<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><!-- generator="wordpress.com" -->
<rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	>

<channel>
	<title>चिट्ठाकारिता &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/चिट्ठाकारिता/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "चिट्ठाकारिता"</description>
	<pubDate>Sun, 06 Jul 2008 15:18:37 +0000</pubDate>

	<generator>http://wordpress.com/tags/</generator>
	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[आपका चिट्ठा इंटरनेट एक्सप्लोरर 6 में कैसा दिखता है?]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2008/04/13/your-blog-on-ie-6/</link>
<pubDate>Sun, 13 Apr 2008 03:50:40 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2008/04/13/your-blog-on-ie-6/</guid>
<description><![CDATA[आपको लग रहा होगा कि ऐसा अजीब सवाल मैं क]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">आपको लग रहा होगा कि ऐसा अजीब सवाल मैं क्यों पूछ रहा हूं। मगर इसका कारण है। क्या आपने कभी जांचा है कि आपका चिट्ठा इंटरनेट एक्सप्लोरर -6 पर कैसा दिखता है?</font></p>
<p><font size="3">जब चिट्ठाकारी शुरू की थी तो मैं इंटरनेट एक्सप्लोरर -6 प्रयोग किया करता था। मगर बाद में फायरफॉक्स शुरू किर लिया। इंटरनेट एक्सप्लोरर - 7&#160; के आने के बाद इसके साथ ही चिपके रहे । साथ ही फायरफॉक्स&#160; भी रखा मगर प्रयोग नहीं किया। </font></p>
<p><font size="3"></font>&#160;</p>
<p><font size="3">पिछले कुछ&#160; दिनों से मेरा कंप्यूटर परेशान कर रहा था उसे फार्मेट करना पड़ा। इस दौरान अपने चिट्ठे इंटरनेट एक्सप्लोरर -6 पर देखने का मौका मिला। इससे पता चला कि मेरे चिट्ठे इंटरनेट एक्सप्लोरर -6 पर सही नहीं दिखते । खास कर ब्लॉस्पॉट पर वे चिट्ठे जिनका टैंपलेट बदला गया है। </font></p>
<p><font size="3"></font>&#160;</p>
<p><font size="3">अधिकतर चिट्ठाकार&#160; फायरफॉक्स&#160; या इंटरनेट एक्सप्लोरर - 7 ही प्रयोग करते हैं। मगर सर्च इंजनों से आने वाले पाठकों में 75% के लगभग इंटरनेट एक्सप्लोरर -6 का ही प्रयोग करते हैं (आपने यदि स्टैटकाउंटर लगा रखा है तो आप इसे आसानी से पता कर सकते हैं कि आपके पाठक कौन सा ब्राउजर प्रयोग करते हैं)। </font></p>
<p><font size="3"></font>&#160;</p>
<p><font size="3">तो जब भी आप अपने चिट्ठे का टैंपलेट बदलें यह जरूर जांच लें कि नया टैंपलेट क्या सभी ब्राउजरों पर सही दिखता है, खास कर वे चिट्ठाकार जो एडसेंस का प्रयोग करते हैं क्योंकि हो सकता है कि आपकी एडसेंस यूनिट जिस स्थान पर आपको नजर आती है, आपके पाठकों को किसी और स्थान पर दिख रही हो। कहीं ऐसा तो नहीं कि आपकी साईडबार साईड पर नहीं पोस्ट के नीचे नजर आ रही हो।</font></p>
<p><font size="3"></font>&#160;</p>
<p><font size="3"><br /></font>&#160;</p>
<p><font size="3"></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[चिट्ठों में कूड़ा या खजाना - नजर नजर का फर्क]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2008/01/26/%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%82%e0%a5%9c%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%96%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be/</link>
<pubDate>Sat, 26 Jan 2008 11:40:56 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2008/01/26/%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%82%e0%a5%9c%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%96%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be/</guid>
<description><![CDATA[बात उन दिनों की है जब मैं एक युरोपियन ए]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">बात उन दिनों की है जब मैं एक युरोपियन एयरलाइंस के लिये काम करता था। ऑफिस में बहुत सारे नये कंप्यूटर आये थे। विंडोस 3.1 (याद है किसी को?) वाले। हर कंप्यूटर के साथ में बहुत सी सॉफ्टवेयर की किताबें और बंडल के बंडल छोटी फ्लॉपियां। (अरे भई सीडी उन दिनों कहां होतीं थीं)। </font></p>
<p><font size="3"></font></p>
<p><font size="3">बॉस परेशान कि इतनी सारी किताबें और फ्लोपियों का क्या किया जाये। बोले इस कूड़े का क्या किया जाये। जब ढेर सी एक सी ओरिजनल सोफ्टवेयर और उनकी किताबें एक साथ आ जायें तो किस काम की?  काम तो एक ही से चलाया जा सकता है। </font></p>
<p><font size="3"></font></p>
<p><font size="3">मुझे लगा कि ऐसी कीमती किताबें और सॉफ्ट्वेयर को कोई कूड़ा कैसे कह सकता है? </font></p>
<p><font size="3"></font></p>
<p><font size="3">उनमें से कुछ किताबें और सॉफ्ट्वेयर मैं ले आया था उन दिनों।  किताबें पढ़ीं भी। सॉफ्ट्वेयर भी काम आये। </font></p>
<p><font size="3"></font></p>
<p><font size="3">पिछले दिनों वही फ्लॉपियां कुड़े जैसी हालत में घर के स्टोर से निकलीं और सात रु किलो के पुराने प्लास्टिक में बिकीं। बिक तो वह किताबें भी रहीं थीं मगर पड़ोस के युवक की नजर पड़ गयी उन पर। झट से बोला ’यह खजाना क्यों बेच रहे हैं कबाड़ में।" अब वह किताबें वह युवक ले गया पढ़ने के लिये।</font></p>
<p><font size="3"></font></p>
<p><font size="3">एक ही चीज जो किसी के लिये कूड़ा हो सकती है वही चीज किसी दूसरे के लिये खजाना हो सकती है। उसी प्रकार जो चीज आज मेरे लिये खजाना है कल को हो सकता है वही चीज मेरे लिये कूड़ा हो जाये।</font></p>
<p><font size="3">जरा सोचिये यदि मुझे शेयर बाजार की जानकारी नहीं है तो शेयर बाजार पर छपने वाले सभी चिट्ठे मेरे लिये कूड़ा ही हैं। एक बात और यदि मुझे शेयर बाजार की बहुत अच्छी जानकारी है तो हो सकता है कि शेयर बाजार पर छपने वाली सभी जानकारी का मुझे पहले से ही पता हो। उस दशा में भी शेयर बाजार पर छपने वाले चिट्ठे मेरे लिये कूड़ा ही हुए।</font></p>
<p><font size="3"></font></p>
<p><font size="3">पिछले दिनों रवि जी ने जब </font><a href="http://raviratlami.blogspot.com/2008/01/1.html"><font size="3">तरीका बताया</font></a><font size="3"> कि चिट्ठों से कूड़ा पोस्ट  अलग कर अपनी पसंद के चिट्ठे कैसे पढ़ें तो खूब हंगामा हुआ। मुझे विश्वास है कि जिस गति से हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ रही है देर सवेर सभी को यह तरकीब अपनानी पड़ेगी। यदि आप केवल अपना चिट्ठा दूसरों से पढ़वाना ही नहीं चाहते दूसरे चिट्ठों को भी पढ़ना चाहते हैं तो इससे बेहतर कोई तरीका शायद ही हो।</font></p>
<p><font size="3"></font></p>
<p><font size="3">आज चिट्ठाजगत पर जाकर देखा तो जान कर बहुत खुशी हुई कि वहां अपनी पसंद के चिट्ठे चुनने का बहुत ही <a target="_blank" href="http://www.chitthajagat.in/?khaata=meracj">आसान और उन्नत तरीका </a>मौजूद है। चंद मिनट लगे और मैंने अपनी पसंद के चिट्ठे चुन लिये। आप भी यदि चाहते हैं कि अपनी पसंद के चिट्ठों की कोई पोस्ट पढ़ने से न छूट जाये तो अपनी पसंद को चिन्हित कीजिये। </font></p>
<p><font size="3"><a target="_blank" href="http://www.chitthajagat.in/?khaata=meracj"><img width="449" src="http://aaina2.files.wordpress.com/2008/01/mc-thumb.jpg" alt="mc" height="402" style="border:0;" /></a> </font></p>
<p><font size="3">एक बात और यदि आप चाहते हैं कि आपकी पसंद के चिट्ठे दूसरे लोग भी पढ़ें तो भी आप उन्हें अपनी पसंद के चिट्ठों में शामिल कीजिये। हो सकता है कि जो चिट्ठा अधिक से अघिक लोगों की पसंद का होगा उसे और अधिक लोग पढ़ना चाहेंगे। यह भी हो सकता है कि बहुत से चिट्ठे बहुत अच्छे हों मगर अभी तक बहुत लोगों की उन पर नजर न गयी हो। </font></p>
<p><font size="3"></font></p>
<div style="display:inline;margin:0;padding:0;" class="wlWriterSmartContent">Technorati tags: <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a5%87">चिट्ठे</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%8f%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%97%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a4%b0">एग्रीगेटर</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%97%e0%a4%a4">चिट्ठाजगत</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/Blogs">Blogs</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/Hindi%20Blog">Hindi Blog</a></div>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अब बनाइये अपने चिट्ठे की मोबाइल से पढ़ी जा सकने वाली साईट]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/11/15/lets-go-mobile/</link>
