<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><!-- generator="wordpress.com" -->
<rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	>

<channel>
	<title>बरस &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/बरस/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "बरस"</description>
	<pubDate>Thu, 16 Oct 2008 07:44:37 +0000</pubDate>

	<generator>http://wordpress.com/tags/</generator>
	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[वह कब आयेगी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=969</link>
<pubDate>Sat, 26 Apr 2008 10:43:40 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/04/26/wah-kab-aayegii/</guid>
<description><![CDATA[वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी
जिसका इ‍ंति]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी<br />
जिसका इ‍ंतिज़ार करता हूँ यारा<br />
जिसके लिए फिरता हूँ मारा-मारा<br />
वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी<br />
वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">हमने राहों में लाखों हसीं देखे हैं<br />
उनकी बाँहों में हमनशीं देखे हैं<br />
मेरी कब कोई हमनशीं होगी<br />
हाँ, मेरी कब कोई हमनशीं होगी<br />
वह जो मेरी जान जाँनशीं होगी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी<br />
अपना बनाके मुझे इश्क़ सिखायेगी<br />
वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सोचो बीस बरस गुज़रे तन्हा-तन्हा<br />
अब न रहना मुझे तन्हा-तन्हा<br />
कह दो उसे जाकर मुझे दरस दे<br />
न मुझे दूरी का इक और बरस दे<br />
मेरी जान में जान कब आयेगी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी<br />
जिसका इ‍ंतिज़ार करता हूँ यारा<br />
जिसके लिए फिरता हूँ मारा-मारा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">उससे कहो अपनी इक झलक दे<br />
ज़मीं तो मिली है थोड़ा फ़लक़ दे<br />
अब जिस्म से जान, अब जायेगी<br />
वह मुझे और कितना तड़पायेगी<br />
विरह की सूनी रतियाँ सुलगायेगी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह अब आयेगी जो मुझे चाहेगी<br />
जिसका इंतिज़ार करता हूँ यारा<br />
जिसके लिए फिरता हूँ मारा-मारा</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=956</link>
<pubDate>Wed, 02 Apr 2008 17:03:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/04/02/tumhaarii-khushboo-se-mahak-utha-hai-man/</guid>
<description><![CDATA[तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन
तुम्ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन<br />
तुम्हारे तस्व्वुर से भर आये नयन<br />
बरखा की मखमली फुहार से जी तर है<br />
धीरे-धीरे बुझ रही है दर्द की सूजन</font></p>
<p><font color="#000000">लहू फिर ज़ख़्मे-जिगर से बहा है<br />
दर्द तुम्हारा दिल में मेहमान रहा है<br />
सर्द है बरसों से यह ख़िज़ाँ का मौसम<br />
ज़र्द पत्तों में खो गया है कहीं गुलशन</font></p>
<p><font color="#000000">बहार की नर्म धूप कहीं खो गयी है<br />
मानूस वह चाँदनी किसी छत पे सो गयी है<br />
यह उदास फ़ज़िर भी कितनी तवील है<br />
दिखता नहीं दूर तक उफ़क़ का रोगन</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको पहली नज़र से चाहा दिलो-जाँ से<br />
हर दुआ में मैंने तुमको माँगा आसमाँ से<br />
मेरी मंज़िल मेरी मोहब्बत हो तुम<br />
कैसे भी तुम मेरी बनो, जुड़ जाये बन्धन</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=951</link>
<pubDate>Fri, 28 Mar 2008 17:47:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/03/28/koii-to-tumhein-paane-kii-raah-mile/</guid>
<description><![CDATA[कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले
कभी ते]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले<br />
कभी तेरे आगोश में पनाह मिले<br />
मैं शज़रे-धूप की छाँव में बैठा हूँ<br />
कभी तो इनायते-निगाह मिले</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हाथ तो बढ़ा दो मेरे मसीहा<br />
ज़ख़्मों पे रख दो मरहम का फीहा<br />
बेबसी में मेरा दम घुटने लगा है<br />
फिर से सौंधी हुई सुबह मिले</font></p>
<p><font color="#000000">रुख़े-ख़ुशी मेरी तरफ़ मोड़ दो<br />
मेरे दर्द का हर तागा तोड़ दो<br />
एक ही ख़ाहिश है मेरी बरसों से<br />
तेरे दिल में मुझे जगह मिले</font></p>
<p><font color="#000000">मैं अपनी कोशिशों में रहूँ क़ाबिल<br />
इस दरिया को मिले तेरा साहिल<br />
तुम्हीं से ज़िन्दगी को मानी मिला है<br />
काश कि तेरी-मेरी हर राह मिले</font></p>
<p><font color="#000000">मुश्किलें सब यह आसाँ हो जायें<br />
जो हम दो जिस्म एक जाँ हो जायें<br />
लम्हों में सदियाँ तय कर चुका हूँ<br />
तेरा-मेरा दिल किसी तरह मिले</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तस्व्वुरे-हुस्नो-सादगिए-'शीना']]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=947</link>
<pubDate>Sun, 23 Mar 2008 18:08:24 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/03/23/taswwur-e-husn-o-saadagi-e-sheena/</guid>
