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	<title>चिट्ठाजगत &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/चिट्ठाजगत/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "चिट्ठाजगत"</description>
	<pubDate>Tue, 13 May 2008 19:10:42 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[पिटारा हुआ गिरगिटिया- अब गिरगिट के लिंक टूलबार पर]]></title>
<link>http://hinditoolbar.wordpress.com/2008/03/15/link-to-girgit/</link>
<pubDate>Sat, 15 Mar 2008 15:40:53 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://hinditoolbar.wordpress.com/2008/03/15/link-to-girgit/</guid>
<description><![CDATA[चिट्ठाजगत की नयी सेवा गिरगिट के बारे म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">चिट्ठाजगत की नयी सेवा </font><a href="http://girgit.chitthajagat.in/" target="_blank"><font size="3">गिरगिट</font></a><font size="3"> के बारे में तो सभी चिट्ठाकार जान चुके होंगे। यदि नहीं जानते तो अपको बता दें कि यह सेवा आपको किसी भी युनिकोड साइट की लिपि बदल कर पढ़ने की सुविधा देती है। </font></p>
<p><font size="3">आप अपने चिट्ठे पर इसके </font><a href="http://girgit.chitthajagat.in/widget.php" target="_blank"><font size="3">विजेट</font></a><font size="3"> लगा कर दूसरी लिपियों के पाठकों को अपना चिट्ठा उनकी लिपि में ही पढ़ने की सुविधा दे सकते हैं। इसके बारे में रवि जी ने </font><a href="http://raviratlami.blogspot.com/2008/03/blog-post_12.html" target="_blank"><font size="3">यहां</font></a><font size="3"> लिखा है।</font></p>
<p><font size="3"></font>&#160;</p>
<p><font size="3">अब हमने पिटारा टूलबार में इसके लिंक लगाये हैं। आप किसी भी चिट्ठे या साइट की लिपि बदल कर पढ़ना चाहते हैं तो टूल मिनू में ’लिपि बदल कर पढ़े’ पर जायें और अपनी पसंद की लिपि चुन लें। </font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[एक क्लिक से चिट्ठाजगत की श्रेणियां]]></title>
<link>http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/12/16/chitthajagat-2/</link>
<pubDate>Sun, 16 Dec 2007 15:05:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/12/16/chitthajagat-2/</guid>
<description><![CDATA[आज जब 1300 से ज्यादा हिंदी चिट्ठे हैं, हर ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">आज जब 1300 से ज्यादा हिंदी चिट्ठे हैं, हर चिट्ठे को पढ़ पाना मुमकिन नहीं है। फिर यह भी हो सकता है कि कवितायें पढ़ने वालों को शेयरबाजार के चिट्ठों में रुचि न हो। यह भी हो सकता है कि खेलों से जुड़े चिट्ठे पढ़ने वालों को कविताओं में रुचि न हो। किसी को केवल तकनीकी जानकारी  देने वाले चिट्ठे पढ़ने की रुवि होगी तो किसी को समाचारों के चिट्ठे पढ़ने की। फिर यदि आपको सारे चिट्ठे पढ़ने हैं तो वे भी उपलब्ध हैं ही। </font></p>
<p><font size="3">अलग अलग श्रेणियों में प्रस्तुत चिट्ठे उन के लिये बहुत उपयोगी होंगे जो लोग चिट्ठाकार न हो कर चिट्ठापाठक हैं। हर तरह के  हजारों चिट्ठों में अपनी पसंद के चिट्ठे यदि पाठक को एक ही स्थान पर मिल जाते हैं तो पठक के लिये यह काफी सुविधाजनक हो जायेगा। </font></p>
<p><font size="3">यहां आपको यह बता दें कि <strong><a href="http://www.chitthajagat.in/">चिट्ठाजगत.इन</a></strong> पर दी गयी इस सुविधा का बहुत से पाठक प्रयोग कर रहे हैं और चिट्ठाजगत पर दी गयी अलग अलग श्रेणियों के पृष्ठों  पर क्लिक   कर के  हमारे चिट्ठों पर आ रहे हैं। </font></p>
<p><font size="3">नीचे के चित्र में </font><a href="http://hindinewspaper.blogspot.com/"><font size="3">मजेदार समाचार</font></a><font size="3"> पर आने वाले पाठकों की जानकारी है। </font></p>
<p><a href="http://hinditoolbar.files.wordpress.com/2007/12/windowslivewritere7b8b813f4bf-1174fclass2.jpg"><font size="3"><img border="0" width="423" src="http://hinditoolbar.files.wordpress.com/2007/12/windowslivewritere7b8b813f4bf-1174fclass-thumb.jpg" height="201" style="border-width:0;" /></font></a><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3">हिंदी टूलबार पिटारा में हमने चिट्ठाजगत की सभी श्रेणियों को जोड़ दिया है अब आप सीधे एक ही क्लिक से चिट्ठाजगत की किसी भी श्रेणी के पृष्ठ पर जा सकते हैं। </font></p>
<p><font size="3"> इसे भी पढ़ें</font></p>
<p>’<a href="http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/09/08/chitthajagat/"><font size="3">धड़ाधड़ महाराज’ तक पहुंचें धड़ाधड़</font></a></p>
<p><a href="http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/10/30/search/"><font size="3">अब चिट्ठों में खोजें धड़ाधड़</font> </a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अपने चिट्ठे के लिये लिप्यांतर कोड आसानी से बनायें]]></title>
<link>http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/12/01/bhomiyo-code/</link>
<pubDate>Sat, 01 Dec 2007 06:56:30 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/12/01/bhomiyo-code/</guid>
<description><![CDATA[आपने कई चिटठों पर लिपि बदल कर पढ़ने के ल]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">आपने कई चिटठों पर लिपि बदल कर पढ़ने के लिंक देखे होंगे। लिप्यांतर की यह सुविधा भोमियो द्वारा दी गयी है। यह कोड कैसे बनता है इसके बारे में आप भोमियो की </font><a href="http://bhomiyo.wordpress.com/2007/05/18/proxy-site-to-transliterate-your-blog/"><font size="3">यह पोस्ट</font></a><font size="3"> पढ़ें।</font></p>
<p><font size="3">हिंदी टूलबार पिटारा से आप यह कोड बहुत ही आसानी से बना सकते हैं।</font></p>
<p><font size="3">अपने चिट्ठे के मुख्य पृष्ठ पर जायें। पिटारा टूलबार के टूल मीनू पर क्लिक करें। इसके बाद ’लिपि बदल कर पढ़े’ पर जायें और वांछित लिपि पर क्लिक करें। आपका चिट्ठा उस लिपि में बदल जायेगा। अब अपने ब्राउजर से URL  को कापी कर लें। यह आपके चिट्ठे का उस लिपि के लिये लिंक होगा।</font></p>
<p><a href="http://hinditoolbar.files.wordpress.com/2007/12/windowslivewriter4d1b07f9294a-a88fbhomiyo-code1.jpg"><font size="3"><a href="http://hinditoolbar.files.wordpress.com/2007/12/windowslivewriter4d1b07f9294a-a88fbhomiyo-code2.jpg"><img border="0" width="236" src="http://hinditoolbar.files.wordpress.com/2007/12/windowslivewriter4d1b07f9294a-a88fbhomiyo-code-thumb.jpg" height="240" style="border:0;" /></a></font></a></p>
<p><font size="3">आगे की प्रक्रिया एक उदाहरण से समझते हैं। </font></p>
<p><font size="3">यह रहा पिटारा के रोमन चिट्ठे का URL</font></p>
<p><a href="http://bhomiyo.com/en.xliterate/hinditoolbar.wordpress.com/" title="http://bhomiyo.com/en.xliterate/hinditoolbar.wordpress.com/"><font size="3">http://bhomiyo.com/en.xliterate/hinditoolbar.wordpress.com/</font></a></p>
<p><font size="3">अब रोमन लिंक बनाने के लिये निम्न कोड में अपने URL को भरें</font></p>
<p><font size="3">&#60;a href="</font><a href="http://hinditoolbar.wordpress.com/"><font size="3">यहां अपने चिट्ठे का रोमन URL भरें"</font></a><font size="3">&#62;रोमन&#60;/a&#62;</font></p>
<p><font size="3">इसी प्रकार बाकी लिपियों का भी लिंक बनायें और उसे अपने चिट्ठे पर सहेज दें।</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA["ठण्डे-ठण्डे पानी से नहाना चाहिए"]]></title>
<link>http://hansteraho.wordpress.com/2007/11/12/%e0%a4%a0%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%87-%e0%a4%a0%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be/</link>
<pubDate>Sun, 11 Nov 2007 19:18:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>राजीव् तनेजा</dc:creator>
<guid>http://hansteraho.wordpress.com/2007/11/12/%e0%a4%a0%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%87-%e0%a4%a0%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be/</guid>
<description><![CDATA[&#8220;ठण्डे-ठण्डे पानी से नहाना चाहिए&#8221;
**]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong><img border="0" align="absBottom" width="1" src="http://img239.imageshack.us/img239/7356/towelva6.jpg" height="1" />"ठण्डे-ठण्डे पानी से नहाना चाहिए"</strong></p>
<p>***राजीव तनेजा***<br />
"क्या मियाँ!....?"...</p>
<p>"अब तो दिवाली को गुज़रे हुए भी कई घंटे हो गए"...</p>
<p>"अब तो ये आलस-शालस को मारो गोली और सीधा बाथरूम में जा घुसो"...</p>
<p>"बाल्टी,साबुन.तेल,शैम्पू सब याद कर रहे हैँ"</p>
<p>"बाजुएँ अकड गयी हैँ उनकी तुमसे मिले बिना"</p>
<p>"और तुम हो कि....कोई फिक्र ना फ़ाका"..<br />
"याद है ना...</p>
<p>'शानू जी'के कवि सम्मेलन में जाना है?"और...</p>
<p> दो दिन बाद अपनी शायर फैमिली वाली'श्रधा जी'भी तो आ रही है सिंगापुर से"...<br />
"उनसे भी तो मिलने जाना है पटपडगंज"</p>
<p>"आज ही तो पता और फोन नम्बर नोट कराया है उन्होंने"<br />
"कहीं भूले तो नहीं बैठे हैँ जनाब?"</p>
<p>"कहा भी था कि अच्छी तरहा नक्शा-वक्शा बना लो दोनों पतों का"</p>
<p>"कहीं हम गली-गली भटकते फिरें और भूखे-प्यासे तब पहुँचे मँज़िल पे जब...</p>
<p>जूठे पत्तल चाटने के अलावा कोई और जुगाड ही न बचा हो"<br />
"जल्दी से हो जाओ तैयार"...</p>
<p>"इंतज़ार हो रहा होगा हमारा वहाँ"...<br />
"अब ये कोई ज़रूरी तो नहीं कि खुद ही फोन करें शानू जी और श्रधा जी कि....</p>
