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	<title>मुक्तक &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/मुक्तक/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "मुक्तक"</description>
	<pubDate>Sun, 06 Jul 2008 13:21:39 +0000</pubDate>

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<item>
<title><![CDATA[इश्क ने यहाँ कितनों को कोई और मुकद्दर दिया ]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=191</link>
<pubDate>Wed, 02 Jul 2008 11:35:09 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=191</guid>
<description><![CDATA[इश्क ने यहाँ कितनों को कोई और मुकद्दर ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>इश्क ने यहाँ कितनों को कोई और मुकद्दर दिया<br />
दिल को तन्हाई तो आँखों को समंदर दिया<br />
इबादत-ए-इश्क में जिसे पूजते रहे खुदा मान कर<br />
उस कातिल को इस इश्क ने ही तो खंजर दिया<br />
...................... Shubhashish</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[किसी कोने में]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=190</link>
<pubDate>Mon, 30 Jun 2008 09:06:09 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=190</guid>
<description><![CDATA[ऐसा नहीं की अब सब कुछ बदल गया
पर हाँ हमन]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>ऐसा नहीं की अब सब कुछ बदल गया<br />
पर हाँ हमने खुद को जरुर बदल डाला है</p>
<p>कुछ हासिल नहीं होता छटपटाने से<br />
सो खुद से ही खुद को संभाला है</p>
<p>ऐसा नहीं की अब आग बुझ चुकी है<br />
वो तो आज भी सुलगती है किसी कोने में</p>
<p>हाथ से खोजते थे उसमे जाने क्या खोया हुआ<br />
और ये हाथ अक्सर तब जल जाता था</p>
<p>बुझाने को फूंकते थे जब भी हम उसको<br />
चेहरा एक बार फिर से झुलस जाता था</p>
<p>अब बस यही आदत बदल डाली है तबसे<br />
जाते ही नहीं अब कभी उस कोने में</p>
<p>पर सुबह अपनी आँखे नम मिलने पे समझ आता है<br />
आज क्या ख्वाब देखा है हमने सोने में ??</p>
<p>............................... Shubhashish</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इश्क भी क्या चीज़ है]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=188</link>
<pubDate>Wed, 11 Jun 2008 11:29:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=188</guid>
<description><![CDATA[&#8220;अरे इतनी सी बात पे परेशान होने की क्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>"अरे इतनी सी बात पे परेशान होने की क्या जरुरत ये लो तुम मेरी फाइल दिखा देना,हाँ मेरी राइटिंग थोडी गन्दी है" अनुराग ने मुस्कुराते हुए सुबह से परेशान भावना की ओर अपनी फाइल बढ़ा दी, भावना को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे&#124; "अरे ! नहीं अनुराग तुमने साल भर मेंहनत कर के ये फाइल बनायीं है और अगर आज मेरी लापरवाही की वजह से तुम्हारे लिए कोई परेशानी होगी तो शायद मुझे अच्छा नहीं लगेगा&#124; अगर मैंने ध्यान रखा होता तो वो फाइल गुम ना हुई होती " अरे! come-on भावना बच्चो जैसी बात मत करो आज तुम्हे जरुरत है इसलिए दे रहा हूँ ऐसे भी मेरा टर्न कल है तब तक मैं बना लूँगा फाइल" शायद इस अपनेपन को भावना नकार नहीं सकती थी ऊपर से जरुरत ने उसे और मजबूर कर दिया &#124; "अरे चलो कैंटीन में कुछ खाते हैं यार मुझे बहुत भूख लग रही है" अनुराग के इस बात से सब सहमत हो गए उनके पूरे छ: लोगो का ग्रुप कैंटीन की कोने वाली टेबल पर बैठ के आर्डर का इंतजार करने लगा&#124;   </p>
<p>भावना आज खामोश थी उसके सर का बोझ तो हट गया था पर दिल बहुत भारी था&#124; लोग अपनी बातो में मस्त थे पर वो लगातार अनुराग को देखे जा रही थी &#124; जुबान से खामोश मगर अन्दर जाने कितना तूफान &#124; आखिरकार आँखों ने अनुराग के सामने सवाल उढ़ेल ही दिए "क्यों तुम मुझे एहसान से लादे जा रहे हो पहले के एहसान क्या कम हैं मुझ पर जो आज एक और दे दिया &#124; क्यों नहीं कभी कुछ मांग लेते मुझसे, क्यों नहीं मेरे दिल को ये एहसास होने देते की मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर सकती, इतना प्यार करते हो पर कभी अपनी आँखों से भी नहीं ज़ाहीर होने देते &#124; हाँ, मैं कुछ नहीं दे सकती तुम्हे पर मैं ये एक बार तुम्हारे सामने स्वीकार करना चाहती हूँ &#124; तुम्हारे एहसानो का बोझ बहुत भारी है &#124; इसे लेके अब और नहीं चला जाता मुझ से "  </p>
<p>भावना के दिमाग की इन सारी बातों को जैसे अनुराग ने साफ सुन लिया हो &#124; बहुत ही सहज भाव से उसने भावना की आँखों में देख एक हल्की सी मुस्कराहट से ही जवाब दे दिया "हाँ मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ पर क्या प्यार बस पाने का ही नाम है अगर हाँ तो तुमसे बहुत ज्यादा मैंने पाया है तुम्हारे लिए कुछ भी कर पाने का सुकून मुझे जाने कितने दिनों तक खुश रखता है &#124; तुमसे मांग मैं प्यार को छोटा नहीं कर सकता मैं तुम्हे, तुम्हारी मजबूरिया सब कुछ समझता हूँ &#124; मुझे जो चाहिए वो मुझे तुम अनजाने में ही दे देती हो&#124; तुम्हारी ख़ुशी से ज्यादा मुझे क्या चाहिए होगा &#124; तुम्हारी ख़ुशी शायद तुम्हे भी उतना खुश न करती हो जितना मुझे कर देती है &#124; और इस वक़्त भी मैं तुम्हे हँसता हुआ देखना चाहता हूँ &#124; सच में बस एक बार मुस्कुरा दो ना मेरे लिए, लो मांग भी लिया अब न कहना की कुछ माँगा नहीं "&#124; बात आँखों में हुई थीं पर भावना की आँखों में आंसू और होठो पे मुस्कान थी </p>
