नहीं कि वह जनता के मन में जहरीले विचार पैदा करें । जो लोग ऐसी नीति पर चलना चाहते हैं , वे अपनी सरकार से इस्तीफा देने के लिए भले कहें , मगर जो दुनिया शांति के लिए अभी तक हिंदुस्तान की तरफ ताकती रही है , वह आगे से ऐसा करना बंद कर देगी । हर हालत में जब तक मेरी सांस चलती है , मैं ऐसे निरे पागलपन के खिलाफ अपनी सलाह देना जारी रखूंगा । " <strong>( दिल्ली-डायरी , पृष्ठ ३० )</strong></p></blockquote>
<p><strong>    </strong>८ अक्टूबर , '४७ को गांधी जी ने साफगोई से अपनी राय रखी :</p>
<blockquote><p>    ' अखबारों का जनता पर जबरदस्त असर होता है । संपादकों का फर्ज है कि वे अपने अखबारों में गलत खबरें न दें या ऐसी खबरें न छापें , जिससे जनता में उत्तेजना फैले । एक अखबार में मैंने पढ़ा कि रेवाड़ी में मेवों ने हिंदुओं पर हमला कर दिया । इस खबर ने मुझे बेचैन कर दिया ।मगर दूसरे दिन अखबारों में यह पढ़ कर मुझे खुशी हुई कि वह खबर गलत थी । ऐसे कई उदाहरण दिए जा सकते हैं ।संपादकों और उप संपादकों को को खबरें छापने और उन्हें खास रूप देने में बहुत ज्यादा सावधानी लेने की जरूरत है । आजादी की हालत में सरकारों के लिए यह करीब - करीब असंभव है कि वे अखबारों पर काबू रखें । जनता का फर्ज है कि वह अखबारों पर कड़ी नजर रखें और उन्हें ठीक रास्ते पर चलायें ।पढ़ी - लिखी जनता को चाहिए कि वह भड़काने वाले या गंदे अखबारों को मदद करने से इनकार कर दें । <strong>( दिल्ली-डायरी , पृश्ठ : ७७)</strong></p></blockquote>
<p><strong>    गत </strong>एक वर्ष में काशी विश्वविद्यालय में प्रशासन की अनुमति से परिसर में विश्व हिंदू परिषद के नेताओं के भाषण , विडियो प्रदर्शन , राम शिला पूजन , अस्ति पूजन कराने तथा शाखायें लगाने के अलावा मुस्लिम छात्रों की पीटने , अरबी विभाग में तोड़फोड़ , मुस्लिम शिक्षक , कर्मचारियों को धमकाने की घटनाएं हुई हैं । इस विश्वविद्यालय से जुड़े सर सुन्दरलाल चिकित्सालय में मुस्लिम मरीजों के परिचारकों को पीटा गया । यह अलीगढ़ विश्वविद्यालय की बाबत छपी गलत खबर के बहाने हुआ । महाराज सयाजी राव विश्वविद्यालय वडोदरा के प्रसिद्ध चित्रकार तथा दृश्यकला संकाय के प्रोफेसर गुलाम शेख को विश्वविद्यालय से निकाले जाने की छात्रसंघ द्वारा मांग की गयी क्योंकि उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द के लिए चलाये जा रहे ' वडोदरा शान्ति अभियान ' में हिस्सेदारी की थी । इस सन्दर्भ में गांधी जी २१ जनवरी , १९४२ को काशी विश्वविद्यालय के रजत जन्ती समारोह में दिये गये प्रवचन के उद्धरण मौजू होंगे :</p>
<blockquote><p>" एक बात और । पश्चिम के हर एक विश्वविद्यालय की अपनी एक-न-एक विशेषता होती है । कैंब्रिज और ऑक्स्फोर्ड को ही लीजिए , इन विश्वविद्यालयों को इस बात का नाज है कि उनके हर एक विद्यार्थी पर उनकी विशेषता की छाप इस तरह लगी रहती है कि वे फौरन पहचाने जा सकते हैं ।हमारे देश के विश्वविद्यालयों की अपनी ऐसी कोई विशेषता होती ही नहीं । वे तो पश्चिमी विश्वविद्यालयों की एक निस्तेज और निष्प्राण नकल भर हैं , अगर हम उनको पश्चिमी सभ्यता का सिर्फ सोख्ता या स्याही-सोख कहें , तो शायद वाजिब होगा । आपके इस विश्वविद्यालय के बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि यहां शिल्प - शिक्षा और यंत्र - शिक्षा का यानी इंजिनिरिंग और टेक्नोलॉजी का देशभर में सबसे ज्यादा विकास हुआ है ।और इनका शिक्षा से अच्छा सम्बन्ध है । लेकिन इसे मैं यहां की विशेषता मानने को तैयार नही। तो फिर इसकी विशेषता क्या हो ? मैं इसकी एक मिसाल आपके सामने रखना चाहता हूं । यहां जो इतने हिंदू विद्यार्थी हैं , उनमें से कितनों ने मुसलमान विद्यार्थियों को अपनाया है ? अलीगढ़ के कितने छात्रों को आप अपनी ओर खींच सके हैं ? दरअसल आपके दिल में तो यह भावना पैदा होनी चाहिये कि आप तमाम मुसलमान विद्यार्थियों को यहां बुलायेंगे और उन्हें अपनायेंगे ।</p>
<p>    '...जिस तरह गंगा जी में अनेक नदियां आ कर मिलती हैं , उसी तरह इस देसी संस्कृति गंगा में भी अनेक संस्कृति-रूपी सहायक नदियां मिली हैं , यदि इन सबका कोई सन्देश या पैगाम हमारे लिए हो सकता है तो यही कि हम सारी दुनिया को अपनायें और किसी को अपना दुश्मन न समझें । मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वह हिंदू विश्वविद्यालय को यह सब करने की शक्ति दे । यही इसकी विशेषता हो सकती है - सिर्फ अंग्रेजी सीखने से यह काम नहीं होगा ।'<strong>(बनारस हिंदू विश्वविद्यालय रजत जयंती समारोह , पृष्ठ :४१-४७)</strong></p>
<p><strong>जारी...</strong></p></blockquote>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[जे.पी. और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ]]></title>
<link>http://samatavadi.wordpress.com/2007/02/13/%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%b8/</link>
<pubDate>Tue, 13 Feb 2007 06:59:57 +0000</pubDate>
<dc:creator>अफ़लातून</dc:creator>
