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	<title>याद &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/याद/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "याद"</description>
	<pubDate>Sun, 18 May 2008 09:30:59 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[धुँधलियाँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=970</link>
<pubDate>Mon, 28 Apr 2008 18:02:06 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=970</guid>
<description><![CDATA[धुँधलियाँ-धुँधलियाँ
तेरी यादों की धु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">धुँधलियाँ-धुँधलियाँ<br />
तेरी यादों की धुँधलियाँ<br />
छायी हैं ज़हन पर<br />
तेरी बातों की बदलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">नज़दीकियाँ नज़दीकियाँ<br />
तेरी मुझसे नज़दीकियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">अहसास हो क़रीबी का<br />
मिज़ाज हो ख़ुशनसीबी का<br />
बदले हैं रंग फ़िज़ाओं ने<br />
नूर हो माह रकाबी का</span></p>
<p><span style="color:#000000;">धुँधलियाँ धुँधलियाँ<br />
तेरी यादों की धुँधलियाँ<br />
छायी हैं ज़हन पर<br />
तेरी बातों की बदलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बिजलियाँ बिजलियाँ<br />
तेरे रूप की बिजलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जिस्म रेशमी आग का<br />
चिकने मखमली आफ़ताब का<br />
ख़ुशरू पे बैठी हैं मुस्कियाँ<br />
उतरा है रंग हिजाब का</span></p>
<p><span style="color:#000000;">धुँधलियाँ धुँधलियाँ<br />
तेरी यादों की धुँधलियाँ<br />
छायी हैं ज़हन पर<br />
तेरी बातों की बदलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तब्दीलियाँ तब्दीलियाँ<br />
मुझमें इतनी तब्दीलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">भूल गया सारी मजबूरियाँ<br />
दूर हो गयीं सब दूरियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तब्दीलियाँ तब्दीलियाँ<br />
मुझमें इतनी तब्दीलियाँ<br />
छायी हैं ज़हन पर<br />
तेरी बातों की बदलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">नज़दीकियाँ नज़दीकियाँ<br />
तेरी मुझसे नज़दीकियाँ</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[शाम है और मैं हूँ, तुम क्यों नहीं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=948</link>
<pubDate>Tue, 25 Mar 2008 07:49:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=948</guid>
<description><![CDATA[शाम है और मैं हूँ, तुम क्यों नहीं, क्यों]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">शाम है और मैं हूँ, तुम क्यों नहीं, क्यों नहीं<br />
डर-सा बैठा है दिल में तुम्हें खो न दूँ कहीं<br />
तिलिस्म यह मेरी आँखों का टूट न जाये कहीं<br />
तुमने जहाँ छोड़ा था मुझे मैं आज भी हूँ वहीं</font></p>
<p><font color="#000000">यह फूल हल्के गुलाबी यह आसमाँ आसमानी<br />
सब उदास हैं इक तेरे न होने से और मैं भी<br />
वह यादें मुस्कुराती हुई आज रोती हैं तन्हा<br />
मेरे साथ हैं सीने से लगकर, बिलखती हुई</font></p>
<p><font color="#000000">मुँहज़ोर तन्हाई है सीने में, आँसुओं के भँवर<br />
मैं अकेला कब तलक जूझता रहूँगा यूँ ही<br />
तुमको पाने का इरादा है पर तुम यहाँ नहीं<br />
फिर आँखों से गिरह लगा दो कर लूँ ख़ुद पे यक़ीं</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा दिल किसी ग़मो-अफ़सोस का घर नहीं<br />
यह वक़्तो-ख़ुदा का फ़ैसला है, हम जुदा हैं<br />
सच्चे प्यार की साँसें टूटती नहीं, न टूटेंगी<br />
यह फ़ासला मिटायेगा आप ख़ुदा मुझे है यक़ीं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आँखों में आँसू नहीं आते]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=945</link>
<pubDate>Fri, 21 Mar 2008 09:52:02 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=945</guid>