<pubDate>Thu, 15 Nov 2007 13:03:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/11/15/lets-go-mobile/</guid>
<description><![CDATA[हमारे देश में कोई चार करोड़ इंटरनेट कने]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">हमारे देश में कोई चार करोड़ इंटरनेट कनेक्शन हैं और पच्चीस करोड़ मोबाइल हैं। अधिकतर मोबाइल GPRS युक्त हैं तो आप समझ सकते हैं कि इंटरनेट कि पहुंच आने वाले दिनों में किस के जरिये अधिक से अधिक लोगों तक होगी। तो क्या हिंदी चिट्ठाकारों को भी इस तेजी से फैलते इंटरनेट के प्लेटफॉर्म का प्रयोग नहीं करना चाहिये। </font></p>
<p><font size="3"> आप भी अपने चिट्ठे की मोबाइल से पढ़ी जा सकने वाली साईट बना सकते हैं। मैंने </font><a href="http://winksite.com/aaina/aaina"><font size="3">आईना</font></a><font size="3"> और </font><a href="http://winksite.com/aaina/ms"><font size="3">मजेदार समाचार</font></a><font size="3"> की इसी तरह की साईट बनाई है। आप भी अपने चिट्ठे की मोबाइल साईट बहुत ही आसानी से बना सकते हैं। यही नहीं आप इस मोबाइल साईट में एडसेंस भी लगा सकते हैं। तो आप भी बनाइये अपनी मोबाइल साईट और उसका URL अपने अपने मित्रों को SMS  कर दीजिये। </font></p>
<p><font size="3">इसके लिये आप </font><a href="http://winksite.com/site/start.cfm"><font size="3">विंक्साईट</font></a><font size="3"> (</font><a href="http://winksite.com"><font size="3">http://winksite.com</font></a><font size="3">)    (इसके अलावा और भी कोई इस तरह की सुविधा देने वाली साईट हो सकती हैं) पर जायें और अपना खाता खोलें। इसके बाद अपने चिट्ठे की फीड दे कर आप अपना मोबाईल से पढ़ा जा सकने वाला चिट्ठा बना सकते हैं। यह साईट आपके फिड के द्वारा अपने आप ही अपडेट होती रहेगी। </font></p>
<p><font size="3">आजकल आने वाले मोबाइल के सभी नये मॉडलों में हिंदी पढ़ने की सुविधा मौजूद है। </font></p>
<p><font size="3">आप अपना रोमन फीड दे कर रोमन साईट भी बना सकते हैं। इसके बाद आप अपना गूगल एडसेंस कोड दे कर अपनी मोबाइल साईट पर विज्ञापन भी लगा सकते हैं।</font></p>
<p><font size="3">तो क्यों न जल्दी से मोबाईल हो जायें?</font></p>
<p><a href="http://raviratlami.blogspot.com/2007/10/blog-post.html"><font size="3">फीड के बारे में जानने के लिये यहां पढ़ें</font></a></p>
<p><a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/10/07/read-blogs-in-feed/"><font size="3">अपने चिट्ठे का रोमन फीड कैसे लें</font></a></p>
<p><a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/09/28/hindi-on-mobile-2/"><font size="3">कैसे लिखी मोबाइल से हिंदी </font></a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कुछ छोटी छोटी बातें]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/11/03/small-things/</link>
<pubDate>Sat, 03 Nov 2007 13:00:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/11/03/small-things/</guid>
<description><![CDATA[आज कुछ छोटी छोटी बातें:
1. आईना का गूगल प]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">आज कुछ छोटी छोटी बातें:</font></p>
<p><font size="3">1. आईना का गूगल पेज  रैंक बढ़ कर पांच हो गया है। कुछ अच्छे हिंदी चिट्ठों का पेज रैंक कुछ इस प्रकार है:</font></p>
<p><a href="http://aaina2.files.wordpress.com/2007/11/windowslivewritersmallthings-ff1fpage-rankname21.jpg"><font size="3"><img width="336" src="http://aaina2.files.wordpress.com/2007/11/windowslivewritersmallthings-ff1fpage-rankname-thumb1.jpg" height="338" style="border-width:0;" /></font></a><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3">आप अपना पेज रैंक <a href="http://hindinewspaper.blogspot.com/2007/11/new-google-page-rank.html">यहां</a> चैक कर सकते हैं। गूगल पर आपके पेज रैंक के आधार पर ही आपको सर्च करने वालों को दिखाये जाने वाले नतीजों में प्रमुखता मिलती है।</font></p>
<p><font size="3">खुशी की बात है कि हमारे <a href="http://hinditoolbar.wordpress.com/">हिंदी टूलबार पिटारा</a> के चिट्ठे  और  <a href="http://hindiblog.ourtoolbar.com">डाउनलोड पेज</a> दोनों का पेज रैंक  चार हो गया है।</font></p>
<p><font size="3">2. कचरा हिंदी ठीक करने के लिये : कभी कभी ईमेल में यदि कचरा हिंदी नजर आये तो आप उसे </font><a href="http://lang.ojnk.net/hindi/unifix.html"><font size="3">इस लिंक</font></a><font size="3"> पर जाकर ठीक कर सकते हैं। इस लिंक को हिंदी टूलबार में जोड दिया गया है। </font></p>
<p><font size="3">3. गर्भनाल एक शानदार हिंदी की ई पत्रिका है। मैं इसे काफी समय से पढ़ रहा हूं तथा मैं चाहता हूं कि आप सभी को भी इसके बारे में पता चले। यह पीडीएफ के रूप में मुफ्त उपलब्ध करायी जाती है। आप इस पत्रिका को <a href="http://hinditoolbar.wordpress.com/2007/10/31/garbhnal/">हिंदी टूलबार पिटारा में पढ़ </a>सकते है।  </font></p>
<p><font size="3"><a target="_blank" href="http://hinditoolbar.googlepages.com/garbhanal"><font color="#027ac6">गर्भनाल पत्रिका के सभी अंक आप यहां भी पढ़ सकते हैं।</font></a></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क्या आप गूगल समूह 'चिट्ठाकार' के सदस्य हैं?]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/10/22/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%aa-%e0%a4%97%e0%a5%82%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b9-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%95/</link>
<pubDate>Mon, 22 Oct 2007 11:27:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/10/22/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%aa-%e0%a4%97%e0%a5%82%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b9-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%95/</guid>
<description><![CDATA[
मेरे बहुत से साथियों को मेरे इस प्रश्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3"><a href="http://aaina2.files.wordpress.com/2007/10/windowslivewriter15af35bca840-ef04chitthakar1.jpg"><img width="240" src="http://aaina2.files.wordpress.com/2007/10/windowslivewriter15af35bca840-ef04chitthakar.jpg" height="168" style="border:0;" /></a></font></p>
<p><font size="3">मेरे बहुत से साथियों को मेरे इस प्रश्न से हैरानी हो सकती है। कौन चिट्ठाकार होगा जो इस समूह का सदस्य नहीं होगा? मगर सच्चाई यही है कि अधिकतर चिट्ठाकार इस समूह के सदस्य नहीं हैं। आज यदि हिंदी चिट्ठों की संख्या 1100  को पार कर रही है तो चिट्ठाकर समूह पर सदस्यों की संख्या आज की तारीख में केवल 384 ही  नजर आ रही है। यानि अधिकतर चिट्ठाकार इस समूह के सदस्य नहीं हैं। </font></p>
<p><font size="3">तो जो लोग इस समूह के सदस्य नहीं हैं उन्हें बता दें कि यह समूह है हिंदी चिट्ठाकारों का जहां आप हिंदी चिट्ठाकारी और हिंदी कंप्यूटिंग पर चर्चा कर सकते हैं अथवा कोई भी समस्या या विचार रख सकते हैं। आपको तुरंत किसी न किसी  सदस्य से जवाब मिलेगा और हर संभव सहायता भी की जायेगी। इस समूह पर  हिंदी कंप्यूटिंग से संबंधित नयी नयी सूचनायें भी प्रेषित की जाती हैं। </font></p>