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<description><![CDATA[[ सवालों के लिखित उत्तर जयप्रकाश नाराय]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>[ सवालों के लिखित उत्तर जयप्रकाश नारायण ने 'सामयिक वार्ता' के लिए सितम्बर १९७७ के पहले सप्ताह में दिये ।निम्नलिखित सवाल-जवाब का स्रोत - <strong>सामयिक वार्ता , १६ सितम्बर,१९७७ है </strong>।]</p>
<p><strong>प्रश्न</strong> : <em>आपके आन्दोलन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय मजदूर संघ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ के साथ भाग लिया ।जनता पार्टी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का राजनीतिक अंग अर्थात जनसंघ तो शामिल हो गया है । लेकिन वह खुद तथा अ.भा. विद्यार्थी परिषद और भारतीय मजदूर संघ अपनी अलग हैसियत बनाये हुए हैं । ये जनता पार्टी के युवा , छात्र और मजदूर आदि संगठनों में मिलने से इनकार कर रहे हैं । क्या आपको यह नहीं लगता है कि इससे पार्टी की एकता की भावना कमजोर होती है ?क्या आपके आन्दोलन में शामिल होनेवाले लोगों को , जिन्होंने इमरजेंसी के वक्त बहुत कष्ट सहे , एकता को सबसे ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए ?</em></p>
<p><strong>जे.पी : </strong>इससे निश्चय ही (एकता) कमजोर होगी । मैं आशा करता हूँ कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ , विद्यार्थी परिषद और भारतीय मजदूर संघ जैसे संगठन , जनता पार्टी के जो विभिन्न संगठन बन रहे हैं , उनमें शामिल होंगे । अगर वे शामिल नहीं हुए तो आगे फूट और झगड़े की बहुत ज्यादा आशंका रहेगी ।</p>
<p><strong>प्रश्न :</strong> <em>क्या आप राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को विशुद्ध रूप से एक सांस्कृतिक संगठन के रूप में देखते हैं ? यह सवाल हम इसलिए कर रहे हैं कि आपने उसके बारे में एक समय इससे भिन्न मत प्रकट किया था ।</em></p>
<p><strong>जे.पी. : </strong>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को विशुद्ध रूप से एक सांस्कृतिक संगठन मानना मुश्किल है।</p>
<p><strong>प्रश्न :</strong> <em>आपने बम्बई में २१-२२ मार्च १९७६ को एक अकेली संयुक्त पार्टी बनाने के उद्देश्य से संगठन कांग्रेस , जनसंघ , भारतीय लोक दल , सोशलिस्ट पार्टी के प्रतिनिधियों को तथा कुछ व्यक्तियों की बैठक बुलाई थी । इस बैठक में आपने जनसंघ के प्रतिनिधि को काफी कड़ाई से पूछा था कि वे जेल में क्या अलग शाखाएँ चलाते हैं ? क्या आपकी अभी भी यही राय है ?</em></p>
<p><strong>जे.पी. : </strong>मेरी अभी भी यही राय है ।</p>
<p><strong>प्रश्न : </strong><em>'बिहारवासियों के नाम चिट्ठी में आपने लिखा है " मैंने(जयप्रकाशजी ने) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आन्दोलन की सर्वधर्म समभावनावाली धारा में लाकर साम्प्रदायिकता से मुक्त करने की कोशिश की है ।" आपने यह दावा भी किया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग कुछ हद तक बदले भी हैं ।क्या आप यह मानते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हिन्दू-राष्ट्र के विचार को त्याग दिया है ? आपकी और गांधीजी की भारतीय राष्ट्रीयता की अवधारणा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की हिन्दू-राष्ट्र की अवधारणा से बुनियादी रूप से भिन्न है ।अगर यह बात ठीक है तो यह भिन्नता कैसी है ? अगर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उनके अन्य संगठन  हिन्दू-राष्ट्र के अपने विचार पर अटल रहते हैं तो क्या इससे भारतीय राष्ट्र और देश सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए एक हो पाएगा ?</em></p>
<p><strong>जे.पी. : </strong>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेताओं और कार्यकर्ताओं से  अपने सम्पर्क के दौरान मुझे निश्चय ही उनके दृष्टिकोण में परिवर्तन नजर आया । उनमें अब अन्य समुदायों के प्रति शत्रुता कि भावना नहीं है । लेकिन अपने मन में वे अभी भी हिन्दू-राष्ट्र की अवधारणा में विश्वास करते हैं ।वे यह कल्पना करते हैं कि मुसलमान और ईसाई(जैसे अन्य समुदाय) तो पहले से ही संगठित हैं जबकि हिन्दू बिखरे हुए और असंगठित और इसलिए वे हिन्दुओं को संगठित करना अपना मुख्य काम मानते हैं ।रा.स्व. संघ के नेताओं के इस दृष्टिकोण में परिवर्तन होना ही चाहिए । मैं यही आशा करता हूँ कि वे हिन्दू-राष्ट्र के विचार को त्याग देंगे और उसकी जगह भारतीय राष्ट्र के विचार को अपनाएँगे । भारतीय राष्ट्र का विचार सर्वधर्म समभाववाली अवधारणा है और यह भारत में रहनेवाले सभी समुदायों को अंगीकार करता है।अगर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने को भंग नहीं करता और जनता पार्टी द्वारा गठित युवा या सांस्कृतिक संगठनों में शामिल नहीं होता तो उसे कम-से-कम सभी समुदायों के लोगों ,मुसलमानों और ईसाइयों को अपने में शामिल करना चाहिए। उसे अपने संचालन और काम करने के तरीकों का लोकतंत्रीकरण करना चाहिए और सभी जातियों और समुदायों के लोगों , हरिजन ,मुसलमान और ईसाई को अपने सर्वोच्च पदों पर नियुक्त करने की पूरी कोशिश करनी चाहिए ।</p>