<description><![CDATA[आँखों में आँसू नहीं आते
क्योंकि मैं जा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आँखों में आँसू नहीं आते<br />
क्योंकि मैं जानता हूँ<br />
तुम लौटकर आओगी ज़रूर<br />
यह दिल तन्हा कहाँ है<br />
इसमें यादें हैं तुम्हारी<br />
तुम रहो कितने भी दूर</font></p>
<p><font color="#000000">देखता हूँ तुम्हें<br />
जब भी आँखें मूँद लेता हूँ<br />
और कोई कहाँ है इनमें हुज़ूर<br />
तुमसे प्यार किया है<br />
यह दिल का सौदा है तुम्हीं से<br />
क्यों न रहूँ थोड़ा मग़रूर</font></p>
<p><font color="#000000">पास आने के दिन आ गये<br />
धड़कनों में बेक़रारी है<br />
दिल में सुरूर ही सुरूर<br />
वादियों में चले मौसम हरे<br />
डालियों पर फूल गुलाबी हैं<br />
निगाह में भर गया है नूर</font></p>
<p><font color="#000000">जादू-सा है फ़िज़ाओं में<br />
खिल रहे हैं ख़्याल हर-सू<br />
क्यों न आये तुम्हारा मज़कूर<br />
दिल बहलता नहीं बातों से<br />
यह कैसा सिलसिला है<br />
चैन आये गर आये वह हूर</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कैसी फ़रियाद कैसा नाला]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=941</link>
<pubDate>Tue, 18 Mar 2008 08:22:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=941</guid>
<description><![CDATA[कैसी फ़रियाद, कैसा नाला
हम क़ैसो-फ़रहाद न]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">कैसी फ़रियाद, कैसा नाला<br />
हम क़ैसो-फ़रहाद नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">हम हैं ख़ुदा से, ख़ुदा हमसे<br />
सिवाय इसके कुछ याद नहीं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘वफ़ा’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इक दिन तू चली जायेगी ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=931</link>
<pubDate>Sat, 15 Mar 2008 14:46:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=931</guid>
<description><![CDATA[मेरी जान न कर मुझसे मोहब्बत इतनी
कि इक ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरी जान न कर मुझसे मोहब्बत इतनी<br />
कि इक दिन तू चली जायेगी<br />
एतबार मैं तेरा कर तो लूँगा<br />
मगर इक दिन तू चली जायेगी </font></p>
<p><font color="#000000">ख़ूबसूरत यह दिन, हसीन यह पल<br />
साथ जो तेरे मैंने गुज़ारे हैं<br />
सारे जहाँ की चाहत है इनमें<br />
और यह सब तुम्हारे हैं, सब तुम्हारे हैं</font></p>
<p><font color="#000000">मैं वही दरख़्त हूँ<br />
जिस पर मौसम आते रहे, जाते रहे<br />
इक बहार की तरह तू भी आयी है<br />
और इक दिन तू चली जायेगी</font></p>
<p><font color="#000000">कोई वादा न कर तू रुकेगी ज़हन में<br />
यादों की इक आँधी इक तूफ़ान की तरह<br />
चले जाना तेरी उल्फ़त की तक़दीर है<br />
माना मेरे साथ है तू हमसफ़र की तरह</font></p>
<p><font color="#000000">मैं वही बादल हूँ<br />
जिसकी बाँहों में छिपता है चाँद कभी-कभी<br />
बिल्कुल चाँद की तरह तू भी आयी है<br />
और इक दिन तू चली जायेगी</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी जान न कर मुझसे मोहब्बत इतनी<br />
कि इक दिन तू चली जायेगी...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=924</link>
<pubDate>Sat, 15 Mar 2008 04:19:58 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=924</guid>
<description><![CDATA[हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों स]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से</font></p>
<p><font color="#000000">बोल तुझे इक हर्फ़ में कैसे लिख दूँ<br />
तस्वीर नहीं बनती है कभी हर्फ़ों से</font></p>
<p>हर्फ़= word</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह रात पहाड़ जैसी है कैसे काटे कोई]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=914</link>