<p><a href="http://groups.google.com/group/Chithakar"><font size="3">चिट्ठाकार समूह पर जाने के लिये यहां क्लिक करें।</font></a><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3">अब आपको बतायें एक काम की बात। चिट्ठाकार समूह के संदेशों की फीड हिंदी टूलबार पिटारा में उपलब्ध करा दी गयी है। आप चाहे इस समूह के सदस्य हों अथवा नहीं किंतु आप इस समूह पर आने वाले नये संदेश तुरंत इस फीड पर देख पायेंगे। इसकी घोषणा अलग से हिंदी टूलबार के चिट्ठे पर की जायेगी। </font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[किसी भी साईट का लिप्यांतर होगा एक क्लिक से]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/10/10/%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%88%e0%a4%9f-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%b0/</link>
<pubDate>Wed, 10 Oct 2007 17:39:06 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/10/10/%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%88%e0%a4%9f-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%b0/</guid>
<description><![CDATA[भोमियो ने जब उर्दू से देवनागरी में लिप]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">भोमियो ने जब उर्दू से देवनागरी में लिप्यांतर की सुविधा शुरू की तो उन दिनों मैंने ढेरों उर्दू के पाकिस्तानी चिट्ठे देवनागरी में पढ़े। यकीन मानिये यह एक अलग तरीके का अनुभव था। कम पढ़े लिखे युवकों और युवतियों के पंजाबी और उर्दू की मिलीजुली भाषा में लिखे मासूम चिट्ठे। ज्यादातर पर ग़जलें और शेर। एक चिट्ठा मैं नहीं भूलता जिसमें एक युवक ने अपने दादा के बारे में लिखा जिनका घर यहां दिल्ली में था। बहुत ही मजेदार चिट्ठा था वह। बात पुरानी हो चुकी है इसी लिये उन चिट्ठों के लिंक तो नहीं दे पाऊंगा मगर फिलहाल कुछ <a href="http://bhomiyo.com/uxh.xliterate/www.ur.wordpress.com/">उर्दू चिट्ठे आप यहां पढ़</a> सकते हैं</p>
<p>उन्हीं दिनों मैंने आईना पर <a href="http://aaina2.wordpress.com/?s=%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%8B">सहादत हसन मंटो</a> की कहानी <a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/08/08/manto-toba-tek-singh/">टोबा टेक सिंह</a> प्रकाशित की थी। यह कहानी भी मैंने उर्दू की एक साईट से भोमियो द्वारा लिप्यांतर करके प्राकाशित की थी। आईना पर <a href="http://aaina2.wordpress.com/?s=%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%8B">मंटो</a>, <a href="http://aaina2.wordpress.com/?s=%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%8B">अमृता प्रीतम</a>, <a href="http://aaina2.wordpress.com/?s=%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%B5">शिव कुमार बटालवी</a> और गुलजार की रचनायें पढ़ने के लिये ढेरों पाठक आते हैं। कहने की जरूरत नहीं कि ये पाठक इन रचनाओं को कई अलग अलग लिपियों में पढ़ते हैं।</p>
<p>मेरा बहुत पुराना एक सपना था कि इस तरह का लिप्यांतर हिंदी टूलबार में भी उपलब्ध करवाया जाये। अब वह सपना सच हो गया है।</p>
<p>हिंदी टूलबार पिटारा में भोमियो बटन लगा दिये गये हैं। अब अगर आप किसी साईट की लिपि बदल कर पढ़ना चाहते हैं तो बस इच्छित लिपि के बटन पर क्लिक करें और साईट की लिपि बदल जायेगी। इसके लिये अब जरूरी नहीं कि वांछित साईट पर भोमियो का कोड लगा हो और न ही अब आपको भोमियो की साईट पर जा कर इच्छित साईट का URL लिखने की जरूरत होगी।</p>
<p>इस सुविधा की घोषणा हिंदी टूलबार पिटारा के चिट्ठे पर अलग से विस्तार से की जायेगी।</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[चिट्ठों को रोमन में पढ़ने के लिये चिट्ठाजगत की साईट पर जाने की जरुरत नहीं]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/10/07/%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a5%9d%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95/</link>
<pubDate>Sun, 07 Oct 2007 16:02:21 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/10/07/%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a5%9d%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95/</guid>
<description><![CDATA[एक बार शायद श्रीश शर्मा ने कहा था कि चि]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">एक बार शायद <a href="http://epandit.blogspot.com/">श्रीश शर्मा</a> ने कहा था कि चिट्ठाजगत की टीम का दिमाग बहुत ही उर्वर है और ये लोग ऐसे ऐसे आइडिया खोज कर लाते हैं जिसके बारे में कोई दूसरा सोच भी नहीं सकता।</font></p>
<p><font size="3">अब चिट्ठाजगत पर हमें  मिला है अपने चिट्ठे के लिये RSS फीड रोमन में। यानि कि अब आप अपने चिट्ठे पर एक बटन लगायें <a href="http://chitthajagat.com/?makelink=dekho">रोमन फीड सब्सक्राईब</a> करने का और आपके पाठक आपके चिट्ठे की रोमन फीड के ग्राहक बन सकते हैं। फिर उसके बाद पाठक चाहें गूगल रीडर या किसी भी अन्य फीड रीडर पर इस रोमन फीड को  पढ़ सकेंगे। यानि चिट्ठाजगत की साईट पर जाने से मुक्ति। इसके लिये बस आपको <a target="_blank" href="http://chitthajagat.com/?makelink=dekho">चिट्ठाजगत के इस पृष्ठ </a>पर जाना है और अपने चिट्ठे का लिंक देना है। चिट्ठाजगत आपके लिये एक कोड बना देगा, बस इस कोड को अपने साईडबार में लगाइये बिल्कुल जैसे मैंने लगाया है।</font><font size="3"> </font><font size="3">ऐसी सुविधा देने के लिये चिट्ठाजगत का बहुत बहुत धन्यवाद।</p>
<p></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कैसे लिखी मोबाइल से हिंदी]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/09/28/hindi-on-mobile-2/</link>
<pubDate>Fri, 28 Sep 2007 11:20:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/09/28/hindi-on-mobile-2/</guid>
<description><![CDATA[

अब यह पता नहीं मोबाइल की छोटी स्क्रीन ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3"></p>
<p style="text-align:center;"><img src="http://aaina2.wordpress.com/files/2007/09/3110ad.JPG" alt="3110ad.JPG" /></p>
<p>अब यह पता नहीं मोबाइल की छोटी स्क्रीन के कारण था या पोस्ट लिखने की उतावली थी कि <a rel="bookmark" href="http://aaina2.wordpress.com/2007/09/28/hindi-on-mobile/"><font size="3" color="#444444">मोबाइल से हिँदी मेँ लिखी पहली पोस्ट</font></a> पर फोन का मॉडल 3110 के स्थान पर 3310 लिखा गया। वास्तव में यह नोकिया का 3110 क्लासिक फोन है। मगर मुझे पता चला है कि नोकिया के सभी नये फोन अब इस सुविधा से युक्त हैं।</font><font size="3">वास्तव में  हिंदी एसएमएस लिखने की सुविधा का प्रयोग मैंने मोबाइल के ब्राउजर में जा कर अपना चिट्ठा लिखने के लिये किया।</font></p>
<p><font size="3">वैसे तो वर्डप्रैस <a href="http://m.wordpress.com/">http://m.wordpress.com</a>पर आपको मोबाइल से पोस्ट करने की सुविधा देता है और अंग्रेजी में मोबाइल से पोस्ट करना बहुत ही आसान है। मगर वर्डप्रैस की इस मोबाइल साइट पर हिंदी में पोस्ट लिख कर जब पब्लिश का बटन दबाया तो मेरे मोबाइल ने unknown response दिखा दिया। इसके बाद मैंने मोबाइल पर ही वर्डप्रैस की साइट पर जा कर जैसे कंप्यूटर पर पोस्ट लिखते हैं वैसे ही पोस्ट लिखी और पब्लिश कर दी। पोस्ट पब्लिश हो गयी। मुझे मोबाइल पर दोबारा टाइप नहीं करना पड़ा क्योंकि पहले वाली जगह से ही मैंने टैक्स्ट को कापी कर लिया था। नोकिया का यह मोबाइल यूनिकोड समर्थित है तथा सभी यूनुकोड साइट्स को हिंदी में बहुत अच्छे से दिखाता है।</font></p>
<p align="left"><font size="3">अब बतायें आपको टाइपिंग के बारे में। मुझे फिर से ’क ख ग ’ याद करना पड़ा। कूंजियां कुछ इस तरह हैं:</font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p><font size="3">1 = ँ ं ः  1 । . , ? !</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3">2= अ आ इ ई उ ऊ ऋ 2</font></p>
<p><font size="3"> </font><font size="3">3= ए ऐ ओ औ आँ 3</font><font size="3"> </font><font size="3"></p>
<p align="left">4= क ख ग घ डं 4</p>
<p align="left">5= च छ ज झ ञ  5</p>
<p align="left">6= ट ठ ड ढ ण 6</p>
<p align="left">7= त थ द ध न 7</p>
<p align="left">8= प फ ब भ म 8</p>
<p align="left">9 = य र ल व श ष स ह ळ क्ष ज्ञ 9</p>
<p>इसमें हिंदी के अलावा आठ अन्य भारतीय भाषाओं की टाइपिंग संभव है तथा सभी भाषाओं के लिये कूंजी सहायता कार्ड  जो कि पर्स में आराम से रखा जा सकता है मिलता है। यदि आप उस पोस्ट को ध्यान से देखें तो टाइप करने में ’हिंदी" के स्थान पर मुझसे हिँदी लिखा गया और ’मे’ की बिंदी शुन्य जैसी लगती है।</p>