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]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[' परिचर्चा ' की जारी बहस]]></title>
<link>http://samatavadi.wordpress.com/2006/12/15/abad-incident-a-bad-precedent/</link>
<pubDate>Fri, 15 Dec 2006 17:05:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>अफ़लातून</dc:creator>
<guid>http://samatavadi.wordpress.com/2006/12/15/abad-incident-a-bad-precedent/</guid>
<description><![CDATA[#18 Today 11:31:20




neerajdiwan 
समझदार बंधु 

From: दिल्ली 
Reg]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<h2><span></span><span class="conr">#18 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6144#p6144">Today 11:31:20</a></h2>
<p class="box">
<p class="inbox">
<p class="postleft">
<dl>
<dt><strong><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/profile.php?id=46">neerajdiwan</a></strong> </dt>
<dd><strong>समझदार बंधु</strong> </dd>
<dd></dd>
<dd>From: दिल्ली </dd>
<dd>Registered: 14-05-2006 </dd>
<dd>Posts: 370 </dd>
<dd><a href="mailto:neerajdiwan@yahoo.com">E-mail</a>  <a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/message_send.php?id=46&#38;tid=709">PM</a>  <a href="http://neerajdiwan.wordpress.com/">Website</a> </dd>
</dl>
<p class="postright">
<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
</p>
<p class="postmsg">
<p>आंख बन्द कर लेने से मुसीबतें टल नहीं जाती.. संस्कृति के ठेकेदार कल हमारे घर की दीवारें लांघकर हमें धमकाने लगेंगे कि हम अपने जीवनसाथी के साथ भी मुहूर्त देखकर ही हमबिस्तर हों. <br />प्यार करने के तौर-तरीक़े सीखाने के काम में इनकी कब से माहिरी हो गई जो ब्रह्मचर्य का पालन करने का दंभ भरते फिरते हैं. संघ परिवार के ये चट्टे-बट्टे कभी मुन्ना बजरंगी के तौर पर दिखते हैं तो कभी दारा सिंह के. <br />इनकी आलोचना करना किसी राज्य की अस्मिता का अपमान नहीं हो सकता. जो कोई इसे अस्मिता से जोड़ने की कुचेष्टा करेगा उसे यह समझना चाहिए कि सारा देश भारतवासियों का है. <br />घुघुति ने जो विषय उठाया था.. उसका मर्म सिर्फ़ इतना है कि व्यक्तिगत मामलों में हस्तक्षेप सदैव अनुचित होता है. ऊपर से तुक्का यह कि दंगों के आरोपी जब पुलिसिया तेवर अपना लें तो यह ख़तरनाक प्रवृति होती है.. ये हिन्दू-मुसलमान का प्रश्न नहीं है.. जिन बच्चों को मार पड़ रही थी वो भले ही कोई जुर्म कर रहें हों लेकिन सज़ा देना क़ानून का काम है.. मुन्ना बजरंगियों को दुर्गा वाहिनी की सदस्यों को नहीं... विधि का शासन देश में बना रहे.. इसलिए यह अहम विषय है. </p>
<p>इस तरह का बवाल खड़ा हो गया तो अपन को दुष्यंत कुमार जी की एक रचना याद आ गई.. </p>
<p>मत कहो आकाश में कुहरा घना है <br />यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है </p>
<p>सूर्य हमने भी नहीं देखा सुबह से <br />क्या करोगे सूर्य का क्या देखना है </p>
<p>इस सड़क पर इस कदर कीचड़ बिछी है <br />हर किसी का पैर घुटनों तक सना है </p>
<p>पक्ष औ प्रतिपक्ष संसद में मुखर है <br />बात इतनी है कि कोई पुल बना है </p>
<p>रक्त वर्षों में नसों में खौलता है <br />आप कहते हैं क्षणिक उत्तेजना है </p>
<p>हो गयी हर घाट पर पूरी व्यवस्था <br />शौक से डूबे जिसे भी डूबना है </p>
<p>दोस्तों अब मंच पर सुविधा नहीं है <br />आजकल नेपथ्य में संभावना है</p>
<p class="postedit"><em>Last edited by neerajdiwan (Today 11:33:28)</em></p>
<p class="postsignature">
<hr /></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[' परिचर्चा ' से साभार]]></title>
<link>http://samatavadi.wordpress.com/2006/12/15/%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0/</link>
<pubDate>Fri, 15 Dec 2006 11:37:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>अफ़लातून</dc:creator>
<guid>http://samatavadi.wordpress.com/2006/12/15/%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0/</guid>
<description><![CDATA[पिछली प्रविष्टी पर टिप्पणियां , आईं , क]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>पिछली प्रविष्टी पर टिप्पणियां , आईं , कम से कम तीन चिट्ठों पर घटना पर केन्द्रित प्रविष्टियां आयीं और घुघुटीबसूती द्वारा एक सुन्दर चर्चा <a href="http://www.akshargram.com/paricharcha/viewtopic.php?id=709">'परिचर्चा '</a> पर शुरु की गयी . इनमें सब कोंण 'परिचर्चा' में अच्छी तरह आये हैं . यहां उन्हें पूरा दिया जा रहा है .  'परिचर्चा' तथा सभी हिस्सेदार लोगों के प्रति आभार के साथ :</p>
<h2><span></span><span class="conr">#1 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6121#p6121">11-12-2006 19:42:46</a></h2>
<dl>