<pubDate>Fri, 14 Mar 2008 11:03:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=914</guid>
<description><![CDATA[यह रात पहाड़ जैसी है कैसे काटे कोई
यह फ़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह रात पहाड़ जैसी है कैसे काटे कोई<br />
यह फ़ासले मीलों-से कैसे तय करे कोई<br />
दो पल में बिछड़ जाना ख़ाब जैसा है<br />
इश्क़ आग का दरया है कैसे बुझाये कोई</font></p>
<p><font color="#000000">इस टूटे हुए दिल में वही दर्द पुराने हैं<br />
आँखों में सिमटे हुए गुज़रे ज़माने हैं<br />
तेरी यादों को सीने से लगाके अपना बनाके<br />
यह दूरी दिल से दिल की कैसे मिटाये कोई</font></p>
<p><font color="#000000">यह वीराना तेरे बिना आबाद कैसे होगा<br />
दिल को भी ख़ुशियों का एहसास कैसे होगा<br />
पानी होके लहू आँखों से बहने लगा है<br />
बिगड़ी क़िस्मत अपनी कैसे बनाये कोई</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=900</link>
<pubDate>Wed, 12 Mar 2008 15:38:40 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=900</guid>
<description><![CDATA[वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है
तो कहता है बस ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है<br />
तो कहता है बस इतने ही!</font></p>
<p><font color="#000000">ख़िज़ाँ आयी बहार लौट गयी<br />
निशान रह गये इतने ही</font></p>
<p><font color="#000000">उसने नज़र जो उठायी है<br />
मिट गये दीवाने कितने ही</font></p>
<p><font color="#000000">हमने ज़ख़्म जितने बुझाये हैं<br />
सुलगाये हर साँस हैं उतने ही</font></p>
<p><font color="#000000">अनाड़ी निकले सबके सब<br />
तजुर्बेकार थे जितने ही</font></p>
<p><font color="#000000">वक़्त ने बादशाह किया था<br />
मिटा दिया उसे वक़्त ने ही</font></p>
<p><font color="#000000">याद तुम आते रहना सदा<br />
पास रहो क्यूँ न कितने ही</font></p>
<p><font color="#000000">एक नन्हा-सा ख़ाब पास में<br />
उंगली थामे बैठा है अपने ही</font></p>
<p><font color="#000000">तख़्तपोश उसका ख़ुदा था<br />
बरबाद किया उसे उसने ही</font></p>
<p><font color="#000000">ऐ 'नज़र' वह हार गया है<br />
जो लाता था मुदाम फ़ितने ही</font></p>
<p>ख़िज़ाँ= पतझड़, मुदाम= सदैव, फ़ितना= मुश्किलात, समस्याएँ</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जब आसमाँ पे यह हिलाल आया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=898</link>
<pubDate>Wed, 12 Mar 2008 14:53:20 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=898</guid>
<description><![CDATA[जब आसमाँ पे यह हिलाल आया
मुझे याद तुमस]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जब आसमाँ पे यह हिलाल आया<br />
मुझे याद तुमसे विसाल आया</font></p>
<p><font color="#000000">जिस शब तारों की बारात आयी<br />
मुझे तुम्हारा ही ख़्याल आया</font></p>
<p><font color="#000000">हमने कितने सवाब हैं कमाये<br />
जो मेरे हिस्से यह जमाल आया</font></p>
<p><font color="#000000">नाज़ करना ख़ुद पे फ़ितरत है<br />
उम्र पे यह कैसा साल आया</font></p>
<p><font color="#000000">है तेरे इश्क़ को रस्मो-राह<br />
उफ़! निगाह में कैसा गुलाल आया</font></p>
<p><font color="#000000">तुझे देखने के बाद 'नज़र' का<br />
शुरुआती दौरे-वबाल आया</font></p>
<p>हिलाल= दूज का चाँद, सवाब= पुण्य, जमाल= सुन्दरता, दौरे-वबाल= कठिन समय</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=891</link>
<pubDate>Mon, 10 Mar 2008 10:06:08 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=891</guid>
<description><![CDATA[शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर
जैसे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर<br />