<p>........... ये इश्क भी क्या चीज़ है &#124;</p>
<p><em>यूँ तो इश्क हो जाता है बस चन्द कदम साथ चलकर के<br />
पर ये मोम नहीं जो खत्म हो जाये बस थोडी देर जल कर के<br />
लकडी जल कर कुछ देर में ही कोयला हो जाया करती है<br />
पर कोयले से हीरा बनता है सैकडो साल घुटन सह कर के<br />
........................... Shubhashish</em></p>
<p>नोट : - हीरा कोयले का ही अपरूप होता है, जब कोयला कई सौ सालों तक ज़मीन में दबा रहता है तो उसकी आण्विक संरचना परिवर्तित हो जाती है और धीरे-धीरे वो कोयले से हीरा बन जाता है &#124;</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[रात भर]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=187</link>
<pubDate>Fri, 06 Jun 2008 08:21:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=187</guid>
<description><![CDATA[दर्द सीने में सिसकता रहा है रात भर,
याद]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>दर्द सीने में सिसकता रहा है रात भर,<br />
यादों का सिलसिला चलता रहा है रात भर,<br />
एक बार फिर से माफ़ कर दूं उसकी बेवफाई को,<br />
यही इल्तजा दिल मुझसे करता रहा है रात भर &#124;<br />
................................ Shubhashish</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[निशानी]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=182</link>
<pubDate>Mon, 02 Jun 2008 09:06:19 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=182</guid>
<description><![CDATA[समझ नहीं आता की क्या कर डालूँ मैं
तुम्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>समझ नहीं आता की क्या कर डालूँ मैं<br />
तुम्हें बदलने की कोशिश करूं या खुद को बदल डालूँ मैं</p>
<p>अब और यही दर्द नहीं सहा जाता मुझसे<br />
दम तोड़ने दूं या खुद को संभालूँ मैं </p>
<p>जाने कब से बरसने को तरसते हैं बादल<br />
रोकूँ उन्हें या अपना दामन भीगा डालूँ मैं</p>
<p>जीने नहीं देती, पर तेरी यही एक निशानी बाकी है<br />
इस दर्द को सीने से क्या सोच के निकालूँ मैं<br />
................................. Shubhashish(2007)</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[एहसास नहीं रह जाता]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=180</link>
<pubDate>Sat, 31 May 2008 09:09:06 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=180</guid>
<description><![CDATA[जीने के लिये इस दुनिया में कुछ खास नही ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>जीने के लिये इस दुनिया में कुछ खास नही रह जाता है<br />
सब कुछ होता है फिर भी कुछ पास नही रह जाता है<br />
खुद अपने मे घुट कर जब अरमान युं ही मर जाये तो<br />
इक हद के आगे दर्द का भी एहसास नहीं रह जाता है<br />
................................................... Shubhashish(2007)</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[खुदा भी पिघलता है]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=179</link>
<pubDate>Thu, 29 May 2008 09:34:38 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=179</guid>
<description><![CDATA[जब गम तेरा देख के दिल मुझसे नही सम्भलत]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>जब गम तेरा देख के दिल मुझसे नही सम्भलता है<br />
तो तेरी खुशियों की खातिर ये यूं ही दिन रात जलता है<br />
ऐसे तो सुनता ही नही खुदा दुआ हमारी अक्सर<br />
पर शायद कभी-कभी हमारे आँसुवों से वो भी पिघलता है<br />
.......................................... Shubhashish(2007)</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ चरित्रहीन - The call girl]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=171</link>
<pubDate>Mon, 26 May 2008 06:43:55 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=171</guid>
<description><![CDATA[
यौवन के मद में अनियंत्रित, सागर में खो ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/ladyback.jpg"><img class="size-full wp-image-172 alignright" style="float:right;" src="http://apurn.wordpress.com/files/2008/05/ladyback.jpg" alt="" width="158" height="272" /></a></p>
<p>यौवन के मद में अनियंत्रित, सागर में खो जाने को<br />
आज चला था पैसो से मैं यौवन का सुख पाने को</p>
<p>दिल की धड़कन भी थिरक रही थी यौवन के मोहक बाजे पे<br />
अरमानों के साथ मैं पंहुचा उस तड़ीता के दरवाजे पे</p>
<p>अंदर पंहुचा तो मानो हया ने भी मुँह फेर लिया<br />
चारो तरफ से मुझको यूँ रुपसियों ने था घेर लिया</p>
<p>हर कोई अपने यौवन के श्रृंगार से सुसज्जित था<br />