<dt><strong><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/profile.php?id=130">ghughutibasuti</a></strong> </dt>
<dd><strong>नवीन सदस्य</strong> </dd>
<dd></dd>
<dd>Registered: 04-07-2006 </dd>
<dd>Posts: 14 </dd>
</dl>
<h3>अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<p>अपने अहमदाबाद ने भी प्रेमी युगलों को पीटने की होड़ में किसी से पीछे रहना उचित नहीं समझा। शुरु हो गये बजरंग दल वाले और वालियाँ भी।<br />
भाई, यदि ये प्रेमी यूँ ही प्रेम करते रहे और फिर प्रेम विवाह भी रचा लें तो फिर हम किस से दहेज समेटेंगें? कैसे अपने माता पिता होने का वर्चस्व सिद्ध करेंगे? कैसे आग लगाएंगे आने वाली पीढ़ियों की खुशियों में? कैसे बहुएं जलाएँगे? कैसे जात पात बचाएंगे? और कैसे वोट बैन्क बनाएंगे?<br />
जब हमने नहीं किया प्यार कभी तो क्योंकर प्यार बढ़ाएंगे?   <br />
तो फिर भाइयो और बहनो चलो शुरु हो जाओ, डंडा हमारा हो सिर हमारे बच्चों का। क्या आनन्द आयेगा? जब बच्चा चिल्लाएगा। नहीं रहना इस देश में। जब बच्चा बच्चा जा विदेश बस जाएगा। क्या आनन्द आएगा,वाह क्या आनन्द आएगा।<br />
घुघुती बासूती</p>
<hr />घुघूती बासूतीOffline</p>
<p class="postfootright">&#160;</p>
<h2><span></span><span class="conr">#2 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6123#p6123">12-12-2006 17:01:32</a></h2>
<dl>
<dt><strong><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/profile.php?id=185">rachana</a></strong> </dt>
<dd><strong>सदस्य</strong> </dd>
<dd></dd>
<dd>From: Nasik </dd>
<dd>Registered: 05-08-2006 </dd>
<dd>Posts: 92 </dd>
<dd><a href="http://www.rachanabajaj.wordpress.com/">Website</a> </dd>
</dl>
<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<p>सही कह रही हैं आप, पता नही ये सब बाते युवाओं को कहाँ ले जा रही हैं..</p>
<p>Offline</p>
<p class="postfootright">&#160;</p>
<h2><span></span><span class="conr">#3 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6125#p6125">12-12-2006 20:40:35</a></h2>
<dl>
<dt><strong><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/profile.php?id=3"><span style="color:#bb0000;">amit</span></a></strong> </dt>
<dd><strong>बच के रहना रे ऽऽ</strong> </dd>
<dd></dd>
<dd>From: आकाशगंगा के दूसरे छोर पर </dd>
<dd>Registered: 22-04-2006 </dd>
<dd>Posts: 674 </dd>
<dd><a href="http://www.amitgupta.in/">Website</a> </dd>
</dl>
<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<p>यह सीधे सीधे सामूहिक गुण्डागर्दी का मामला है और इसके खिलाफ़ कार्यवाही होनी चाहिए। लेकिन बात है कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बाँधे?? जब शिकायत होगी तभी तो कार्यवाही होगी ना!!</p>
<hr /><a href="http://www.amitgupta.in/"><span style="color:#bb0000;"><strong>अमित गुप्ता</strong></span></a>Offline</p>
<p class="postfootright">&#160;</p>
<h2><span></span><span class="conr">#4 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6126#p6126">13-12-2006 00:39:32</a></h2>
<dl>
<dt><strong><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/profile.php?id=261">Shrish</a></strong> </dt>
<dd><strong>आसक्त</strong> </dd>
<dd></dd>
<dd>From: हरियाणा </dd>
<dd>Registered: 07-10-2006 </dd>
<dd>Posts: 101 </dd>
<dd><a href="http://epandit.wordpress.com/">Website</a> </dd>
</dl>
<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<p>इस तरह का मामला कुछ समय पहले मेरठ में भी हुआ था। पता नहीं यह लोग क्या साबित करना चाहते हैं. क्या भारतीय संस्कृति में प्रेम वर्जित है ? कोई भी पुराण-काव्य-साहित्य खोल कर देख लो उसमें प्रेम का वर्णन मिलेगा। अगर पीटना है तो जाकर कॉलगर्लों को पीटो, चकलाघरों पर हमला करो, उन्हें बंद कराओ। अपनी ताकत का परिचय ये लोग वहाँ क्यों नहीं देते।</p>
<hr />Offline</p>
<p class="postfootright">&#160;</p>
<h2><span></span><span class="conr">#5 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6127#p6127">13-12-2006 07:41:03</a></h2>
<dl>
<dt><strong><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/profile.php?id=3"><span style="color:#bb0000;">amit</span></a></strong> </dt>
<dd><strong>बच के रहना रे ऽऽ</strong> </dd>
<dd></dd>
<dd>From: आकाशगंगा के दूसरे छोर पर </dd>
<dd>Registered: 22-04-2006 </dd>
<dd>Posts: 674 </dd>
<dd><a href="http://www.amitgupta.in/">Website</a> </dd>
</dl>
<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<blockquote>
<h4>Shrish wrote:</h4>
<p>अगर पीटना है तो जाकर कॉलगर्लों को पीटो, चकलाघरों पर हमला करो, उन्हें बंद कराओ। अपनी ताकत का परिचय ये लोग वहाँ क्यों नहीं देते।</p></blockquote>