<p>"आ जाओ!...हम इंतज़ार कर रहे हैँ"<br />
"इतने वी.आई.पी भी नहीं हम"<br />
"सौ तरह के सौ-सौ काम होंगे उन्हें"<br />
"हमारी तुम्हारी तरह वेली थोडी हैँ वो दोनों कि न्यौता आ जाए सही कहीं से और...</p>
<p>बस मुँह उठाएँ और चल दें "<br />
"याद है ना पिछली बार जब चंबल से न्योता आया था अपुन को ?"...</p>
<p>"बडे मज़े से पहुँच गए थे अगली ही गाडी से लॉलीपॉप चूसते-चूसते"...<br />
"ये तो वहाँ जा के पता चला था कि वो 'इनवीटेशन कार्ड'नहीं बल्कि...</p>
<p>फिरौती के लिए लिखा गया पत्र था जिसे हम न्योता समझ कूदे-कूदे फिर रहे थे"<br />
"ये तो शुक्र है कि उसी दिन पुलिस ने धावा बोल मुठभेड में'लाखन सिंह'को मार गिराया था"...</p>
<p>"वर्ना हम तो कब के लग गए होते 'खुड्डल लाईन'"<br />
"सब तुम्हारी बेवाकूफी का नतीज़ा था"...</p>
<p>"ना खुद खत ढंग से पढा और ना ही मुझे ठीक से पढने दिया"<br />
"और नतीजे में!..याद है ना कैसे बीहडों में जाग-जाग काटी थी रात?"<br />
"साले!...उन गीदडों ने भी तो हुआँ-हुआँ कर जीना हराम कर डाला था"<br />
"हुह!...बडे आए कहने वाले तुम कि....</p>
<p>"पापा जी!..आप चिंता ना करें"...</p>
<p>"मैँ सब सम्भाल लूंगा"...<br />
"कहीं उस दिन मेरी दौलत याने मेरी बीवी को ही संभालने की नहीं सोच रहे थे ना ?"<br />
"ऐसा सोचने के बारे में सोचना भी मत"...<br />
"इसलिए नहीं कि पराई नॉर पे नज़र डालना पाप है...गुनाह है "</p>
<p>"बल्कि इसलिए कि ऐसी सोच सोच के भी तुम पछताओगे"<br />
"उफ!...किस मनहूस की याद दिला दी?"</p>
<p>"रोयाँ-रोयाँ तक काँप उठता है आज भी जब माथे पे हाथ फेरता हूँ"<br />
"देख रहे हो ना?"<br />
"अभी भी सूजन नहीं गई है उस दिन वाले बेलन की मार की"<br />
"पट्ठी का निशाना ही इतना पक्का है कि बस पूछो मत"...</p>
<p>"सौ गज़ के फासले से भी अचूक वार करती है"...</p>
<p>"बचपन में मारन पिट्टी  जो खेला करती थी"<br />
"वैसे एक बात समझ नहीं आ रही कि मैँ ये सब राज़ की बातें मैँ तुमसे क्यों करता जा रहा हूँ?"</p>
<p>"खैर छोडो इन बेफिजूल की बातों को"...</p>
<p>"कुछ नहीं धरा इनमें"<br />
"हाँ!...तो मैँ कह रहा था कि....</p>
<p>बेचारी शानू जी तो काम के बोझ से अधमरी हुई जा रही होंगी और श्रधा जी सफर की थकान के मारे चूर"<br />
"शानू जी ही तो सब इंतज़ामात कर रही हैँ कवि सम्मेलन का"<br />
"अपनी श्रधा जी भी कौन सी कम हैँ?"</p>
<p>"पूरा फोरम और ब्लॉग संभाल रही हैँ अपने दम पे"<br />
"बहुत टैंशन हो जाती होगी इन दोनों को तो"...<br />
"पता नहीं कैसे मैनेज कर लेती होंगी ये सब ?"...</p>
<p>'बिज़िनस'संभालना...</p>
<p>'घर-परिवार'देखना...</p>
<p>'कविता' लिखना....</p>
<p>'शायरी' झाडना....</p>
<p>'ब्लॉग' अप टू डेट रखना...</p>
<p>'दूसरों के चिट्ठों पे टिपियाना वगैरा...वगैरा. .."<br />
"और अपुन?"...</p>
<p>"अपुन ठहरे रमते जोगी"...<br />
"अपना क्या है...</p>
<p>"ऐन टाईम पे जाना है"...</p>
<p>"चाय-नाश्ता पाडना है"</p>
<p>"दो-चार बार जहाँ सबने ताली बजाई....</p>
<p>सो!...हमने भी बजा देनी है "<br />
"थोडी बहुत वाह-वाह भी कर देंगे अपने गुरुदेव 'समीर लाल जी'के लिए...</p>
<p>"वो भी तो आ रहे हैँ ना कनेडा से"<br />
"सो!...तैयार हो जाओ फटाफट"<br />
"कोई ज़रूरी नहीं कि पिछली होली और दिवाली की तरह इस बार भी तुम्हें ज़बर्दस्ती ही नहलाया जाए"<br />
"अबकि बार तो आपको एक्दम से गोरा-चिट्टा बना के ही दम लेना है"...</p>
<p>"बॉय गॉड...कसम से"...</p>
<p>"अपनी श्रधा जी जो आ रही हैँ"<br />
"उफ!...क्या गज़ब के क्यूट और हैंडसम लगोगे"<br />
"पता है ना!....पिछली बार जो हैदराबाद वाली ऑंटी  ताना मारा था कि...</p>
<p>खुद तो इतना बन-संवर के रहते हो और अपने दोस्त का कोई ख्याल नहीं"</p>
<p>"तो बन्धु मेरे..इस बार किसी को कोई शिकायत का मौका नहीं"</p>
<p>"अब ये उनींदी आँखो से नींद का पर्दा हटाओ और चौखटे पे पानी के छींटे मारते हुए सीधे जा घुसो नहाने को"...<br />
"क्या कहा?"</p>
<p>"नींद आ रही है?"</p>
<p>"वाह रे!..मेरे कुम्भकरण...वाह"<br />
"रामलीला कब की खत्म हो गयी और अब भी कुम्भकरण के पात्र को ही जिए चले जा रहे हो?"<br />
"वाह!..."...<br />
"ये तुम राजेश खन्ना कब से बन गए कि चाहे दस बरस पहले से ही बुढाए पडे हो लेकिन. ..</p>
<p>रोल 'हीरो'का ही करना है उस्ताद ने"<br />
"रजनीकाँत समझ रखा है क्या खुद को ?"</p>
<p>"अरे!...झंडू का च्यवनप्राश खाता है वो दिन में तीन-तीन दफा और तुम हो कि...</p>
<p>पैग पे पैग चढाए रहते हो हरदम"<br />
"पता भी है कि दारू पीने से 'लीवर'खराब होता है लेकिन अब इस बुड्ढे 'काका'को समझाए कौन?"</p>
<p>"डिम्पल जी की बात तो सुनते ही कहाँ हैँ?"<br />
"उफ!...किसका नाम ले लिया?"</p>
<p>"लुट गया ना सब सुख चैन मेरा?"</p>
<p>"याद दिला ना'बॉबी'की?"...</p>
<p>"अब रातें करवटें बदल-बदल ही काटनी पडा करेंगी"<br />
"अपनी 'बॉबी डार्लिंग'उर्फ श्रीमति मायके जो  गयी हुई है"<br />
"रात काटने से याद आया कि मियाँ!...कब तक यूँ कुँभकरण की नींद उँघाते रहोगे?"</p>
<p>"डाक्टर ने नहीं कहा था कि रामलीला में कुंभकरण का रोल करो?"...</p>
<p>"कोई और रोल नहीं था क्या करने को?"</p>
<p>"ह्म्म!...तो यहाँ भी तुम्हारे आलस ने ही ज़ोर मारा होगा कि...</p>
<p>'सोने'को खूब मिलेगा और नाम का नाम होगा"...<br />
"खाक!..सोना मिलेगा"....</p>
<p>"दिहाडी तो पूरी दी नहीं गयी इन मुय्ये  रामलीला वालों से"...<br />
"हुँह!...बडे आए सोना देने वाले"..</p>
<p>"एक पीतल का पानी चढी गद्दा थमाई...</p>
<p>वो भी 'डिब्ब-खडिब्बी' कि..</p>
<p>"ले बेटा!...चढ जा स्टेज पे"...</p>
<p>"छुडा दे छक्के"...</p>
<p>"मार ले मैदान"<br />
"तुमने भी सोचा होगा कि चलो इसे ही बेच कुछ दाम वसूल लूगा"</p>
<p>"पर वो भी तो पट्ठों ने वापिस छीन ली और उल्टा पुलिस में जाने की धमकी देने लगे सो अलग"...<br />
"और ले लो वडेंवे!..."...<br />
"वाह!..रे मेरे बंटुक नाथ"...</p>
<p>"वाह"...</p>
<p>"बडे आए थे कहने वाले कि अब होंगे आम के आम और गुठलियों के भी पूरे-पूरे दाम"<br />
"दिखा दी न तुमने अपनी बनिया बुद्धी"...</p>
<p>"हर चीज़ में फायदा ढूंढते हो"...<br />
"अब!...ये जो  दो-दो महीने नहीं नहाते हो"...</p>
<p>"तो!...इसमें भी कोई न कोई फायदा ही ढूँढते होंगे महाशय...?"<br />
"है ना!...?"<br />
"हाय!...अब क्या करूँ तुम्हारी इस मूढ बुद्धी का?"अब कह रहे हो कि....</p>
<p>'साबुन'बचता है...</p>
<p>'तेल' बचता है...</p>
<p>'तौलिया-कंघी'कम घिसते हैँ"</p>
<p>"और!..ये जो दो-दो महीने की मैल को जब चाकू से खुरच-खुरच के उतारते हो ?"</p>
<p>"वो सब क्या होता है?"<br />
"याद है ना पिछली बार का?"...</p>
<p>"जब धार कुंद पड गयी थी चाकू की तो बीच में ही पिताश्री से 'ब्लेड'माँग काम चलाना पडा था किसी तरह"..</p>
<p>"और ऊपर से कँजूसों के महा कँजूस तुम्हारे पिताजी"...</p>
<p>"थमा दिया उन्होंने दो साल से पडा-पडा जंग खा रहा ब्लेड"...</p>
<p>"वो भी पूरा नहीं...आधा ही थमाया था कि बचा हुआ आधा वक्त-बेवक्त काम आएगा"</p>
<p>"बचत में कैसी शर्म?"<br />
"अगर 'सैप्टिक-शैप्टिक'हो जाता तो उनकी बला से?"..<br />
"फिर पता चलता बच्चू को"</p>
<p>"ट्ट्टू पता चलता तुम्हारे पिताश्री को?"</p>
<p>"उन्होंने तो उसी घसियारे 'डाक्टर'के बच्चे से ही ठुकवा देने थे 'इंजैक्शन'धडाधड"<br />
"हाँ!..ठुकवाने ही तो थे"..</p>
<p>"कौन सा डिग्रीधारी था वो डाक्टर ?"...</p>
<p>"पट्ठा!..पंचर जो लगाया करता था पहले"...</p>
<p>"पुरानी आदतें इतनी जल्दी कहाँ पीछा छोडती हैँ?"</p>
<p>"पहले 'टायर'से कील निकाला करता था अब अब बदन में कील घुसेडा करता  है"..</p>
<p>"खैर छोडो...क्या रखा है टाईम खोटी करने में?"</p>
<p>"ये आलस का पुलिंदा छोडो और उठ के नहा लो फॅटाक से फटाफट "...<br />
"नहीं तो!...पता है ना मेरा?"<br />
"क्या कहा?"...</p>
<p>"नहीं पता?"<br />
"तो!..तुम ऐसे नहीं मानोगे?"</p>
<p>"लगता है!..'थर्ड डिग्री'ही अपनानी पडेगी?"<br />
"थर्ड डिग्री से याद आया कि स्कूल तो 'थर्ड' में ही छोड दिया था मैंने"..<br />
"बस!..तभी तो पड गया था दो नम्बर के धन्धे में"...</p>
<p>"फिर आना-जाना तो लगा ही रहा ताउम्र"...</p>
<p>"कभी अपने देश में तो कभी परदेस में"...<br />
"अब अपने देश वालों में इतना दम कहाँ कि वो अपने पर थर्ड डिग्री अपना सकें?..</p>
<p>"ये तो वो साले फिरंगी पुलिस वाले ही नहीं समझते किसी को कुछ"...</p>
<p>"ज़रा सी!..बस ज़रा सी 'चूं-चपड'करुं सही...</p>
<p>उन्हें तो बस मौका भर चाहिए हाथ साफ करने का"...<br />
"साले!...बन्दे को बन्दा नहीं समझते हैँ"...</p>
<p>"पता नहीं मेरे चौखटे में ऐसे कौन से सुरखाब के पर लगे हैँ जो देखते ही...</p>
<p>अपने-अपने लट्ठों को तेल पिलाना चालू कर देते हैँ"<br />
"अब कुछ ना पूछो कि कैसे बचते बचाते जुगाड-पानी से दे-दिला कर...</p>
<p>उनका 'तौलिया'गायब करवाया है खास तुम्हारे लिए"<br />
"देख लिया ना?"</p>
<p>"आखिर दोस्त ही दोस्त के काम आता है!...दुशमन नहीं"<br />
"अब तुम्हारे इस चक्कर में मेरी हालत का मुझे ही पता है कि क्या-क्या हुआ मेरे साथ"...</p>
<p>"आह!...पराया तन क्या जाने मेरी पीड"</p>
<p>"बडी मुशकिल से उसे 'हिन्दोस्तानी' ज़बान सिखाई है"...</p>
<p>"अब तो बेटे लाल!...इशारे पे नाचता है...इशारे पे"..<br />
"तौलिया?"...</p>
<p>"नाचता है?"...</p>
<p>"इशारे पे?"दोस्त एक झटके से कई सवालों को चेहरे पे लिए उठ खडा हुआ<br />
"हाँ!...मेरे प्यारे 'बंटुक नाथ'..</p>
<p>"इशारे पे"...<br />
"और आज इसी के दम पे ठान लिया है कि...</p>
<p>चाहे लाख तूफाँ आएँ...</p>
<p>चाहे जान भी अब तेरी चली जाए...</p>
<p>तुझे नहला के ही लेंगे हम दम...</p>
<p>ऐ सनम"...<br />
"क्या कहा?"...</p>
<p>"ज़रा फिर से तो कहना"<br />
"अच्छा!...नहीं नहाओगे?"...<br />