पर अब जाने क्यों मेरा मॅन थोडा सा लज्जित था</p>
<p>आहत होता था हृदय बहुत उन संबोधन के तीरों से<br />
पर अभी भी मॅन था बंधा हुआ संवेगों की जंजीरों से</p>
<p>तभी एक रूपसी पर अटकी मेरी दृष्टि थी<br />
लगता था मानो स्वयं वही सुन्दरता की सृष्टि थी</p>
<p>व्यग्र हुआ मॅन साथ में उसके स्वयं चरम सुख पाने को<br />
उस कनकलता को लिए चला अपनी कामाग्नि बुझाने को</p>
<p>जून के उष्ण महीने में बसंती सी हो गयी थी रुत<br />
कुछ ऐसे अपने तन को उसने मेरे समुख किया प्रस्तुत</p>
<p>खुला निमंत्रण था सपनो को आलिंगन में भरने का<br />
पर नहीं समझ पा रहा था कारण अपने अंतस के डरने का</p>
<p>अंतस को अनदेखा कर के प्रथम स्पर्श किया तन को<br />
उस मद से ज्यादा मद-मादित अब तक कुछ नहीं लगा मॅन को</p>
<p>खुद अंग ही इतने सुंदर थे लज्जा आ जाये गहनों को<br />
पर सहसा सहम गया देख उस मृग-नयनी के नयनो को</p>
<p style="text-align:left;">आँखों में कोई चमक नहीं चेहरे पे कोई भाव नहीं<br />
सपने कोई छीन गया जैसे जीने कोई चाह नहीं</p>
<p style="text-align:left;">प्रश्नों की श्रृंखल कड़ियों ने सारा मद तोड़ दिया पल में<br />
व्याकुल था अंतस जानने को क्या है इसके हृदयातल में</p>
<p style="text-align:left;">उसे देख अवस्था में ऐसी जब रहा नहीं गया मुझसे<br />
जो उबल रहा था अंतस में वो सब कुछ बोल दिया उससे</p>
<p style="text-align:left;">आँखे सूना चेहरा सूना क्यों सूना तेरा जीवन है<br />
इच्छाओं के संसार में क्यों अब लगता नहीं तेरा मॅन है</p>
<p style="text-align:left;">सिर्फ तन का मूल्य दिया हूँ मैं, मॅन पर मेरा अधिकार नहीं<br />
पर इतना तो बता ऐ कनकलता क्या तुझको मैं स्वीकार्य नहीं</p>
<p style="text-align:left;">हे कामप्रिया!,हे मृगनयनी! ऐसी क्या विवशता है तुझको<br />
जो मॅन से मेरे साथ नहीं फिर तन क्यों सौप दिया मुझको</p>
<p style="text-align:left;">शांत भाव से बोली वो यहाँ मॅन को कौन समझता है<br />
एक लड़की के लिए गरीबी ही उसकी सबसे बड़ी विवशता है</p>
<p style="text-align:left;">इतना कह के फिर शांत हो गयी कुछ समझ नहीं आया मुझको<br />
प्रश्नों की श्रृंखल कड़ियों से फिर मैंने झक-झोर दिया उसको</p>
<p style="text-align:left;">लड़ना ही जीवन है चाहे मुश्किल कितनी भी ज्यादा हो<br />
फिर नारी हो के क्यों तोड़ दिया तुमने अपनी मर्यादा को</p>
<p style="text-align:left;">कमी नहीं दुनिया में काम की पैसे इज्जत से कमाने को<br />
फिर क्यों बेच दिया खुद को बस अपनी क्षुधा मिटाने को ?</p>
<p style="text-align:left;">तड़प उठी वो मेरे ऐसे प्रश्नों के आघातों से<br />
मुझसे बोली क्या समझाना चाहते हो इन बातों से</p>
<p style="text-align:left;">शौक नहीं था वेश्या बन बाज़ारों में बिक जाने का<br />
अपने ही हाथों से खुद अपना आस्तित्व मिटाने का</p>
<p style="text-align:left;">पर आँखों के सारे सपने एक रोज बह गए पानी में<br />
जब माँ-बाप,घर-आँगन सब खो गए सुनामी में</p>
<p style="text-align:left;">फिर एक ही रात में बदल गयी मेरी दुनिया की तस्वीर यहाँ<br />
कठपुतली बना के बहुत नचाई मुझको मेरी तक़दीर यहाँ</p>
<p style="text-align:left;">दिन अच्छे हो जाते हैं राते भी अच्छी लगती हैं<br />
भरे पेट को सिद्धांत की हर बातें अच्छी लगती हैं</p>
<p style="text-align:left;">पर मई-जून की गर्मी से जब देह झुलसने लगती है<br />
रोटी के टुकड़े खोज रही आँखे कुछ थकने लगती हैं</p>
<p style="text-align:left;">भूख की आग में तड़प-तड़प मुश्किल से दिन कट पाते हैं<br />
अपनी बेबसी में घुट-घुट कर सपनों को जलाती रातें है</p>
<p style="text-align:left;">जब नीली छत के सिवा सर पर कोई और छत नहीं होती है<br />
कपडो के छेदों से झाँक रही मजबूरी खुद पे रोती है</p>
<p style="text-align:left;">गिद्धदृष्टि से देहांश देखता जब कोई चीर-सुराखों से<br />
तब मॅन छलनी हो जाता है तीर विष बुझे लाखों से</p>
<p style="text-align:left;">जब इन हालातों से लड़ लड़ कर जवानी थकने लगती है<br />
तब मर्यादा और सम्मान की ये बातें बेमानी लगने लगतीं है</p>
<p style="text-align:left;">लोगो ने जाने कितनी बार मन को निर्वस्त्र कर डाला था<br />
पर फिर भी किसी तरह मैंने अपना तन संभाला था</p>
<p style="text-align:left;">पर एक दिन कुचल गयी कली कुछ मदमाते क़दमों से<br />
कुछ और नहीं अब बाकी था इन किस्मत के पन्नों में</p>
<p style="text-align:left;">खुद को ख़त्म कर लेने का निश्चय कर लिया मेरे मॅन ने<br />
पर लाख चाहने पर भी दिल का साथ नहीं दिया हिम्मत ने</p>
<p style="text-align:left;">पर जीने का मतलब मेरे लिए हर मोड़ पर एक समझौता था<br />
फिर इस जगह से ज्यादा गया गुजरा मेरे लिए क्या हो सकता था</p>
<p style="text-align:left;">इतना गिर गयी हूँ मैं कैसे ये सवाल हमेशा डसता था<br />
लेकिन मेरे पास भी इसके सिवा अब और कहाँ कोई रस्ता था</p>
<p style="text-align:left;">उस वक़्त बहुत मैं रोई थी हद से ज्यादा चिल्लाई थी<br />
दूसरों के हाथ आस्तित्वहीन हा जब खुद को मैं पाई थी</p>
<p style="text-align:left;">पर रो-रो के सारे आंसू एक रोज़ बहा डाला मैंने<br />
