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	<title>फिल्म &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/फिल्म/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "फिल्म"</description>
	<pubDate>Sun, 06 Jul 2008 13:32:18 +0000</pubDate>

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<item>
<title><![CDATA[करते हास्य कविता की पैनी धार]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/?p=360</link>
<pubDate>Sat, 26 Apr 2008 15:40:58 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
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<description><![CDATA[फंदेबाज आया और बोला
‘दीपक बापू, तुम क्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#003366;"><strong>फंदेबाज आया और बोला<br />
‘दीपक बापू, तुम क्रिकेट जरूर देखा करो<br />
अरे, तुम इस बात की चिंता क्यांे करते हो कि<br />
कौन टीम जीत रही है और कौन हार<br />
तुम तो देखो उसमे नृत्य और गाने जैसे चित्रहार<br />
इसीलिये तो क्रिकेट और फिल्म को मिक्स किया है<br />
खेल भी होगा और साथ में मनोरंजन का भी व्यापार<br />
यह क्या रेडियो पर गाने सुनते हो<br />
और ठोकते हो ब्लाग पर हास्य कविता<br />
तुम्हारे पाठक तो उधर ही है<br />
जहां है क्रिकेट की बहार’’</strong></span><br />
<span style="color:#003366;"><strong>अपने चश्में और नाक के बीच से<br />
आंखों से झांकते हुए उसे घूरा<br />
और फिर कहैं दीपक बापू<br />
‘तुमने क्रिकेट कितनी खेली होगी<br />
जितनी हमने झेली होगी<br />
अगर उसमें वक्त नहीं खराब लोग नहीं करवाते<br />
तो हम आज प्रेमचंद जैसे कहलाते<br />
बैट किसी के हाथ में खेलता कोई और है<br />
बाल जिसके हाथ में होती<br />
वह फैंकता नजर आता है<br />
विकेट लेता  कोई और है<br />
जब से सुना यह हमने<br />
उतर गया क्रिकेट का नशा<br />
अब तो हास्य कविता में मन है बसा<br />
यह डांस देखने के लिये बहुत चैनल है<br />
फिर क्रिकेट के साथ क्या देखना<br />
दिखा रहे हैं जो लोग<br />
उनका खेल से क्या वास्ता<br />
उनका तो लोगों की जेब पर जोर है<br />
अब नहीं उठा सकते क्रिकेट के मनोरंजन का बोझ<br />
पाठक जब देख रहे हैं क्रिकेट<br />
तो हम ठोक देंगे कोई कविता<br />
मैच देखने के बाद सबकी हालत तो<br />
वैसे ही हो जाती है<br />
जैसे नाचने के बाद मैले पैर<br />
देखकर रोता मोर है<br />
फिर मन बहलाने के लिये हमारे पास तो<br />
अपने पास शब्दों का है बहुत भंडार<br />
लिख-लिखकर होती जा रही  अपनी<br />
हास्य कविता की पैनी धार<br />
.....................................</p>
<p></strong></span></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जोधा-अक़बर सिर्फ़ एक फिल्म है]]></title>
<link>http://itsme.wordpress.com/?p=239</link>
<pubDate>Wed, 27 Feb 2008 01:37:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>Amit</dc:creator>
<guid>http://itsme.wordpress.com/?p=239</guid>
<description><![CDATA[अभी हाल ही में रिलीज़ हुई रितिक और ऐश्व]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>अभी हाल ही में रिलीज़ हुई रितिक और ऐश्वर्य की फ़िल्म <a href="http://www.imdb.com/title/tt0449994/">जोधा अक़बर</a> को लेकर काफ़ी हल्ला हो चुका है। बहुतों का कहना है कि जोधा वास्तव में मुग़ल बादशाह अक़बर की शरीक-ए-हयात न थी वरन्‌ उनके साहिबज़ादे और अगले मुग़ल बादशाह जहाँगीर की बेग़म थी। और ये कुछ लोग इसलिए आशुतोष गोवारिकर से खफ़ा हैं कि खामखा पुत्रवधु को ससुर की लुगाई करार दिया जा रहा है और इतिहास की वाट लगाई जा रही है।</p>
<p><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Jodhaa_Akbar"><img src="http://img167.imageshack.us/img167/6144/415pxjodhaaakbarpostertf4.jpg" border="0" /></a></p>
<p>मुझे यह सोच उन लोगों पर हंसी आ रही है कि खामखा अपना समय वे लोग एक बेकार के मुद्दे पर हल्ला कर व्यर्थ कर रहे हैं। फ़िल्में कब से सच्चाई का आईना हो गईं? अधिकतर फ़िल्में मनोरंजन के लिए बनाई जाती हैं और जोधा-अक़बर भी एक कमर्शियल फ़िल्म है जिसका उद्देश्य भी मनोरंजन ही है न कि लोगों का ज्ञानवर्धन करना। तो कुछ हल्ला मचाने वाले लोग यह कह रहे हैं कि जिस तरह जन्नतनशीन फिल्म निर्देशक के.आसिफ़ द्वारा बनाई गई दिलीप कुमार तथा मधुबाला की फ़िल्म <a href="http://www.imdb.com/title/tt0054098/">मुग़ल-ए-आज़म</a> ने जोधा का अक़बर की बेग़म होने की भ्रांति फैलाई थी उसी प्रकार फ़िल्म जोधा-अक़बर भी उसी भ्रांति को कायम रखे है।</p>
<p>पर बात वही है कि फ़िल्में कब से सच्ची घटनाओं को जस-का-तस देखने का आईना हो गईं? जिन अत्यधिक पढ़े-लिखे महानुभावों को यह पता है कि जोधा वास्तव में अक़बर की बेग़म न होकर जहाँगीर की बीवी थी उन पढ़े-लिखे महानुभावों को यह न दिखा कि फ़िल्म जोधा-अक़बर के आरंभ में कथा बाँचते हुए अमिताभ बच्चन कहते हैं:</p>
<blockquote><p>
हिन्दुस्तान.....<br />
इतिहास गवाह है कि इस ज़मीन पर खून की खुराक से ही सल्तनतें पनपती रही हैं। सन्‌ 1011 से कितनों ने ही वक्त-२ इसे लूटकर इस फूल को अपने कदमों तले रौंदा है। और फिर..... <strong>सन्‌ 1450 में कदम रखा मुग़लों ने</strong>; जिन्होंने इसे अपना घर बनाया, इसे प्यार दिया और इसे नवाज़ा। <strong>बादशाह बाबर से शुरु हुई मुग़लिया हुकूमत</strong> हुमायूँ से होती हुई अक़बर तक पहुँची जिसे मुग़लिया दौर में सबसे ऊँचा दर्जा हासिल हुआ।
</p></blockquote>
<p>फ़िल्म वालों की तो क्या कहें पर इन पढ़े-लिखे विद्वानों और इतिहासकारों पर अवश्य आश्चर्य हो रहा है कि इन्होंने इस बात पर हल्ला नहीं मचाया कि फ़िल्म में कहा गया है कि मुग़ल सन्‌ 1450 में आए थे। अब यह तो फ़िल्म में सही कहा गया है कि मुग़लिया सल्तनत की नींव बादशाह बाबर ने रखी थी पर यह मुझे समझ नहीं आता कि मुग़ल सन्‌ 1450 में भारत कैसे आ गए थे क्योंकि मुग़ल सल्तनत की नींव बाबर ने सन्‌ 1504 के आसपास रखी थी जब उसने काबुल और खोरासन के पूर्वी भागों और सिंध पर कब्ज़ा किया था। और तो और, उसे छोड़िए, <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Babur">बाबर</a> का जन्म सन्‌ 1483 में हुआ था तो वह कैसे सन्‌ 1450 में भारत आकर मुग़लिया सल्तनत की शुरुआत कर सका यह वाकई चर्चा का विषय है। क्या कोई समय में यात्रा कर सकने वाला उपकरण उस काल में मौजूद था या भविष्य से कोई वहाँ जाएगा यह करने के लिए? ;)</p>
<p>फ़िल्म में यह बात तो सही दिखाई है कि सन्‌ 1555 में बादशाह हुमायूँ की अकस्मात मृत्यु से लफ़ड़ा हो गया था और हेमचन्द्र विक्रमादित्य भार्गव उर्फ़ हेमु ने दिल्ली और आगरा पर अपना कब्ज़ा जमा अपने को सम्राट घोषित कर दिया था और फिर बैरम खाँ की कमान में चलती फौज ने पानीपत की दूसरी लड़ाई में हेमु की अपने से दोगुणी फ़ौज से लोहा लिया था और हेमु आँख में तीर लगने से ज़ख्मी हो गिर पड़ा था जिसका बैरम खाँ ने तब सिर कलम कर दिया था जब अक़बर ने ऐसा करने से मना किया था। यानि कि पूर्णतया झूठ नहीं दिखाया है फ़िल्म में, कुछ-२ जगह पर सही इतिहास फ़िल्माया गया है।</p>
<p>पर बात यह नहीं है कि क्या सही फ़िल्माया है, बात यह है कि इन हल्ला करने वाले विद्वानों को सन्‌ 1450 वाली त्रुटि क्यों न दिखी? जोधा का अक़बर की बीवी न होने का गूढ़ राज़ मालूम है जो कि अभी भी विवादास्पद है क्योंकि इस बारे में कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं पर तारीख का नहीं मालूम जिसके बारे में पक्के ठोस प्रमाण हैं और जो दर्ज इतिहास है?</p>
<p>ज़ाती तौर पर मेरा मानना है कि फ़िल्म मनोरंजन के लिए होती हैं, इतनी टेन्शन न ही लो तो बेहतर होता है। तकरीबन दो वर्ष पहले आई हॉलीवुड की फ़िल्म <a href="http://www.imdb.com/title/tt0416449/">300</a> का ही उदाहरण लें जो कि <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Battle_of_Thermopylae">थरमॉपली की प्रसिद्ध लड़ाई</a> पर बनी थी जिसमें कथित 300 स्पॉर्टा के सैनिकों ने हज़ारों-लाखों की पर्शिया की फौज से लोहा लिया था, परन्तु उसमें दिखाया गया कि अंत में सिर्फ़ स्पॉर्टा के ही सैनिक रह गए जो मारे गए परंतु इतिहास तो कुछ और ही कहता है। दर्ज इतिहास के अनुसार उन 300 स्पॉर्टा के सैनिकों के साथ तकरीबन 700 थेस्पिया के सैनिकों ने भी अंत तक ज़र्कसीस की सागर सी विशाल फौज से लोहा लेते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। तो इस बारंबार दोहराए जाने वाले गूफ़-अप(Goof Up) को क्या कहेंगे कि जब भी थरमॉपली की प्रसिद्ध लड़ाई का ज़िक्र आता है तो सिर्फ़ उन 300 स्पॉर्टा के सैनिकों तथा उनके राजा लियोनाईडस की वाह वाही होती है जबकि उनके साथ आखिरी साँस तक लड़ते हुए शहीद हुए 700 गुमनाम थेस्पियन सैनिक अपने हिस्से की वाह-वाही से वंचित रह जाते हैं!!</p>