जैसे वह मुझको मिले और मिले भी ना</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद खिड़की पर बैठकर मुझे देखता है...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह कैसा लम्हा है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=881</link>
<pubDate>Thu, 06 Mar 2008 10:28:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=881</guid>
<description><![CDATA[यह कैसा लम्हा है
यह कैसा एहसास है
तू पल]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह कैसा लम्हा है<br />
यह कैसा एहसास है<br />
तू पलकों में क़ैद है<br />
दिल के पास है</font></p>
<p><font color="#000000">क्या देखूँ तेरे सिवा<br />
क्या चाहूँ तेरे सिवा<br />
मेरे दर्दे-दिल की<br />
तू ही तो है दवा</font></p>
<p><font color="#000000">खिलते हुए लम्हे सब<br />
खिल गये हैं अब<br />
मैं तुझको महसूस करूँ<br />
साँस लूँ जब</font></p>
<p><font color="#000000">आज जो देखा तुझे<br />
याद आया मुझे<br />
लोग दीवाना क्यों<br />
कहते है मुझे</font></p>
<p><font color="#000000">जब निगाहों ने छुआ<br />
यह एहसास हुआ<br />
तूने भी मुझको सनम<br />
प्यार है किया</font></p>
<p><font color="#000000">दुनिया बदल गयी है<br />
तू मुझे मिल गयी है<br />
ज़िन्दगी मेरी इक हसीन<br />
शाम हो गयी है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=874</link>
<pubDate>Tue, 04 Mar 2008 03:39:27 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=874</guid>
<description><![CDATA[तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे
जैसे मेरी स]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे<br />
जैसे मेरी सदा तुम्हें<br />
जो दीवारें ख़ुद-ब-ख़ुद गिरती हैं<br />
मैं कैसे चुनावाऊँ उन्हें</font></p>
<p><font color="#000000">मैं बद से बदतर हुआ जाता हूँ<br />
याद कर-करके तुम्हें<br />
ख़िज़ाँ भी ख़ुशरंग हुई जाती है<br />
खुष्क पत्ते पहने-पहने</font></p>
<p><font color="#000000">शाम कितनी हसीन हो जाती है<br />
पहने के रात के गहने<br />
ऐसी शाम भी सादी लगती है मुझे<br />
यह दर्द क्या पता तुम्हें</font></p>
<p><font color="#000000">अब तो खुष्क पत्तों पर<br />
ओस की तरह जीता हूँ...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: ०८ जून २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तन्हाई मिटाने दो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=870</link>
<pubDate>Sun, 02 Mar 2008 12:55:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=870</guid>
<description><![CDATA[तन्हाई मिटाने दो
किस्से सुनाने दो
सुब]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तन्हाई मिटाने दो<br />
किस्से सुनाने दो<br />
सुबह बह जायेगी<br />
रोशनी उगाने दो</font></p>
<p><font color="#000000">तितलियों के परों-सी<br />
बारिश के घरों-सी<br />
छोटी-सी ज़िन्दगी यह<br />
किताब के हर्फ़ों-सी</font></p>
<p><font color="#000000">आइने में अक्स है<br />
वहाँ कौन शख़्स है<br />
मेंहदी धुल गयी सब<br />
मुझमें नक़्स है</font></p>
<p><font color="#000000">बदली और पवन ने<br />
गुल और चमन ने<br />
मुझको बहकाया है<br />
शिकारी और हरन ने</font></p>
<p><font color="#000000">फ़ुर्क़त में क़ुर्बत जैसे<br />
दर्द में मोहब्बत जैसे<br />
वह याद आये मुदाम<br />
दोस्ती में उल्फ़त जैसे</font></p>
<p><font color="#000000">नाराज़ है कौन यहाँ<br />
हमसे यह सारा जहाँ<br />
किस-किसको मनाऊँ<br />
इक यहाँ, इक वहाँ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: ०५ जून २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दुख के चेहरे पर लकीरें याद की]]></title>
<link>http://rohitler.wordpress.com/2008/02/28/%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%96-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6/</link>
<pubDate>Thu, 28 Feb 2008 07:43:33 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rohit Jain</dc:creator>