<p>बाकी जैसा कि आपने रिलायंस फोन के एक विज्ञापन में भी देखा होगा कि जहां पानी न हो, जमीन न हो, रोशनी न हो, मोबाइल का नेटवर्क तो होता ही है। तो  अब आप जहां कहीं से  भी अपना चिट्ठा तो लिख ही सकते हैं।</p>
<p></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[डिड यू मीन ’रवि रतलामी’]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/09/11/raviratlami/</link>
<pubDate>Tue, 11 Sep 2007 13:46:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/09/11/raviratlami/</guid>
<description><![CDATA[आपको याद होगा कि एक बार जब मैंने हिंदी ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">आपको याद होगा कि एक बार जब मैंने हिंदी के कुछ चिट्ठाकारों के नाम गूगल पर हिंदी में  सर्च किये तो ये नाम गूगल पर शाहरुख और अमिताभ से भी ज्यादा बार नजर आते थे।  वह पोस्ट यहां है।</font></p>
<p><a rel="bookmark" href="http://aaina2.wordpress.com/2007/02/04/bloggers/" title="Permanent Link to "><font size="3" color="#444444">जहां चिट्ठाकारों की ख्याति ज्यादा है अमिताभ और शाहरुख से</font></a></p>
<p><font size="3">अब आपको आज की बात बताते हैं। आज आइबीएन चैनल <img border="0" align="bottom" width="1" src="http://aaina2.wordpress.com/files/2007/09/rr.jpg" alt="rr.jpg" height="1" /><img border="0" align="bottom" width="1" src="http://aaina2.wordpress.com/files/2007/09/rr.jpg" alt="rr.jpg" height="1" />पर एक समाचार रिपोर्ट देखी जिसमें रोहतक और अलवर में इंटेरनेट के प्रयोग के बारे में बताया गया था। मुझे याद आया कि ऐसी ही रिपोर्ट हमारे रवि जी जो कि रतलाम  में रहते हैं और <a href="http://raviratlami.blogspot.com/">रवि रतलामी</a> के नाम से जाने जाते हैं को ले कर भी आइबीएन चैनल ने बनायी थी। मैंने सोचा शायद इस रिपोर्ट को आइबीएन चैनल ने अपनी साईट पर डाल दिया हो। तो यही सोच कर मैंने गूगल पर Ravi Ratlam सर्च किया। जानते हैं गूगल बाबा ने क्या पूछा?</font><font color="#cc0000"> </font></p>
<p><font color="#cc0000">Did you mean: </font><a href="http://www.google.co.in/search?hl=en&#38;pwst=1&#38;sa=X&#38;oi=spell&#38;resnum=0&#38;ct=result&#38;cd=1&#38;q=Ravi+Ratlami&#38;spell=1" class="p"><font color="#0000cc">Ravi <strong><em>Ratlami</em></strong></font></a>  </p>
<p><font size="3">रवि जी आपको अब गूगल का सर्च इंजिन भी पहचानता है।</font></p>
<p class="chronodata">&#160;</p>
<p><img border="0" align="bottom" width="558" src="http://aaina2.wordpress.com/files/2007/09/rr.jpg" height="406" /><!-- The following two sections are for a noteworthy plugin currently in alpha. They'll get cleaned up and integrated better --></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरी पसंद के चिट्ठे]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/09/01/hindi-blog/</link>
<pubDate>Sat, 01 Sep 2007 12:29:13 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/09/01/hindi-blog/</guid>
<description><![CDATA[”की जाणां मैं कौण” ने  चिट्ठाकारी के ट]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">”की जाणां मैं कौण” ने  चिट्ठाकारी के <a target="_blank" href="http://ki-jaana-main-kaun.blogspot.com/2007/08/nice-matters-awards.html">टैगिंग के खेल </a>में  हमारे चिट्ठे का नाम दे कर बताया कि आईना पर लिखा उन्हें पसंद आता है। उनका बहुत बहुत धन्यवाद। उनसे इस तरह की तारीफ पहले भी मिलती रही है।  की जाणां मैं कौण एकमात्र ऐसा अंग्रेजी का गैरतकनीकि चिट्ठा है जिसे मैं नियमित रूप से पढ़ता हूं। </font></p>
<p><font size="3">इनकी छोटी छोटी पोस्ट अक्सर दिल को छू जाती हैं।</font></p>
<p><font size="3">आधुनिक सोच के साथ साथ उनके जैसी संवेदनशीलता बहुत कम देखने को मिलती है। </font></p>
<p><font size="3">अमीर खुसरो और बुल्ले शाह जैसे सूफी गीतकारों पर इनकी समझ गज़ब की है। </font></p>
<p><font size="3">आगामी सोमवार को होने वाली सर्जरी के लिये इनको शुभकामनाएं।</font></p>
<p><font size="3"> इसके अलावा पिछले दिनों समीर लाल जी ने एक मेल भेज कर बताया कि आईना उनके पिता जी का प्रिय चिट्ठा है। यकीन मानिये यह मेल मेरे लिये किसी भी अवार्ड से कम नहीं था। अब यह बात मैं अपनी तारीफ की वजह से नहीं लिख रहा हूं यह बताने के लिये लिख रहा हूं कि यह समीर जी का बड़प्पन था कि उन्हों ने समय निकाल कर वह विशेष मेल मुझे भेजा।</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3">अब खेल को आगे बढ़ाते हुए मुझे भी चार नाम देनें हैं। सिर्फ चार? साइडबार में पूरी लिस्ट लगी है फिर भी यह नाम हैं जो पहली बार में ही दिमाग में आते हैं:</font></p>
<p><font size="3"> </font><font size="3">1. <strong><a target="_blank" href="http://www.hindini.com/fursatiya/">फुरसतिया</a></strong>: इनकी मजेदार लेखनी के बारे में तो आप सब जानते ही हैं। जब से चिट्ठाकारी में आया इनका लिखा हर लेख और चिट्ठाचर्चा पढ़े।  अनूप जी आपना लिखा तो पोस्ट करते ही हैं, जब भी कोइ दूसरों की लिखी रचना जो कि इन्हें लगे कि सभी को पढ़नी चाहिये उसे भी पोस्ट करते हैं। इसके अलावा दूसरों को लिखने की प्रेरणा भी देते रहते हैं।</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3">2. <strong><a target="_blank" href="http://udantashtari.blogspot.com/">उड़न तश्तरी</a></strong> : यानी समीर लाल जी। खूब अवार्ड जीत चुके हैं चिट्ठाकारी में। कवि हैं। हंसाते भी खूब  हैं। मगर मुझे और भी ज्यादा मजा आता है जब यें गंभीर लेख लिखते हैं फिर वो चाहे एक मामूली <a target="_blank" href="http://udantashtari.blogspot.com/2006/12/blog-post_29.html">चिड़िया के बारे में हो</a>, पड़ोस की किसी <a href="http://udantashtari.blogspot.com/2007/08/blog-post_06.html">रुकमणी माई</a> के बारे में या मन में आते कई सारे <a target="_blank" href="http://udantashtari.blogspot.com/2007/07/blog-post_13.html">विचारों के बारे </a>में।</font><font size="3"> </font></p>
<p align="left"><font size="3">3. <strong><a target="_blank" href="http://raviratlami.blogspot.com/">रवि रतलामी का हिंदी ब्लॉग</a></strong> : रवि जी नियमित लिखते हैं। उनका एक क्लासिक स्टाइल है लिखने का। कभी कभी कुछ चुलबुला कभी गंभीर। जानकारी और अनुभव से भरपूर।</font></p>
<p align="left"><font size="3"> 4. <strong><a target="_blank" href="http://www.jitu.info/merapanna/">मेरा पन्ना</a></strong>: जीतू भाई का अलग ही स्टाइल है लिखने का। शरारती सा स्टाइल। किसी भी विषय पर वे लिख लेते हैं और उसमें हास्य का पुट भी डाल देते हैं। पिछले दिनों दिल्ली में इनसे मुलाकात हुई तो एक पल के लिये भी नहीं लगा कि पहली बार मिल रहे हैं।</font></p>
<p align="left"><font size="3"> मैं चाहता हूं कि इस खेल को आगे बढ़ाया जाये और जिनका नाम लिखा है वे भी अपने चार मनपसंद चिट्ठों के बारे में  जरूर लिखे। फुरसतिया जी खास खयाल रखें कि सिर्फ चार लिखने हैं। ;)</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हिंदी चिट्ठाकारी के कुछ टूटते मिथक]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/08/18/earnings-from-blogs/</link>
<pubDate>Sat, 18 Aug 2007 15:26:44 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/08/18/earnings-from-blogs/</guid>
<description><![CDATA[हिंदी चिट्ठाकारी में दो  माह का समय बह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">हिंदी चिट्ठाकारी में दो  माह का समय बहुत ज्यादा है। पिछले दो माह में मैंने यहां बहुत कुछ नया जाना, नया अनुभव किया उसे आप से भी बांटना चाहता हूं।</font><font size="3"> </font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>एग्रिगेटर का महत्व:</strong> इस बात पर तो मैं और अन्य कई चिट्ठकार लिख चुके हैं कि जब आपका चिट्ठा पुराना हो जाता है तो चिट्ठे पर पाठकों को लाने के लिये एग्रीगेटरों का इतना महत्व नहीं रहा जाता है। मगर मैंने अब जाना कि यदि चिट्ठा अपेक्षाकृत नया भी हो तो भी एग्रीगेटरों का इतना महत्व नहीं रहता है। एग्रीगेटर आपको पाठक नहीं भेजता मगर अन्य चिट्ठों के लेखक भेजता है जो आपका चिट्ठा पढ़ते हैं। पाठक आपके पास गूगल भेजता है।</font><font size="3"><strong> </strong></font></p>