<p>तो बात यह भी नहीं है कि फ़िल्म जोधा-अक़बर में बताई गई गलत तारीख को हल्ला करने वाले इतिहास के विद्वानों ने अनदेखा कर दिया; बात यह है कि फ़िल्म को फ़िल्म की तरह ही लो यानि कि काल्पनिक कहानी के रूप में। यदि यह कहा जाता है कि फ़िल्म सच्ची घटनाओं पर बनी है और फिर उसमें कोई बात गलत दिखाई जाती है तो उसका विरोध लाज़मी है।</p>
<p>और जो हल्ला करने वाले लोग यह कहते हैं कि इस तरह की गलतियों से लोगों को गलत ज्ञान मिलता है तो भई जो व्यक्ति ठोस दर्ज किताबी ज्ञान लेने की जगह फ़िल्म देख यह ज्ञान लेता है कि अक़बर कब बादशाह बना और उसकी बीवी का क्या नाम था तो उस व्यक्ति और उसकी बुद्धि पर तरस ही आ सकता है!! ;)</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।]]></title>
<link>http://webmsony.wordpress.com/?p=44</link>
<pubDate>Wed, 06 Feb 2008 18:55:26 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rakesh</dc:creator>
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<description><![CDATA[मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="center">मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,<br />
प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,<br />
पहले भोग लगा लूँ तुझको फिर प्रसाद जग पाएगा,<br />
सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।१।</p>
<p>प्यास तुझे तो, विश्व तपाकर पूर्ण निकालूँगा हाला,<br />
एक पाँव से साकी बनकर नाचूँगा लेकर प्याला,<br />
जीवन की मधुता तो तेरे ऊपर कब का वार चुका,<br />
आज निछावर कर दूँगा मैं तुझ पर जग की मधुशाला।।२।</p>
<p>प्रियतम, तू मेरी हाला है, मैं तेरा प्यासा प्याला,<br />
अपने को मुझमें भरकर तू बनता है पीनेवाला,<br />
मैं तुझको छक छलका करता, मस्त मुझे पी तू होता,<br />
एक दूसरे की हम दोनों आज परस्पर मधुशाला।।३।</p>
<p>भावुकता अंगूर लता से खींच कल्पना की हाला,<br />
किव साकी बनकर आया है भरकर किवता का प्याला,<br />
कभी न कण-भर खाली होगा लाख पिएँ, दो लाख पिएँ!<br />
पाठकगण हैं पीनेवाले, पुस्तक मेरी मधुशाला।।४।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दोस्ती नाम नहीं सिर्फ़ दोस्तों के साथ रेहने का.....]]></title>
<link>http://webmsony.wordpress.com/?p=42</link>
<pubDate>Sat, 02 Feb 2008 13:00:06 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rakesh</dc:creator>
<guid>http://webmsony.wordpress.com/?p=42</guid>
<description><![CDATA[दोस्ती नाम नहीं सिर्फ़ दोस्तों के साथ र]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="center"><font color="#ff0000">दोस्ती नाम नहीं सिर्फ़ दोस्तों के साथ रेहने का..<br />
बल्कि दोस्त ही जिन्दगी बन जाते हैं, दोस्ती में..</p>
<p>जरुरत नहीं पडती, दोस्त की तस्वीर की.<br />
देखो जो आईना तो दोस्त नज़र आते हैं, दोस्ती में..</p>
<p>येह तो बहाना है कि मिल नहीं पाये दोस्तों से आज..<br />
दिल पे हाथ रखते ही एहसास उनके हो जाते हैं, दोस्ती में..</p>
<p>नाम की तो जरूरत हई नहीं पडती इस रिश्ते मे कभी..<br />
पूछे नाम अपना ओर, दोस्तॊं का बताते हैं, दोस्ती में..</p>
<p>कौन केहता है कि दोस्त हो सकते हैं जुदा कभी..<br />
दूर रेह्कर भी दोस्त, बिल्कुल करीब नज़र आते हैं, दोस्ती में..</p>
<p>सिर्फ़ भ्रम हे कि दोस्त होते ह अलग-अलग..<br />
दर्द हो इनको ओर, आंसू उनके आते हैं , दोस्ती में..</p>
<p>माना इश्क है खुदा, प्यार करने वालों के लिये "अभी"<br />
पर हम तो अपना सिर झुकाते हैं, दोस्ती में..</p>
<p>ओर एक ही दवा है गम की दुनिया में क्युकि..<br />
भूल के सारे गम, दोस्तों के साथ मुस्कुराते हैं, दोस्ती में. i miss you dost</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पति पत्नी और अटल जी की बातें]]></title>
<link>http://webmsony.wordpress.com/2008/01/22/%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%9f%e0%a4%b2-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%87/</link>
<pubDate>Tue, 22 Jan 2008 12:47:34 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rakesh</dc:creator>
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<description><![CDATA[काफी दिन से सोच रहा था कुछ चुटकुला लिख]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#808080"><font color="#808000">काफी दिन से सोच रहा था कुछ चुटकुला लिखूं &#124; कल मेरे १ मित्र ने मुझसे कहा भी की आज कल चुटकुले नही लिख रहे हो &#124;<br />
मुझे यह जानकर काफी खुशी हुई की लोग मुझे याद करते हैं भले ही हंसने के बहाने &#124; आपलोगों के लिए मैं इसी तरह लिखता रहूँ और आप मुझे अपने कमेंट से मुझे मेरे बारे मी बताते रहे &#124;<br />
</font></font></p>
<p><font color="#808080"><font color="#808000">तो अब मैं आ गया कुछ चुटकुलों के साथ &#124;<br />
</font></font></p>
<p><font color="#808080"><font color="#808000">[1] </font></font></p>
<p><font color="#808080"><font color="#808000"> पति-पत्नी आपस में बातें कर रहे थे।<br />
पति - ”मेरे लिये 11 का अंक हमेशा ही शुभ रहा है। 11वें महीने की 11 तारीख को 11 बजे हमारी शादी हुई। हमारे मकान का नंबर भी 11 है। एक रोज मुझे 11 बजकर 11 मिनिट और 11 सेकण्ड पर किसी ने बताया कि आज बड़ी रेस होने वाली है। मैंने सोचा कि मेरे लिये 11 के नम्बर में जरूर चमत्कार छिपे हुये हैं, मैं गया और 11वें नम्बर की रेस के लिये 11 वें घोड़े पर 11 हजार रूपये लगा दिये।”<br />
पत्नी - ”और घोड़ा जीत गया ?”<br />
पति - ”यही तो रोना है! कम्बख्त 11वें नम्बर पर आया!”</font></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हर पल आती रह तेरी याद]]></title>
<link>http://webmsony.wordpress.com/2008/01/05/%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b2-%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6/</link>
<pubDate>Sat, 05 Jan 2008 12:58:56 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rakesh</dc:creator>
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<description><![CDATA[एक मुद्दत हुई दिल को सताती रही तेरी या]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="center"><font color="#000000"><font size="4"><span style="color:#ff99ff;">एक मुद्दत हुई दिल को सताती रही तेरी याद  </span><br />
</font><font size="4"><span style="color:#ff99ff;">आंसू बन लहू में घुल जाती रही तेरी  याद<br />
</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">सुबह को लालिमअ बन छा  जाती रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">धुप में साया  बन साथ चलती रहi तेरी याद </span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">दोपहर छाया बन तासीर दिलाती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">शाम को हवा का झोन बन लुभाती  रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">रात के अँधेरे में जुगनू बन चमकती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">आसमान में तारों संग टीम टीम  आती रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">चांदनी बन ज़मीं को नहलाती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">रोज़ ख्वाब बन तेरी दीद कराती  रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">गर्मी में हवा का झोंका बन आ जाती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">इन्द्रधनुष के रंगों में रंग  जाती रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">सर्दी में खिली धुप सी चमकती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">पहाडों पर बर्फ बन बिछ जाती  रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">फूलों पर तितली बन मंडराती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">हवा को खुशबू बन महकाती रही  तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">बेलों को सहारा बन बढाती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">बागों को बहार बन सजाती रही  तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">होली में गुलाल बन रंग उडाती रही तेरी  याद</span><br />