<guid>http://rohitler.wordpress.com/2008/02/28/%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%96-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6/</guid>
<description><![CDATA[दुख के चेहरे पर लकीरें याद की
सुन रहा ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>दुख के चेहरे पर लकीरें याद की<br />
सुन रहा हूं सदा दिलेबरबाद की</p>
<p>तेरी महफ़िल तेरा परचम ओ' हुजूम<br />
अब किसे है फ़िक़्र इस नाशाद की</p>
<p>तूने जीते जी ही मारा है मुझे<br />
अब ज़रूरत ही नहीं जल्लाद की</p>
<p>क्यों न टूटूं क्यों न रो'ऊं ये बता<br />
इन्सान हूँ, मूरत नहीं फ़ौलाद की</p>
<p>है तबियत ये के खुद मिट जायेंगे<br />
क्या ज़रूरत है किसी की याद की</p>
<p>मुझसे बोला अब ज़माने से न बोल<br />
और ना तौहीन कर फ़रियाद की</p>
<p>जो क़रम होता नहीं तो ना सही<br />
हमको भी आदत नहीं है दाद की</p>
<p>सोचता हूं के परों को तोड़ना<br />
आपकी फ़ितरत है या सैय्याद की</p>
<p>हर तरह से तोड़ के देखा ये दिल<br />
है ज़रूरत अब नई ईजाद की</p>
<p>पूरी महफ़िल ही ग़मों में चूर है<br />
क्या करें कोशिश अब इसकी शाद की</p>
<p>क्या इमारत क्या मकां क्या झोंपड़ा<br />
तोड़ दी बुनियाद हर बुनियाद की<br />
रोहित जैन<br />
28-02-2008</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[बिछड़ के रहना सीख लिया है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=815</link>
<pubDate>Tue, 19 Feb 2008 11:44:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=815</guid>
<description><![CDATA[बिछड़ के रहना सीख लिया है
क्या तुमने, क]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">बिछड़ के रहना सीख लिया है<br />
क्या तुमने, क्या तुमने<br />
बिछड़ के रहना सीख लिया है<br />
क्या तुमने, क्या तुमने...</font></p>
<p><font color="#000000">क्या वहाँ तक, वहाँ तक<br />
मेरी आवाज़, मेरी सदा जाती नहीं<br />
क्या वहाँ तुझे, वहाँ तुझे<br />
मेरी बातें, मेरी याद सताती नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">बिछड़ के रहना सीख लिया है<br />
क्या तुमने, क्या तुमने<br />
बिछड़ के रहना सीख लिया है<br />
क्या तुमने, क्या तुमने...</font></p>
<p><font color="#000000">हर तरफ़ तू नज़र आती है<br />
पल-पल तू दिल में समाती है<br />
बेवफ़ा तू हो सकती नहीं<br />
दिल से जुदा तू हो सकती नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">क्या वहाँ तक, वहाँ तक<br />
मेरी आवाज़, मेरी सदा जाती नहीं<br />
क्या वहाँ तुझे, वहाँ तुझे<br />
मेरी बातें, मेरी याद सताती नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">बिछड़ के रहना सीख लिया है<br />
क्या तुमने, क्या तुमने<br />
बिछड़ के रहना सीख लिया है<br />
क्या तुमने, क्या तुमने...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तेरी चुप निगाहें]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=806</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 16:03:34 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=806</guid>
<description><![CDATA[तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें
तेरे ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं, मेरे लिए<br />
एक बार तो कुछ कह दे सनम<br />
तू एक बार तो हाँ कर दे मुझसे<br />
ज़िन्दगी एक झमेला है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी मुस्कुराहटें तेरी सादी अदाएँ<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं मेरे लिए<br />
परियों से भी कहीं ज़्यादा हसीं<br />
खिलती कलियों-सी तू माहजबीं<br />
ख़ुदा ने तुझे बनाया है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे सारे शिकवे वह सभी यादें<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं मेरे लिए<br />
मुझे तेरा इन्तिज़ार था बरसों से<br />