<p><font size="3"><strong>विवादों से चिट्ठा हिट होता है</strong>: एकदम गलत। आप अच्छी सूचना दें इससे आपका चिट्ठा हिट होता है। आपके विवाद एक दिन के लिये आपको हिट्स दिलवा सकते हैं हमेशा के लिये नहीं। विवाद काठ की हांडी ही हो सकते हैं।</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3"><strong>हिंदी कभी नहीं कमा सकती:</strong> कमाई हिंदी नहीं करती। कमाई करता है आपका चिट्ठा जो कि हिंदी में भी हो सकता है। इंटेरनेट कोई किताबी प्रकाशन नहीं है जिसका पाठक बहुत गरीब है और खरीद कर नहीं पढ़ता इसीलिये बेचारा हिंदी का लेखक हमेशा गरीब ही रहेगा। यहां तो कमाई शुद्ध रूप से आवाजाही पर निर्भर करेगी न कि चि्ट्ठे की भाषा पर। यदि विज्ञापन कह रहा है ’मोबाइलफोन जीतिये’ तो पाठक उस पर क्लिक कर देगा यह देखने के लिये कि मोबाइल फोन कैसे जीता जा सकता है। अब बताइये इस बात से क्या फर्क पड़ेगा कि यह विज्ञापन हिंदी के चिट्ठे पर था या अंग्रेजी के चिट्ठे पर?</font><font size="3"> </font><font size="3"></p>
<p align="left"><strong> </strong><strong>कम टिप्पणियों का मतलब कम पाठक :</strong> यह बात सही भी हो सकती है मगर गलत भी हो सकती है। पाठक अगर टिप्पणी नहीं कर रहा तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि वह आपको पढ़ नहीं रहा है। अधिकतर पाठक तकनीकि कारणों से टिप्पणी नहीं करता। हमेशा इस बात की संभावना अधिक है कि आपको जानने वाला पाठक अधिक टिप्पणी करता है। अनजान पाठक कम टिप्पणी करता है। एक बात और यदि पाठक आपको जानता है और आप यदि विवाद पैदा करने वाले लेखक हैं तो भी पाठक चुपचाप पढ़ कर खिसकने में ही भलाई समझता है। टिप्पणी का आना इस बात पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है कि पाठक को आप कितना कंफर्ट लेवल देते हैं। नम्र भाषा में लिखे लेख पर आक्रामक भाषा में लिखे लेखों के मुकाबले ज्यादा टिप्पणियां मिलती हैं। छ्द्म नाम से लिखे जाने वाले चिट्ठों पर भी कम टिप्पणियां मिलती हैं। </p>
<p align="left"><strong>हमें केवल चिट्ठालेखक ही पढ़ते हैं:</strong> यह बात कोई कहता नहीं है पर जब हम लिखते हैं तो हमारे दिमाग में यही छाया होता है तथा हम हमेशा चिट्ठालेखकों को ध्यान में रख कर ही  लिखते हैं। वास्तव में ऐसा नहीं है। <a href="http://raviratlami.blogspot.com/">रवि जी</a> को १३० के करीब पाठक फीड से पढ़ते हैं। अब यदि हम चिटठालेखकों के घेरे से बाहर का नहीं सोच रहे हैं तो हम जानते ही नहीं कि हमारे पाठक कौन हैं। यदि हमारी अधिकतर पोस्टों को समझने के लिये पाठकों को चिट्ठालेखक होना आवश्यक है तो हम कुंए के मेढक बन कर ही रह जायेंगे। अब आईना पर प्रकाशित पुराने लेखों को मैं <a target="_blank" href="http://aaina2.blogspot.com/">आईना के बिंब</a> पर दोबारा प्रकाशित कर रहा हूं।  मगर सर्च करके आने वाले लेखक तो प्रतिदिन इस पुराने लेखों को पढ़ते ही हैं।</p>
<p>अब आप कहेंगे कि चिट्ठा लिखते तो मुझे काफी समय हो गया फिर यह सारा ज्ञान दो माह में ही क्यों आया?</p>
<p>लगभग ७५ दिन पहले मैंने प्रयोग के तौर पर <a target="_blank" href="http://hindinewspaper.blogspot.com/">’मजेदार समाचार’ </a>गूगल एड के साथ शुरू किया। कुछ आंकड़े:</p>
<p>कुल पेजलोड्स : ४४६५</p>
<p>एक दिन में अधिकतम पेजलोड्स : २५५</p>
<p>एक दिन में अधिकतक नये विजिटर्स : १५८</p>
<p>फीड सब्स्क्राइबर : १७</p>
<p>कमाई : इतनी कि ’मजेदार समाचार’ अपना डोमेन खरीद सकता है।</p>
<p><img border="0" width="255" src="http://farm2.static.flickr.com/1052/1160844114_f4d50a62cb_o.jpg" alt="कहां से आये पाठक" height="407" /></p>
<p>पांच सौ के लॉग में केवल दस पंद्रह  प्रतिशत ही आये एग्रिगेटरों से</p>
<p><a href="http://farm2.static.flickr.com/1401/1160844968_f02924e06c_o.jpg"><img border="0" width="613" src="http://farm2.static.flickr.com/1401/1160844968_f02924e06c_o.jpg" alt="गुगल ��ेजता है धड़ाधड़ पाठक" height="324" /></a></p>
<p>गूगल भेजता है धड़ाधड़ पाठक</p>
<p><img border="0" width="308" src="http://farm2.static.flickr.com/1203/1159989429_f6aee45594_o.jpg" alt="तमिल पाठक ��ी " height="435" /></p>
<p>तमिल पाठक भी आता है दोबारा (<a target="_blank" href="http://poonji.wordpress.com/">पूंजी बाजार </a>पर)</p>
<p></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हिंदी टूलबार के बारे में विस्तार से]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/08/12/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%9f%e0%a5%82%e0%a4%b2%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5/</link>
<pubDate>Sun, 12 Aug 2007 14:25:12 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/08/12/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%9f%e0%a5%82%e0%a4%b2%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5/</guid>
<description><![CDATA[
(बड़ी इमेज देखने के लिये इमेज पर क्लिक क]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="left"><a href="http://farm2.static.flickr.com/1279/1093520198_c2259e18d2_o.jpg"><img src="http://static.flickr.com/1279/1093520198_3592d04505_d.jpg" /></a></p>
<p>(बड़ी इमेज देखने के लिये इमेज पर क्लिक करें)</p>
<p><font size="3"><br />
हिंदी टूलबार के बारे में हमने जब भी चर्चा की है, इस टूलबार कि किसी एक  सुविधा की चर्चा की है। आज हम इस टूलबार के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे जिससे यह पता चल जाये कि इस टूलबार में वास्तव में कितना कुछ है। इससे जिन्हों ने इस टूलबार को स्थापित नहीं किया है उन्हें भी और जिन्होंने इसे स्थापित किया है उन्हें भी इसके बारे में विस्तार से पता चल जायेगा। </font><font size="3">यह टूलबार इंटेरनेट पर हिंदी में लिखने और पढ़ने वालों के लिये बहुत ही काम का टूल है। इसमें आपको हिंदी की सभी साइट्स के लिंक मिलते है इसके अलावा चिट्ठासर्च, हिंदी लिखने में सहायता, एक क्लिक पर नारद, परिचर्चा और चिट्ठाचर्चा, सभी हिंदी पत्रिकाओं के लिंक, सभी हिंदी के लिंक, एग्रीगेटरों के लिंक, क्रिकेट का स्कोरकार्ड, ऑनलाइन रेडियो, पॉप अप ब्लॉकर, इमेल नोटिफायर, गुगल समाचार और नारद के आर एस एस लाइव फीड, गुगल पेज रेंक, बुकमार्क करने की सुविधा, कुछ चिट्ठों के लिंक, बहुत से गजेट्स जैसे कि आपके शहर का मौसम और लाइव टीवी भी शामिल हैं। </font></p>
<p><font size="3">अभी तक इस टूलबार की एक हजार से भी अधिक प्रतियां डाउनलोड हो चुकी हैं।</font></p>
<p><font size="3"> आइये इस टूलबार के  बारे में विस्तार से जानते हैं।</font></p>
<p><font size="3"><a href="http://farm2.static.flickr.com/1279/1093520198_c2259e18d2_o.jpg"><img border="0" align="left" width="166" src="http://farm2.static.flickr.com/1217/1092658795_70c2ebfdec_o.jpg" alt="सर्च" height="255" /></a><strong>1. सर्च :</strong> इसमें सामान्य गुगल सर्च के आलावा इमेज, न्यूज, स्टॉक और मौसम की खोज तो है ही, चिट्ठाखोज में आप सभी एग्रीगेटरों से भी  सीधे सर्च कर सकते हैं। यानि जो कुछ भी आप चिट्ठाखोज पर सर्च करते हैं वह केवल नारद, हिंदीब्लॉग्स, चिट्ठाजगत और ब्लॉगवाणी से सर्च होगा।</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3"><strong>2. हिंदी लिखें:</strong> इस बटन में कुशिनारा टूल का लिंक दिया गया है। इसे क्लिक करते ही आप जिस भी साइट या चिट्ठे पर हों, आप वहां हिंदी में लिख पायेंगे बिना किसी अन्य सॉफटवेयर की सहायता के। यानि अगर आपने अपने कंप्यूटर पर हिंदी लिखने का  कोई अलग से सॉफटवेयर नहीं स्थापित किया है तो भी आप हिंदी लिख पायेंगे। इस टूल में आप फोनेटिक हिंदी लिख सकते हैं यानि यदि आपको ’भारत’ लिखना है तो आप ’bharat’ ही टाइप करेंगे।</font><font size="3"> </font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left"><font size="3"><strong>3. परिचर्चा, नारद तथा चिट्ठाचर्चा:</strong> एक क्लिक पर आप इन साइट्स पर जा सकते हैं।</font></p>