</font><font size="4"><span style="color:#ff99ff;">दिवाली में चिराज बन उजाले फैलाती रही तेरी  याद<br />
</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">ईद में चाँद बन खुशियाँ  लुटती रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">च्रिस्त्मस  में संता बन तोहफे बांटी रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">थक गया तो दिल बहलाने आ जाती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">चोट खाई तो सहलाने आ जाती रही  तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">रूठ गया तो मनाने आ जाती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">गिर गया तो उठाने आ जाती रही  तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">सोने चला तो लोरी सुनाने आ जाती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">रोने लगा तो हँसाने आ जाती  रही तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">जीत गया तो जश्न मनाने आ जाती रही तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">हार गया तो समझाने आ जाती रही  तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">महफ़िल में रौनक बन छा जाती रही तेरी  याद</span><br />
</font><font size="4"><span style="color:#ff99ff;">तन्हाई में साथ निभाने आ जाती रही तेरी  याद<br />
</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">मेरे हर ज़र्रा -ओ -कतरे  में बसी हुई हुई तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">मेरी  ग़ज़ल से रूह तक उतर रही है तेरी याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;"></span><br />
<span style="color:#ff99ff;">मौत के बाद भी "खाक " से न जुदा होगी तेरी  याद</span><br />
<span style="color:#ff99ff;">ख्श्बू बन हर तरफ फिजा में  महका करेगी तेरी याद</span></font></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आज भी इन आँखों में वो खामोशियाँ क्यों है]]></title>
<link>http://webmsony.wordpress.com/2008/01/05/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%a8-%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a5%8b-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%b6/</link>
<pubDate>Sat, 05 Jan 2008 12:55:22 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rakesh</dc:creator>
<guid>http://webmsony.wordpress.com/2008/01/05/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%a8-%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a5%8b-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%b6/</guid>
<description><![CDATA[मुद्दत हो गयी उन तनहाइयों  को गुजरे ,
आज]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<div align="center"><font color="#000000"><span style="color:#330099;">मुद्दत हो गयी उन तनहाइयों  को गुजरे ,</span><br />
<span style="color:#330099;">आज भी इन आँखों में वो खामोशियाँ क्यों है</span><br />
<span style="color:#330099;">चुन चुन कर जिसकी यादों  को अपने जीवन से निकाला मैंने</span><br />
<span style="color:#330099;">मेरे दिल पर आज भी उसकी हुकूमत क्यों है</span><br />
<span style="color:#330099;">तोड़  दिया जिसने यकीं मोहब्बत से मेरा</span><br />
<span style="color:#330099;">वो शख्स आज भी मेरे प्यार के काबिल क्यों  है</span><br />
<span style="color:#330099;">रास ना आये जिसको चाहत मेरी</span><br />
<span style="color:#330099;">आज भी वो मेरे दिन और रात में शामिल क्यों  है</span><br />
<span style="color:#330099;">खत्म हो गया जो रिश्ता वो आज भी सांस ले रहा है</span><br />
<span style="color:#330099;">मेरे वर्तमान में जीवित वो  आज भी मेरा अतीत क्यों है</span></font></div>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[काश! ब्लोग नहीं बनाता ]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/2007/12/20/kaash-blog-naheen-banaataa/</link>
<pubDate>Thu, 20 Dec 2007 14:29:29 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
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<description><![CDATA[प्रेयसी और प्रियतम दोनों अकेले चैट
कर]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>प्रेयसी और प्रियतम दोनों अकेले चैट<br />
करते हो गए  थे बोर<br />
दोनों खुश नहीं थे इस बात से कि<br />
उनके इश्क के जमाने में नहीं है<br />
चर्चा और शोर<br />
इसलिए सोचा ब्लोग बनाकर<br />
करेंगे इश्क की बाते<br />
सुने -पढें लोग उनके बारे में<br />
और प्रेमियों की भी रंगीन हो रातें<br />
छुप-छुपकर इश्क करने की<br />
लोगों को सिखायेंगे नई खुराफातें<br />
लोग कहेंगे 'वंस मोर' </p>
<p>दोनों ने शुरू किया ब्लोग लिखने का अभियान<br />
प्रियतम का ब्लोग कला वर्ग में था<br />
और प्रियतमा  को तकनीकी शब्द पसंद  था<br />
पर दोनों का कविता पर ही होता मिलान<br />
दोनों का लिखने पर ही  था जोर</p>
<p>एक दूसरा ब्लोगर भी यह सब देख रहा था<br />
सोफ्टवेयर इंजीनियर  था<br />
और कविताओं में जिन्दगी डुबो रहा था<br />
पर नहीं था दिल का कमजोर<br />
उसने लगाया प्रेमिका के ब्लोग पर कमेन्ट<br />
और देने लगा तकनीकी सलाहें<br />
खोल रहा था उसके ब्लोग की राहें<br />
प्रियतम पहले नहीं समझा उसकी बातें<br />
इसलिए कवितायेँ लिखता जा रहा था और<br />
प्रियतमा के दिल पर दूसरा<br />
कर रहा था अपना नाम पैंट<br />
बना रहा था उसमें अपने इश्क का ठौर<br />
अचानक बंद हो गयी आना  प्रियतमा की कमेन्ट<br />
आखिर उसे पता चली सब बातें<br />
वह बिचारा अब भी<br />
बिना कमेन्ट के ब्लोग ढो रहा है<br />
विरह की कवितायेँ लिख कर<br />
गुजर रहा है रातें<br />
और सोचता है कि<br />
'काश नहीं बनाता ब्लोग<br />
इससे तो अच्छा यही रहता  कि<br />
होता रहता बोर'</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[एक बार जीने के लिए सौ बार मरे है हम]]></title>
<link>http://webmsony.wordpress.com/2007/12/06/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b8%e0%a5%8c-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%b0/</link>
<pubDate>Thu, 06 Dec 2007 11:16:48 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rakesh</dc:creator>
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<description><![CDATA[एक बार जीने के लिए सौ बार मरे है हम
एक म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="center"><font color="#ffffff">एक बार जीने के लिए सौ बार मरे है हम<br />
एक मुसकुराहट के लिए कितना सिसका यह गम<br />
यह जीवन जलता जलता भी नहीं<br />
कितना जलया इसने हर दम<br />
एक लमहा जो छुप गया आसमान तले<br />
ढूँढते फिर रहे हैं बस उमर भर से हम<br />
मेरी खामोशियाँ बन गई मेरे  गुनाह<br />
हर पल नया गुनाह करता रहा यह मन<br />
उम्मीद की यह लौ क्यों नहीं बुझती<br />
थम गयी जब यह सासों की सरगम<br />
किस तरफ़ जा रहा हूँ ,क्यों जा रहा हूँ<br />
कोइ बता दे मुझे कहाँ ले जायेंगे यह कदम<br />
अपनी मजबूरिओं से नराज़ है यह दिल<br />
मजबूरियों के लिए उठाये गए ज़िंदगी तेरे सितम<br />
आँसू में भीगा यह मन यह आँचल<br />
इक हँसी की चाह मैं अब तक आंखें हैं यह नम !!!!!!!!!!!!</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[लव के रूप | मैं प्यार करती ]]></title>
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<pubDate>Thu, 06 Dec 2007 11:15:40 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rakesh</dc:creator>
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<description><![CDATA[ मैं तुमसे बहूऊऊऊऊऊऊत् प्यार करती हूँ ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="center"><font color="#ffffff" face="Arial" size="2"> मैं तुमसे बहूऊऊऊऊऊऊत् प्यार करती हूँ .<br />
मैं कुछ भी नहीं तुम्हारे बिना !<br />
मुझमे क्या कमी है की वो प्यार नहीं करती !<br />
मैं तुम्हे पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता हूँ !<br />