हम एक-दूजे के बने जनमों से<br />
तुमने जनम लिया है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">आँखों में माहताब-सा चमकता है<br />
तेरा चेहरा, तेरा चेहरा, तेरा चेहरा<br />
मैं सहराँ-सहराँ भटकता हूँ तेरे लिए<br />
तू एक बार तो हाँ कर दे मुझसे<br />
ज़िन्दगी एक झमेला है मेरे लिए</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=802</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 13:01:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=802</guid>
<description><![CDATA[हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों स]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से<br />
इतनी दूरी क्यों है, यह मजबूरी क्यों है<br />
इसका जवाब दो तुम इसका जवाब दो<br />
यह जुदाई क्यों है यह रुसवाई क्यों है<br />
इसका जवाब दो मुझे इसका जवाब दो</font></p>
<p><font color="#000000">यह दिल मेरा तेरी मोहब्बत चाहता है<br />
वह दिल तेरा मेरी मोहब्बत चाहता है<br />
इस मुश्किल से थोड़ी राहत चाहता है</font></p>
<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ाहिश है तू मेरी, जन्नत है तू मेरी<br />
इस दुनिया में सबसे सुन्दर है तू ही<br />
नीले आकाश में जैसे उड़ता बादल है<br />
नील आँखों में जैसे सजता काजल है<br />
कुछ यूँ मेरे दिल के अन्दर है तू ही<br />
मेरी सजनी तू नील समन्दर है तू ही</font></p>
<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से</font></p>
<p><font color="#000000">तुम मेरे जीवन में फिर आ जाओ<br />
तुम मुझे एक बार अपना कह जाओ<br />
फिर जो बोलोगे तुम हम कर जायेंगे<br />
फिर तुम बोलोगे तो हम मर जायेंगे<br />
पर ऐसी ज़िन्दगी हम न जी पायेंगे<br />
तन्हा साँसें ले‍गें हम तन्हा मर जायेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से<br />
इतनी दूरी क्यों है, यह मजबूरी क्यों है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[याद आती हैं फिर वह तारीख़ें ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=796</link>
<pubDate>Sun, 17 Feb 2008 13:33:25 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=796</guid>
<description><![CDATA[याद आती हैं फिर वह तारीख़ें
मेरा करना ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">याद आती हैं फिर वह तारीख़ें<br />
मेरा करना तुम्हारी तारीफ़ें<br />
लिखना पुराने ख़तों को दोबारा<br />
पूछना क्या नाम है तुम्हारा</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ न मिले ऐसी शाम के तले<br />
इतना मान ले इतना जान ले</font></p>
<p><font color="#000000">वह साँसों का साँसों तक जाना<br />
क़रीब आकर फिर मुड़ जाना<br />
लिखना पुराने ख़तों को दोबारा<br />
पूछना क्या नाम है तुम्हारा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा मुझे देखकर शरमाना<br />
यारों से दिल की बात छिपाना<br />
है प्यार तो क्यों न कह दो<br />
एक प्रेम-पत्र ही लिखकर दे दो</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ न मिले ऐसी शाम के तले<br />
इतना मान ले इतना जान ले</font></p>
<p><font color="#000000">याद आती हैं फिर वह तारीख़ें<br />
मेरा करना तुम्हारी तारीफ़ें<br />
लिखना पुराने ख़तों को दोबारा<br />
पूछना क्या नाम है तुम्हारा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जब से भूल जाना चाहा तुमको ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=771</link>
<pubDate>Thu, 14 Feb 2008 06:32:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=771</guid>
<description><![CDATA[जब से भूल जाना चाहा तुमको
तेरी याद और भ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जब से भूल जाना चाहा तुमको<br />
तेरी याद और भी आती है<br />
सपना क्या कभी कोई ऐसा हुआ<br />
जो बिखरा नहीं<br />
बची राख को आँधी<br />
मेरी कब्र तक उड़ा ले जाती है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम फिर क्यों मेरी निगाहों में<br />