हर अरमान का गला घोंट कफ़न ओढा डाला मैंने</p>
<p style="text-align:left;">पर अब पेट भर जाने पर भी जब नीद नहीं आती रातों को<br />
नहीं सँभाल पता है ये दिल तब इन बिखरे जज्बातों को</p>
<p style="text-align:left;">क्यों नहीं सजा सकती हूँ मैं दुल्हन बन किसी आँगन को<br />
क्यों प्रेयसी बनने का अधिकार नहीं मिला मुझ अभागन को</p>
<p style="text-align:left;">काश कि मैं भी किसी को प्राणों से प्यारा कह पाती<br />
काश कि मैं भी किसी के हृदयातल में रह पाती</p>
<p style="text-align:left;">काश कि मेरे आँचल में भी एक अंश मेरा अपना होता<br />
ममता से पागल हो जाती एक बार जो मुझको माँ कहता</p>
<p style="text-align:left;">इतना कहते कहते ही उसकी आँखे भर आई थी<br />
मैं भी था खामोश वहाँ बस एक उदासी छाई थी</p>
<p style="text-align:left;">फिर मुझमे हिम्मत ही नहीं थी उससे कुछ कह पाने को<br />
धीमे क़दमों से लौट गया वापस गंतव्य पे जाने को</p>
<p style="text-align:left;">सोचता रहा ये रास्ते भर होके मानववृत्ति के अधीन<br />
वो चरित्रहीन थी या फिर दुनिया ही है चरित्रहीन</p>
<p style="text-align:left;">........................................  Shubhashish(2006)</p>
<p>In printable format<br />
<a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/chtf1_0.jpg"><img class="alignleft size-thumbnail wp-image-173" src="http://apurn.wordpress.com/files/2008/05/chtf1_0.jpg?w=74" alt="" width="74" height="96" /></a> <br />
<a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/cht2f_0.jpg"><img class="alignleft size-thumbnail wp-image-174" src="http://apurn.wordpress.com/files/2008/05/cht2f_0.jpg?w=74" alt="" width="74" height="96" /></a><br />
<a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/chtf3.jpg"><img class="alignleft size-thumbnail wp-image-175" src="http://apurn.wordpress.com/files/2008/05/chtf3.jpg?w=74" alt="" width="74" height="96" /></a><br />
<a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/chtf4.jpg"><img class="alignleft size-thumbnail wp-image-176" src="http://apurn.wordpress.com/files/2008/05/chtf4.jpg?w=74" alt="" width="74" height="95" /></a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कोशिश न करना कीमत लगाने की]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=170</link>
<pubDate>Thu, 22 May 2008 08:29:57 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=170</guid>
<description><![CDATA[धोखे से लूट ले जा सकते हो तुम भी,
पर कोश]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>धोखे से लूट ले जा सकते हो तुम भी,<br />
पर कोशिश न करना कीमत लगाने की,<br />
जिसके बदले में बिक जाये इमान मेरा,<br />
औकात इतनी नहीं अभी इस ज़माने की<br />
............................. Shubhashish</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[गहरा समन्दर है मेरे जज्बात-ए-इश्क का]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=164</link>
<pubDate>Mon, 19 May 2008 08:58:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=164</guid>
<description><![CDATA[करते हैं वही जो हमारा उसूल है,
युं ही सम]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>करते हैं वही जो हमारा उसूल है,<br />
युं ही समझ जाओगे हमें तुम्हारी भूल है,<br />
बहुत गहरा समन्दर है मेरे जज्बात-ए-इश्क का,<br />
बिन डुबे इसे नापने कि कोशिश फिजूल है&#124;<br />
.................................... Shubhashish(2006)</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कुछ आदतें नहीं बदलतीं]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=163</link>
<pubDate>Fri, 16 May 2008 05:47:35 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=163</guid>
<description><![CDATA[भगवान को मानना तो जाने कब से छोड़ दिया ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>भगवान को मानना तो जाने कब से छोड़ दिया है<br />
पर मंदिर के सामने बिना कुछ सोचे ही सर झुक जाता है<br />
कम्बख्त कुछ आदतें लाख चाह के भी नहीं बदलतीं<br />
........कुछ ऐसा ही तेरी गली से गुजरते हुए भी होता है</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[बस एक ख्वाब हो तुम]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=162</link>
<pubDate>Wed, 14 May 2008 06:10:20 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=162</guid>
<description><![CDATA[सच कहू तो बस एक ख्वाब हो तुम,
दोस्ती नही]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>सच कहू तो बस एक ख्वाब हो तुम,<br />
दोस्ती नही की तुम से कुछ पाने के लिए,<br />
अपनी बातों से बस तुम्हे हॅसाना चाहता हूँ,<br />
क्यूंकि वजह कम है मेरे पास मुस्कुराने के लिये,<br />
ना समझना मुझे परवाना अपनी लौ का,<br />
तुझमें जलने कि मुझको कोई ख्वाहिस नही है,<br />
मैं तो जलके पहले ही आफताब हो गया हूँ,<br />