मैं तुमपे जान देती हूँ , क्या तुम्हे एक बार भी  मुझसे लव नहीं हुआ ,क्या तुमने एक पल के लिए भी मुझसे प्यार नहीं किया ?<br />
क्या तुम कभी लाइफ में एक बार मुझे याद करोगे ?<br />
क्या तुम्हे कभी लगेगा की मैं तुम्हारे लिए सही  था ?<br />
तुम्हे मुझसे अच्छा कोई नहीं मिल सकता दुनिया में , तुम्हे मुझसे ज्यादा प्यार करने वाला नहीं मिल सकता<br />
अगर मैंने इतनी मेहनत इतने दिल से भगवान् को बुलाया होता , तो वो मेरे पास आ जाते !<br />
तुम्हे मैं बहुत खुश रखूँगा !<br />
मैं हर वक्त ये ही सोचता हूँ की इस वक्त तुम क्या सोच रहे होगे , कैसा फील कर रहे होगे !<br />
मैं तुम्हे हर पल मिस करती ह<br />
जब तुम मेरे पास होती हो , उस पल मैं बहुत खुश रहता ह !<br />
मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हूँ !<br />
तुम अगर मिल जाओ , तो मैं दुनिया बदल सकता हूँ<br />
मैं तुम्हारी साँसे फील कर सकती हूँ<br />
क्या तुम्हे मुझपे बिल्कुल तरस नहीं आता ? इतना मत तडपाओ , की एक दिन मुझे अपने आपसे  नफरत हो जाए !</font><font color="#ffffff" face="Arial" size="2">तुम इतना मना मत करो मुझे , इतना इग्नोर मत करो मुझे , की मैं तुमसे नफरत करने लगूँ एक दिन<br />
एक बार मेरी आंखों में देखो , क्या तुम्हे एक पल भी नहीं लगता की मैं प्यार करती / करता हूँ<br />
क्या मेरी आंखो में तुम्हे प्यार नहीं दिखता ?<br />
हम कई जन्मों से साथ साथ हैं<br />
काश तुम समझ सकते मुझे </font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[चाणक्य नीति:जहाँ यज्ञ-हवन न हो वह घर मुर्दाघर समान ]]></title>
<link>http://dpkraj.wordpress.com/2007/12/05/chaanky-neetijahaan-yagya-havan-n-ho-vah-ghar-murdaaghar-samaam/</link>
<pubDate>Wed, 05 Dec 2007 03:53:43 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://dpkraj.wordpress.com/2007/12/05/chaanky-neetijahaan-yagya-havan-n-ho-vah-ghar-murdaaghar-samaam/</guid>
<description><![CDATA[१.इस संसार में कुछ प्राणियों के किसी व]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>१.इस संसार में कुछ प्राणियों के किसी विशेष अंग में विष होता है-जैसे सर्प के  दांतों  में मक्खी के मस्तिष्क में और बिच्छू की पुँछ में-पर इन सबसे अलग दुर्जन और कपटी मनुष्य के  हर अंग में विष होता है. उसके मन में विद्वेष,वाणी में कटुता और कर्म में नीचता का व्यवहार  जहर बुझे तीर की तरह दूसरे को त्रास देते हैं.</p>
<p>२.किसी भी व्यक्ति को वह स्थान भी त्याग देना चाहिए जहाँ आजीविका न हो क्योंकि आजीविका रहित मनुष्य समाज में किसी सम्मान के योग्य नहीं रह जाता. </p>
<p>३.हर मनुष्य को सभी विधाओं में निपुण होना चाहिऐ. बडे लोगों से विनम्रता, विद्वानों से श्रेष्ठ और मधुर ढंग से वार्तालाप का तरीक सीखना चाहिए.  जुआरियों से झूठ बोलना और  कुशल स्त्रियों से चालाकी का गुण सीखना चाहिए.<br />
४.मनुष्य  को ऐसे कर्म करना जिससे उसकी कीर्ति सब और फैले. विद्या, दान, तपस्या, सत्य भाषण और धनोपार्जन के उचित तरीकों से कीर्ति दसों दिशाओं में फैलती है.</p>
<p>५.अपना जीवन शांतिपूर्वक बिताने के लिए हर मनुष्य को धर्म-कर्म का अनुष्ठान करते रहना चाहिऐ. वह घर मुर्दाघर के समान हैं जहाँ धर्म-कर्म या यज्ञ-हवन नहीं होता. जहाँ वेद शास्त्रों का उच्चारण नहीं होता, विद्वानों का सम्मान नहीं होता और यज्ञ-हवन से देवताओं का पूजन नहीं होता ऐसे घर, घर न रहकर शमशान के समान होता है.</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मोहब्बतें - उनकी मोहब्बत बढ़ी और दुनिया से खुशी कम होती रही]]></title>
<link>http://webmsony.wordpress.com/2007/11/29/%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%89%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a4-%e0%a4%ac/</link>
<pubDate>Thu, 29 Nov 2007 12:31:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rakesh</dc:creator>
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<description><![CDATA[अलबामा में 53 साल पहले पैदा हुई थी, इसी म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#ffffff">अलबामा में 53 साल पहले पैदा हुई थी, इसी माह की किसी तारीख को। उत्तरी अमेरिका के इस हिस्से में आज भी जातीय भावनाएं कायम हैं, तब तो वहां काले लोग अछूत ही माने जाते थे। वे बसों में पीछे ही बैठ सकते थे, उनके रेस्टोरेंट्स अलग थे। उसने भी सहा। सर्कस देखने गई तो बाहर कर दी गई, होटल में रूम नहीं मिला, यही नहीं, डिपार्टमेंटल स्टोर में कपड़े खरीदे तो उसे फिटिंग चेक करने के लिए ट्रायल रूम में नहीं स्टोररूम में जगह मिली (ट्रायलरूम में सिर्फ गोरे जा सकते थे)। 1963 में उसके साथ जो घटना हुई, आज तक नहीं भूली वह। कालों को निशाना बनाकर बमिंघम चर्च में हुए बम विस्फोट में उसकी दोस्त समेत चार काली लड़कियां मारी गईं। उसने भी धमाके देखे और सुने। वह कहती है, उस दृश्य और आवाज को मैं कभी न भूल पाऊंगी। लेकिन वह नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने वाली इंसान न बन सकी। उसका पारिवारिक बैकग्राउंड कानफर्मिस्ट नेचर का था। उसने अपना ध्येय बनाया खूब मेहनत करना और गोरों से दोगुना बेहतर बनना। पिता ने मंत्र दिया कि व्यवस्था से टकराओ नहीं, मेहनत करो, आगे बढ़ो और व्यवस्था का फायदा उठाओ।<br />
उसने यही किया। तीन साल की उम्र से फ्रेंच सीखना शुरू किया। स्केटिंग उसका पसंदीदा गेम था और बैले अपनी भावनाओं को विस्तार देने का साधन। वायलिन बजाना उसे अच्छा लगता था और वह चाहती थी अच्छी वायलिनवादक बने लेकिन इससे जीवनयापन मुश्किल था सो उसने इरादा बदला। जब यूनिवसिर्टी पहुंची, कोल्ड वार में रुचि बढ़ी और फिर सोवियत संघ पर एक लेक्चर सुना तो राह ही बदल गई। उसने मिलिटरी डाक्टराइन और चेकोस्लोवाकिया पर पीएचडी की और पहुंच गई स्टैनफोर्ड यूनिवसिर्टी में पढ़ाने। वहां वह रिपब्लिकन हो गई और मौका मिला अमेरिकी राष्ट्रपति को सोवियत मामलों पर सलाह देने का।<br />
उसकी मुलाकात राष्ट्रपति के बेटे से हुई। दिन निकलते रहे। राष्ट्रपति के बेटे के सितारे बुलंद हुए और साथ ही उसके भी। उसने न शादी की और न मोहब्बत का इजहार (शायद)। हां एक बार गलती से राष्ट्रपति के बेटे को अपना हसबैंड जरूर बोल गई, जाने कैसे। लेकिन बुलंद सितारों के साथ ही शुरू हुई असफलताओं की कहानी। 9/11 से शुरू होकर यह सफर आज भी जारी है। अफगानिस्तान, इराक और अब ईरान इसी मोहब्बत की गर्माहट में झुलस रहे हैं और साथ में पूरी दुनिया।<br />
वह बताती है कि जब मैं चार साल की थी, मेरे पिता ने मेरी एक फोटो ली थी जिसमें मैं सांताक्लाज की गोद में थी और यकीन करिए फोटो में मेरे चेहरे के भाव दूरियों वाले थे क्योंकि मैं कभी किसी गोरे के इतने करीब पहले कभी नहीं गई थी। लेकिन अब उसके चेहरे पर आश्वस्ति के भाव दिखाई देते हैं। आज भी वह अच्छी वायलिन बजाती है।</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क्रिकेट और फिल्म में ऐसा भी  हो सकता है ]]></title>
<link>http://dpkraj.wordpress.com/2007/11/22/cricket-aur-film-men-yah-bhee-ho-saktaa-hai/</link>
<pubDate>Thu, 22 Nov 2007 15:50:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://dpkraj.wordpress.com/2007/11/22/cricket-aur-film-men-yah-bhee-ho-saktaa-hai/</guid>
<description><![CDATA[आखिर झगडा किस बात का है? क्रिकेट वालों ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>आखिर झगडा किस बात का है? क्रिकेट वालों ने  एक्टर से  कहा होगा कि-''यार, क्रिकेट को लोग देखने तो खूब आ रहे हैं पर अभी पहले जैसी तवज्जो नहीं मिल रही है। हमारी टीम ने ट्वेन्टी-ट्वेन्टी मैं विश्व कप जीता है और हमें चाहिए फिफ्टी-फिफ्टी के ग्राहक जिसमें विज्ञापन  लंबे समय तक दिखाए जा सकते हैं। सो तुम भी मैदान मैं देखने आ जाओ तो थोडा इसका क्रेज बढे। ट्वेन्टी-ट्वेन्टी के समय से क्रिकेट पेट नहीं भरना है.''</p>
<p>इधर एक्टर भी फ्लॉप चल रहें हो तो क्या करें? एक दिन फिल्म आयी मीडिया मैं शोर मचा फिर थम गया। अरबों रूपये का खेल है और तमाम तरह के विज्ञापन  अभियान(अद्द cअम्पैं) लोगों की भावनाओं पर जिंदा हैं। विज्ञापन    देने वाली  कंपनिया तो सीमित हैं। फिल्मों के एक्टर हों या क्रिकेट के खिलाड़ी उनके प्रोडक्ट के प्रचार के माडल होते हैं। एक क्षेत्र में फ्लॉप हो रहे हों तो दूसरे के इलाके से लोग ले आओ। समस्या फिल्म और क्रिकेट की नहीं है कंपनियों के प्रोडक्ट के प्रचार की हैं। जब किसी प्रोडक्ट के माडल हीरो और खिलाड़ी एक हों तो उनका एक जगह पर होना प्रचार का दोहरा साधन हो जाता  है। </p>