भर आये आँसू<br />
क्या कोई दर्द हुआ दिल में<br />
या फिर वह तस्वीर मिल गयी<br />
यह तो बताये कोई<br />
मुझे तू क्यों याद आती है?</font></p>
<p><font color="#000000">जब से भूल जाना चाहा तुमको<br />
तेरी याद और भी आती है</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद है आसमाँ पर, ज़मीं पर नहीं<br />
बस बात इतनी है जो मुझे तुमसे<br />
दूर नहीं जाने देती है आँसू,<br />
क्या हुआ ऐसा? गुल खिल गये<br />
जो दिए जल गये<br />
क्या यह सब ख़ाब है?<br />
मुझे तू नज़र आती हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">जब से भूल जाना चाहा तुमको<br />
तेरी याद और भी आती है</font></p>
<p><font color="#000000">निगाहों में, नज़ारों में, तू बेवफ़ा<br />
सपनों से दूर जा, न याद आ </font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल के दरवाज़े पर]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=746</link>
<pubDate>Mon, 11 Feb 2008 14:24:25 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=746</guid>
<description><![CDATA[दिल के दरवाज़े पर दस्तक देता है कोई
रोज़-]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दिल के दरवाज़े पर दस्तक देता है कोई<br />
रोज़-रोज़ मुझे नये ख़ाबों में मिलता है कोई<br />
याद न आती हो ऐसा कोई पल जाता नहीं<br />
मेरा मन पागल है इसे कोई समझाता नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">ख़्याल दिल तक आकर फिर जाता है कभी<br />
इन आँखों पर कोई सागर लहराता है कभी<br />
मैं तन्हा हूँ यहाँ और मेरा दिल खोया है कहीं<br />
रहता हूँ अकेलेपन में मेरा कोई साथी नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">फिर भी न जाने क्यों ऐसा लगता है कभी<br />
दिल के दरवाज़े पर दस्तक देता है कोई...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दूदे-तन्हाई के उस पार क्या है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=730</link>
<pubDate>Sat, 09 Feb 2008 08:16:57 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=730</guid>
<description><![CDATA[दूदे - तन्हाई   के   उस    पार   क्या   है
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दूदे - तन्हाई   के   उस    पार   क्या   है<br />
वह ख़ुद है या उसके हुस्न की ज़या है</font></p>
<p><font color="#000000">बेवजह किसी की याद यूँ सताती नहीं<br />
मेरे दिल ने तुझको पसन्द किया है</font></p>
<p><font color="#000000">फ़ैज़   क्या   सोचें   राहे - मोहब्बत   में<br />
क़ैस न हो हर आशिक़ इतनी दुआ है</font></p>
<p><font color="#000000">सहाब बरसें हैं एक मुद्दत के बाद<br />
यह मेरा नसीब है या उसकी वफ़ा है</font></p>
<p><font color="#000000">हिचकियाँ आये हुए मुझको बरस हुए<br />
क्या तुमने कभी मुझे याद किया है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे जाने के बाद दिल में कुछ न रहा<br />
वह ढूँढ़ते हैं जो मुझमें तेरा नक्शे-पा है</font></p>
<p><font color="#000000">अब   सबा   हर-सू   चुपचाप   बहती   है<br />
उसकी ख़ामोशी यह कहती है तू ख़फ़ा है</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुश रहो कि हम जाते हैं तेरी दुनिया से<br />
ग़ैर   से   निबाह   में   अब   तेरी   दुनिया   है</font></p>
<p><font color="#000000">जो कहता था 'नज़र' इश्क़ से बचना<br />
वह ख़ुद ही आज उसमें मुब्तिला है</font></p>
<p>दूदे-तन्हाई = तन्हाई का धुँधलका (haze of solitude), ज़या = रोशनी (light), फ़ैज़ = फ़ायदा (profit),<br />
क़ैस = मजनूँ का वास्तविक नाम, सहाब = बादल (cloud), नक्शे-पा = क़दमों के निशान (footprint),<br />
सबा = सुबह की हवा, मुब्तिला = फँसा हुआ, जकड़ा हुआ (embroiled)</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००६-२००७</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तेरी यादों के साये तले ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=724</link>