<p>उनको पीटेंगे तो फ़िर इनकी आय का एक स्रोत सूख नहीं जाएगा!! <img width="15" src="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/img/smilies/wink.png" alt="wink" height="15" /></p>
<hr /><a href="http://www.amitgupta.in/"><span style="color:#bb0000;"><strong>अमित गुप्ता</strong></span></a>Offline</p>
<p class="postfootright">&#160;</p>
<h2><span></span><span class="conr">#6 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6128#p6128">13-12-2006 08:45:08</a></h2>
<dl>
<dt><strong><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/profile.php?id=241">अफ़लातून</a></strong> </dt>
<dd><strong>नवीन सदस्य</strong> </dd>
<dd></dd>
<dd>From: Varanasi </dd>
<dd>Registered: 20-09-2006 </dd>
<dd>Posts: 33 </dd>
<dd><a href="http://samatavadi.wordpress.com/">Website</a> </dd>
</dl>
<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<p>गनीमत है कि द्वारिका मोदी के गुजरात में है, मथुरा या बृन्दावन नहीं . मोदी का राज यदि मथुरा-वृन्दावन में होता तब राधा-कृष्ण का क्या हाल होता ? वह भी भारतीय संस्कृति के कथित रक्षकों के हाथों . विडम्बना है कि ‘रक्षकों’ में कुछ गोपियां भी पीछे नही हैं .<br />
काश इन ‘संस्कृति रक्षकों’ का भीम और हिडिम्बा जैसे युगल से कभी सामना हो जाता ,तब समझ में आता.<br />
<a href="http://www.ibnlive.com/videos/28066/vhp-workers-thrash-young-couples.html">http://www.ibnlive.com/videos/28066/vhp … uples.html</a><br />
Pankaj Bengani has left a new comment on your post "राधा - कृष्णों की फजीहत": [ <a href="http://samatavadi.blogspot.com/">http://samatavadi.blogspot.com</a> ]<br />
यह मोदी का राज.. मोदी का राज क्या लगा रखा है आपने??? मोदी कोई तानाशाह नही है, जनता उन्हे ठुकरा देगी तो वे आसानी से चुनाव हारकर घर भी बैठ सकते हैं। आप तो ऐसा कह रहे हैं जैसे यहाँ जंगलराज है। जो भी हो जिस प्रदेश में आप निवास करते हैं उस कथित उत्तम प्रदेश से तो अच्छा है। आपको सडक छाप मजनुओं में कृष्ण नजर आते हैं!!! 600 - 700 किमी दूर बैठकर संजय दृष्टि से देखने की बजाय प्रत्यक्ष में देखिए कि कौन से कृष्ण लीला कर रहे हैं।</p>
<p class="postedit"><em>Last edited by अफ़लातून (13-12-2006 09:03:38)</em></p>
<p>Offline</p>
<p class="postfootright">&#160;</p>
<h2><span></span><span class="conr">#7 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6130#p6130">Yesterday 03:49:57</a></h2>
<dl>
<dt><strong><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/profile.php?id=7"><span style="color:#007700;">pbengani</span></a></strong> </dt>
<dd><strong>मंदक</strong> </dd>
<dd></dd>
<dd>From: Ahmedabad </dd>
<dd>Registered: 11-05-2006 </dd>
<dd>Posts: 328 </dd>
<dd><a href="http://www.tarakash.com/">Website</a> </dd>
</dl>
<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<p>घुघुतिबासुति (या जो भी आप हैं),</p>
<p>आप बात का बतंगड ना बनाएँ। किसी प्रेमी युगल की कोई पिटाई नही की गई है।</p>
<p>अहमदाबाद को उत्तरप्रदेश ना समझें।</p>
<p>यहाँ वी.एच.पी. वालों और दुर्गा वाहिनी की महिलाओं ने कोलेज के आगे खडे होकर महिलाओं को छेडने वाले लफंगो की खबर ली है। उनका तरीका गलत हो सकता है पर कार्य सही है। यही काम तथाकथित मानवाधिकारी करते तो ठीक था, वी.एच.पी. वाले करे तो गलत!! ऐसा?</p>
<p>और अफलातुन महोदय,</p>
<p>किससे पुछकर मेरी टिप्पणी को यहाँ प्रेषित किया आपने, कृपया मुझे अवगत कराएँ।</p>
<p>आप सब बुद्धिजीवी लोगों से हाथ जोडकर नम्र प्रार्थना है कि गुजरात को कारण अकारण बदनाम करना बन्द करें।</p>
<hr />- पंकज बेंगाणीOffline</p>
<p class="postfootright">&#160;</p>
<h2><span></span><span class="conr">#8 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6131#p6131">Yesterday 09:23:00</a></h2>
<dl>
<dt><strong><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/profile.php?id=28">srijanshilpi</a></strong> </dt>
<dd><strong>सदस्य</strong> </dd>
<dd></dd>
<dd>From: New Delhi </dd>
<dd>Registered: 11-05-2006 </dd>
<dd>Posts: 74 </dd>
<dd><a href="http://www.srijanshilpi.blogspot.com/">Website</a> </dd>
</dl>
<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<blockquote>
<h4>pbengani wrote:</h4>
<p>घुघुतिबासुति (या जो भी आप हैं),</p>
<p>आप बात का बतंगड ना बनाएँ। किसी प्रेमी युगल की कोई पिटाई नही की गई है।</p>
<p>अहमदाबाद को उत्तरप्रदेश ना समझें।</p>
<p>यहाँ वी.एच.पी. वालों और दुर्गा वाहिनी की महिलाओं ने कोलेज के आगे खडे होकर महिलाओं को छेडने वाले लफंगो की खबर ली है। उनका तरीका गलत हो सकता है पर कार्य सही है। यही काम तथाकथित मानवाधिकारी करते तो ठीक था, वी.एच.पी. वाले करे तो गलत!! ऐसा?</p>
<p>और अफलातुन महोदय,</p>
<p>किससे पुछकर मेरी टिप्पणी को यहाँ प्रेषित किया आपने, कृपया मुझे अवगत कराएँ।</p>