"देखो!..हर फैसला यूँ जल्दबाज़ी  में लेना ठीक नहीं"...</p>
<p>"अच्छी  तरह सोच-विचार लो"<br />
"फिर वो ही बात?"...</p>
<p>कह रहे हो कि....</p>
<p>"हमको नहला सके ...ये ज़माने में दम नहीं...</p>
<p>हमसे है ज़माना...ज़माने से हम नहीं"<br />
"कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ तुम्हें नहला सकने वाला?"<br />
"ठीक है!...आज ही और अभी ही फैसला हो जाए फिर तो"...<br />
"कल किसने देखा है?"...</p>
<p>"क्या मालुम कल को तुम ही...हो न हो"<br />
"देखो!...दोस्त हो तुम मेरे,इसीलिए कह रहा हूँ फिर से"...</p>
<p>"मेरी बात मान लो और अच्छे बच्चों की तरह जा के चुपचाप से नहा लो"</p>
<p>"मालुम था मुझे!..."...</p>
<p>"हाँ!...मालुम था मुझे"<br />
"तो फिर!...नहीं मानोगे तुम?"<br />
"अच्छा!...एक बार....</p>
<p>बस एक बार...नज़र भर देख तो लो 'तौलिए'को"<br />
"फिर ये न कहना कि मौका नहीं दिया 'राजीव'ने बचाव का"<br />
"बच्चू!...किस फिराक में हो तुम?"</p>
<p>"भागने का मौका तक ना मिलेगा"...</p>
<p>"किस हवा में उडे-उडे फिर रहे हो तुम?"कि...</p>
<p>मैँ ये कर दूंगा...</p>
<p>मैँ वो कर दूंगा"<br />
"बेटे लाल!...देसी नहीं...</p>
<p>खालिस सोलह ऑने शुद्ध विलायती तौलिया है...खालिस विलायती"</p>
<p>"बडों-बडों को तिगनी का नाच नचा दे ये तो"...</p>
<p>"तुम किस खेत की गाजर-मूली हो?"...<br />
"ये क्या?...तुमने तो लपेटना चालू कर दिया?"</p>
<p>"अरे!...फैंक नहीं रहा हूँ मैँ..जो तुम लपेटे चले जा रहे हो"<br />
"पता चल जाएगा कुछ ही पल में कि मैँ सच्ची बात कर रहा हूँ कि झूठी"...</p>
<p>"हाथ कँगन को आरसी क्या...पढे लिखे को फारसी क्या"</p>
<p>"खुद ही देख लो और भली भांति जाँच लो"...<br />
"ठण्डे-ठण्डे पानी से नहाना चाहिए...</p>
<p>ओ पुत्रा!..लिखना आए या ना आए...लिखना चाहिए"...<br />
"अब ये!...लिखना-लिखाना तो तुम्हारे बस का है नहीं"<br />
"तो!...क्या कहते हो?"...</p>
<p>"कर आऊँ गीज़र ऑन?"<br />
"नहाना तो तुम्हें है ही"..</p>
<p>"दो मिनट पहले सही...दो मिनट बाद में सही"</p>
<p>"कहीं यही बहाना न मिल जाए बाद में तुम्हें कहीं कि...</p>
<p>"ठण्ड लग रही है"..</p>
<p>"अगली दिवाले पे नहा लूंगा"...</p>
<p>"पक्का!...'गॉड प्रामिस'<br />
 </p>
<p>***राजीव तनेजा***</p>
<p> <img border="0" align="absBottom" width="320" src="http://img239.imageshack.us/img239/7356/towelva6.jpg" height="213" /></p>
<p> <img border="0" align="absBottom" width="320" src="http://img138.imageshack.us/img138/2859/towel1ln6.jpg" height="213" /></p>
<p><img border="0" align="absBottom" width="320" src="http://img98.imageshack.us/img98/122/towel2fw3.jpg" height="213" /></p>
<p><img border="0" align="absBottom" width="320" src="http://img86.imageshack.us/img86/2552/towel3rc3.jpg" height="213" /></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA["मेरी कहानी नवभारत टाईम्स पर"]]></title>
<link>http://hansteraho.wordpress.com/2007/11/10/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%88%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b8/</link>
<pubDate>Sat, 10 Nov 2007 16:58:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>राजीव् तनेजा</dc:creator>
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<description><![CDATA[&#8220;मेरी कहानी नवभारत टाईम्स पर&#8221;22.10.2007 ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>"मेरी कहानी नवभारत टाईम्स पर"</strong><strong><img border="0" align="absBottom" width="1" src="http://img132.imageshack.us/img132/1493/122222222222rt3.jpg" height="1" />22.10.2007 को नवभारत टाईम्स में मेरी कहानी छपी है </strong></p>
<p><strong><img border="0" align="top" width="320" src="http://img147.imageshack.us/img147/5453/onnavbharattimesjf5bs0.jpg" height="240" /></strong></p>
<p><strong><img border="0" align="top" width="1" src="http://img70.imageshack.us/img70/6596/122222222222rt3kh0.jpg" height="1" /></strong></p>
<p><strong>"बताएँ तुम्हे बच्चा कैसे होता है" के नाम से<br />
<img border="0" align="absBottom" width="1" src="http://img86.imageshack.us/img86/2637/rajivsstoryonanotherblowl6.jpg" height="1" /><br />
www.navabharattimes.com -पाठकपन्ना-कहानियाँ - बताएँ तुम्हें बच्चा कैसे होता है<br />
<a href="http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/2480094.cms">http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/2480094.cms</a></strong><strong> </strong><strong> </strong><strong>जिसे एक ब्लॉगर बन्धु श्री पवन कुमार मल्ल जी ने जस का तस कॉपी-पेस्ट कर डाला है अपने ब्लॉग पे ...<br />
http://pawankumarmall.blogspot.com/<br />
उनका मैँ अत्यंत आभारी हूँ कि उन्होने कहानी के साथ मेरा नाम नहीं लिखा..जिसके लिए मैंने उन्हें कमैंट भी किया और उन्होंने इसके लिए सॉरी भी कहा ...</p>
<p></strong><img border="0" align="top" width="320" src="http://img70.imageshack.us/img70/6596/122222222222rt3kh0.jpg" height="203" /></p>
<p>लेकिन अभी भी वहाँ से मेरा नाम नदारद है ...</p>
<p>चलो इसी बहाने एक पोस्ट और लिखने का मौका मिला और मेरी कहानी एक बार फिर से आप सभी ब्लॉगर बन्धुओं के सामने पेश है</p>
<p><strong>बताएं तुझे कैसे होता है बच्चा... </strong></p>
<p>बड़े दिन हो गए थे। खाली बैठे बैठे , कोई काम-धाम तो था नहीं, बस कभी-कभार कंप्यूटर खोला और थोडी-बहुत ' चैट-वैट ' ही कर ली। सच पूछो तो यार बेरोज़गार था मैं और इसमें अपनी सरकार का कोई दोष नहीं , दरअसल अपनी पूरी जेनरेशन ही ऐसी है। अब कोई छोटी-मोटी नोकरी तो हम करने से रहे। अब यार हर किसी ऐरे-गैरे नत्थू-खैरे को घड़ी-घड़ी कौन सलाम बजाता फिरे ? कोई छोटा- मोटा धंधा करना तो अपने बस की बात नहीं। बाप-दादा जो थोडी-बहुत पूंजी छोड गए थे , वो भी आहिस्ता-आहिस्ता खत्म होने को आ रही थी। आखिर वह भी भला कब तक साथ देती ? बीवी के तानों का तो शुरू से ही मुझ पर कोई असर होता नहीं था। उसकी हर बात को मैं एक कान से सुनता और दूसरे से बाहर निकाल देता। कई बार तो कान में घुसने तक ही ना देता।<br />
पहले नकदी खत्म हुई फिर , गहने-लत्तों का नंबर भी आ गया। एक-एक करके चीज़ें खत्म होती जा रही थीं लेकिन मेरी अकड़ ढीली होने का नाम ही नहीं ले रही थी। एक दिन मज़े से टीवी पर ' नो-एंट्री ' फिल्म देखते-देखते अचानक खुशी के मारे उछल पडा। इसलिए नहीं कि फिल्म अच्छी थी बल्कि...अपुन के भेजे मे आइडिया आ गया था नोट कमाने का। अरे नोट कमाने का क्या, वह तो नोट छापने का आइडिया था। जैसे ही बीवी को बताया कि एक आइडिया मिला है नोट छापने का तो वह गश खा कर गिरी और वहीं बेहोश हो गई।</p>
<p>होश मे आने के बाद बोली, " बस जेल जाने की कसर ही बाकी रह गई थी .... नोट छाप कर वह भी पूरी करने का इरादा है जनाब का? "<br />
मेरी हंसी रोके ना रुकी। बोला, " अरी भागवान , नोट छापने का असली मतलब सचमुच में नोट छापना नहीं है। "<br />
" तो फिर ?"<br />
" देखा नहीं, फिल्म में उस ज्योतिषी को ?.... कितनी सफाई से सलमान से पैसे ऐंठ लेता है और अनिल कपूर बेवकूफ बनाता है। "<br />
" तो क्या हुआ ?"<br />
" अपुन का भी बस यही आइडिया है। "<br />
" तुम्हारे पूरे खानदान में भी कोई ज्योतिषी हुआ है जो तुम बनोगे ?"<br />
" है तो नहीं लेकिन हमारी आनेवाली नस्ल ज़रूर राज ज्योतिषी कहलाएगी। "<br />
" पर ये सब करोगे कैसे ?"<br />
" अरे कुछ खास नहीं, बस थोड़ा-बहुत त्याग तो मुझे करना ही होगा। "<br />
" वह भला कैसे ?"<br />
अरे ये हीरो-कट बाल छोड़ सीधे-सीधे लम्बे बाल रखूंगा। "<br />
" उसमें तो नाई का खर्चा भी बचेगा, " बीवी चहक उठी ।<br />
" कर दी ना तुमने दो कौड़ी वाली बात .... अरे मैं लाखों में खेलने की सोच रहा हूं और तुम इन छोटी-छोटी बातों पर नज़र गड़ाए बैठी हो। "<br />
" लेकिन आता-जाता तो कुछ है नहीं, खाली वेष बदलने से क्या होगा ?" बीवी फिर बोल पड़ी।<br />
" अरे यार, पहले पूरी प्लानिंग तो सुन ले। "<br />
" जी बताऒ, " बीवी आतुर नज़रों से मेरी तरफ ताकते हुए बोली।<br />
" हां, तो मैं त्याग करने की बात कह रहा था। तो दूसरा त्याग यह करना पडेगा कि....ये गोविंदा-छाप कपड़े छोड़ धोती-कुरता पहनना पड़ेगा। "<br />
" वह तो शादी का पड़ा-पड़ा अभी तक सड़ रहा है अलमारी में, " बीवी चहकते हुए फिर बोल पड़ी।<br />
" चलो, यह काम तो आसान हुआ. अब कोने वाले कबाड़ी की दुकान से रद्दी छांटनी पड़ेगी। "<br />
" आय-हाय। अब क्या रद्दी भी बेचोगे ?"<br />
" जब पता नहीं होता , तो बीच में चोंच मत लड़ाया कर, " मैं आँखे तरेरता हुआ बोला, " बेवकूफ, पुराने अखबारों में जो भविष्यफल आता है, उसकी कतरनों को सम्भालकर रखूंगा, वक्त-बेवक्त काम आएंगी और अगर एस्ट्रॉलजी से रिलेटेड कोई किताब मिल गई तो... पौ-बारह समझो। "<br />
" पौ-बारह मतलब ?"<br />
" अरे बेवकूफ, पौ-बारह मतलब लॉटरी लग गई समझो। "<br />
" लेकिन यह जन्तर-मन्तर कहां से सीखोगे भला ?"<br />
" कोई खास मुश्किल नहीं है यह सब भी , बस...बल्ली सागू या फिर बाबा सहगल के किसी भी रैप सॉन्ग को कुछ इस अन्दाज़ से तेज़ी से होंठो ही होंठो मे बुदबुदाना होगा कि किसी के पल्ले कुछ ना पडे। बस हो गया.... ' जन्तर-मन्तर काली कलन्तर... "<br />
" ऒह समझ गई.... समझ गई। "</p>
<p>बस फिर क्या था मोटी कमाई के चक्कर में बीवी के बटुए का मुंह खुल चुका था। ज़रूरी सामान इकट्ठा करने के बहाने पैसे ले मैं चल पड़ा बाज़ार। पहले ठेके से दारू की बोतल खरीदी और फिर जा पहुंचा बाज़ू वाले कबाड़ी की दुकान पर। एक-दो पेग मरवाए उसे और अपने मतलब की रद्दी छांट लाया।<br />