<description><![CDATA[सुबह-सा चेहरा, माथे पर सूरज-सी बिन्दिय]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">सुबह-सा चेहरा, माथे पर सूरज-सी बिन्दिया<br />
हँसी, जैसे ख़ुशबू हो कोई, गुनगुनाती हुई<br />
आँखें साँवली-सी, कजरारी-सी<br />
ऐसे झुकती और खुलती थीं<br />
जैसे रात पे सुबह का दरिया बहा दिया हो<br />
वह लट जब चेहरे पर गिरती थीं<br />
यूँ लगता था मानो! बादल की ओट में चाँद हो</font></p>
<p><font color="#000000">उसके पाँव की आहट जैसे बादे-सबा फूलों पर<br />
रूप की सादगी ऐसी जैसे सूफ़ी का तस्व्वुर<br />
रंग बिल्कुल गुले-अंदाम ज़रा-सी बनावट नहीं<br />
लब सुर्ख़ थे ऐसे, जिस तरह गुलाब के पैमाने<br />
ज़ुबाँ नाज़ुक मिज़ाज, वाइज़ो-नासेह की तरह<br />
बदन शीशे जैसा, साफ़-शफ़्फ़ाक़-गुल्फ़ाम<br />
अदा में जुज़ सादगी और कुछ नहीं झलकता था</font></p>
<p><font color="#000000">मालूम नहीं, वह बरस ख़ाब का था कि सच था<br />
उसका वह मेरे घर आना<br />
काँधे से गिरते वह कमर पे दुप्पटे की गाँठ<br />
वह दीपावली के दिए, वह सजावट सब<br />
देखना उसे मेरा एक टुक, सुबहो-शाम, रोज़<br />
वह तूफ़ान जी का, कुछ करके दिखा दें<br />
लिखना तेरा नाम दरो-दर पर, आदतन</font></p>
<p><font color="#000000">आज पाँच बरस हो गये...<br />
I'm still reminiscing about you...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३-२००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[लो! यह दिन भी क़रीब आ गये]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=928</link>
<pubDate>Sat, 15 Mar 2008 04:53:57 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/03/15/lo-yah-din-bhii-qareeb-aa-gaye/</guid>
<description><![CDATA[लो! यह दिन भी क़रीब आ गये जानम
जब मैं तुम]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">लो! यह दिन भी क़रीब आ गये जानम<br />
जब मैं तुम्हारे लिए सरे-बाम खड़ा होता था</font></p>
<p><font color="#000000">इस बरस होली के रंग रास नहीं आयेंगे...</font></p>
<p>सरे-बाम= छत के ऊपर, छज्जे पर, on the roof</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तेरी चुप निगाहें]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=806</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 16:03:34 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/02/18/terii-chup-nigaahein/</guid>
<description><![CDATA[तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें
तेरे ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं, मेरे लिए<br />
एक बार तो कुछ कह दे सनम<br />
तू एक बार तो हाँ कर दे मुझसे<br />
ज़िन्दगी एक झमेला है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी मुस्कुराहटें तेरी सादी अदाएँ<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं मेरे लिए<br />
परियों से भी कहीं ज़्यादा हसीं<br />
खिलती कलियों-सी तू माहजबीं<br />
ख़ुदा ने तुझे बनाया है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे सारे शिकवे वह सभी यादें<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं मेरे लिए<br />
मुझे तेरा इन्तिज़ार था बरसों से<br />
हम एक-दूजे के बने जनमों से<br />
तुमने जनम लिया है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">आँखों में माहताब-सा चमकता है<br />
तेरा चेहरा, तेरा चेहरा, तेरा चेहरा<br />
मैं सहराँ-सहराँ भटकता हूँ तेरे लिए<br />
तू एक बार तो हाँ कर दे मुझसे<br />
ज़िन्दगी एक झमेला है मेरे लिए</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[और इक आह की ख़लिश देती है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%87%e0%a4%95-%e0%a4%86%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88/</link>
<pubDate>Sat, 15 Sep 2007 09:16:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/aur-ik-aah-kii-khalish-detii-hai/</guid>
<description><![CDATA[रूह बहुत बेक़रार&#8217; बहुत बेकल है
इस जिस]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">रूह बहुत बेक़रार' बहुत बेकल है<br />
इस जिस्म से छुटकारा चाहती है<br />
अगर तुम न मिली मुझको...<br />
यह बेक़रारी' यह बेकली उसी दिन से है<br />
जब तुम्हें पहली बार देखा था...</font></p>
<p><font color="#000000">वह अपलक आँखें<br />
वह थमी हुई साँसें<br />
और वह रवाँ धड़कनों की आवाज़...<br />
सारे एहसास,<br />
तुम्हारे तस्व्वुर से आज भी जाग उठते हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारी मोहब्बत मुझे हर दम साँस देती है<br />
और इक आह की ख़लिश देती है<br />
हर लम्हा... हर पल...<br />
मैं कब तक यूँ ही ज़ीस्त की गिरह में फँसा रहूँगा!</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा हाथ थाम लो,<br />
हमसफ़र बनके अपना लो मुझे<br />
या फिर अपने ही पाक़ीज़ा हाथों से...<br />
दफ़्न कर दो मुझे,<br />
एक यही चाह मुझे बरसों से है</font></p>
<p><font color="#000000">एक यही चाह मुझे बरसों से है...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>

</channel>
</rss>