<p><font size="3"><br />
 </font><font size="3"><img border="0" align="left" width="275" src="http://farm2.static.flickr.com/1440/1092660865_3b3332b7d4_o.jpg" alt="पत्रिकाएं" height="621" /><strong>4. पत्रिकायें :</strong> इस ड्रॉप डाउन मीनू में नेट पर हिंदी की 25 पत्रिकाओं के लिंक हैं। यानि यदि अप हिंदी पत्रिकायें पढ़ने के शौंकीन हैं तो न तो लिंक के पते याद रखने का झंझट और न ही बुकमार्क करने की जरूरत।</font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left"><font size="3"><strong>5. काम के लिंक :</strong> इसमें आपको मिलेंगे बहुत से काम के लिंक। सबसे पहले समाचार में हिंदी की सभी समाचारों कि साइट्स के लिंक हैं। इसके बाद हिंदी के शब्द कोश, फिर हिंदी के सर्च इंजन, इसके बाद हिंदी लिखने के सभी ऑनलाईन और ऑफ्लाइन टूल्स, गुगल और याहू समूह के लिंक और बहुत से अन्य   काम के लिंक हैं।</font><font size="3"> </font></p>
<p align="left"> <img border="0" width="282" src="http://farm2.static.flickr.com/1280/1092659977_6ada6a1c11_o.jpg" alt="काम के लिंक" height="550" /></p>
<p align="left"><img border="0" width="1" src="http://farm2.static.flickr.com/1280/1092659977_6ada6a1c11_o.jpg" height="1" /></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>6. एग्रीगेटर:</strong> हिंदी के सभी एग्रीगेटरों के लिंक इस मीनू में हैं। जितने भी और नये एग्रीगेटर आयेंगे उनके लिंक यहां जोड़े जायेंगे।</font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>7. क्रिकेट स्कोर कार्ड :</strong> </font><font size="3">इसमें जुड़ा है लाइव क्रिकेट स्कोर कार्ड। इस स्कोर कार्ड पर अपने आप अपडेट होने वाला स्कोर कार्ड है जो विश्व में कही भी हो रहे क्रिकेट मैच का लाइव स्कोर देता है। इस छोटे से विजेट को आप स्क्रीन पर कहीं भी लेजा सकते हैं।</font><font size="3"> </font></p>
<p align="left"><font size="3"><img border="0" width="363" src="http://farm2.static.flickr.com/1408/1093520684_818f9caeb0_o.jpg" alt="स्कोरकार्ड" height="345" /></font></p>
<p><font size="3"><strong>8. रेडियो :</strong> यह यंत्र इस टूलबार की खास विशेषता है। टूलबार में जुड़े़ इस रेडियो  में पचास से अधिक हिंदी संगीत के रेडियो जो कि नेट पर उप्लब्ध हैं, जोड़े गये हैं। <strong>इनमे आल इंडिया रेडियो से प्रसारित दैनिक दोपहर समाचार जो कि आधे घंटे का समाचार का कार्यक्रम है वह भी जुड़ा है और इसके साथ साथ आकाशावाणी के हर घंटे प्रसारित होने वाले पांच मिनट के हिंदी समाचार बुलेटिन भी अपने आप हर एक घंटे में अपडेट होते हैं।</strong></font></p>
<p><font size="3">आप चाहें तो आप अपने लाईव स्ट्रीम भी इसमें जोड़ सकते हैं।</font></p>
<p><font size="3">इस सब के अलावा इस रेडियो प्लेयर की एक खूबी यह भी है कि आप इस पर अपनी हार्ड डिस्क पर सुरक्षित संगीत भी सुन सकते है यानि इंटेरनेट पर सर्फ करते करते संगीत सुनने के लिये आपको अलग से मीडिया प्लेयर या और कोई ऐसा कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता नहीं है।</font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>9. इमेल नोटिफायर :</strong> आप इसमें अपने इमेल एकाउंट को सैट कर सकते हैं। आप इसमें हॉटमेल, याहू, जीमेल तथा कोई भी POP  एकांउट सैट कर सकते हैं। नयी मेल आने पर यह नोटिफायर आवाज के साथ आपको सूचित करता है।</font><font size="3"> </font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>10. पॉप अप ब्लॉकर :</strong> किसी भी साइट पर तंग करने वाले पॉप अप रोकने के लिये।</font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>11. समाचर फीड :</strong> गुगल समाचार की आर एस एस फीड जिसमें आप पचास ताजा  समाचारों के शीर्षक देख सकते हैं।</font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>12. चिट्ठों की फीड:</strong> यदि आपको बार बार नारद पर झांकने की आदत है तो आपके बहुत काम का बटन है। इसमें चिट्ठों की ताजा फीड अपने आप अपडेट होती रहती है।</font></p>
<p><font size="3"><strong>13. चिट्ठों की सूची:</strong> हिंदी के कुछ अच्छे चिट्ठों की सुची जहां आप सीधे क्लिक करके इन में से किसी भी चिट्ठे पर पहुंच सकते हैं।</font><font size="3"> </font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>14. संदेश :</strong> यहां आपको टूलबार में हुए ताजा परिवर्तनों के बारे में सूचित किया जायेगा। यह संदेश दोनों तरफ से काम करते हैं अर्थात यदि आप भी कोई सुझाव देना चाहते हैं, टूलबार में कोई समस्या आ रही है अथवा आप टूलबार के प्रयोगकर्ताओं को कोई संदेश देना चाहते हैं तो आप भी यहां संदेश भेज सकते हैं।</font></p>
<p><font size="3"><strong>15. गेम्स :</strong> यहां आप कभी कभी छोटे छोटे गेम्स खेल सकते हैं।</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3"><img border="0" align="left" width="360" src="http://farm2.static.flickr.com/1390/1093521688_2021764174_o.jpg" alt="गेम्स" height="489" /></font></p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left">&#160;</p>
<p align="left"><font size="3"><strong>16. मौसम :</strong> आपके शहर का लाइव मौसम तथा आने वाले दिनों के लिये मौसम की भविष्यवाणी यहां है।</font></p>
<p align="left"><font size="3"><strong>17. गुगल पेज रैंक :</strong> यहां आप जिस साइट पर जा रहे हैं उसका गुगल पेज रैंक भी देख सकते हैं।</font></p>
<p><font size="3">इसके अलावा आप इसमे और भी कई गजेट्स जोड़ सकते हैं जिनमें प्रमुख है लाइव टीवी।</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3">अपको इस बात का भी नियंत्रण होगा कि आप इस टूलबार में कौन सा कंपोनेट रखना चाहते हैं तथा कौन सा कंपोनेट हटाना चाहते हैं।</font></p>
<p><font size="3"><a target="_blank" href="http://hindiblog.ourtoolbar.com/">हिंदी टूलबार यहां से डाउनलोड करें।</a></font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3">यदि आप इस टूलबार के लिये कोई सुझाव देना चाहते हैं तो आपका स्वागत है।</font></p>
<p style="font-size:8px;text-align:right;"> <!-- technorati tags begin --></p>
<p style="font-size:10px;text-align:right;">Tags: <a rel="tag" href="http://technorati.com/tag/Toolbaar">Toolbaar</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tag/Hindi">Hindi</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tag/%20Hindi%20Toolabaar">Hindi Toolabaar</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tag/%20%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80">हिंदी</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tag/%20%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80%20%E0%A4%9F%E0%A5%82%E0%A4%B2%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0">हिंदी टूलबार</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tag/%20%E0%A4%9F%E0%A5%82%E0%A4%B2%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0">टूलबार</a></p>
<p><!-- technorati tags end --></p>
<p><!-- AddThis Bookmark Button BEGIN --><br />
<a target="_blank" href="http://www.addthis.com/bookmark.php" title="Bookmark using any bookmark manager!"><img border="0" width="160" src="http://s9.addthis.com/button2-bm.png" alt="AddThis Social Bookmark Button" height="24" /></a><br />
<!-- AddThis Bookmark Button END --></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ये क्या हो गया .......!!]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/08/04/technorati/</link>
<pubDate>Sat, 04 Aug 2007 18:37:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/08/04/technorati/</guid>
<description><![CDATA[
आज टैक्नोराती को पता नहीं क्या हो गया]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><img src="http://aaina2.wordpress.com/files/2007/08/technorati.jpg" alt="technorati.jpg" /><br />