अब दिन-रात एक करके हम मियां-बीवी उन कतरनो का एक-एक अक्षर चाट गए और इस नतीजे पर पहुंचे कि " पूरी दुनिया में इससे आसान काम तो कोई हो ही नहीं सकता। " अब आप पूछोगे कि , " वो भला कैसे ?"<br />
तो ये मैं आपको क्यों बताऊं ? और अपने पैर पर ख़ुद ही कुलहाड़ी मार लूं ? कहीं मुझसे ही कॉम्पिटीशन करने का इरादा तो नहीं है आपका ?<br />
क्या कहा ?.... चिंता ना करूँ ?<br />
तो सुन लीजिए...कुछ ख़ास मुश्किल नहीं है यह सब.... बस सिम्पल-सी कुछ बातें गांठ बांध लो कि... " हर बंदा अपने को अच्छा और बाक़ी सबको बुरा समझता है। "<br />
हर-एक को यही लगता है कि वह सही है और बाक़ी सब ग़लत, कोई उसे सही ढंग से समझ ही नहीं पाया आज तक, वह अपनी तरफ़ से कड़ी मेहनत करता है लेकिन उसका पूरा फल नहीं मिलता, सबके सब उसकी कामयाबी से जलते हैं, कोई उसका भला नहीं चाहता ... दोस्त-यार ... रिश्तेदार .. भाई-बहन ... पड़ोसी ... सब के सब मतलबी हैं ... कोई उसकी ख़ुशी से ख़ुश नहीं हैं...वह सब पर तरस ख़ाता है, लेकिन कोई उस पर नहीं खाता ... किसी ने उस पर कोई जादू-टोना किया हुआ है ... या फ़िर उसकी दुकान या मकान बांध दिया है...<br />
बस कुछ सामने वाले का चौख़टा देख कर अंदाज़ा लगाओ कि उस पर कौन-कौन से डायलॉग फ़िट बैठेंगे। बस चौखटा देखो और मार दो हथौड़ा। अगर तीर सही निशाने पर लगा तो समझो कि अपनी तो निकल पड़ी।<br />
" और अगर निशाना ग़लत लगा तो ?"<br />
फिकर नॉट... घुमा-फिरा कर 2-4 डायलॉग और मार दो बस... " कोई ना कोई तो अटकेगा ज़रूर। और हाँ... अगर ऊं चे लेवल का गेम खेलना है, तो दो-चार चेले-चपाटे भी साथ रख लो, एकाध चेली हो तो कहना ही क्या। अगर कोई ना मिले तो चौक से ही दिहाड़ी पर पकड़ लाओ।<br />
बड़े बे-रोज़गार हैं , कोई ना कोई अपने मतलब का मिल ही जाएगा पर इतना ज़रूर ध्यान रखना कि....चेला रखना है गुरु नहीं ... । कहीं अगले दिन ही वह तुम्हारे सामने तेल की शीशी और चटाई लिए बैठा तुम्हारा ही बंटाधार करता न मिला। चौक पर बिकने वाला तोता अगर मिल जाए, तो धंधे में और रौनक आ जाएगी।<br />
बस तोते को भूखा रखना है और... भविष्य की पर्चियों पर अनाज का दाना चिपका देना है। पंछी बेचारा तो भूख के मारे अनाज के दाने वाली पर्ची उठाएगा और बकरा बेचारा बस यही समझेगा कि मिट्ठू महाराज ने उसका नसीब बांच दिया है।<br />
" और उस पर्ची के अंदर लिखा क्या होगा ?" बीवी बोल पड़ी।<br />
" हे भागवान, पूरी रामायण खत्म होने को आई और यह पूछ रही है कि ... सीता , राम की कौन थी ?"<br />
" अरी भागवान, अभी ऊपर सारे मंतर तो बताता आया हूँ...कोई ना कोई तो फ़िट बैठेगा ज़रूर।"<br />
" हुं! " बीवी की समझ मैं बात आ चुकी थी।</p>
<p>सो एक दिन ऊपरवाले का नाम लिया और जा पहुंचा बीच बाज़ार और बरगद के पेड़ के नीचे डेरा जमाया। " कोई न कोई कोई असामी रोज़ टकराने लगी। किसी को कुछ , तो किसी को कुछ इलाज बताता उसकी हर तक़लीफ़ या बीमारी का। एक से तो मैने एक ही झटके में पूरे बारह हज़ार ठग डाले थे। बड़ी आई थी मज़े से कि " महाराज बच्चा नहीं होता है , कोई उपाय बताओ। "<br />
मैंने सोचा, अरे नहीं होता है तो कुछ ' ओवर-टाइम ' लगाओ , ' माल-शाल खाओ और अगर फिर भी बात नहीं बने तो किसी डॉक्टर-शॉक्टर के पास जाओ। यह क्या कि सीधे मुंह उठाया और ज्योतिषी के पास चली आई। अब यार, अपने घर की ड्यूटी तो बजाई नहीं जाती अपुन से, ओवरटाइम कौन कंबख्त करता फिरे ? लेकिन धंधा तो धंधा है सो , उस बेचारी को कुछ उलटी-पुलटी चीज़ें बताई लाने के लिए जैसे ' काली शेरनी का दूध... जंगली भैंसे का सींग ... शुतुर्मुर्ग का कलेजा और न जाने क्या-क्या...<br />
मुंह उतर आया उस बेचारी का कि मैं अबला नारी... " कहाँ से लाऊंगी ये सब ?"<br />
मैंने कहा, " आप चिंता ना करें। परसों मेरा शागिर्द नेपाल से आनेवाला है, उसको फ़ोन किए देता हूँ , वही सब इंतज़ाम कर देगा। " उसने हामी भर दी।<br />
और चारा भी क्या था उसके पास ?<br />
नकद गिन के पूरे बारह हज़ार धरवा लिए मैने। फिर जाने दिया उसे।<br />
मोटी-कमाई हो चुकी थी, सो मैने अपना झुल्ली बिस्तरा संभाला और चल पड़ा घर की ओर।<br />
रास्ते में विलायती की पेटी ले जाना नहीं भूला।</p>
<p>ख़ुश बहुत था मैं, बस पीता गया, पीता गया। कुछ होश नहीं कि कितनी पी और कितनी नहीं पी। होश आया तो बीवी ने बताया , " पूरे तीन दिन तक टुल्ली थे आप। ख़ूब उठाने की कोशिश की लेकिन कोई फ़ायदा नहीं। "<br />
" तो क्या पूरे तीन दिन दुकान बन्द रही ?"<br />
" और नहीं तो क्या ?"<br />
मैं झट से खड़ा हुआ और भाग लिया सीधा दुकान की ओर। पूरे रास्ते यही सोचे जा रहा था कि तीन दिन में पता नहीं कितने का नुक़सान हो गया होगा ?<br />
कई बार तो पता नहीं कैसे मेरा तुक्का सही लगने लगा था और किसी-किसी को थोड़ा-बहुत फ़ायदा भी होने लगा लेकिन 8-10 बार शिकायत भी आई कि " महाराज आपकी तरकीब तो काम न आई, कोई और जुगाड बताओ। " ऐसे बकरों का तो मुझे बेसब्री से इंतज़ार रहता था। एक ही पार्टी को 2-2 दफा शैंटी-फ्लैट करने का मज़ा ही कुछ और है। उसके द्वारा किए गये इलाज में कोई न कोई कमी ज़रूर निकलता और नये सिरे से बकरा हलाल होने को तैयार। पुरानी कहावत भी तो है कि " खरबूजा चाहे छुरी पर गिरे या फ़िर छुरी खरबूजे पर , कटना तो खरबूजे को ही पड़ता है।</p>
<p>अपुन का कॉन्फिडेंस ' टॉप-ओ-टॉप बढता ही जा रहा था कि एक दिन एक ' जाट-मोलढ ' टकरा गया ....<br />
पूरी कहानी सुनने के बाद मैंने उससे , उसकी परेशानी का इलाज बताने के नाम पर 2 हज़ार माँग लिए। जाट सौदेबाज़ी पर उतर आया। आख़िर में सौदा 450 रुपये में पटा। उसने धोती ढीली करते हुए जो नोट निकाले, तो मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं। नज़र धोती में बंधी नोटों की गड्डी पर जा अटकी, लेकिन अब क्या फ़ायदा, जब चिड़िया चुग गयी खेत। मैं तो यही सोचे बैठा था कि बेचारा ग़रीब मानुस है, इसे तो कम से कम बख्श ही दूं। आख़िर ऊपर जाने के बाद वहां भी तो हिसाब देना पड़ेगा। लेकिन यह बांगड़ू तो मोटी आसामी निकला। यहीं तो मार खा गया इंडिया।</p>
<p>साढ़े चार सौ जेब के हवाले करते हुए मुंह से बस यही निकला, " ताऊ काम तो करवा रहे हो पूरे ढाई-हज़ार का और नोट दिखा रहे हो टट्टू ।"<br />
" बेटा टट्टू तो तुमने अभी देखा ही कहाँ है ?"<br />
" वो तो अब मैं तुम्हें दिखाऊंगा, " कहते हुए उसने किसी को इशारा किया और तुरंत ही मेरे चारों तरफ़ पुलिस ही पुलिस थी। " साले! पब्लिक का फु<img border="0" align="top" width="1" src="http://img216.imageshack.us/img216/4392/onnavbharattimesjf5.jpg" height="1" />द्दू खींचता है। अब बताएंगे तुझे...चल थाने। बड़ी शिकायतें मिली हैं तेरे खिलाफ़। साले! वो S.H.O साहेब की मैडम थीं, जिससे तूने बारह हज़ार ठगे थे । चल अब हम तुझे बताते हैं कि बच्चा कैसे होता है।<br />
राजीव तनेजा</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अब चिट्ठों में खोजें धड़ाधड़]]></title>
<link>http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/10/30/search/</link>
<pubDate>Tue, 30 Oct 2007 11:05:42 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/10/30/search/</guid>
<description><![CDATA[क्या आपको यह खोजना है कि आपका चिट्ठा च]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">क्या आपको यह खोजना है कि आपका चिट्ठा चिट्ठाजगत.इन पर है कि नहीं?</font></p>
<p><font size="3">किसी और चिट्ठे को खोजना चाहते हैं?</font></p>
<p><font size="3">हिंदीचिट्ठों की प्रविष्टियों में से कुछ खोजना चाहते हैं?</font></p>
<p><font size="3">किसी चिट्ठाकार का नाम तो जानते हैं पर वो किस चिट्ठे पर लिखता है और उसका चिट्ठा किस नाम से है यह नहीं जानते?</font></p>
<p><font size="3">किसी एक चिट्ठाकार के और भी कौन कौन से चिट्ठे हैं यह जानना चाहते हैं ?</font></p>
<p><font size="3">यह सब जानकारी और और भी बहुत कुछ अब एक क्लिक पर धड़ाधड़ क्योंकि हमने अपने हिंदी टूलबार पिटारा में यह सब खोजने के लिये इसके सर्च इंजिन में ही यह सारे विकल्प जोड़ दिये हैं। बस इन सब में से जो कुछ भी आप जानना चाहते हैं उसे सर्च बॉक्स में टाईप करें और खोजें। </font></p>
<p><font size="3">यहां आपको यह भी बता दें कि यदि आप कोई भी टैक्स्ट अपने माऊस से सेलेक्ट करते हैं तो वह अपने आप ही सर्च बॉक्स में पहुंच जायेगा।</font></p>
<p><font size="3">अब तो आप ’ढूंढते रह जाओगे’ !</font><br />
<img src="http://hinditoolbar.wordpress.com/files/2007/10/chitthajagat.jpg" alt="chitthajagat.jpg" /></p>
<p><font size="3">इसे भी पढ़ें:</font></p>
<p><font size="3"><a target="_blank" href="http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/09/08/chitthajagat/">धड़ाधड़ महाराज’ तक पहुंचें धड़ाधड़</a></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[काम के हिंदी फीड]]></title>
<link>http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/10/26/hindi-feeds/</link>
<pubDate>Fri, 26 Oct 2007 12:42:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/10/26/hindi-feeds/</guid>
<description><![CDATA[हमने हिंदी टूलबार पिटारा में कुछ बहुत ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">हमने हिंदी टूलबार पिटारा में कुछ बहुत ही काम के हिंदी फीड जोड़े हैं।</font></p>
<p><font size="3">आइये आपको इनके बारे में बता दें।</font></p>
<p><font size="3">इस टूलबार में चिट्ठाजगत और नारद के ताजे जीवंत फीड तो पहले से ही मिल रहे थे अब आपको इनके साथ साथ निम्न फीड भी मिलेंगे</font></p>
<ul>
<li><font size="3"><a target="_blank" href="http://www.chitthajagat.com/">चिट्ठाजगत की रोमन फीड </a>: चिट्ठाजगत पर आने वाली हिंदी चिट्ठों की रोमन फीड</font></li>