<pubDate>Fri, 08 Feb 2008 14:31:34 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=724</guid>
<description><![CDATA[तेरी यादों के साये तले
जाने हम-
कितनी द]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तेरी यादों के साये तले<br />
जाने हम-<br />
कितनी दूर तक चले<br />
क्या ख़बर कब...<br />
थकते क़दमों की शाम ढले<br />
जाने कब पतझड़ को<br />
महकता सावन मिले<br />
तेरी यादों की शाम<br />
है नीली-नीली<br />
सागर तट की रेत<br />
है गीली-गीली </font></p>
<p><font color="#000000">तेरी यादों के साये तले<br />
जाने हम-<br />
कितनी दूर तक चले<br />
क्या ख़बर किसलिए...<br />
बुझी राख में चिन्गारी जले<br />
जाने क्यों तेरे बिना...<br />
चलते हैं यहाँ सिलसिले<br />
इक डोर बाँधी थी हमने<br />
वह टूटी नहीं है,<br />
दिल को लगी थी जो लगन,<br />
वह छूटी नहीं है... </font></p>
<p><font color="#000000">तेरी यादों के साये तले<br />
जाने हम-<br />
कितनी दूर तक चले<br />
क्या ख़बर कैसे क्या हुआ<br />
जो तुम रुसवा हो गये...<br />
हम बिल्कुल अकेले,<br />
तन्हा रह गये तुम जो गये<br />
जब कोई आहट आती है<br />
तेरी ही याद जगाती है<br />
तन्हा कर-करके हमें<br />
पल-पल तोड़ जाती है...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कोई है इस दिल में]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=720</link>
<pubDate>Thu, 07 Feb 2008 13:34:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=720</guid>
<description><![CDATA[कोई है इस दिल में पर साथ में नहीं है
वह ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">कोई है इस दिल में पर साथ में नहीं है<br />
वह मेरा जाने-जिगर, वह मेरा हमसफ़र<br />
जिससे मिली थी नज़र वह कहाँ खो गयी है</font></p>
<p><font color="#000000">उनकी यादों के सब साये धुँधले पड़ गये हैं<br />
दिल के अरमाँ इस ज़मीं में जड़ गये हैं<br />
किसी को पता नहीं है वह कहाँ खो गयी है<br />
कोई है इस दिल में पर साथ में नहीं है...</font></p>
<p><font color="#000000">सिर्फ़ नज़रों ही नज़रों में जिनसे हम मिले<br />
चलने लगे उसके साथ दिल के सिलसिले<br />
दिल में उनका बसर, खोजती उनको नज़र<br />
जाने कब कहाँ मिलें, जाने कब गुल खिले</font></p>
<p><font color="#000000">आज बहारों के सभी मौसम लौट आये हैं<br />
डाकिये से संदेशे हमने उन्हें कहलवायें हैं<br />
किसी को पता नहीं है वह कहाँ खो गयी है<br />
कोई है इस दिल में पर साथ में नहीं है...</font></p>
<p><font color="#000000">कोई तस्वीर भी तो नहीं उनकी हमारे पास<br />
देख लें जिसको हम कभी जब हो जी उदास<br />
दो बातें भी तो उन्होंने हमसे कभी की नहीं<br />
जिनको सोचकर काट लें हम यह ज़िन्दगी</font></p>
<p><font color="#000000">कोई है इस दिल में पर साथ में नहीं है...<br />
वह मेरा जाने-जिगर, वह मेरा हमसफ़र<br />
जिससे मिली थी नज़र वह कहाँ खो गयी है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरी मुहब्बत तो झूठी नहीं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=702</link>
<pubDate>Tue, 05 Feb 2008 04:58:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=702</guid>
<description><![CDATA[मेरी मुहब्बत तो झूठी नहीं
अगर मैं झूठा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरी मुहब्बत तो झूठी नहीं<br />
अगर मैं झूठा हूँ<br />
तुम जो गये हो यहाँ से<br />
पल-पल मैं टूटा हूँ<br />
किसी का एतबार नहीं करता<br />
किसी को देखकर नहीं मरता<br />
एक फ़ितरत-सी बन गयी है<br />
हर पल तुम्हें याद करने की<br />
तुम्हें भूलने की कोशिश में<br />
हर पल तुम्हें क़रीब रखता हूँ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २०००-२००१</p>
]]></content:encoded>
</item>

</channel>
</rss>