<p>आप सब बुद्धिजीवी लोगों से हाथ जोडकर नम्र प्रार्थना है कि गुजरात को कारण अकारण बदनाम करना बन्द करें।</p></blockquote>
<p>बात का बतंगड़ तो पहले ही बन चुका है और परिचर्चा पर इस मुद्दे को उठाकर घुघुतिबासूति ने इसमें कोई योगदान नहीं किया है। पिटाई प्रेमी युगलों की हुई या मनचलों की, यह तो अदालत में साबित होने दीजिए। एफआईआर तो दर्ज हुआ ही है और मुकदमा भी चलेगा।</p>
<p>मेरठ में जब इस तरह का वाकया हुआ था तब पुलिस ने इस तरह की हरकत की थी और मामला सामने आने पर कुछ दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया था। जब पुलिस द्वारा ऐसा किया जाना अनुचित था तो नागरिकों के किसी समूह द्वारा ऐसा किया जाना और भी अनुचित होगा।</p>
<p>उत्तर प्रदेश हो या गुजरात या कोई अन्य राज्य, कानून भारत में हर जगह एक ही है। सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील हरकत की शिकायत यदि पुलिस को की जाए तो वह कार्रवाई कर सकती है, लेकिन उसे यह देखना होगा कि अश्लील हरकत है या नहीं और उससे दूसरों पर कोई दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका है या नहीं। लेकिन पुलिस को भी इस मामले में पिटाई करने का अधिकार नहीं है। वह अभियुक्तों को हिरासत में ले सकती है और मुकदमा चला सकती है। ऐसे मामले में आम तौर पर थाने में ही जमानत हो जाती है।</p>
<p>मेरा ख्याल है कि घुघुतीबासूती पंकजजी की तुलना में कुछ कम गुजराती नहीं हैं और गुजरात की इज्जत की चिंता उन्हें भी कम नहीं होगी।</p>
<p>दूसरी बात, अफ़लातून जी ने यदि अपने ब्लॉग पर आपकी सार्वजनिक टिप्पणी को परिचर्चा पर उद्धृत किया तो इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने व्यक्तिगत मेल को सार्वजनिक नहीं किया है और जो टिप्पणी उन्होंने उद्धृत की है, वह विषय से संबंधित है।</p>
<p>आपका गुजरात-प्रेम स्वाभाविक और काबिलेतारीफ है, लेकिन गुजरात से संबंधित हर बहस को गुजरात के सम्मान पर आघात समझना उचित नहीं।</p>
<p class="postedit"><em>Last edited by srijanshilpi (Yesterday 09:35:33)</em></p>
<hr />Offline</p>
<p class="postfootright">&#160;</p>
<h2><span></span><span class="conr">#9 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6132#p6132">Yesterday 09:59:53</a></h2>
<dl>
<dt><strong><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/profile.php?id=241">अफ़लातून</a></strong> </dt>
<dd><strong>नवीन सदस्य</strong> </dd>
<dd></dd>
<dd>From: Varanasi </dd>
<dd>Registered: 20-09-2006 </dd>
<dd>Posts: 33 </dd>
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<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<p>अब वह मेरठ वाली महिला-दरोगा भी बहाल हो चुकी है और अहमदाबाद का 'बजरंगी'( यह उसका तख़ल्लुस है,जैसे मुन्ना बजरंगी) भी गिरफ़्तार हो कर छूट चुका है.<br />
'लफंगई' करने से रोकने वालों को मोदी जी की पुलिस ने पकड़ लिया! बड़ा अनर्थ हुआ !<br />
दर-असल जिनके सींग नहीं होते वह बहस नहीं कर सकते.कुछ चौपाये भी बिना सींग के होते हैं.<br />
पहले 'प्रचारकों' के विवाह पर रोक थी.गोलवलकर से ,उस दौर में, जब एक प्रचारक ने विवाह की इच्छा जतायी तो उन्होंने कहा,'यूं तो कुत्ते भी निर्वाह कर लेते हैं !नर-नारी सम्बन्धों पर यह 'गुरुजी' की दृष्टि है.<br />
हिन्दू कोड बिल में जब महिलाओं को अधिकार देने के प्राविधान किये गये तब उसका भी 'गुरुजी' ने विरोध किया था.</p>
<hr />Offline</p>
<p class="postfootright">&#160;</p>
<h2><span></span><span class="conr">#10 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6133#p6133">Yesterday 12:04:54</a></h2>
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<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<p>शांति-शांति मित्रों, विषय से मत भटको और परिचर्चा को अखाड़ा मत बनाओ। वैचारिक भिन्नता तो इंसानी स्वभाव है। व्यक्तिगत आक्षेप और क्षेत्रवाद आप जैसे प्रबुद्ध लोगों को शोभा नहीं देता।</p>
<hr />Offline</p>
<p class="postfootright">&#160;</p>
<h2><span></span><span class="conr">#11 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6135#p6135">Yesterday 12:11:30</a></h2>
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<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<blockquote>
<h4>अफ़लातून wrote:</h4>
<p>अब वह मेरठ वाली महिला-दरोगा भी बहाल हो चुकी है और अहमदाबाद का 'बजरंगी'( यह उसका तख़ल्लुस है,जैसे मुन्ना बजरंगी) भी गिरफ़्तार हो कर छूट चुका है.<br />
'लफंगई' करने से रोकने वालों को मोदी जी की पुलिस ने पकड़ लिया! बड़ा अनर्थ हुआ !<br />
दर-असल जिनके सींग नहीं होते वह बहस नहीं कर सकते.कुछ चौपाये भी बिना सींग के होते हैं.<br />
पहले 'प्रचारकों' के विवाह पर रोक थी.गोलवलकर से ,उस दौर में, जब एक प्रचारक ने विवाह की इच्छा जतायी तो उन्होंने कहा,'यूं तो कुत्ते भी निर्वाह कर लेते हैं !नर-नारी सम्बन्धों पर यह 'गुरुजी' की दृष्टि है.<br />