तेरी दुनियाँ में आया हूं बस जगमगाने के लिये&#124;<br />
.............................. Shubhashish</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैं इमरान हाशमी बनना चाहता हूँ ]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=159</link>
<pubDate>Mon, 12 May 2008 06:25:48 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=159</guid>
<description><![CDATA[ (अपने बी.टेक. फाइनल इयर में जब मैंने ये ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/image003.gif"><img class="alignleft size-medium wp-image-160" src="http://apurn.wordpress.com/files/2008/05/image003.gif?w=128" alt="" width="128" height="128" /></a> (अपने बी.टेक. फाइनल इयर में जब मैंने ये कविता लिखी थी उस वक़्त unicode जैसी सहूलियत नहीं थी इसलिए मेरे दोस्त कुमार वरुण, जो की इस कविता के प्रेरणा भी थे (क्युकी वो कभी कभी बोलता की यार मैं इमरान हाश्मी बनना चाहता हूँ :P ) ने इसे हिंदी पैड पे लिख के jpeg फॉर्मेट में मेल में attach किया! आज मैं इसे unicode में यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ )</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><strong> मैं इमरान हाशमी बनना चाहता हूँ</strong> </p>
<p>पांचवी कक्षा की एक क्लास मे मास्टर ने बच्चों से पूछा<br />
बताओ क्या बनोगे, कैसे करोंगे अपने माँ-बाप का नाम ऊँचा<br />
किसी ने IAS. किसी ने PCS. किसी ने कहा अच्छा आदमी बनाना चाहता हूँ<br />
तभी पीछे की सीट से उठकर एक बच्चे ने कहा<br />
Sir! मैं इमरान हाशमी बनना चाहता हूँ</p>
<p>ऐसे जवाब की ख्वाब मे भी नही की थी कभी कल्पना<br />
पर Teacher को लगा शायद हो ये लडके का बचपना<br />
समझाया की बेटा गलती की है तुने Career को चुनने मे<br />
ये तो बता क्या प्रॉब्लम है तुझे और कुछ बनने मे ???</p>
<p>लड़का बोला Sir! जॉब मे अभी कहाँ इतना पैसा है<br />
और Business करना मुझे लगता बेवकूफों जैसा है<br />
नेता फस जाते हैं Akshar स्टिंग ऑपरेशन के जंजाल मे<br />
खेल मे Zahar भर दिया मैच फिक्सिंग के बवाल ने<br />
पर फ़िल्म इंडस्ट्री मे प्रोफिट की लाइन हमेशा ऊपर चढ़ती है<br />
बढ़िया काम से Price-Value तो बुरे से Popularity बढ़ती है<br />
और इस बात को तो ख़ुद कई बड़े फ़िल्म समीक्षक माने है<br />
MMS Clips से भी ज्यादा बिकते इमरान के फिल्मो के गाने है</p>
<p>मै भी ऐसे गाने कर अपनी लाइफ बदलना चाहता हूँ<br />
इसीलिए तो Sir! मैं इमरान हाशमी बनाना चाहता हूँ</p>
<p>हुंह!!!! आज कल के लडके जाने पढ़ते हैं किस किताब से<br />
Teacher का भी सर चक्र गया बच्चे के इस जवाब से<br />
Teacher ने फ़िर भी पूछा उसमे ऐसी क्या बात समाई है<br />
ये तो बता अभिषेक बच्चन बनने मे क्या बुराई है ???</p>
<p>सिर्फ़ दो फिल्मो से इतना नाम नही कमाया अभिषेक के बाप ने<br />
Murder किया लड़किया फ़िर भी कहती .Aashiq Banaya Aap Ne...<br />
मल्लिका,तनुश्री, उदिता निपटी पिछली फिल्मों की साइन मे<br />
सुनाने मे आया है की अब सेलिना हृषिता भी है लाइन मे</p>
<p>मै भी ऐसे टेस्टी CHOCOLATE का स्वाद चखाना चाहता हूँ<br />
इसीलिए तो Sir मैं इमरान हाशमी बनाना चाहता हूँ</p>
<p>अब मास्टर का गुस्सा पहुच गया सातवे आसमान पे<br />
बोले.. सिवाय लड़किया घुमाने के क्या किया इमरान ने ??<br />
Sir! लड़कियों को पीछे घुमाना कोई आसान काम नही<br />
वरना बड़े Powerful लोगो का होता ये अंजाम नहीं</p>
<p>क्या नही जानते आप America के पूर्व राष्ट्रपति को ??<br />
कैसे प्राप्त हुए मोनिका के चक्कर मे .वीरगति को<br />
बदल गया कप्तान देश का सौरभ-नग्मा के टक्कर मे<br />
Cricket खेलना भूल गया वो .नए खेल के चक्कर मे<br />
मेरी इतनी बातों का मतलब बिलकुल सीधा-साफ है<br />
काबिलियेत मे भी इमरान हाशमी. बिल क्लिंटन का बाप है</p>
<p>मैं भी एक Demanded और काबिल आदमी बनाना चाहता हूँ<br />
इसीलिए तो Sir! मैं इमरान हाशमी बनाना चाहता हूँ</p>
<p>................................. Shubhashish ( 2006)</p>
<p>In printable format<br />
<a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/mih1.jpg"><img class="alignleft size-thumbnail wp-image-173" src="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/mih1.jpg?w=74" alt="" width="74" height="96" /></a><br />
<a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/mih2.jpg"><img class="alignleft size-thumbnail wp-image-173" src="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/mih2.jpg?w=74" alt="" width="74" height="96" /></a> </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[माँ]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=161</link>
<pubDate>Sun, 11 May 2008 10:57:20 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
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<description><![CDATA[जो भी जॉब के लिए घर से दूर हैं शायद उन स]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>जो भी जॉब के लिए घर से दूर हैं शायद उन सब के दिल में यही जज्बात होंगे &#124; <br />