<li><font size="3"><a target="_blank" href="http://www.indianpad.com/indic">IndianPad Hindi इंडियन पैड हिंदी</a> : इंडियन पैड तेजी से भारत का अपना डिग्ग बनता जा रहा है। यहां पर भारतीय समाचार तथा ब्लॉग प्रविष्टियां समाहित की जातीं हैं और यदि आपकी कोई प्रविष्टी यहां पापुलर पेज पर आ गयी तो समझिये कि आपके चिट्ठे पर पाठकों का तांता लग जायेगा। हमने इंडियन पैड पर आने वाली पापुलर हिंदी प्रविष्टियों की फीड को भी टूलबार में जोड़ दिया है।</font></li>
<li><font size="3"><a target="_blank" href="http://www.desipundit.com/category/hindi/">देसीपंडित हिंदी </a>: देसी पंडित पर कई भारतीय भाषाओं के चिट्ठों से चुन चुन कर अच्छे अच्छे पोस्ट दिये जाते हैं। यहां आने वाले हिंदी पोस्ट का फीड भी अब टूलबार में जोड दिया गया है।</font></li>
<li><font size="3"><a target="_blank" href="http://del.icio.us/">del.icio.us</a> पर हिंदी : यह है del.icio.us पर पापुलर पोस्टों में से चुने हुए वह पोस्ट जो कि हिंदी के साथ टैग किये गये हैं।          </font></li>
<li><font size="3"><a target="_blank" href="http://groups.google.com/group/Chithakar">गूगल समूह चिट्ठाकार:</a> इस समूह पर आने वाले संदेश अब आप इस फीड में पढ़ सकते हैं। इसके बारे में विस्तार से <a target="_blank" href="http://aaina2.wordpress.com/2007/10/22/chitthakar/">यहां</a> पढ़ें।</font></li>
<li><font size="3"><a target="_blank" href="http://akshargram.com/paricharcha/">परिचर्चा</a> : परिचर्चा फोरम पर आने वाले सभी नये पोस्ट। परिचर्चा एक फोरम है इंटरनेट पर हिंदी प्रयोग करने वालों के लिये। आप यदि इस फोरम के सदस्य नहीं हैं तो आज ही इसके सदस्य बनें। इस फोरम के बारे में जानना चाहते हैं तो <a target="_blank" href="http://akshargram.com/paricharcha/">इस फोरम</a> पर जा कर ही जानें। (नोट: परिचर्चा की फीड फिलहाल IE7 में अपडेट नहीं हो रही है इसे शीघ्र ही सुधार लिया जायेगा)</font></li>
</ul>
<p><font size="3">तो यह सब अब आपके प्रिय हिंदी टूलबार पिटारा में जुड़ गया है तथा इस सब को आप जीवंत फीड के द्वारा पढ़ सकते हैं।<br />
आपके सुझावों हमारे लिये बहुत उपयोगी हैं, आप अपने इस टूलबार में और क्या क्या जुड़वाना चाहते हैं हमें सुझाव अवश्य दें।</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[न कोई कोड चाहिये न स्क्रिप्ट, टूलबार पर क्लिक करें और लिपि बदल जायेगी]]></title>
<link>http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/10/11/one-click-transliteration/</link>
<pubDate>Thu, 11 Oct 2007 09:28:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/10/11/one-click-transliteration/</guid>
<description><![CDATA[क्या आप पंजाबी, गुजराती, उर्दू, तेलुगू, ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">क्या आप पंजाबी, गुजराती, उर्दू, तेलुगू, उड़िया, तमिल, मलयालम या कन्नड़ समझते हैं पर पढ़ नहीं सकते?</font><font size="3">क्या आप इन भाषाओं के चिट्ठे पढ़ना चाहते हैं पर क्या करें चिट्ठाकार के भोमियो कोड ही नहीं लगा रखा?</p>
<p>आप अपने चिट्ठे को दूसरी लिपियों में पाठकों को पढ़वाना चाहते हैं पर जानते नहीं कि भोमियो कोड कैसे बनायें या लगायें?</p>
<p>क्या आप देखना और पढ़ना चाहते हैं कि उर्दू या अन्य भाषाओं के चिट्ठों, समाचार पोर्टल्स और साईट्स पर क्या क्या क्या लिखा जा रहा है?</p>
<p>यह सब तथा और भी बहुत कुछ अब संभव होगा हिंदी टूलबार पिटारा पर लगे भोमियो के लिप्यांतर बटन से, जिससे आप किसी भी साईट की लिपि बदल कर पढ़ सकेंगे। टूलबार के टूल मिनू में ’लिपि बदल कर पढ़ें’ ऑप्शन पर क्लिक करके आप जिस पृष्ठ पर होंगे उसी पृष्ठ की लिपि बदल सकेंगे, बस एक क्लिक से। इस तरीके से आप अपने चिट्ठे के लिये भी भोमियो कोड बना सकते हैं।</p>
<p>अपने चिट्ठे पर जायें और टूलबार पर लिप्यांतर के सभी ऑप्शन्स पर क्लिक करें। ब्राउजर में जो भी URL खुलेगा, वह उस लिपि के लिये आपके चिट्ठे का लिंक होगा।</p>
<p>तो है ना यह सब बहुत आसान?</p>
<p>टूलबार के मिनू में भी कई परिवर्तन किये गये हैं उसके बारे में अगले पोस्ट में।</p>
<p>लिप्यांतर के क्या क्या फायदे हैं उनके बारे में यहां भी पढ़ें</p>
<h5><a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/10/10/one-click-translitration/">किसी भी साईट का लिप्यांतर होगा एक क्लिक से</a></h5>
<p><a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/10/06/adsense-in-hindi-blogs/">आप को पाठक और डॉलर दोनो मिल सकते हैं इससे </a></p>
<p><a href="http://raviratlami.blogspot.com/2007/10/blog-post_06.html">ट्रांसलिट्रेशन का प्रतिच्छेदन....</a></p>
<p><a href="http://epandit.blogspot.com/2007/10/hindi-in-guana-but-devanagari-lost.html">गुयाना में हिन्दी है पर देवनागरी गुम</a></p>
<p></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कादम्बिनी में ब्लॉगजगत (स्कैन्ड पन्ने)  ]]></title>
<link>http://neerajdiwan.wordpress.com/2007/10/03/kadambinioct07/</link>
<pubDate>Wed, 03 Oct 2007 12:27:19 +0000</pubDate>
<dc:creator>neerajdiwan</dc:creator>
<guid>http://neerajdiwan.wordpress.com/2007/10/03/kadambinioct07/</guid>
<description><![CDATA[चिट्ठाजगत के तक़रीबन सभी पाठक जानते ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>चिट्ठाजगत के तक़रीबन सभी पाठक जानते हैं कि <a href="http://www.balendu.com/">श्री बालेंदु शर्मा दाधीच </a>(<a href="http://www.prabhasakshi.com/">प्रभासाक्षी </a>वाले) ने हिंदी ब्लागिंग से संबंधित <a href="http://www.balendu.com/hindi_blogs_article_by_balendu_sharma_dadhich.htm">लेख </a>लिखा है। यह लेख कादम्बिनी के अक्टूबर अंक में प्रकाशित हुआ है। इस लेख में ब्लागिंग के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुये हिंदी ब्लागिंग से जुड़े हुये तमाम मुद्दों पर जानकारी देने की कोशिश की गयी है। आप मूल लेख पढ़ चुके हैं। हालांकि <a href="http://www.balendu.com/hindi_blogs_article_by_balendu_sharma_dadhich.htm">मूल लेख </a>से कुछ अंश हटा दिए गए हैं फिर भी कादम्बिनी के इस लेख को लेकर पाठकों में उत्सुकता बनी हुई थी। अब कादम्बिनी में प्रकाशित लेख के सभी आठ पन्ने पढ़िए। <strong>(कादम्बिनी से साभार) </strong></p>
<p><a target="_blank" href="http://img169.imagevenue.com/img.php?image=13983_B1_122_764lo.jpg"><img border="0" src="http://img169.imagevenue.com/loc764/th_13983_B1_122_764lo.jpg" /></a><a target="_blank" href="http://img125.imagevenue.com/img.php?image=13996_B2_122_1052lo.jpg"><img border="0" src="http://img125.imagevenue.com/loc1052/th_13996_B2_122_1052lo.jpg" /></a><a target="_blank" href="http://img41.imagevenue.com/img.php?image=14007_B3_122_914lo.jpg"><img border="0" src="http://img41.imagevenue.com/loc914/th_14007_B3_122_914lo.jpg" /></a><a target="_blank" href="http://img152.imagevenue.com/img.php?image=14019_B4_122_989lo.jpg"><img border="0" src="http://img152.imagevenue.com/loc989/th_14019_B4_122_989lo.jpg" /></a><br />
<a target="_blank" href="http://img145.imagevenue.com/img.php?image=14031_B5_122_657lo.jpg"><img border="0" src="http://img145.imagevenue.com/loc657/th_14031_B5_122_657lo.jpg" /></a><a target="_blank" href="http://img146.imagevenue.com/img.php?image=14041_B6_122_1113lo.jpg"><img border="0" src="http://img146.imagevenue.com/loc1113/th_14041_B6_122_1113lo.jpg" /></a><a target="_blank" href="http://img154.imagevenue.com/img.php?image=14052_B7_122_613lo.jpg"><img border="0" src="http://img154.imagevenue.com/loc613/th_14052_B7_122_613lo.jpg" /></a><br />
<a target="_blank" href="http://img25.imagevenue.com/img.php?image=14060_B8_122_754lo.jpg"><img border="0" src="http://img25.imagevenue.com/loc754/th_14060_B8_122_754lo.jpg" /></a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA["बुरा दिन" ]]></title>
<link>http://hansteraho.wordpress.com/2007/09/30/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8/</link>
<pubDate>Sun, 30 Sep 2007 15:24:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>राजीव् तनेजा</dc:creator>
<guid>http://hansteraho.wordpress.com/2007/09/30/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8/</guid>
<description><![CDATA[&#8220;बुरा दिन&#8221;
***राजीव तनेजा***
&#8220;मुँह म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>"बुरा दिन"</strong></p>
<p>***राजीव तनेजा***</p>
<p>"मुँह में जो पानी ने आना शुरू किया तो फिर रुकने का नाम ही नहीं लिया"</p>
<p>"मेरी हालत देख बीवी से रहा ना गया....तुनक के बोली....</p>
<p>"अभी तो सिर्फ शादी का न्योता भर ही आया है और तुम्हारा ये हाल हुए जा रहा है....</p>
<p>"जब मौका आएगा तो कुछ'खान'पडेगा नहीं आपसे"<br />
मैँ बोला"अरी भागवान!....कभी तो अपनी चोंच बन्द किया करो...</p>
<p>ये नहीं कि हर'टाईम'बस'बकर-बकर'..</p>
<p>"ऊपरवाले ने अगर ज़बान दी है तो वो दी है...'तर'माल पाडने के लिए....</p>
<p>"ये नहीं कि जब देखो करते जाओ ...बस'चबड-चबड'.....और कुछ नहीं"...<br />
"बिना आगा-पीछ सोचे बोलते जाओ...बस बोलते जाओ"...</p>
<p>"वो भी बिना किसी तुक के"<br />
बीवी कहाँ रुकने वाली थी?तपाक से जवाब दिया...</p>
<p>"जानती हूँ आपको...</p>
<p>बातें ये लम्बी चौडी..और जब खाने की बारी आए तो...</p>
<p>"टाँय-टाँय-फिस्स"<br />