हिन्दू कोड बिल में जब महिलाओं को अधिकार देने के प्राविधान किये गये तब उसका भी 'गुरुजी' ने विरोध किया था.</p></blockquote>
<p>आप जैसे समझदार इन्सान  विषय से भटके अच्छा नहीं लगता, और जिस सदस्य की तुलना आप बिना सींग के चौपाये से कर रहे हैं वह हमारे हिन्दी चिठ्ठा जगत के सम्मानित सदस्य हैं, अफ़लातून जी विषय पर ही रहें, विषय "प्रेमी युगलों की पिटाई है" ना कि गुरूजी और स्त्री पुरुष संबंधों पर उनके के विचार और ना ही हिन्दू कोड बिल। इन विषयों पर चर्चा करना ही चाहते हैं आप तो एक नया थ्रेड खोल लें और किसी सद्स्य का अपमान ना करें।</p>
<p class="postedit"><em>Last edited by nahar7772 (Yesterday 12:16:36)</em></p>
<hr />Offline</p>
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<h2><span></span><span class="conr">#12 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6136#p6136">Yesterday 12:14:42</a></h2>
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<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<blockquote>
<h4>Shrish wrote:</h4>
<p>शांति-शांति मित्रों, विषय से मत भटको और परिचर्चा को अखाड़ा मत बनाओ। वैचारिक भिन्नता तो इंसानी स्वभाव है। व्यक्तिगत आक्षेप और क्षेत्रवाद आप जैसे प्रबुद्ध लोगों को शोभा नहीं देता।</p></blockquote>
<p>वैचारिक मतभेद स्वाभावाविक है पर जानबूझ कर किसी को कोई उत्तेजित करे, उकसावे और सारे लोग आशा करे कि कोई बोले भी नहीं तो यह तो सरासर ज्यादती है। कुछ लोग जानबुझ कर ऐसी ओछी हरकतें लगातार कर रहे हैं, कृपया उन्हें समझावें।</p>
<hr /><span style="color:#ff0000;">सागर चन्द नाहर</span>Offline</p>
<p class="postfootright">&#160;</p>
<h2><span></span><span class="conr">#13 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6138#p6138">Yesterday 13:58:28</a></h2>
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<dt><strong><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/profile.php?id=241">अफ़लातून</a></strong> </dt>
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<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<p>बन्दर और गधे को आपसी चर्चा में लाना अनुचित है.हो सकता है इन निर्दोष जीवों का अपमान हुआ हो.पहले बन्दर के महान बनने की कोशिश पर एक साथी द्वारा इसी सन्दर्भ मे‍ यहां ( <a href="http://www.tarakash.com/mantavya/2006/12/blog-post_14.html">http://www.tarakash.com/mantavya/2006/1 … st_14.html</a> ) एक व्यंग्य लिखा गया . तब बिना सींग के पशु की याद आयी.<br />
जब घटना में दुर्गा वाहिनी,वि.हि.प. की पहलकदमी हो तब उनके मुख्य विचारक की दृष्टि का सन्दर्भ उठाना और वह भी सन्दर्भित चर्चा की बाबत विषयान्तर नहीं हुआ .<br />
'ओछी हरकत' उस दिन अहमदाबाद में हुई.इस पर बहस के लिए उकसाना ओछी हरक़त नही.<br />
मुझे मेरे गुजरात प्रेम की मजबूती पर भरोसा है,वह छुई-मुई नहीं है . इसलिए इस बहस को क्षेत्रीय दृष्टि से देखना एक और संकीर्णता है.<br />
तानाशाही के दौर में देवब्रत बरुआ ने 'इन्डिया इज़ इन्दिरा,इन्दिरा इज़ इन्डिया' कहा था .गुजरात उस दौर से फिलहाल नहीं गुजर रहा है इसलिए वह दृष्टि(बरुआ टाइप) अप्रासंगिक है.</p>
<hr />Offline</p>
<p class="postfootright">&#160;</p>
<h2><span></span><span class="conr">#14 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6139#p6139">Yesterday 14:16:52</a></h2>
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<dt><strong><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/profile.php?id=23">nahar7772</a></strong> </dt>
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<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<p>जरा उस लेख की अन्तिम पंक्तियों को फ़िर से देख लेते जिसका हवाला आपने यहाँ दिया है<br />
<strong>इस बार लंगुर उछलकर दूर पेड पर जा बैठा और बन्दर को हिकारत भरी निगाह से देखने लगा और बोला “तु बन्दर नहीं हो सकता। तु बन्दर का मुखौटा लगाकर आया हुआ गुजराती गधा तो नहीं? तु जरूर “पंकज” है।</strong></p>
<hr /><span style="color:#ff0000;">सागर चन्द नाहर</span>Offline</p>
<p class="postfootright">&#160;</p>
<h2><span></span><span class="conr">#15 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6140#p6140">Yesterday 20:31:53</a></h2>
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<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<p>मित्रो,<br />