ये चार लाईने मैं अपनी माँ के लिए लिखा हूँ, वैसे माँ को याद करने को लिए कोई दिन नहीं होता है माँ तो हमेशा हमारे दिल में रहती हैं  हैं लेकिन आज Mother's Day के बहाने जरुर इन भावनाओ को यहाँ व्यक्त कर रहा हूँ  </p>
<p>कभी-कभी खुद अपनी तरक्की से भी हो जाता नाराज हूँ मैं<br />
इसी भाग दौड़ में खुद अपनों से दूर हो गया आज हूँ मैं<br />
जिस आंचल के साये में रह के किसी लायक बन पाया<br />
उस माँ से ही मिलने को चन्द छुट्टी का मोहताज हूँ मैं<br />
...................................... Shubhashish</p>
<p> </p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इतनी गैरत नहीं]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=158</link>
<pubDate>Sat, 10 May 2008 11:16:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
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<description><![CDATA[इस ज़िन्दगी में तुने पूरी की मेरी कोई ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>इस ज़िन्दगी में तुने पूरी की मेरी कोई हसरत नहीं,<br />
मेरी खुशियों के लिए तू कुछ करे इतनी तुझे गैरत नहीं,<br />
पर हम तो आखिरी दम तक तुझे दुवाएं ही देते जायेंगे,<br />
क्यूंकि धोखा खाना तो मेरी किस्मत है पर धोखा देना मेरी फितरत नहीं&#124;<br />
.............................................. Shubhashish(2005) </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[करते थे बातें इशारों पे जान देने की]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=157</link>
<pubDate>Fri, 09 May 2008 04:47:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
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<description><![CDATA[अब चाहता हूँ तो जिन्दगी रुसवाई नही देत]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>अब चाहता हूँ तो जिन्दगी रुसवाई नही देती,<br />
अन्धेरे मे अपनी परछाई भी दिखाई नही देती,<br />
जो अब तक करते थे बातें इशारों पे जान देने की,<br />
क्या अब उन्हें हमारी आवाज भी सुनाई नहीं देती?<br />
....................................... Shubhashish(2005)</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जरुरत किसको नहीं होती]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=156</link>
<pubDate>Thu, 08 May 2008 04:46:30 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=156</guid>
<description><![CDATA[एतबार की जरुरत किसको नहीं होती,
एक यार ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>एतबार की जरुरत किसको नहीं होती,<br />
एक यार की जरुरत किसको नहीं होती,<br />
मिलता नहीं कोइ हमसफर साथ निभाने के लिये,<br />
वरना प्यार की जरुरत किसको नहीं होती&#124;<br />
............................... Shubhashish(2005)</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इम्तेहां हो गई]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=155</link>
<pubDate>Wed, 07 May 2008 08:19:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=155</guid>
<description><![CDATA[मोहब्बत की मेरे इम्तेहां हो गई,
सारी ब]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>मोहब्बत की मेरे इम्तेहां हो गई,<br />
सारी बातें खत्म बस यहां हो गई,<br />
क्या से क्या हो गये जिनकी खातिर,<br />
बातें अब ये उनके लिये बचपना हो गयीं&#124;<br />
.................................. Shubhashish(2005)</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कभी अकेला नही छोडा]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=154</link>
<pubDate>Tue, 06 May 2008 11:54:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=154</guid>
<description><![CDATA[ढूढता था कि कौन मेरा साथ निभायेगा साये]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>ढूढता था कि कौन मेरा साथ निभायेगा साये की तरह,<br />
सोचता था कि कौन मेरे जज्बातों को समझेगा यहाँ,<br />
पर जब खयाल आया उनका जिन्होने हमे कभी अकेला नही छोडा,<br />
तो लगा इन ' तन्हाइयों ' से अच्छा साथी मुझे मिलेगा कहाँ&#124;<br />
........................................ Shubhashish(2005)</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कभी लडखडा के तो देख]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=153</link>
<pubDate>Mon, 05 May 2008 05:59:04 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=153</guid>
<description><![CDATA[यूँ तो हर चाहने वाला तेरे सपने सजाता न]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>यूँ तो हर चाहने वाला तेरे सपने सजाता निगाहों मे है,<br />
पर कभी सोचा कि ये फूल बिखेरता कौन तेरी राहों में है,<br />
तुझे बस अपनी ओर बुलाते हैं ये जमाने भर के हाथ,<br />
पर कभी लडखडा के तो देख तु गिरती किसकी बाहों मे है&#124;<br />
................................ Shubhashish(2005)</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मौसम]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=148</link>