<p>अब आगे और बदलाव आने वाले हैं। जो युवक और युवतियां फिल्म के लिए इंटरव्यू देने जायेंगे उनसे  अपने अभिनय के बारे में कम क्रिकेट के बारे में अधिक  सवाल होंगे। खेल से संबन्धित विषय पर नहीं बल्कि उसे देखने के तरीक के बारे में सवाल होंगे। जैसे<br />
१. जब मैच देखने जाओगे तो कैसे  सीट पर बैठोगे?<br />
२. चेहरे पर कैसी भाव भंगिमा बनाओगे जिससे लगे कि तुम क्रिकेट के बारे में जानते हो?<br />
३. जब कोई देश का खिलाड़ी  छका लगाएगा तो कैसे ताली बजाओगे?<br />
                इस तरह के ढेर सारे सवाल और होंगे और अनुबंध में ही यह शर्त  शामिल होगी कि जब तक फिल्म  पुरानी न पड़े तब तक निर्माता के आदेश पर फिल्म प्रचार के लिए एक्टर मैच देखने मैदान पर जायेगा।  </p>
<p>क्रिकेट में क्या होगा? लड़के दो तरह के कोच के यहाँ जायेंगे-सुबह क्रिकेट के कोच के यहाँ शाम को डांस वाले के यहाँ। भी रैंप पर भी जाना तो होगा क्रिकेट के प्रचार के लिए। आगे जब स्थानीय, प्रादेशिक और राष्ट्रीय स्तर पर जो चयन करता टीम का चयन करेंगे वह पहले खिलाडियों की नृत्य कला की परख करेंगे। क्रिकेट खेलने वाले तो कई मिल जायेंगे पर रेम्प पर नृत्य कर सकें यह संभव नहीं है-और ऐसी ही प्रचार अभियान चलते रहे तो नृत्य में प्रवीण खिलाडियों की पूछ परख बाद जायेगी। हाँ, इसमें पुराने संस्कार धारक दब्बू क्रिकेट खिलाडियों को बहुत परेशानी होगी। यह बाजार और प्रचार का खेल और इसमें आगे जाने-जाने क्या देखने को मिलेगा क्योंकि यह चलता है लोगों के जज्बातों से और जहाँ वह जायेंगे वहीं उनकी जेब में रखा पैसा भी जायेगा और उसे खींचने वाले भी वहीं अपना डेरा जमायेंगे।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पुराने सुपर स्टार का दुख ]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/2007/11/17/%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%96/</link>
<pubDate>Sat, 17 Nov 2007 12:54:53 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
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<description><![CDATA[ओम शांति फिल्म में अपनी मजाक उडाये जान]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>ओम शांति फिल्म में अपनी मजाक उडाये जाने से भारतीय फिल्मों के पुराने अभिनेता कलाकार   मनोजकुमार आज के तथाकथित सुपर स्टार शाहरुख खान और निदेशिका फराह खान से बहुत नाराज हैं। मनोजकुमार की नक़ल करते हुए इस फिल्म में उनका मजाक उडाया गया है और उन्होने इस मामले को सिने आर्टिस्ट एसोसियेशन में ले जाने की धमकी दी है। </p>
<p>हम थोडी देर के लिए तुलना करें तो शाहरुख खान आज के सशक्त प्रचार माध्यमों की वजह से लोगों को याद कराये जाते हैं कि वह इस देश के सुपर स्टार हैं जबकि मनोजकुमार तो बिना याद कराये ही लोगों के  दिमाग में आज भी पुराने  सुपर स्टार हैं। शाहरुख़ खान तो अभिनेता हैं और मनोजकुमार कलाकार हैं। अभिनेता और कलाकार में फर्क होता है। अभिनेता तो फिल्म में किसी  तय पात्र का  अभिनय करता है और कलाकार उस पात्र को जीवन देता है। अगर हम पुराने अभिनेताओं में देवानंद, मनोजकुमार, राजेंद्र कुमार,जानीवाकर और राजेश खन्ना की फिल्में देखे तो लगता है कि उनकी जगह और कोई उस फिल्म में  होता तो उस पर फिट नहीं बैठता। सबके संवाद  प्रेषण की अपने एक शैली थी और ऐसा लगता था कि वह वास्तव में वह पात्र जी रहे हैं। जिस फिल्म में शाहरुख़ होते हैं अगर उसमें सलमान खान भी हों तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता। इन सबके चेहरे सपाट हैं और पात्र के अनुसार संवाद तो बोलते हैं पर चेहरे पर वैसी  प्रतिक्रिया नहीं होती। नये कलाकारों में कई  अभिनेता तथाकथित रूप से सुपर स्टार जरूर हैं पर वह मनोजकुमार जैसे कलाकार से अभी कोसों दूर हैं। यही कारण हैं कि शोले, दीवार, सन्यासी, जंजीर, उपकार, पूरब पश्चिम, रोटी कपडा और विदाई जैसी  फिल्में जिनको  मील  का पत्थर  कहा जा सकता है अब नहीं बनती। </p>
<p>आज भी मिमिक्री करने वाले पुराने महान कलाकारों की नक़ल करते हैं यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि उनके बाद के कलाकारों के पास अभिनय और संवाद की अपनी कोई शैली नहीं है। अपनी धमाचौकडी में मग्न कलाकारों और निदेशकों को यह होश नहीं रहता कि पुराने कलाकारों की नक़ल कर रहे हैं तो कम से कम उनसे पूछ लें या बता दें। यह केवल इस बार ही नहीं हुआ,पहले भी हो चुका है जब देवानंद की नक़ल करने वाला उनका हमशकल कलाकार जब उनसे मिलने पहुंचा तो उन्होने थप्पड़ जड़ दिया क्योंकि वह फिल्मों में उनकी संवाद शैली की नक़ल करता था। उस समय बहुत शोर मचा था कि देवानंद जी  को यह नहीं करना चाहिए था पर उन्होने इस बारे  में कोई सफाई नहीं दी थी।  अब मनोजकुमार जी की नाराजगी से यह पता लगता है कि इन नये लोगों द्वारा पूर्व सोचना या अनुमति न लेना उनका अपमान है। अगर वह इसकी अनुमति लेते तो शायद वह सहर्ष अनुमति देते और जब लोगों को यह पता लगता तो थोडा उनका सम्मान और बढ़ता। क्या एक पुराने कलाकार का यह अधिकार नहीं बनता की नये  कलाकार से कुछ सम्मान पा ले। </p>
<p>मुझे इस बात से तकलीफ नहीं हुई कि उनका मजाक उडाया गया है बल्कि उन्हें बाद में इससे जो दुख पहुंचा है उससे तकलीफ है। वह एक महान कलाकार हैं और उस समय के सुपर स्टार हैं जब टीवी और रेडियो पर उनका नाम भी नहीं होता था पर लोग लेते थे और आज भी याद करते हैं। वैसे फराह खान और शाहरुख खान ने इसके लिए उसने माफी मांगी है। वैसे अगर वह लोग चाहते हैं कि अपनी गलती का प्रायश्चित किया जाये तो उनका सार्वजनिक रूप से सम्मान करें. आज के अभिनेता और निदेशक खूब पैसा कमा रहे हैं और अगर कुछ पैसा उनके सम्मान पर खर्च हो जायेगा को कौनसी बड़ी बात है, आखिर इस युग में भी अपनी फिल्म हिट कराने के चक्कर में उनको पुराने कलाकार के नाम की जरूरत पडी है. व्यवसायिक दृष्टि से भी किसी का नाम इस्तेमाल करने के लिए उसे पैसा देना चाहिऐ-अभिनेता   खुद भी अनेक उत्पादों में अपना नाम और फोटो देने के लिए पैसे तो लेते ही होंगे।  </p>
<p>वैसे इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर  पैसे के मामले में कलेक्शन तो अच्छा कर लिया होगा पर लोगों के नजरों में कोई खास फिल्म नहीं है. भारत में आम आदमी सफल फिल्म उसे मानता है जिसे दुबारा देखा जाये और जिन लोगों ने यह फिल्म देखी है वह इसे इस लायक नहीं मानते कि दोबारा देखा जाये. फिर मनोज कुमार की जो छबि इस देश में उसे देखते हुए इस फिल्म के प्रति लोगों के दिमाग में रहा-सहा उत्साह भी जाता रहेगा।<br />
आलेख, फिल्म, </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[राजनीति के ’पिंजर’ में फंसा लोकतंत्र]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/08/14/pinjar/</link>
<pubDate>Tue, 14 Aug 2007 12:06:47 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/08/14/pinjar/</guid>
<description><![CDATA[अमृता प्रीतम का उपन्यास ’पिंजर’ मैंन]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3"><img border="0" align="left" width="193" src="http://farm2.static.flickr.com/1427/1115344598_16e0c1c38b_o.jpg" height="227" /></font><font size="3">अमृता प्रीतम का उपन्यास ’पिंजर’ मैंने  तब  पढ़ा था पहली बार जब में स्कूल में ही था। उसके बाद जाने कितनी ही बार पढ़ लिया। आज जब हम आजादी की सालगिरह मना रहे हैं तो मन कहता है कि इस उपन्यास के बारे में कुछ लिखूं। बंटवारे की पृष्टभूमी पर लिखे गये इस उपन्यास पर फिल्म भी बन चुकी है। आप ने यदि यह उपन्यास नहीं पढ़ा और यदि इन्सानी दुखों से आपके हृदय पर सिलवटें पड़ती हैं तो इस उपन्यास को जरूर पढ़ें। यह उपन्यास आपके अस्तिस्व और आपकी सोच पर एक गहरा असर जरूर छोड़ कर जायेगा। जब मैंने पढ़ा तो कच्ची उम्र थी मेरी। उपन्यास का असर और भी गहरा हुआ।</font></p>
<p align="left"><font size="3">पिंजर कहानी है बंटवारे से पूर्व के हिंन्दुस्तान के पंजाब के एक गांव कि लड़की पूरो के दुखों की। हालांकि उपन्यास पूरी तरह पूरो की कहानी कहता है मगर साथ ही आपको उस समय की राजनैतिक हलचलों के कारण हो रहे घटनाक्रम के प्रभावों से बेचैन कर देता है। पूरे उपन्यास में अमृता जी ने कहीं भी कोई राजनैतिक बयान नहीं दिया, कहीं कोई पात्र कोई राजनैतिक वाक्य नहीं बोलता, मगर जैसे जैसे आप कहानी को पढ़ते जाते हैं, आपके अंदर एक गुस्सा उत्पन्न होता जाता है। आप जैसे जैसे पूरो के दुखों को पढ़ते हैं आप के अंदर वो गुस्सा धधकने लगता है, आप नफरत करने लगते हैं दुनिया भर के उन जिन्नाओं और नैहरूओं से जो अपनी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के कारण जमीनों, देशों, समाजों और लोगों में बंटवारे करवाते हैं।</font></p>