<font size="3">आज टैक्नोराती को पता नहीं क्या हो गया। हर चिट्ठे का रैंक 1 ही दिखा रहा है। एक बार के लिये मेरी आंखों में कैसी चमक आयी इसका आप अंदाजा लगा ही सकते हैं। और यकीन मानिये आज की तारीख भी एक अप्रेल नहीं है। वैसे यादगार के लिये हमने तो यह स्क्रीनशॉट ले लिया है।</font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आत्म-सुधार की कसरतें और चिट्ठाकारी ]]></title>
<link>http://srijanshilpi.wordpress.com/2007/08/04/daily_routine/</link>
<pubDate>Sat, 04 Aug 2007 12:37:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>सृजन शिल्पी</dc:creator>
<guid>http://srijanshilpi.wordpress.com/2007/08/04/daily_routine/</guid>
<description><![CDATA[हमारी सोच-समझ और हमारे कर्म-व्यवहार के]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>हमारी सोच-समझ और हमारे कर्म-व्यवहार के बीच कितनी एकरूपता है, इसी से निर्धारित होता है कि हमारा आत्म-विकास किस स्तर तक हो पाया है। ज्ञान को कर्म में परिणत कर पाना अक्सर हमसे मुमकिन नहीं हो पाता। किसी का श्रेष्ठ विद्वान, लेखक या वक्ता होना अलग बात है और उसका श्रेष्ठ इंसान होना बिल्कुल दूसरी बात। हम जैसे साधारण लोग भी कई बार बहुत अच्छी और बड़ी-बड़ी बातें कर लेते हैं, लेकिन जीवन में उन्हीं बातों पर अमल कर पाने में सफल नहीं हो पाते। महान व्यक्तियों और हमारे-जैसे आम मनुष्यों में यही फर्क़ है। एक इंसान के तौर पर महान वही बन पाते हैं जो दूसरों की नज़र में खुद को महान साबित करने की होड़ में नहीं लगे रहते, बल्कि अहर्निश आत्म-सुधार की साधना में रत रहते हैं। क्योंकि, आत्म-सुधार ही संसार की सबसे बड़ी सेवा है। जो खुद अपना भला नहीं कर सकता, वह संसार का कैसे भला करेगा!</p>
<p>खासकर, लेखन और वाचन के पेशों से जुड़े लोगों के साथ तो कथनी-करनी की एकरूपता वाली नैतिकता को निभा पाना सबसे कठिन होता है। जो साहित्यकार अपने साहित्य में महान नज़र आता है, कई बार अपनी निजी जिंदगी में नैतिकता के मानदंडों पर सामान्य व्यक्ति से भी गया-गुजरा साबित होता है। जो पत्रकार अपनी पत्रकारिता में व्यवस्था-विरोधी नज़र आता है, कई बार अपने कॅरियर में प्रगति और जीवन की सुविधाओं के लिए उतना ही चापलूस और समझौतापरस्त भी होता है। कोई प्रवचनकर्ता मंच से जितने सुन्दर और प्रेरक सदुपदेश देता है, अपने व्यक्तिगत जीवन में अक्सर उसके ठीक विपरीत आचरण करता हुआ पाया जाता है। इसी तरह, कई अध्यापक भी अपने छात्रों से जिन नैतिक आदर्शों की बात करते हैं, अपने व्यक्तिगत जीवन में उनके ठीक विपरीत आचरण करते हैं। चिट्ठाकारी करते समय भी हम अक्सर ऐसी बातें कर जाया करते हैं, जिनकी कसौटी पर शायद हम खुद खरे नहीं उतरते। दूसरों की कमियों की आलोचना करना, दूसरों की नैतिकता का रखवाला बनना और दूसरों को उपदेश देना जितना सहज है, उतना ही कठिन है खुद अपने गिरेबान में झाँकना और अपनी कमियों को दूर करने की कोशिश करना। </p>
<p>गांधीजी के जीवन और कार्य-व्यवहार में हम पाते हैं कि अपनी कथनी और करनी में एकरूपता बनाए रखने के मामले में वह बहुत सजग रहते थे। जो भी बात उन्हें अच्छी लगती थी, उस पर तत्क्षण अमल करने की चेष्टा में वह जुट जाया करते थे और अपनी उस चेष्टा में सफल रहने के बाद ही दूसरों से उस पर अमल करने के लिए कहते थे। व्यावहारिक अर्थों में मन, वचन और कर्म की एकरूपता ही सत्य की साधना है। जब हम किसी व्यक्ति के चरित्र की बात करते हैं तो सबसे पहले यही देखते हैं कि उसकी सोच, कथनी और करनी में किस हद तक एकरूपता है। इस तरह की एकरूपता नहीं होने की वजह से ही आम जनता की नज़र में आज के अधिकतर राजनेताओं की कीमत गिर चुकी है।</p>
<p>आत्म-सुधार की चेष्टा का दूसरा कदम है अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करना। गांधीजी की दिनचर्या इस मायने में मुझे काफी आकर्षित करती रही है। इतनी व्यवस्थित दिनचर्या विरले किसी इन्सान की होती है। हर काम समय पर करना, जीवन के हर पल का भरपूर सदुपयोग करना, हर क्षण के महत्व को समझते हुए उसे पूरी तरह से जीना। उनकी दिनचर्या कुछ ऐसी प्रतीत होती है मानो वह समय की सतत बहती धारा में अतीत और भविष्य के किनारों से टकराए बगैर वर्तमान की मँझधार में सीधे बहे जा रहे हों। कहते हैं कि सुबह की सैर पर निकलने का उनका वक्त इतना निश्चित था कि उनको देखकर घड़ी मिलाई जा सकती थी। टॉलस्टॉय की प्रेरक कहानी "<a target="_blank" href="http://www.online-literature.com/tolstoy/2736">तीन प्रश्न</a>" के संदेश को उन्होंने अपने जीवन में पूरी तरह से चरितार्थ कर लिया था। हर किसी से वह ऐसे मिलते थे मानो उनसे बात करने वाला व्यक्ति दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हो। उनसे मिलने वाले हर व्यक्ति को यह महसूस होता था कि उस मुलाकात में उसने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों को जी लिया है। हर काम को वह ऐसे करते थे मानो वह जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण काम हो। चाहे अपनी बकरी के लिए घास जुटाने का काम हो या आजादी के आंदोलन के संबंध में गंभीर विचार-विमर्श करना हो या ब्रिटिश वायसराय से मुलाकात के लिए जाना हो या किसी कुष्ठ रोगी की सेवा करनी हो, हर काम को वह उतना ही महत्वपूर्ण मानते थे। सच्चे मायने में गांधीजी ही कह सकते थे-- मेरा जीवन ही मेरा संदेश है।</p>
<p>मेरे गुरुदेव की दिनचर्या भी कुछ ऐसी ही थी। हर सुबह एक नया जन्म और हर रात एक नई मौत। वह हमें सिखाते थे, जब सबेरे जगो तो पिछले दिन की कोई चिंता, कोई ग़म, कोई मलाल तुम पर हावी न हो। जब रात को सोने जाओ तो अगले दिन के लिए कोई परवाह, कोई परेशानी अपने दिमाग में समेट कर मत रखो। हर दिन को ऐसे गुजारो जैसे कि वही तुम्हारे जीवन का आखिरी दिन हो। एक-एक पल को जीओ और उसका पूरा-पूरा उपयोग करो। उन्होंने अपना पूरा जीवन पूर्वनियोजित ढंग से गुजारा। यहां तक कि अपनी मौत का मुहूर्त भी वर्षों पूर्व उन्होंने खुद ही मुकर्रर कर लिया था।</p>
<p>हालांकि महान लोगों में कई ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने इस तरह की मशीनी दिनचर्या को अपनाने के बजाय समय के दबाव से मुक्त रहकर जीना पसंद किया। ऐसे व्यक्ति जीवन में सहजता, स्वच्छंदता और नैसर्गिकता को अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं। । वे अपनी मर्जी के मालिक होते हैं और मूड के हिसाब से काम करते हैं। वे समय की धारा के साथ सहज भाव से बहते हैं, उसकी तरंगों के साथ डूबते-उतराते हैं, अपनी तरफ से कोई चेष्टा नहीं करते।</p>
<p>मैं इस बहस में नहीं पड़ना चाहता कि दोनों में से किस तरह की दिनचर्या अधिक उपयुक्त है। दोनों ही रास्तों पर चलकर लोगों ने जीवन को सफल और सार्थक बनाया है। दोनों ही तरह की जीवन शैली वाले लोग महानता के शिखर तक पहुंचे हैं। एक ही समय के दो महान लोगों की दिनचर्या और जीवन शैली में भी हम यह बुनियादी अंतर देख सकते हैं। जैसे कि महात्मा गांधी और रवीन्द्रनाथ ठाकुर, चाणक्य और दाण्डयायन, श्रीराम शर्मा आचार्य और ओशो ..... ।</p>
<p>दिक्कत तब होती है जब हमारी दिनचर्या में जाने-अनजाने इन दोनों ही तरह की जीवन शैली एक साथ शामिल हो जाती है। ऐसा खासकर तब होता है जब हमारी बंधी-बंधाई दिनचर्या में कोई नया शगल शामिल हो जाता है और वह जीवन शैली में एक किस्म का व्यतिक्रम ला देता है। मेरी दिनचर्या में भी इसी कारण ऐसे व्यतिक्रम समय-समय पर आते रहे हैं। हालांकि, मैं <a target="_blank" href="http://srijanshilpi.wordpress.com/2006/02/25/samay_yoga">समय योग</a> का साधक बनने के लिए प्रयासरत रहा हूं, लेकिन जब भी मेरे ऊपर कोई नया शगल सवार होता है, दिनचर्या कुछ गड़बड़ा जाती है। जैसे कि, जब से चिट्ठाकारी का शगल हुआ, तब से मेरी दिनचर्या में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव आ गया। चिट्ठों को पढ़ने में अब काफी समय निकल जाता है। पहले यह समय लाइब्रेरी में गुजरता था, पत्र-पत्रिकाएँ और किताबों को पढ़ने में। सुबह-शाम ध्यान और व्यायाम में गुजरने वाले समय में भी चिट्ठाकारी ने सेंध मार ली। इससे मेरी सेहत पर भी काफी असर पड़ा। पहले लगभग हर सप्ताह अख़बारों में मेरे लेख छप जाते थे, लेकिन चिट्ठाकारी में सक्रिय होने के बाद से यह सिलसिला भी थम-सा गया।</p>