<pubDate>Sat, 03 May 2008 12:14:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=148</guid>
<description><![CDATA[ &#8230;Unfortunately a true Love story 
 
अजीब सी खामोशी के साथ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span style="font-size:small;"><span style="font-family:Times New Roman;"><span><a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/mausam2.jpg"><img class="alignright size-medium wp-image-151" src="http://apurn.wordpress.com/files/2008/05/mausam2.jpg?w=140" alt="" width="140" height="105" /></a> ...</span>Unfortunately a true <span style="text-decoration:line-through;">Love</span> story </span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:right;margin:0;"> </p>
<p>अजीब सी खामोशी के साथ धीमी बरसात है<br />
शायद आज फिर से एक लम्बी रात है<br />
निहारती हैं एक टक आँखे बाहर के मौसम को,<br />
फिर से याद आ रही किसी मौसम की हर बात है</p>
<p>वो सुरूर मोहब्बत का, वो आँखों की प्यास<br />
वो बेताब धड़कने, वो मिलने की आस<br />
वो तन्हाईयों में अक्सर उनकी तस्वीर से बातें,<br />
उनसे आँखे टकराने पर वो अजीब सा एहसास</p>
<p>उनके खयालो से मेरा दिल महकता था हर पल<br />
उनके दिखने से मेरे खुशियों में होती थी हलचल<br />
एक झलक के लिए पागल हम कोई अकेले नहीं थे<br />
देख के मौसम को मौसम भी हो जाता था चंचल</p>
<p>जिंदगी खुश थी और मौसम खुशगवार था<br />
पर शायद इतनी खुशियों से वक़्त को इंकार था<br />
जाने क्या सोच कर ठुकरा दिया मौसम ने मुझे<br />
मेरे सामने तो बस सवालों का अंबार था</p>
<p>मौसम में कई नए फूल खिलने लगे थे<br />
जैसे तैसे हम अपने ज़ख्म सिलने लगे थे<br />
अब मौसम के दिल का कुमार कोई और था<br />
कई सवालों के जवाब भी हमे मिलने लगे थे</p>
<p>खैर!!<br />
अब बहुत दूर हो चुके हैं अपनी जिंदगी के रास्ते<br />
शायद दर्द भी ढल जाये यूँ ही आस्ते आस्ते<br />
जाने क्यूँ समझ नहीं पाया इस छोटी सी बात को<br />
अरे! मौसम तो होता ही है बदलने के वास्ते ...<br />
................................. Shubhashish(2005)</p>
<p>In Printable Format<br />
<a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/msm_0.jpg"><img class="alignleft size-thumbnail wp-image-173" src="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/msm_0.jpg?w=74" alt="" width="74" height="96" /></a><br />
<a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/msm2_3.jpg"><img class="alignleft size-thumbnail wp-image-173" src="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/msm2_3.jpg?w=74" alt="" width="74" height="96" /></a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[प्यार सामने होता है]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=147</link>
<pubDate>Fri, 02 May 2008 04:44:38 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=147</guid>
<description><![CDATA[प्यार सामने होता है उससे इकरार सामने ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>प्यार सामने होता है उससे इकरार सामने होता है,<br />
हम जिससे मोहब्बत करते हैं उसका इन्तजार सामने होता है,<br />
इस दबे हुए दिल मे भी तब आँसू कि लडी लग जाती है,<br />
जब किसी गैर कि बाहों मे अपना यार सामने होता है&#124;<br />
................................. Shubhashish(2005)</p>
<p>{संदर्भ :- कॉलेज में अकसर दो दोस्तों को एक ही लड़की पसंद होती है, अब बेचारा दूसरा दोस्त सिर्फ सब कुछ देखता है की जिसे वो पसंद करता है उसका wait उसी के सामने  कोई और कर रहा है  :P , मजाक नहीं यार, भावनाओ को समझो }</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[बड़ा अजीब सा है वो]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=146</link>
<pubDate>Wed, 30 Apr 2008 09:10:46 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=146</guid>
<description><![CDATA[यूँ कहने को तो कई दिल-अजीज सा है वो, 
पर ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>यूँ कहने को तो कई दिल-अजीज सा है वो, <br />
पर फिर भी सच में बड़ा अजीब सा है वो, </p>
<p>दिन रात गैरों को वही सब बाटता रहता,<br />
जिस चीज़ के लिए खुद बहुत गरीब सा है वो,</p>
<p>कितने दोस्त हैं उसके ज़माने भर में लेकिन,<br />
खुद अपनी किस्मत के लिए एक रकीब सा है वो, </p>
<p>तमाम सितारों के बीच में भी जो तन्हा ही रह जाता, <br />
कुछ वैसे ही चाँद जैसा नसीब सा है वो,</p>
<p>भाई भाई के खून का जहाँ प्यासा हो गया,<br />
उस ज़माने में भी एक अदब तहजीब सा है वो,</p>
<p>जब नीद नहीं आती तो उसको सोचता हूँ मैं,<br />
वक़्त गुजारने को, मेरे लिए, एक तरकीब सा है वो, <br />
......................................... Shubhashish</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[रुक्सत]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=145</link>