<p align="left"><font size="3">दुख की बात यह है की आज भी हमारे राजनेता यही कर रहे हैं। आपने मेरी  कई पोस्टों में यह महसूस किया होगा कि मेरे मन में सभी राजनीतीबाजों के लिये एक नफरत हमेशा से रही है। यह बात सही है कि हमारा लोकतंत्र एक मजबूत लोकतंत्र है मगर हमारे राजनेता अभी भी जाति, धर्म और वर्गों के नाम पर हमें बांट रहे हैं। जातियों और धर्म के नाम पर चुनावों में टिकट दिये जाते हैं और जातियों और धर्मों के नाम पर ही चुनाव जीते जाते हैं। क्या  हमारे बुजुर्गों ने इसी जातियों, धर्मों, वर्गों और भाषाओं में बंटे हुए लोकतंत्र का सपना देखा था?</font><font size="3"> </font><font size="3"> </font></p>
<p align="left"><font size="3">अफसोस तो यह है कि सत्ता के लिये नफरत की यह कहानियां  अभी भी दोहरायी जाती हैं। कभी दिल्ली में  तो कभी गुजरात में ।</font></p>
<p align="left">इसी उपन्यास से एक अंश:</p>
<p align="left">(साफ न पढ़ पा रहे हों तो इमेज पर क्लिक करें)</p>
<p align="left"><font size="3"><a href="http://farm2.static.flickr.com/1343/1115321370_a710506423_o.jpg"><img border="0" width="645" src="http://farm2.static.flickr.com/1343/1115321370_a710506423_o.jpg" height="744" /></a></font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left"><font size="3"><a target="_blank" href="http://farm2.static.flickr.com/1234/1115322058_d28c786d0d_o.jpg"><img border="0" width="684" src="http://farm2.static.flickr.com/1234/1115322058_d28c786d0d_o.jpg" height="1077" /></a></font></p>
<p align="left"><a target="_blank" href="http://farm2.static.flickr.com/1175/1114565617_8e31fda902_o.jpg"><img border="0" width="734" src="http://farm2.static.flickr.com/1175/1114565617_8e31fda902_o.jpg" height="1010" /></a></p>
<p>इसे भी पढ़ें</p>
<p><a rel="bookmark" href="http://aaina2.wordpress.com/2007/04/13/warisshah/"><font size="3" color="#444444">वारिस शाह नूं - अमृता प्रीतम</font></a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आइये समझें गुलजार को : मैंडा यार मिला दे....]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/07/19/gulzar/</link>
<pubDate>Thu, 19 Jul 2007 15:34:56 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/07/19/gulzar/</guid>
<description><![CDATA[आ देख मेरी पेशानी को तक़दीर के हरफे लिक]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="left"><font size="3"><strong>आ देख मेरी पेशानी को तक़दीर के हरफे लिक्खे हैं </strong></font></p>
<p><font size="3"><strong>पैरों के निशाँ जब देखे जहाँ सौ बार झुकाया सर को वहाँ </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3">(पेशानी =माथा, तकदीर = किस्मत, हरफे = वाक्य)</font></p>
<p align="left"><font size="3">गुलजार साहब के ये बोल बहुत ही अनोखे हैं। फिल्मी गीतों के पूरे इतिहास में ऐसे खूबसूरत बोल कहीं नहीं मिलते। मैं तो यहां तक कहुंगा कि इन दो लाइनों मे गुलजार साहब गालिब की बराबरी करते नजर आते हैं। शब्दों के अर्थ समझ में आ भी जायें तो भी बात का मर्म बहुत बाद में समझ आता है।</font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left"><font size="3">साथिया फिल्म में ए आर रहमान का गाया यह गीत मुझे इतना पसंद है कि एक ही दिन में लगातार इस गीत को अगर मैं पचासों बार भी सुन लूं तो भी जी नहीं भरता। आसानी से चाहे गीत समझ में न आये पर रहमान साहब ने जिस शिद्दत से इसे गाया है, यह गीत सुनने वाले के दिल में उतर जाता है। मैंने पूरा इंटेरनेट छान मारा मगर इसके सही बोल न तो देवनागरी में मिले और न ही रोमन मैं हालांकी गलत बोल कई जगह मिलते हैं। सूफी अंदाज में लिखे और गाये गये इस गीत में जो पंजाबी के शब्द प्रयोग में लाये गये हैं उस तरह की पंजाबी पाकिस्तान में ज्यादा बोली जाती है। आइये थोड़ा इस गीत को समझने की कोशिश करते हैं।</font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>बंजर है सब बंजर है </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>बंजर है सब बंजर है </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>हम ढूँढने जब फ़िरदौस चले (फ़िरदौस =स्वर्ग)</strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>तेरी खोज तलाश में देख पिया हम कितने काले कोस चले </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>बंजर है सब बंजर है </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>मैंडा यार मिला दे साईयाँ (मैंडा = मेरा)</strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>इक बार मिला दे साईयाँ </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>एक बार मिला दे साईयाँ</strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>मैंने पोटा पोटा फ़लक़ छाना, (पोटा =अंगुलियों के पोर, फ़लक़= आकाश)</strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>मैने टोटे-टोटे तारे चुने (टोटे-टोटे = टुकड़े टुकड़े)</strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>मैंडा यार मिला दे साईयाँ </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>इक बार मिला दे साईयाँ इक बार मिला दे साईयाँ</strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>तारों की चमक ये सुबह तलक़ लगती ही नहीं पल भर को पलक,</strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>साईयाँ साईयाँ साईयाँ </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>मैंने पोटा पोटा फ़लक़ छाना, </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>मैने टोटे-टोटे तारे चुने </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>सिर्फ़ इक तेरी आहट के लिये </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>कंकड़ पत्थर बुत सारे सुने </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>हुण मेणे ते रुस्वाइयाँ (हुण = अब, मेणे = उलाहने,रुस्वाइयाँ = बदनामियां )</strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>मैंडा यार मिला दे साईयाँ </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>इक बार मिला दे साईयाँ </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>इक बार मिला दे साईयाँ </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>मैंडा यार मिला दे साईयाँ </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>आ देख मेरी पेशानी को तक़दीर के हरफ़े लिक्खे हैं </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>पैरों के निशाँ जब देखे जहाँ सौ बार झुकाया सर को वहाँ </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>यार मिला दे साईयाँ </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>आ देख मेरी पेशानी को तक़दीर के हरफ़े लिक्खे हैं </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>मैं कितनी बार पुकारूँ तुझे तेरे नाम के सफहे लिक्खे हैं (सफहे = पन्ने)</strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>तेरा साया कभी तो बोलेगा तेरा साया कभी तो बोलेगा मैं सुनता रहा परछाइयाँ </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>मैंडा यार मिला दे साईयाँ </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>इक बार मिला दे साईयाँ </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>इक बार मिला दे साईयाँ </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>मैंडा यार मिला दे साईयाँ </strong></font></p>
<p align="left"><font size="3">आप इस गीत को <a target="_blank" href="http://www.mag4you.com/music/s/saathiya.asp?bhcp=1#download">यहां</a> सुन सकते हैं।</font></p>
<p align="left"><font size="3">इसे भी पढ़ें:</font></p>
<p align="left"><font size="3"><a rel="bookmark" href="http://aaina2.wordpress.com/2007/06/04/jhoon-barabar-jhoom-and-ticket-to-hollywood/"><font size="3" color="#444444">गुलजार साहब का ‘झूम बराबर झूम’ और ‘टिकट टू हॉलिवूड’</font></a></font></p>