लगता है मैंने किसी की दुखती रग पर हाथ रख दिया। जबकि मैं यहाँ इतनी नयी हूँ कि अभी किसी की भी दुखती या ना दुखती किसी भी तरह की रग की जानकारी नहीं है। आगे से चेष्टा करूँगी कि अपने प्रदेश (चाहे यह मेरी जन्म भूमि न भी है पर जब यहाँ रह रही हूँ तो लगता है कि कुछ तो मेरी भी है।) के बारे में कुछ भी बोलने से पहले अनुमति ले लूँगी। वैसे,मुझे तो सारा संसार अपना सा लगता है। सच कहूँ तो इस विषय को मैंने गुजरात के संदर्भ में नहीं उठाया था। वैसे,गुजराती भाइयो, क्षमा करना, यदि मैंने आपकी भावनाओं को ठेस पहुँचाई। मेरा यह इरादा बिल्कुल  न था। वैसे मैं पंकज जी  की आभारी हूँ कि उन्होंने केवल यह कहा कि ' घुघुतिबासुति (या जो भी आप हैं),' , उन्होंने इतना आदर तो दिया। नहीं तो एक बार यों लगा कि मैं किन्ही कीड़े मकोड़ों की जमात में खड़ी हूँ। फिर ध्यान से पढ़ने पर पाया , नहीं वे तो मुझे मनुष्यों की श्रेणी में ही गिनते हैं।अत: आभार आपका पंकज जी। मैं नहीं कहूँगी पंकज जी या जो कुछ भी आप हैं। केवल यही कहूँगी , क्षमा प्राथी हूँ। जय गुजरात। जय बाबू बजरंगी, जो हमारी अस्मिता की रक्षा करते हैं।<br />
और नया वर्ष अंगरेजों का तो आ ही रहा है, फिर वेलेन्टाइन्सडे, क्यों न हम अपने डन्डे चमका लें। काम आयेंगे।<br />
आपकी ही,<br />
घुघूती बासूती या जो भी।<br />
पुन:श्च : कृपा कर के बंदरों, लंगूरों , कुत्तों, गधों  आदि को तो बक्श दें। वे अति शान्ति प्रिय जीव हैं। उनके बदले मेरा सिर हाज़िर है।<br />
घुघूती बासूती या जो भी।</p>
<hr />घुघूती बासूतीOffline</p>
<p class="postfootright">&#160;</p>
<h2><span></span><span class="conr">#16 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6141#p6141">Today 04:36:33</a></h2>
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<dd><strong>मंदक</strong> </dd>
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<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<p>बात यू पी की चली हो, या हो रही गुजरात की<br />
मानव ही तो कर रहे और मानवों की बात थी<br />
बंदर हो या गधा कोई, सभी अपनी मस्ती में हैं<br />
व्यवहार आपका स्पष्ट करने, मैने उनकी बात की.</p>
<p>नहीं रही मंशा कभी भी, मूक का विश्वास तोडूँ<br />
आपकी इस चाल में, मैं क्यूँ उनका नाम जोडूँ<br />
वो दुकानें आपकी है, जो खुल गई बस्ती में हैं<br />
लोग खुद ही जान लें, मैं क्यूँ अपना काम छोडूँ.</p>
<p>माफ करिये आप मुझको, मैने ये भी जान लिया है<br />
समाज सेवा के नाम को, आपने बदनाम किया है<br />
आपका तो पेशा यही, कुछ भी हो- विरोध करना<br />
मैने तो बस शब्द देकर, जग से आव्हान किया है.</p>
<p>न जाने और कितने, बहुत ही जरुरी काम पडे हैं<br />
आप जैसे ही तो हैं, जो विरोध में उनके खडे हैं<br />
आपकी चलती रहे, चाहे देश का कुछ हाल हो,<br />
आपका तो क्या कहें, आप अपनी जिद पे अडे हैं.</p>
<p>मै हट रहा हुँ। कोई मेरे व्यवहार से आहत हुआ हो तो मैं माफी चाहता हुँ। घुघुतिजी विशेष रूप से क्षमाप्रार्थी हुँ।</p>
<hr />- पंकज बेंगाणीOffline</p>
<p class="postfootright">&#160;</p>
<h2><span></span><span class="conr">#17 </span><a href="http://samatavadi.wordpress.com/wp-admin/viewtopic.php?pid=6142#p6142">Today 05:00:03</a></h2>
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<dd><strong>समझदार बंधु</strong> </dd>
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<dd>From: Ahmedabad &#124; कर्णावती </dd>
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<h3>Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई</h3>
<p>मैंने अभी यह बहस देखी. मन आहत हुआ. हम किस स्तर पर उतर आएं है. जिन्हे बुद्धीजिवी समझ कर सम्मान से देखता रहा हूँ, उनसे इस प्रकार की निम्नस्तरीय बहस की उम्मिद नहीं थी.<br />
बजरंगी मार्का लोग न तो हमारे आदर्श हैं, न ही हो सकते हैं.<br />
मोदी की प्रसंशा मात्र इसलिए करते रहे हैं की वे अन्य मुख्यमंत्रियों से अलग है, साथ ही हमें सही बात कहते हुए साम्प्रदायिक कहलवाने से डर भी नहीं लगता.<br />
घुघुतिबासुति के लिए मुझे नहीं लगता पंकज ने अपमान जनक कुछ लिखा है, हमारा अल्पज्ञान समझ लिजीये की ऐसा नाम पहली बार सुना है, इसलिए लिख दिया की आप जो भी है. इसका अर्थ यह नहीं की इन्हे मानव से परे कुछ माना है.<br />
साथीगण अपने पद,स्तर तथा उम्र की गरिमा बनाए रखे.</p>
<hr />नैतिक बल हो इतना प्रबल कि आपको सागर भी रास्ता दे.<br />
-संजय बेंगाणी</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[राधा - कृष्णों की फजीहत]]></title>
<link>http://samatavadi.wordpress.com/2006/12/10/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a3%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b9%e0%a4%a4/</link>
<pubDate>Sun, 10 Dec 2006 10:58:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>अफ़लातून</dc:creator>
<guid>http://samatavadi.wordpress.com/2006/12/10/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a3%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b9%e0%a4%a4/</guid>
<description><![CDATA[गनीमत है कि द्वारिका मोदी के गुजरात मे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>गनीमत है 