"पिछली बार का याद है ना...जब गए थे शर्मा जी के बेटे की बारात में...</p>
<p>"क्या खाक माल पाडा था?"....</p>
<p>"बस दो-चार आल्तू-फाल्तू की चीज़ों में ही पेट पस्त हो गया था आपका"<br />
"अरे!...वो तो मैँ ही थी जो ...पूरे हफ्ते भर का माल-पानी समेट लाई थी एक ही झटके में"<br />
"और हाँ!...जब जा ही रहे हो तो एक बात ध्यान से गाँठ बाँध लो"....</p>
<p>"खबरदार!..जो खाली हाथ वापिस आए"....</p>
<p>"घर में घुसने तक न दूंगी"...</p>
<p>"कहे देती हूँ!...कसम से"<br />
"और हाँ!...वो'जैकेट'ले जाना मत भूल जाना कहीं"..<br />
"बडी मुश्किल से'वाटर-प्रूफ'जेबें लगवाई हैँ....</p>
<p>'गुलाब जामुन'और'रसमलाई'के लिए"...</p>
<p>"ये नहीं कि'वाटर प्रूफ'जेबों में'पकोडे'लाद लो और'गुलाब जामुन'दूसरी जेब में कि...</p>
<p>पूरे रास्ते भर'चासनी'ही टपकती रहे"...<br />
"पता है ना?...पिछली बार कितनी'चींटियाँ'चिपक गयी थी मिठाई से"...<br />
"पूरा बदन सुजा दिया था कम्भखत मारियों ने काट-काट के"....</p>
<p>"एक-एक को मिठाई से उखाड कर फैंकने से मिठाई खाना भी कितना बदमज़ा हो गया था ना?"<br />
"अब भला सारी कहाँ छूट पायी थी?"...</p>
<p>"आठ-दस को तो निगलना ही पडा था"<br />
"वो ही तो...."</p>
<p>"ध्यान रखना कि सबसे पहले किस चीज़ पे हाथ साफ करना है और बाद में किस पर"...<br />
"खबरदार!...जो'पनीर'के अलावा किसी चीज़ को मुँह मारा तो"...</p>
<p>"खाना है तो ढंग की चीज़ खाओ"...</p>
<p>"ये क्या?कि बस यूँ ही मज़ाक-मज़ाक में उलटी-सीधी चीज़ों से'स्वाद-स्वाद'में ही निबट लो"<br />
"अरे!...दावत तो होती थी हमारे टाईम में...</p>
<p>महीने भर पहले ही जा धमकते थे न्योता देने वालो के यहाँ कि...</p>
<p>"ले बेटा!..कर सेवा-पानी"...</p>
<p>"हमारा आशीर्वाद तेरे साथ है"<br />
"अब तो बस नाम भर का ही रह गया है मिलना-मिलाना"</p>
<p>"किसे फुर्सत है अब एक दूसरे का हाल-चाल पूछने की?"...<br />
"अब तो बस....</p>
<p>'जाओ'....</p>
<p>'शक्ल'दिखाओ ..</p>
<p>'थोडा बहुत पेट में ठूसो'...</p>
<p>'लिफाफा थमाओ'...</p>
<p>और हो लो रफूचक्कर"<br />
"ऊपर से ये मुय्या'प्लेट सिस्टम'का फैशन खाने का तो मज़ा ही बद मज़ा करता जा रहा है"<br />
"ये भी कोई बात हुई कि बस चुपचुपाते...'आर्डर'करो...'थोडी'अंटी'ढीली करो'...और हो गया काम"</p>
<p>"पडोस तक को भी ना पता चले कि कोई दावत-शावत का प्रोग्राम है"<br />
"और ऊपर से ये साले!..'केटरिंग'वाले बडे ही चालू होते है....</p>
<p>जब'रेट'..'फाईनल'करने का वक्त होता है तो...</p>
<p>"जी!..ये परोसेंगे"...और..."वो भी परोसेंगे"....<br />
"माँ....दा...सिर्...परोसेंगे"<br />
"साले!... इतनी लम्बी-चौडी'लिस्ट..'रट्टू तोते'के माफिक'सुना डालते हैँ कि....</p>
<p>बन्दा तो बस बावला हो उनकी ही'डायलाग बाज़ी'सुनता रहे"...</p>
<p>"साले!...बातों की ही खाते हैँ और...बातों की ही खिलाते हैँ"</p>
<p>"कोई कसर बाकी  न रह जाए...यही सोच बन्दा चुप लगा जाता है"...</p>
<p>"इज़्ज़त जो प्यारी होती है सभी को"</p>
<p>"किसी को बिटिया के हाथ पीले करने होते हैँ..</p>
<p>"तो किसी को अपने पैसे की नुमाएश"<br />
"इस चक्कर में ये भी भूल जाते हैँ कि..</p>
<p>"कम्भख्त साला पेट तो एक ही है"...</p>
<p>"क्या-क्या ठूसा जाएगा इसमें भला?"<br />
"ईमानदारी की बात तो ये कि बन्दा अगर ढंग से खाने बैठे तो एक या दो'आईटम'में ही'कोटा'पूरा"<br />
"लेकिन..."लालच बुरी बला है"...</p>
<p>"सो!...खाने वाला सोचता है कि अपने बाप का क्या जा रहा है?...</p>
<p>"थोडा खाओ...थोडा फैंको"<br />
"चीज़ पसन्द भी आ जाए बेशक...लेकिन जैसे दूसरे की बीवी ज़्यादा सुन्दर लगती है...</p>
<p>ठीक वैसे ही..दूसरे की'प्लेट'में पडा खाना ज़्यादा'लज़्ज़तदार'दिखाई पडता है"<br />
"इसलिए एक कौर मुँह में डाला नहीं कि बाकि सारा सीधा'डस्टबिन'में जाता नज़र आता है"<br />
"फिर से नयी'प्लेट'में नयी'आईटम'"<br />
"पट्ठे के पास...नम्बर दो का बडा माल है...</p>
<p>"कुछ तो कम हो"<br />
"वर्ना'टैक्स-वैक्स'के लपेटे में आ गया तो वैसे ही लेने के देने पड जाएंगे"..</p>
<p>"कुछ तो भला हो किसी का"<br />
"अब यार!...वैसे भी कौन सा अपनी जेब से'नोट'लग रहे हैँ?....</p>
<p>"जो एक ही प्लेट में सब कुछ खा डालने की सोचें"<br />
"कई बार तो ऐसा होता है जैसा कभी दिल्ली की'डी.टी.सी'बसों का हाल हुआ करता था....</p>
<p>एक के ऊपर एक लदा दिखाई देता था जैसे...</p>
<p>जीते जागते इंसान न हुए किसी कसाई के पिंजरे में बन्द पडी मुर्गियाँ हों"<br />
"ठीक वैसे ही'प्लेट'में पडे माल का हाल हो रहा होता है...<br />
"पनीर के ऊपर'गोभी'चढी दिखाई देती है तो....</p>
<p>नीचे से जगह बनाते हुए चुपके से'दाल मक्खनी'अपनी'एंट्री'मार लेती है"<br />
"बेचारा'पापड'तो अपनी किस्मत को रो रहा होता है कि...</p>
<p>उसे ऊपरवाले ने इतना कमज़ोर क्यों बनाया?"</p>
<p>"क्या बिगाडा था उसने किसी का जो उसे ऐसे दिन देखने पड रहे हैँ?"<br />
"ऊपर से तो गर्मागर्म'गुलाब जामुन'चढ बैठा और नीचे से'दही भल्ले'की दही दाखिल हो गयी उसकी'टैरेटरी'में"<br />
"ये साले!केटरिंग वाले भी किसी के सगे नहीं होते...</p>
<p>मौका मिला तो बस'आलू'उबाला और तल दिया अल्ग-अलग शक्ल में"<br />
"किसी को'लम्बा'तो किसी को'गोल'...</p>
<p>तो कोई'तिकोना'बन अपने रूप पे इतरा रहा होता है"</p>
<p>"कुछ को'पीला'रंग डाला तो कुछ को'लाल'"<br />
"बस!..हो गयी'वैराईटी'पूरी"<br />
"पल्ले पड रही है ना बात?"या फिर...</p>
<p>भैंस के आगे बीन बजाए चली जा रही हूँ मैँ इतनी देर से?"बीवी गुस्से से बिफरती हुयी बोली<br />
"अरे!...कुछ तो बोलो..."</p>
<p>"मुँह तो खोलो"..</p>
<p>"या ज़बान को ताला लग गया?"<br />
"और हाँ...इसी बात पे याद आया...'सूटकेस'को ताला ज़रूर लगा लेना...</p>
<p>"कहीं बाद में पता चले कि...मेहनत तो हम करते मर गए और चटखारे कोई और मारता रहा"<br />
"'फाईव स्टार होटल'में पार्टी है...थोडा बन-ठन के जाना"<br />
"क्या-क्या गायब करना है?....मालुम है ना?"...<br />
"या!...बिलकुल ही दिमाग का बंटाधार कर बैठे हो इन बेवाकूफी भरी कहानियाँ को लिखने के चक्कर में"</p>
<p>"कितनी बार कह चुकी हूँ के बेफिजूल में'टाईम'खोटी ना किया करो"...<br />
"जितने मर्ज़ी पन्ने काले करते फिरो..कोई नहीं पढ्ने  वाला"<br />
 </p>
<p>"ना कोई आया है और ना ही कोई आएगा'फीतियाँ'लगाने"<br />
"कभी एक-आध'कमैंट'मिला है ढंग का?"</p>
<p>"बस सब..यही कहते फितरते हैँ कि इतना'टाईम'कैसे निकाल लेते हो?"<br />
"जिसका काम उसी को साजे"</p>
<p>"आँखे बनी हैँ लडकियों को ताडने के लिए और....</p>
<p>तुम सोचते हो कि ये ज़रूरी काम छोड हर कोई तुम्हारे इन कागज़ों में माथा-पच्ची करता फिरे"<br />
"उफ!...कितने भोले हो तुम भी"<br />
"अब किसे टाईम हैँ कि बेकार की रद्दी में आँखे गडाता फिरे?"</p>
<p>"अपनी तरह घर से फाल्तू समझ रखा है क्या सबको?"<br />
"ये सब चिट्ठे-विट्ठे'बेकार के ढकोसले हैँ ...कोई नहीं पढता इन्हें"...</p>
<p>"सिर्फ दिल की भडास निकलने का ज़रिया भर हैँ"</p>
<p>"अब अगर दो चार चेले मिल मिला भी गए अपवाद स्वरूप तो कौन सा तीर मार लोगे?"<br />
"दो चार नमूनों ने कुछ झूठी-सच्ची तारीफ क्या कर दी...</p>
<p>सब काम छोड के जनाब लग गये'कीबोर्ड'की ऐसी तैसी करने में"<br />
"तीन तो बदल चुके हो दो साल में"<br />
"जिस दिन'कम्प्यूटर'खुद ही हाथ खडे कर देगा...तभी चैन पडेगा आपको"...</p>
<p>"कुछ तो बक्श ही दो मेरी खातिर"...</p>
<p>"थोडी'चैट-वैट'क्या कर लेती हूँ कभी-कभार"....</p>
<p>"मेरा सुख नही देखा जाता आपसे"कहते हुए बीवी ने झट से कम्प्यूटर बन्द कर दिया<br />
"चिटठे और चिट्ठाजगत की बुराई सुनी ना गयी मुझसे और गुस्से से चिल्ला पडा..</p>
<p>"चुप होती है या दूँ एक खींच के ?"</p>
<p>"कितनी बार कहा है कि फाल्तू ना बोला कर...लेकिन तेरी ज़बान है या हिन्दुस्तान की अबादी?"..</p>
<p>"रुकने का नाम ही नहीं लेती"<br />
"मेरी गीदड भभकी काम आई और बीवी चुप लगा के बैठ गयी"<br />
"दर असल उसे मेरी चिंता नहीं लेकिन आने वाले माल-पानी की चिंता तो ज़रूर ही थी"<br />
"खैर!...सब गिले-शिकवे छोड हम मियाँ-बीवी रात भर दावत के बारे में ही बातें करते रहे"</p>
<p>"कब आँख लगी कुछ पता नहीं"<br />
"याद नहीं कि...अलसुबह के सपने में किसका चौखटा देखा था...</p>
<p>जो हर वक़्त बुरा ही बुरा हो रहा था मेरे साथ"<br />
"पहले तो घर से निकलते ही बिल्ली रस्ता काट गयी और...ऊपर से पेट भी खराब हो चला था"<br />
"पता नहीं बीवी किस भण्डारे से माल-पानी ले आई थी हफ्ता भर पहले?"</p>
<p>"कल तक तो ठीक ही था...एक दिन में ही इतना बिगड जाएगा...सोचा न था"<br />
"पता होता तो कल ही सारा का सारा सफाचट न कर जाता भला?"<br />
"अब यार!..रह रह कर पेट में गुड-गुड सी हो रही थी लेकिन...</p>
<p>'ट्रेन'के छूट जाने का डर और नतीजन'बेलन'की मार पडने का खौफ...<br />
सो!...मैँ'इंजन'की सीटी सुन भाग लिया सरपट'रेलवे स्टेशन'की ओर"<br />
"बडी मुश्किल से आखरी डिब्बे में जगह बनाई"<br />
"जल्दबाज़ी में पता ही नहीं चला कि'कम्पार्टमैंट'लेडीज़'है या फिर'जैंटस'"<br />
"आव देखा ना ताव...सीधा भाग लिया'टायलेट'की तरफ"<br />
"दरवाज़ा अन्दर से बन्द था"</p>
<p>"खूब खटखटाया...लेकिन कोई फायदा नहीं"<br />
"आखिर तंग आ के ऊपर रौशनदान से झाँकने की कोशिश कि तो..</p>
<p>पीछे से एक जनाना आवाज़ों ने ध्यान बांट दिया"...<br />
"बचाओ....बचाओ"...</p>
<p>"पुलिस...पुलिस"...की सी अवाज़ें सुनाई दे रही थी"<br />
"किसी अनहोनी की आशंका से पलट के देखा तो सब कम्भखत मारियों का इशारा मेरी ही तरफ था"<br />
"हडबडाहट में कहाँ कूदा...कैसे कूदा..कुछ याद नही....बस सीधा सरपट भाग लिया दूसरे डिब्बे की तरफ"<br />
"लेकिन...हाय री!.... फूटी किस्मत"</p>
<p>"सामने से हवलदार आवाज़ें सुन के इधर ही चला आ रहा था"</p>
<p>"साथ में कई और'ठुल्ले'भी थे"</p>