<p class="chronodata">&#160;</p>
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]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पार्टनर : दिल का डॉक्टर ]]></title>
<link>http://manatala.wordpress.com/2007/07/18/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%a8%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a1%e0%a5%89%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%b0/</link>
<pubDate>Wed, 18 Jul 2007 01:06:39 +0000</pubDate>
<dc:creator>manatala</dc:creator>
<guid>http://manatala.wordpress.com/2007/07/18/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%a8%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a1%e0%a5%89%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%b0/</guid>
<description><![CDATA[निर्देशक डेविड धवन ने गोविन्दा और सलम]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>निर्देशक डेविड धवन ने गोविन्दा और सलमान खान के साथ कई हिट फिल्में बनाई हैं। अब डेविड इन दोनों को ‘पार्टनर’ फिल्म में साथ प्रस्तुत कर रहे हैं।</p>
<p>एक जमाने में एक के बाद एक हिट फिल्म बनाने वाले डेविड ने इन दिनों अपनी फिल्म बनाने की रफ्तार थोड़ी धीमी कर दी है। गोविन्दा और डेविड दोनों को एक हिट फिल्म की इस समय सख्त जरूरत है।</p>
<p>प्रेम (सलमान खान) एक अनोखा डॉक्टर है। अनोखा इसलिए कि वह कई पुरुषों की लड़कियाँ पटाने में मदद करता है। कई लोग लड़कियों को चाहते हैं, लेकिन उन्हें प्रभावित नहीं कर पाते। वे प्रेम के पास जाते हैं और वह चुटकियों में उनकी समस्या सुलझा देता है। शायद इसलिए लोग उसे ‘डेट डॉक्टर’ कहते हैं।</p>
<p>प्रेम को बचपन से ही लड़कियों में रूचि थी। वह हर किस्म की महिलाओं की पसंद-नापसंद को पहचानता था। वह उन लोगों की ही मदद करता है, जो सच्चा प्यार करते हैं। किसी औरत को बिस्तर पर ले जाने की ख्वाहिश रखने वालों की वह कभी सहायता नहीं करता है।</p>
<p>इन डॉक्टर महाशय की सारी डॉक्टरी तब धरी गई जब वे खुद मरीज बन गए। यानि प्रेम का दिल आ गया नैना (लारा दत्ता) पर, जो एक अखबार में पत्रकार है। प्रेम ने अपने खजाने के सारे फार्मूले अपना लिए, लेकिन नैना पर सारे बेअसर साबित हुए।</p>
<p>प्रेम के पास आए गोविंदा नामक मरीज जो कैटरीना कैफ को चाहते हैं। कैटरीना एक अमीर उद्योगपति की लड़की है। दोनों को अपनी-अपनी लड़की पटाने में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इन मुसीबतों का सामना वे हँसते-हँसाते हुए पूरा करते हैं और आखिर में जीत दिल वालों की ही होती है।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[गुलजार साहब का 'झूम बराबर झूम' और 'टिकट टू हॉलिवूड']]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/06/04/jhoon-barabar-jhoom-and-ticket-to-hollywood/</link>
<pubDate>Mon, 04 Jun 2007 16:26:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/06/04/jhoon-barabar-jhoom-and-ticket-to-hollywood/</guid>
<description><![CDATA[गुलजार साहब जब गीत लिखते हैं तो कई बार ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="left"><font size="3">गुलजार साहब जब गीत लिखते हैं तो कई बार बोल पकड़ में नहीं आते। खास कर जब संगीत ए आर रहमान या शंकर एहसान लोय का हो।</font></p>
<p align="left"><font size="3">गुलजार साहब कभी कभी सीधे से वाक्य में पंजाबी का शब्द ऐसे फिट कर देते हैं कि कई बार पूरे वाक्य का अर्थ समझ में नहीं आता है।</font></p>
<p align="left"><font size="3">कई बार दिल किया कि इस तरह के वाक्यों को गीतों के बीच से एकत्र कर उनके अर्थ लिखे जायें। आप सब से अनुरोध है कि इस तरह के वाक्य सुझाएं जो गुलजार साहब के गीतों में आते हैं मगर आप हमेशा यही सोचते रहे कि इनका अर्थ क्या है।</font><font size="3"> </font><font size="3">आज  यहां <a href="http://neerajdiwan.wordpress.com/">नीरज भाई</a> की फरमाइश पर गुलजार साहब का नया गीत <a href="http://www.yashrajfilms.com/microsites/jbj/microflash.html">'झूम बराबर झूम'</a> दे रहे हैं।</font></p>
<p align="left"><font size="3">ओ आजा आजा रब्बा इश्के दी खोल गुत्थियां</font><font size="3"> </font></p>
<p align="left"><font size="3">घाट्ट ना मुनाफे अनमोल गुत्थियां<br />
</font>
</p>
<p align="left"><font size="3">ते लागी लागी जो लगावे ना लगे आशिकी</font><font size="3"> </font></p>
<p align="left"><font size="3">उड़ती उड़ती अखियों के</font><font size="3"> </font><font size="3">लड़ गये पेचे लड़ गये वे</font></p>
<p align="left"><font size="3">गीत लगा के झूम झूम झूम</font></p>
<p><font size="3">झूम बराबर झूम बराबर झूम बराबर झूम<br />
झूम बराबर झूम बराबर झूम बराबर झूम</font><font size="3"> </font><font size="3"></p>
<p align="left">कब लगे कहां रब्ब जाने</p>
<p align="left">जब लगे जहां सब जाने, रब्बा....</p>
<p align="left">रब्बा हर चोट मजा देती है<br />
जीने की सजा देती है, रब्बा..</p>
<p align="left">झूठी मूठी बातें सुनके<br />
गुनगुनाती आंखे सुनके
</p>
<p align="left">जलावे बुझावे, बुझावे जलावे ओये मोमबत्तियां</p>
<p align="left">उड़ती उड़ती अखियों के</p>
<p align="left">लड़गये पेचे लड़ गये वे<br />
गीत लगा के झूम झूम झूम
</p>
<p align="left">झूम बराबर झूम बराबर झूम बराबर झूम</p>
<p align="left">झूम बराबर झूम बराबर झूम बराबर झूम</p>
<p align="left">ये इश्क पुराना पापी<br />
हर बार खता करता है, रब्बा....</p>
<p align="left">हर बार बचाता हूं मैं<br />
हर बार ये जा मरता है, रब्बा....</p>
<p align="left">हो पास कोई आ गया तो<br />
रास कोइ आ गया तो
</p>
<p align="left">बार बार कल्रेजे पे ना मार अखियां</p>
<p align="left">उड़ती उड़ती अखियों के</p>
<p align="left">लड़ गये पेचे लड़ गये वे<br />
गीत लगा के झूम झूम झूम
</p>
<p align="left">झूम बराबर झूम बराबर झूम बराबर झूम बराबर</p>
<p align="left">ओ आजा रब्बा इश्के दी खोल गुत्थियां</p>
<p align="left">घाट्ट ना मुनाफे अनमोल गुत्थिया<br />
ते लागी लागी जो लगावे ना लगे आशिकी
</p>
<p align="left">उड़ती उड़ती अखियों के</p>
<p align="left">लड़ गये पेचे लड़ गये वे<br />
गीत लगा के झूम झूम झूम
</p>
<p align="left">झूम बराबर झूम बराबर झूम बराबर झूम</p>
<p align="left">झूम बराबर झूम बराबर झूम बराबर झूम</p>
<p align="left">यहां इन पंक्तियों को देखें</p>
<p align="left"><strong>ओ आजा रब्बा इश्के दी खोल गुत्थियां</strong></p>
<p align="left"><strong>घाट्ट ना मुनाफे अनमोल गुत्थिया</strong><br />
गुत्थी थैली को कहते हैं, इश्क की थैली खुलती है तो घाटा नहीं होता मुनाफा ही मुनाफा है क्योंकि यह थैली अनमोल है।
</p>
<p align="left">इस गीत को <a href="http://www.musicindiaonline.com/p/x/1X2m7oK55d.As1NMvHdW/">यहां</a> सुन सकते हैं।</p>
<p align="left">अब इसी फिल्म के एक और गीत के कुछ शब्दों की ओर ध्यान दीजिये अंग्रेजी हिंदी और पंजाबी का क्या तड़का लगाया है</p>
<p align="left">ओस में घोली मिंट की गोली निरी खुशबू बीबा</p>
<p align="left">कन्नी से काटे मांझे की डोरी</p>
<p align="left">काटेगी तूं बीबा</p>
<p align="left">औना पौना ही सही</p>
<p align="left">दिल का कोना ही सही</p>
<p align="left">लौटा दे मेरा टिकट टू हालीवूड</p>
<p align="left">जमीं से दो इंच ऊपर</p>
<p align="left">हवा पे चलती है तूं</p>
<p align="left">कहीं पैरों का निशान जो पड़े तो झुकूं</p>
<p align="left">शहर के उस मोड़ पर</p>
<p align="left">जहां से तूं पास हो</p>
<p align="left">कहे तो मैं जिंदगी भर वहीं पे रुकूं</p>
<p align="left">लौटा दे मेरा टिकट टू हालीवूड....</p>
<p align="left"> पूरा गीत यहां <a href="http://www.musicindiaonline.com/p/x/5X2ml2DToS.As1NMvHdW/">सुन </a>सकते हैं।</p>
<p></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[गुरू : अनदेखे सीन 4]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/03/20/253/</link>
<pubDate>Tue, 20 Mar 2007 17:59:15 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/03/20/253/</guid>
<description><![CDATA[गुरू : अनदेखे सीन 4

]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गुरू : अनदेखे सीन 4</strong><br />