<pubDate>Tue, 29 Apr 2008 09:06:14 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=145</guid>
<description><![CDATA[(ये कविता मैंने २००५ में अपने seniours के लि]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:left;">(ये कविता मैंने २००५ में अपने seniours के लिए उनके farewell पे लिखी थी, जिसे आज यहाँ publish कर रहा हूँ )</p>
<p style="text-align:center;">Ruqsat ’05<br />
रुक्सत…</p>
<p style="text-align:center;">By: Shubhashish Pandey</p>
<p style="text-align:center;">जैसे अभी कल ही तो मिले थे,<br />
समां था कितना प्यारा,<br />
लगा के सीने से अपने,<br />
किसी ने किया था <strong>अभिषेक</strong> हमारा,</p>
<p style="text-align:center;">थे साथ <strong>नवेंदु</strong> कई मगर,<br />
ना सर पे माँ का <strong>आँचल</strong> था,<br />
पर <strong>रवि प्रतीक</strong> उन <strong>दीपक</strong> से,<br />
मॅन का हर कोना <strong>उज्जवल</strong> था,</p>
<p style="text-align:center;">रुला के हसन हँसा के रुलाना,<br />
टूट जाए तो फिर उनका <strong>धीरज</strong> बंधना,<br />
<strong>अमित</strong> खुशियों से नाचे <strong>मयूर</strong> मेरे मॅन के,<br />
याद कर के उनका हमें कैंटीन ले जाना,</p>
<p style="text-align:center;">कैसे भूलूंगा वो Exams की टेंशन<br />
<strong>आदित्य मयंक</strong> के साथ पढना-पढाना,<br />
<strong>पीयूष</strong> बोली सदा दिल में <strong>अंकित </strong>रहेगी,<br />
गुज़र जाये भले कॉलेज का जमाना,</p>
<p style="text-align:center;">हरफनमौला अदाओं से जीता<br />
जिन्होंने हर दिल को,<br />
कैसे <strong>रुक्सत</strong> का पायेंगे ,<br />
इन शाक्सियत के <strong>बैसिल</strong> को,</p>
<p style="text-align:center;">मस्ती के पलों में जब भी<br />
कोई युगल सुर से सुर मिलाएंगे,<br />
हमें तो हमेशा कॉलेज के<br />
<strong>फणीन्द्र </strong>और <strong>मंजू</strong> ही याद आयेंगे</p>
<p style="text-align:center;">साथ बाटी हैं हमनें खुशियाँ अपनी सारी,<br />
वक़्त <strong>राकेश</strong> या <strong>निशांत लवनीत</strong> का हो,<br />
किसी का कहाँ कोई डर है रहता,<br />
जब <strong>आशीष</strong> स्वयम <strong>अजय चक्रेश</strong> का हो,</p>
<p style="text-align:center;"><strong>तमन्ना </strong>हमारी बस इतनी है तुमसे,<br />
ना तोड़ना कभी आपसी प्रेम के धागे,<br />
आज लगता है मुश्किल तुम्हे छोड़ पाना,<br />
पर मंजिल तुम्हारी है <strong>सूरज</strong> से आगे,</p>
<p style="text-align:center;"><strong>यादें...</strong><br />
(पल जो शायद आप कभी भूल नहीं पाएंगे)<br />
By: Shubhashish Pandey</p>
<p style="text-align:center;">वोलीबाल की गेंदे, वो क्रिकेट का बल्ला,<br />
कट जाए जो लाईट तो टोपी पे हल्ला,<br />
रात की तनहाइयों में वो आपस की बातें,<br />
साथ बैठ के बनाना वो धुवें का छल्ला,</p>
<p style="text-align:center;">12 बजे रात में बर्थडे की लातें,<br />
फिर लगा के सीने से देना सौगातें,</p>
<p style="text-align:center;">खोखे पे बैठ के वो चौपाल लगाना,<br />
Juniors को जबरदस्ती के Funde पिलाना,<br />
फिर अचानक ही कही से थी आवाज आती,<br />
“पलट दो!-पलट दो!<br />
वर्ना पराठा जल जायेगा मामा..."</p>
<p style="text-align:center;">गर्ल्स हॉस्टल पर हर रात का ग्रुप-Discussion<br />
दिवाली-होली पर करना वो चन्दा collection;<br />
वो जाडो की रातों में श्री राम की चाय,<br />
<a href="http://apurn.wordpress.com/2008/04/12/juli-the-real-story/">जुली</a> किसकी है ?? - करना इसपे compromisation,</p>
<p style="text-align:center;">हर पल में अपनी कहानी छुपी है,<br />
मस्ती के दिन हो या DEC 31 की रातें,<br />
याद आएगा वो बिता हुआ हर वो लम्हा,<br />
याद करेंगे जब भी हम अपने कॉलेज की बातें</p>
<p style="text-align:center;">...............................Shubhashish(2005)</p>
<p style="text-align:left;"> इस कविता में प्रयुक्त शब्द में से ज्यादातर शब्द मेरे seniours के नाम हैं कुछ नामो के अर्थ यहाँ दिए हैं !</p>
<p style="text-align:left;">नवेंदु =&#62; नया चाँद ,अमित =&#62; अपार, आदित्य =&#62; सूरज, मयंक =&#62; चाँद, पियूष =&#62; अमृत, बैसिल =&#62; राजा, राकेश = चाँद, निशांत =&#62; रात का अंत करने वाला, लवनीत =&#62; सूरज की पहलो किरण</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कल फिर]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=144</link>
<pubDate>Mon, 28 Apr 2008 09:20:42 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=144</guid>
<description><![CDATA[कल फिर कुछ पहलू अनछुए से रह गये
कल फिर क]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>कल फिर कुछ पहलू अनछुए से रह गये<br />
कल फिर कुछ वादे अनकहे से रह गये<br />
शायद मै जानता था कि ये आखिरी मुलाकात है<br />
तभी कई अरमान दिल में दबे रह गये<br />
.......................................... Shubhashish(2005)</p>
]]></content:encoded>
</item>

</channel>
</rss>