<p>"मुझे भागते देख वो भी मेरे पीछे लपक लिए और धर दबोचा मुझ मासूम को'मुर्गे'की माफिक"<br />
"साले!...लेडीज़ को छेडता है?"...</p>
<p>"अभी सिखाते हैँ तुझे सबक कि कैसे छेडा जाता है लेडीज़ को"</p>
<p>"चल!..टिकट दिखा"...<br />
"मैँ चुप"....</p>
<p>"जब भला जब मेरे पूरे खानदान ने कभी टिकट नेहीं लिया तो मैँ भला क्यों लेने लगा?"</p>
<p>"फाल्तू पैसे नहीं हैँ हमारे पास कि यूँ ही मुफ्त में लुटाते फिरें"</p>
<p>"सो!..जेबें टटोलने का नाटक करते हुए बहाना बना डाला....<br />
"जी!...लगता है जल्दबाज़ी में स्टेशन पे ही गिर गयी"<br />
"मेरे सूट-बूट'का'एक्सरे'करने के बाद सबकी आँख बचा हवलदार ने जेब गर्म करने का इशारा किया"<br />
"पागल कहीं का...इतना भी नहीं पता कि मैँ हमेशा माँगे हुए कपडों मे ही जचंता हूँ"<br />
"पता नहीं'लालू'ने भी किस-किस को भर्ती कर डाला है?"<br />
"बेवाकूफ!...अपनी बीवी ने कभी अपुन की जेब में चवन्नी के अलावा कुछ टिकने दिया है भला?...</p>
<p>जो आज कुछ माया-शाया दे देती"<br />
"हुँह!...और ये जनाब चले हैँ'टिकट'वसूलने"<br />
"जेब गर्म करने का तो भैय्या ...सवाल ही पैदा नहीं होता"<br />
"सीधे-सीधे ....साफ-साफ हाथ खडे कर दिए"और मिमियाते हुए बोला कि....</p>
<p>मेरा पेट खराब है..मुझे'टायलेट'जाने दो".....<br />
"प्लीज़"....<br />
"हवलदार को गुस्सा तो मेरी कंगली हालत देख पहले से ही चढा था,बोला...<br />
"साले!....</p>
<p>"एक तो बिना टिकट"...</p>
<p>"ऊपर से लेडीज़'कम्पार्टमेंट"</p>
<p>"और अब जनाब'टायलेट'भी...'लेडीज़'का ही इस्तेमाल करना चाहते हैँ"</p>
<p>"इसे कहते हैँ...'चोरी...ऊपर से सीना जोरी"<br />
"तेरे जैसे'ड्रामे'के लिए तो हमने स्पैशल'जुगाड'बनाया हुआ है"...<br />
"इसी की तनख्वाह मिलती है हमें"<br />
"चल!..वहीं ले चलता हूँ"<br />
"तू भी क्या याद करेगा कि किसी दिलदार से पाला पडा है"<br />
"चेहरे पे मुस्कान उभरी....उम्मीद की किरण जो जाग चुकी थी कि...</p>
<p>इस हवलदार के बच्चे को वहीं से चकमा दे नौ दो ग्यारह हो जाउंगा"<br />
'</p>
<p>"लेकिन वो साला!...भी किसी कमीने से कम नहीं था"...</p>
<p>"बहुत चतुर था"..</p>
<p>"इरादा भाँप गया मेरा और ज़बरदस्ती सारे कपडे उतरवा बन्द कर दिया एक सडियल से'टायलेट'में"<br />
"मैने भी सोचा कि पहले ज़रूरी काम से तो फारिग हो ही लूँ"....<br />
"बाद में निबटूंगा इस हवलदार के बच्चे से "<br />
"लेकिन सालो ने बिना टिकट वालो के लिए जो'इंतज़ामात'किए हुए थे...</p>
<p>वो सब देख तो मेरे होश'फाख्ता'होने को आए"<br />
"अब!...अपने मुँह से कैसे कहूँ?कि...कैसे-कैसे'शाही इंतज़ामात'थे"<br />
"आप खुद समझदार हैँ...अपने आप अन्दाज़ा लगा लेना मेरी हालत का"</p>
<p><img border="0" align="absBottom" width="335" src="http://img233.imageshack.us/img233/10/buradintp8.jpg" height="377" /><br />
"बडी मुशकिल से मान-मनौवल कर किसी तरह हवलदार से पीछ छूटा...</p>
<p>"उसको भी अठन्नी का'पार्टनर'बनाना पडा शादी के माल-पानी में"</p>
<p>"अब वो उल्लू का पट्ठा भी दोस्त बन मेरे साथ ही जा रहा था शादी में"...<br />
"वो भी बिना'टिकट'... "<br />
***राजीव तनेजा***</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[आपके चिट्ठों के लिंक और ढेर सा मनोरंजन, अब सब मिलेगा हिंदी टूलबार में]]></title>
<link>http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/09/21/entertainment/</link>
<pubDate>Fri, 21 Sep 2007 14:10:25 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/09/21/entertainment/</guid>
<description><![CDATA[ हिंदी टूलबार में हमने कुछ चुने हुए चि]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3"><img align="left" src="http://hinditoolbar.wordpress.com/files/2007/09/list.jpg" alt="list.jpg" /> हिंदी टूलबार में हमने कुछ चुने हुए चिट्ठों के लिंक जोड़े हुए थे। यह संभव भी नहीं था कि सारे हिंदी चिट्ठों के लिंक इस टूलबार में जोड़े जायें और फिर नित नये बनते हिंदी चिट्ठों का हिसाब किताब रखना और उन्हें जोड़ते जाना वाकई टेढ़ी खीर होता। इसका हल सुझाया चिट्ठाजगत  ने। उन्होंने चिट्ठाजगत पर शामिल चिट्ठों की सूची को टूलबार में जोड़ने का हमारा अनुरोध स्वीकार कर लिया और हम आ गये सभी चिट्ठों के लिंक इस टूलबार में ले कर। इसमें आप अपने चिट्ठे तो देख ही सकेंगे दूसरे चिट्ठे जो आप पढ़ना चाहते हैं उनके URL पते न तो आपको याद रखने की आवश्यक्ता होगी और न ही बार बार उन्हें टाइप करने का झंझट। बस चिट्ठों की सूची पर जायें और मनचाहे चिट्ठे पर क्लिक करें और पहुंच जायें। </font></p>
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<p align="left"><font size="3">अब बात मनोंरंजन की।</font></p>
<p><font size="3"><br />
<img align="left" src="http://hinditoolbar.wordpress.com/files/2007/09/menu.jpg" alt="menu.jpg" /></font><font size="3"> </font><font size="3">इस टूलबार पर हमने एक मनोरंजन का एक ड्रापडाउन मीनू बनाया है। इसमें हमने आपके मनोंरंजन का भरपूर इंतजाम किया है।</font><font size="3"></p>
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<p align="left">सबसे पहले इसमें जो विजेट लगा है वह है डिज्लर का । डिज्लर में आप अपने पसंद का संगीत, वीडियो, रेडियो तथा गेम्स सर्च कर सकते हैं, उन्हें बजा सकते हैं और चाहें तो उन्हें बुकमार्क भी कर सकते हैं। पहली बार जब मैंने इसे परखा तो घंटों कैसे बीत गये पता ही नहीं चला। बहुत ही मजेदार विजेट है यह आपको जरूर पसंद आयेगा।<br />
<img align="left" src="http://hinditoolbar.wordpress.com/files/2007/09/dizzler.jpg" alt="dizzler.jpg" /></p>
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<p align="left">इसके बाद आती है वीडियो की दीवार। इसे खोलते ही आपकी स्क्रीन पर इंटेरनेट पर हिंदी के वीडियो क्लिप एक दीवार के रूप में आपके सामने आ जाते हैं, उसमें से चाहे कोइ वीडियो क्लिप चुनिये और चलाइये।</p>
<p align="left"><img src="http://hinditoolbar.wordpress.com/files/2007/09/videowall.jpg" alt="videowall.jpg" /></p>
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<p align="left">इसके बाद जुड़े हैं बहुत से  भारतीय टीवी चैनल। क्लिक कीजिये और लाइव मजे लीजिये।</p>
<p>आखिर में एक विजेट है अंतर्राष्ट्रीय टीवी चैनलों का। इसमें आपको सैंकड़ों विदेशी टीवी चैनल देखने को मिलेंगे।</p>
<p>मनोंरंजन के मीनू में जल्द ही और भी बहुत कुछ जुड़ेगा बस थोड़ा इंतजार कीजिये।</p>
<p>चलते चलते आपको एक बात बता दें कि आपका यह टूलबार तेजी से लोकप्रिय हो रहा है इसके डाउनलोड दिनों दिन तेज गति से बढ़ते जा रहे हैं।</p>
<p>अंत में पाठकों और टूलबार के प्रयोगकार्तांओं से एक अनुरोध, चुप न बैंठें, हमारे प्रयासों पर अपनी राय बतायें। आपको इस टूलबार मे क्या पसंद है और क्या नापसंद यह भी बतायें। आप अपने सुझाव भी दें कि आप इस टूलबार में और क्या क्या देखना चाहते हैं।</p>
<p></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[’धड़ाधड़ महाराज’ तक पहुंचें धड़ाधड़]]></title>
<link>http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/09/08/chitthajagat/</link>
<pubDate>Sat, 08 Sep 2007 12:40:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/09/08/chitthajagat/</guid>
<description><![CDATA[
चिट्ठाजगत के धड़ाधड़ महाराज हमें कई तरह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="center"><a href="http://HindiBlog.ourtoolbar.com/"><img border="0" align="bottom" width="1" src="http://hinditoolbar.wordpress.com/files/2007/09/tbcj.jpg" alt="tbcj.jpg" height="1" /><img border="0" align="bottom" width="1" src="http://hinditoolbar.wordpress.com/files/2007/09/tbcj.jpg" alt="tbcj.jpg" height="1" /><img src="http://farm2.static.flickr.com/1348/1274602754_558198b66d_o.jpg" /></a></p>
<p><font size="3"><a href="http://www.chitthajagat.in/">चिट्ठाजगत के धड़ाधड़ महाराज</a> हमें कई तरह की सुविधायें देते हैं। चिट्ठाजगत हमें कई प्रारूपों में तो मिलता ही है, यहां हम अपनी व्यक्तिगत रुचि के अनुसार भी अपना वैयक्तिक पृष्ठ बना सकते हैं। और भी कई प्रकार की सुविधायें हैं चिट्ठाजगत पर&#124;  उम्मीद है कि आगे चल कर धड़ाधड़ महाराज हमें और भी ज्यादा सुविधायें प्रदान करेंगे।</font><br />
<a href="http://HindiBlog.ourtoolbar.com/"><img src="http://hinditoolbar.wordpress.com/files/2007/09/cjdd.jpg" alt="cjdd.jpg" /></a></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p><font size="3">चिट्ठाजगत पर हमें 'हाल में छपे चिट्ठे', 'पारम्परिक प्रारूप', 'लघु प्रारूप', 'वैयक्तिक पृष्ट' और 'मेरे चिट्ठे' के प्रारूपों के विकल्प मिलते हैं। हमने यह सारे प्रारूपों के लिंक एक साथ हिंदी टूलबार में रख दिये हैं जिससे आप अपनी रुचि के अनुसार जिस प्रारूप पर भी जाना चाहें सीधे उसी प्रारूप पर जा सकते है।</font><font size="3"> </font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>धड़ाधड़ महाराज तक धड़ाधड़ कैसे पहुंचें:</strong></font></p>
<p align="left"><font size="3">यह है चिट्ठाकारों के लिये बहुत काम की बात। हमने हिंदी टूलबार पर एक बटन लगाया है ’सारे अधिकृत चिट्ठे अभी चिट्ठाजगत पर खींचे’ । आप जब भी अपने चिट्ठे पर कोई पोस्ट करते हैं तो बस इस बटन पर क्लिक कर दें। एक छोटी सी खिड़की खुलेगी। आपको लॉग इन करना होगा और आपके सभी अधिकृत चिट्ठों की नयी पोस्ट उसी समय चिट्ठाजगत पर नजर आने लगेगी। यदि आप पहले से चिट्ठाजगत पर लॉग इन किये हुए हैं तो आपको फिर से लॉग इन करने की जरूरत नहीं होगी, सिर्फ क्लिक कर देना ही काफी होगा। मजे की बात यह है कि इस प्रक्रिया के लिये कोई जरूरी नहीं है कि आप अपने चिट्ठे पर हों या चिट्ठाजगत पर हों, आप अपने ब्राउजर पर किसी भी पेज से यह कर सकते हैं।</font></p>