<span style='text-align:center; display: block;'><object width='425' height='350'><param name='movie' value='http://www.youtube.com/v/6qkXcTt8NNE'></param><param name='wmode' value='transparent'></param><embed src='http://www.youtube.com/v/6qkXcTt8NNE&rel=0' type='application/x-shockwave-flash' wmode='transparent' width='425' height='350'></embed></object></span></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[गुरू: अनदेखे सीन]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/03/20/250/</link>
<pubDate>Tue, 20 Mar 2007 17:50:35 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/03/20/250/</guid>
<description><![CDATA[गुरू: अनदेखे सीन

]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गुरू: अनदेखे सीन</strong><br />
<span style='text-align:center; display: block;'><object width='425' height='350'><param name='movie' value='http://www.youtube.com/v/VJ7Kx4H7VPk'></param><param name='wmode' value='transparent'></param><embed src='http://www.youtube.com/v/VJ7Kx4H7VPk&rel=0' type='application/x-shockwave-flash' wmode='transparent' width='425' height='350'></embed></object></span></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA['मुन्नाभाई चले अमेरिका' का वास्तविक ट्रेलर]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/19/221/</link>
<pubDate>Mon, 19 Feb 2007 16:51:06 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/19/221/</guid>
<description><![CDATA[मुन्नाभाई चले अमेरिका का वास्तविक ट्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">मुन्नाभाई चले अमेरिका का वास्तविक ट्रेलर Munnabhai Chale America</b></p>
<p><span style='text-align:center; display: block;'><object width='425' height='350'><param name='movie' value='http://www.youtube.com/v/yU3AS9ZedeM'></param><param name='wmode' value='transparent'></param><embed src='http://www.youtube.com/v/yU3AS9ZedeM&rel=0' type='application/x-shockwave-flash' wmode='transparent' width='425' height='350'></embed></object></span><br></p>
<p>और लीजिये अब पेश है मुन्नाभाई चले अमेरिका का वास्तविक ट्रेलर।</p>
<p></font><br />
<strong>मुन्नाभाई श्रेणी के लेख</strong><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2006/10/08/gandhigiri/">बिल्लूगिरी और विंडोस में लोचा</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2006/08/31/lagerahomunnabhai/">लगे रहो मुन्ना भाई</a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2006/11/15/sarkit/">“पता नहीं सरकिट……. !” </a><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/02/11/munnabhaai/">“मुन्नाभाई अमेरिका में” </a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[छोरा गंगा किनारे वाला]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/17/amitabh/</link>
<pubDate>Sat, 17 Feb 2007 14:49:41 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/02/17/amitabh/</guid>
<description><![CDATA[परम पूज्य गंगा किनारे वाले बड़े भैया,
प]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">परम पूज्य गंगा किनारे वाले बड़े भैया,<br />
प्रणाम,</p>
<p>आज आपको खत लिखने की सोची तो समाचार मिला कि जल्द ही <a href="http://in.hindi.yahoo.com/News/Regional/0702/17/1070217002_1.htm">आप सबसे बड़े पद पर भी हो सकते हैं</a> तो सबसे पहले हमार तरफ से और हमार पूरे गांव की तरफ से आपको बहुत बहुत बधाई!<br />
कल रात फिर टी वी पर तोहार इंटरब्यूह देखा। का बताई, गांव मा तो बिजली बहुत ही कम आवत बा हम गये रहे साथ के कस्बा मा। ऊ स्टेशन के पास दुकान पर टीवी चलत रहा तो ऊ पर ही देखे। का शान से बोलत हो भैया। इ सब बाबू जी के संस्कारन का परताप बा। हम इंतजार कर रहे हैं तोहार फिलम 'एकलब्य' का। इंहा तो देर से आई। हम तो सहर जा के देखी। ससुर सहर के मल्टीप्लेक्स मा टिकट बहुत ही मंहगा बा, पर कौनो चिंता नाही, अपने बड़े भैया की फिलम बा। हम जरूर देखी। पर का बताई बड़े भैया, ई मल्टीप्लेक्स  वाले जितने में एक लीटर पानी देत हैं, उत्ते में खेत के पम्प की खातिर दुई लीटर डीजल मिल जाई।</p>
<p>और इंटरब्यूह के बीच बीच मा जो तुम आ आकर हमार आंखन में देख कर  बोले रहे कि 'पुनरजन्म हो यदि मेरा, तो फिर हो गंगा के तट पर' तो भैया हमार सीना फूल जात है। तोहार इसी अदा पर तो पूरा यूपी फिदा हो जात है।<br />
मगर का बताई बड़े भैया, ऊ हमार दोस्त है ना दिल्ली में रहता है, ऊ हमका <a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/01/06/nithari/">आईना दिखा के</a> बोला कि इ जो तुम बोलत हो ना 'पुनरजन्म हो यदि मेरा....' इ तोरे दिल की बात नाही। इ तो तुम बिज्ञापन किये हो और इ दुई बोल बोलन के वास्ते पैसे लिये हो। हम तो कह दिये कि हमार बड़े भैया पैसन की खातिर हमार भावना के साथ कबहु खिलवाड़ ना करी। तो बोले कि जदि पैसे नहीं लिये तो भी ई मा तोहार राजनैतिक दोस्तन का फायदा होई। तुमही बताओ बड़े भैया ई आईना वाला झूठ बोल रहे हैं ना अपना बिलाग चलाये कि खातिर? हमार भावनाओं से तो तुम कभहु खिलवाड़ ना करी?<br />
 पर एक बात बा बड़े भैया। ई जो तुम नया बिज्ञापन करे हो कि हमार प्रदेस मा कानून ब्यबस्ता सब चकाचक बा। ई देख कर हमार माथा भी ठनक गया। हमें  लगत है कि कोइ तुमका बरगलाय दिया है। लगता है कि तुम टाईम निकाल कर इसे कम्फर्म नहीं कर पाये। ठीक है भईया, इतनी फिलमें, कभी एकलब्य तो कभी निशब्द। फिर इतने इंटरब्यूह । फिर घर मा शादी। एक जान हजार काम। फिर जो नयी गाड़ी मिली ऊका कागज पत्तर। सब काम करन मा कितना टाईम लगत है। ससुर लम्बी लाईन लगत अथारिटी मा गाड़ी के कागजन की खातिर।</p>
<p>पर भैया हम से पूछ लेते प्रदेश की कानून ब्यबस्था के बारे में। हम तो एक ही फुनवा की दूरी पर थे(हम जीतू भाई का बिलाग भी पढ़त हैं)।  और अब तो हम <a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/01/09/economicreforms/">मुबाईल भी ले लिये हैं</a>। अगली बार कभी फोन करके पूरे प्रदेश की ना सही हमार और हमार गांव की खबर ले लेना। हमार दिल खुश हो जाई। अब खत को खतम करते हैं।</p>
<p>भौजी को परणाम<br />
रामखिलावन<br />
गंगा किनारे के एक गांव से</font></p>
<p><strong>इसे भी पढ़ें</strong><br />
<a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/01/06/nithari/">पुनर्जन्म हो यदि मेरा !</a> </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[गुरू : अनदेखे सीन 3]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/03/20/252/</link>
<pubDate>Tue, 20 Mar 2007 17:56:56 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/03/20/252/</guid>
<description><![CDATA[गुरू : अनदेखे सीन 3

]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गुरू : अनदेखे सीन 3</strong><br />
<span style='text-align:center; display: block;'><object width='425' height='350'><param name='movie' value='http://www.youtube.com/v/GdEFlP43vx8'></param><param name='wmode' value='transparent'></param><embed src='http://www.youtube.com/v/GdEFlP43vx8&rel=0' type='application/x-shockwave-flash' wmode='transparent' width='425' height='350'></embed></object></span></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[गुरू: अनदेखे सीन 2]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/03/20/251/</link>
<pubDate>Tue, 20 Mar 2007 17:53:55 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/03/20/251/</guid>
<description><![CDATA[गुरू: अनदेखे सीन 2

]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गुरू: अनदेखे सीन 2</strong><br />
<span style='text-align:center; display: block;'><object width='425' height='350'><param name='movie' value='http://www.youtube.com/v/Imnm8pzFWOw'></param><param name='wmode' value='transparent'></param><embed src='http://www.youtube.com/v/Imnm8pzFWOw&rel=0' type='application/x-shockwave-flash' wmode='transparent' width='425' height='350'></embed></object></span></p>
]]></content:encoded>
</item>

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