<p style="text-align:center;"><img border="0" width="435" src="http://hinditoolbar.wordpress.com/files/2007/09/tbcj.jpg" height="379" /></p>
<p><font size="3">इसके अलावा चिट्ठों की फीड में अब नारद के साथ साथ चिट्ठाजगत की ताजा फीड भी आपको टूलबार में लगातार मिलेगी। चिट्ठाजगत की फीड में चिट्ठे का नाम भी पोस्ट के शीर्षक के साथ नजर आता है।</font></p>
<p align="left" style="text-align:center;"><img border="0" align="middle" width="299" src="http://hinditoolbar.wordpress.com/files/2007/09/toolbar2.png" height="353" /></p>
<p><a href="http://hinditoolbar.wordpress.com/files/2007/09/tbcj.jpg" title="tbcj.jpg"></a></p>
<p align="left"><font size="3"> </font><font size="3"> </font><font size="3">आपको हिंदी टूलबार और चिट्ठाजगत का यह संयुक्त प्रयास कैसा लगा हमें जरूर बतायें&#124;</font></p>
<p align="left"><font size="3"><a target="_blank" href="http://hindiblog.ourtoolbar.com/">हिंदी टूलबार यहां से डाउनलोड करें।</a></font></p>
<p align="left"><font size="3">चिट्ठाजगत पर चिट्ठा अधिकृत करने की प्रक्रिया जानने के लिये <a href="http://chittha.chitthajagat.in/2007/08/step-by-step.html">यहां क्लिक </a>करें।</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अनुराग बने रिपोर्टर ]]></title>
<link>http://neerajdiwan.wordpress.com/2007/04/17/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%97-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%b0/</link>
<pubDate>Tue, 17 Apr 2007 11:19:41 +0000</pubDate>
<dc:creator>neerajdiwan</dc:creator>
<guid>http://neerajdiwan.wordpress.com/2007/04/17/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%97-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%b0/</guid>
<description><![CDATA[वर्जिनिया टेक में दर्ज़नों की मौत की ख]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>वर्जिनिया टेक में दर्ज़नों की मौत की ख़बर मिलते ही मुझे अपने ब्लॉगर साथी अनुराग मिश्रा जी याद आई. अनुराग जी से संपर्क साधा और रात प्रसारित होने वाले न्यूज़ बुलेटिन में उन्होंने हमें ताज़ा हाल और पूरी घटना से अवगत कराया. वर्जिनिया टेक से जुड़े वे पहले शख्स थे जो सबसे पहले किसी भारतीय चैनल पर अपनी बात कह रहे थे.<br />
यह किसी तरह की उपलब्धि तो नहीं किंतु यह पत्रकार की नियति है कि हर मौक़े पर, हर दशा में उसे ख़बर कवर करनी ही होती है. अनुराग जी ने ब्रेकिंग न्यूज़ के एंकर और इंडिया टीवी के एडिटर इन चीफ़ रजत जी से बातचीत के दौरान बताया कि किस तरह हमलावर आया और संस्थान के किस इलाक़े में अंधाधुंध फ़ायरिंग की. कितने लोग अपनी जान गवां बैठे और भारतीयो में इस घटना को लेकर कितनी चिंता है. इसके अलावा भी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी उन्होंने हमें दी. बाद में आपसी बातचीत के बीच उन्होंने कई अन्य जानकारी दी. इस तरह एक ब्लॉगर ने रिपोर्टर की संक्षिप्त भूमिका निभायी. हमले की यह घटना अत्यंत दुखद है. सोमवार का दिन दो दुखद घटनाओं के बीच बीता.</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[''आठ पोस्ट डिलीट, दो ब्लॉगों के पासवर्ड चोरी'']]></title>
<link>http://neerajdiwan.wordpress.com/2007/02/20/indibloggiesaward/</link>
<pubDate>Tue, 20 Feb 2007 08:34:02 +0000</pubDate>
<dc:creator>neerajdiwan</dc:creator>
<guid>http://neerajdiwan.wordpress.com/2007/02/20/indibloggiesaward/</guid>
<description><![CDATA[इस रचना का किसी से कोई लेना-देना नहीं ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3"><span style="color:navy;font-family:Mangal;">इस रचना का किसी से कोई लेना-देना नहीं है अलबत्ता रचना पढ़कर कुछ लोगों को लेने के देने पड़ सकते हैं. यदि आपको इसमें कुछ आपत्तिजनक लग रहा है तो भी आप आपत्ति नहीं जता सकते क्योंकि होली के रंग में भंग डालकर यह रचना लिखी गई है. उखड़ने-उखाड़ने की बातों में उलझकर अपना और लेखक का मूड ना उखाड़े.. आप इसे अन्यथा ना लें क्योंकि लेखक ने अन्यथा ले लिया तो अगला लेख विशेष रूप से आप पर लिखा जाएगा. रचना पढ़ें और कमेंट ज़रूर दें. औरों की कमेंट पढ़कर ना कमेंटियाएं .. धन्यवाद </span></font></p>
<p><font size="3"><span style="color:navy;font-family:Mangal;"></span></font></p>
<p><font size="3"><span style="color:navy;font-family:Mangal;"><span> </span></span><span style="color:navy;font-family:Raghu8;"></span></font><span style="color:navy;font-family:Raghu8;"><font size="3" face="Times New Roman"> </font></span><span style="color:navy;font-family:Raghu8;"> </span><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"><font face="Times New Roman"><img src="http://img120.imageshack.us/img120/769/cartoon1gq8.jpg" /></font></span></p>
<p><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"></span><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;"></span></span><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;"></span></span><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;"></p>
<p style="margin:0;"><em><span style="font-size:10pt;color:maroon;font-family:Raghu8;">चित्र</span></em><em><span style="font-size:10pt;color:maroon;font-family:Arial;"> </span></em><em><span style="font-size:10pt;color:maroon;font-family:Raghu8;">सौजन्य</span></em><em><span style="font-size:10pt;color:maroon;font-family:Arial;">- </span></em><em><span style="font-size:10pt;color:maroon;font-family:Raghu8;">तरकशिया, </span></em><em><span style="font-size:10pt;color:maroon;font-family:Raghu8;">जो</span></em><em><span style="font-size:10pt;color:maroon;font-family:Arial;"> </span></em><em><span style="font-size:10pt;color:maroon;font-family:Raghu8;">कह</span></em><em><span style="font-size:10pt;color:maroon;font-family:Arial;"> </span></em><em><span style="font-size:10pt;color:maroon;font-family:Raghu8;">न</span></em><em><span style="font-size:10pt;color:maroon;font-family:Arial;"> </span></em><em><span style="font-size:10pt;color:maroon;font-family:Raghu8;">सके</span></em><span style="font-size:10pt;color:maroon;font-family:Arial;"></span></p>
<p><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"><strong><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;"></span></strong></span></p>
<p></span></span><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"><strong><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;">सु</span></strong><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;">बह-सुबह मेल और ब्लॉगजगत की ख़बरें देखने के लिए मुंगेरीलाल ने कम्प्यूटर खोला. अक्षरग्राम पर ताज़ा ख़बर इस तरह थी- ''आठ पोस्ट डिलीट, दो ब्लॉगों के पासवर्ड उड़ा लिए गए'' नारद जी बता रहे थे- ''ब्लॉगजगत में होने वाले चुनाव के पहले कुछ जगहों पर हिंसक वारदात हुई है. <a href="http://www.indibloggies.org/polls-2006">चुनाव आयोग</a> ने चार ब्लॉगियों को अपशब्दों (बोले तो स्लैंडर कैम्पेन) की वजह से कारण बताओ नोटिस जारी किया है. चुनाव २० तक होने हैं और सभी उम्मीदवार दल-बल के साथ मैदान में कूद चुके हैं. प्रचार कार्य ज़ोरों पर है. आयोग से मिली ख़बरों के अनुसार मुख्य चुनाव अधिकारी देबाशीष ने आठ पोस्ट डिलीट करने वालों का पता लगाने का काम जांच एजंसियों को सौंप दिया है. साथ ही दो ब्लॉगियों के पासवर्ड चोरी करने वाले की तलाश जारी है. हालांकि आयोग ने चुनाव शांतिपूर्वक कराने के लिए सभी इंतज़ाम कर लिए हैं. ब्लॉगचोरी करने के मामले में शक की सुई दिल्ली के उस ब्लॉगर पर जाकर टिक रही है जो एक फ़ोरम में नेट हवलदार के पद पर तैनात है.''</span><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"></span><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"><font face="Times New Roman"> </font></span><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"> </span></span><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"></span><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;">''इधर, ब्लॉग चोरी का खामियाज़ा भुगतने वाले बंधु ने चुनाव आयोग कार्यालय के सामने भूख हड़ताल पर बैठने की धमकी दी है. भुक्तभोगी ब्लॉगिए की मांग की है कि आचार संहिता के उल्लंघन करने वाले उस नेट हवलदार को चुनावी ड्यूटी से हटाया जाए. आयोग ने सभी दलों और उनके प्रत्याशियों को भरोसा दिलाया है कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष होंगे....''</span><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"></span><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"><font face="Times New Roman"> </font></span><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"> </span></span></p>
<p><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"><span style="font-size:13pt;font-family:Raghu8;"><span style="font-size:13pt;font-family:Mangal;">मुंगेरी ने इतना ही पढ़ा था कि तभी मोबाइल की घंटी घनघना उठी और कम्प्यूटर से गर्दन हटकर मोबाइल की तरफ़ मुड़ी. कान पर