<p>हालांकि मैं चिट्ठाकारी में बहुत अधिक सक्रिय कभी नहीं रहा। पहले भी हर सप्ताह एक पोस्ट की औसत से ही लिखता था। लेकिन दूसरे चिट्ठाकारों की पोस्ट को पढ़ने, उन पर टिप्पणियाँ करने और चिट्ठा जगत की हलचलों पर नज़र रखने में काफी समय लग जाया करता था। लेकिन जब मुझे महसूस हुआ कि इस शगल ने मेरी दिनचर्या को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करना शुरू कर दिया है, तो मैं सावधान हो गया। हालांकि चिट्ठाकारी ने मेरे ऑफिसियल कामकाज को कभी प्रभावित नहीं किया, लेकिन नए-नए शुरू हुए वैवाहिक जीवन के कुछ हसीन लम्हों की चोरी इसने अवश्य की, जो बाद में कभी लौटकर नहीं आ सकेंगे। इसलिए, कुछ अरसे से मैंने चिट्ठाकारी से एक दूरी-सी बनाकर दिनचर्या को फिर से पटरी पर लाने की कवायद शुरू कर दी। कुछ चिट्ठाकार साथियों ने अपने मेल और कमेंट्स में मेरे इस 'हायबरनेशन' की चर्चा भी की।</p>
<p>अपने कई चिट्ठाकार साथियों को जब मैं उम्दा स्तर की चिट्ठाकारी में निरंतर सक्रिय देखता हूं तो जिज्ञासा होती है कि वे अपनी दिनचर्या में चिट्ठाकारी के शगल को किस तरह से एडजस्ट करते हैं। खासकर, रवि रतलामी जी, अनूप शुक्ला जी, सुनील दीपक जी, देबू दा, जीतू भाई, शास्त्री जी, ज्ञानदत्त जी, आलोक पुराणिक जी, अनामदास जी, प्रमोद सिंह जी, अभय तिवारी जी, अविनाश जी, मसिजीवी जी, श्रीश जी आदि जैसे चिट्ठाकार साथियों से मैं जानना और सीखना चाहता हूं कि वे अपनी दिनचर्या की तमाम महत्वपूर्ण व्यस्तताओं के साथ चिट्ठाकारी के शगल को कैसे इतनी शिद्दत के साथ पूरा कर पाते हैं!</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क्या आपको भी चिट्ठाकारी का नशा हो गया है ?]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/07/25/cartoon/</link>
<pubDate>Wed, 25 Jul 2007 13:29:46 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/07/25/cartoon/</guid>
<description><![CDATA[1. जब आप अपने नाम की जगह दूसरों को अपने च]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">1. जब आप अपने नाम की जगह दूसरों को अपने चिट्ठे का नाम बताने लगें और पते के स्थान पर URL बताने लगें।</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3"><img border="0" align="middle" width="468" src="http://farm2.static.flickr.com/1394/895904626_3fc27649ec.jpg" height="322" /></font></p>
<p><font size="3">2. जब आप सुबह सुबह उठते ही कंप्यूटर ऑन करके बैठ जायें या शौचालय में भी अपना लैपटॉप साथ ले जायें।</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3"><img border="0" align="middle" width="485" src="http://farm2.static.flickr.com/1222/895904714_bdb78c2720_o.jpg" height="349" /></font></p>
<p><font size="3">3. जब रु 25000/- प्रतिमाह की तन्ख्वाह से ज्यादा महत्वपूर्ण रोज के $0.08 लगने लगें।</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3"><img border="0" align="middle" width="481" src="http://farm2.static.flickr.com/1095/895904756_f1bacd5049_o.jpg" height="345" /></font></p>
<p><font size="3">4. जब खुद की साधुवादिता पर ही आपको हीन भावना होने लगे।</font></p>
<p><font size="3"><img border="0" align="middle" width="400" src="http://farm2.static.flickr.com/1155/895904612_3b0cf37b0a_o.jpg" height="328" /></font></p>
<p>यहां भी देखें</p>
<p><a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/07/10/hindicartoon/">कुछ मजेदार कार्टून</a></p>
<p><!-- AddThis Bookmark Button BEGIN --><br />
<a href="http://www.addthis.com/bookmark.php" title="Bookmark using any bookmark manager!" target="_blank"><img src="http://s9.addthis.com/button2-bm.png" width="160" height="24" border="0" alt="AddThis Social Bookmark Button" /></a><br />
<!-- AddThis Bookmark Button END --></p>
<hr /><strong>Technorati Tags:</strong> <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/हिंदी">हिंदी</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/कार्टून">कार्टून</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/हास्य">हास्य</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/Hindi">Hindi</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/Cartoon">Cartoon</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/Fun">Fun</a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क्या कोइ हमें  हिंदी चिट्ठों का देसीपंडित देगा ?]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/07/13/desipundit/</link>
<pubDate>Fri, 13 Jul 2007 13:19:40 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/07/13/desipundit/</guid>
<description><![CDATA[मेरे दोस्त राजेश रोशन ने लिखा कि कैसे ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">मेरे दोस्त <a href="http://merasapna.wordpress.com/" target="_blank">राजेश रोशन</a> ने लिखा कि कैसे उनकी एक पोस्ट पर <a href="http://merasapna.wordpress.com/2007/07/13/shakira-keyword-and-hits/">एक ही दिन में 221 हिट्स</a> मिले। ऐसा ही एक बार मेरे एक पोस्ट पर हुआ जब मैंने <a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/03/20/250/" target="_blank">गुरू</a> <a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/03/20/251/">फिल्म</a> के <a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/03/20/252/">अनदेखे</a> <a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/03/20/253/">सीन</a> पोस्ट किये और उनका लिंक किसी ने ऑर्कुट पर किसी की स्क्रैपबुक पर लगा दिया।</font></p>
<p><font size="3">यह बात पहले भी कई वरिष्ठ चिट्ठाकार लिख चुके हैं कि एग्रीगेटर केवल वह नोटिसबोर्ड होता है जो कि आपकी पोस्ट की सूचना लोगों तक दे देता है। वास्तव में केवल पहले और दूसरे दिन ही लोग एग्रीगेटर से उस पोस्ट तक आते हैं उसके बाद सर्च करने वाले ही आपके चिट्ठे की विभिन्न पोस्टों तक आते हैं और हमारी पोस्ट की आयू तो अनंत वर्षों की है। <img src="http://farm2.static.flickr.com/1185/798407569_9fcb5ee40f.jpg" alt="आईना पर सर्च से आने वाले" align="middle" border="0" height="417" width="500" /></font></p>
<p><font size="3">यहां मैं अपनी एक पोस्ट <a href="http://aaina2.wordpress.com/2006/06/13/hindinewspaper/" rel="bookmark" title="Permanent Link to "><font color="#444444" size="3">दिस इज़ हिंडी न्यूजपेपर फ़्रॉम डेल्ही</font></a> का उदाहरण देता हूं जिसे मैंने जून 2006 में पोस्ट किया था। आप देख सकते हैं कि पिछले तेरह महीने में इस पोस्ट पर तेरह सौ से ज्यादा हिट्स मिले हैं।  </font><font size="3"> </font><br />
<img src="http://farm2.static.flickr.com/1348/798312089_049e7c3fb7.jpg" alt="मेरी एक पोस्ट के  आंकड़े" border="0" height="193" width="500" /><br />
<font size="3"> यदि आपकी पोस्ट में कुछ ऐसा लिखा है जो केवल आज ही नहीं आने वाले समय तक प्रासांगिक है तो पाठक आपके चिट्ठे पर आते रहेंगे। अब जब चिट्ठाकारों की संख्या जल्द ही हजार (अभी तक ७६१) को छूने वाली है और प्रतिदिन दो सौ से अधिक लेख पोस्ट होंगे तो एग्रीगेटर की भूमिका और भी नग्णय हो जायेगी। आज जब हम इस बात पर खुश हो रहे हैं कि हमारी पोस्ट बटन दबाते ही एग्रीगेटर पर आ जायेगी तब इस बात को भूल रहे हैं कि जल्द ही इतने चिट्ठे हो जायेंगे कि हमारी पोस्ट एक घंटा भी एग्रीगेटर के पहले पेज पर नहीं रहेगी।  दिन भर एग्रिगेटरों की बहती गटरगंगाओं में कोइ अच्छी पोस्ट कब आयी और कब चली गयी पता भी नहीं चलेगा। आज हमें शायद नये एग्रीगेटरों की उतनी जरूरत नहीं है जितनी कि एक मैच्योर तरीके से की गयी चिट्ठाचर्चा की जरूरत है जिसमें दिन की केवल अच्छी पोस्टों का ही जिक्र हो।   क्या कोइ हमें हमारा हिंदी चिट्ठों का अपना <a href="http://www.desipundit.com/">देसीपंडित</a> देगा?</font></p>
<p><font size="3"> </font><font size="3"><a href="http://www.desipundit.com/2006/10/11/windoz-ke-loche/" target="_blank"></a><a href="http://www.desipundit.com/2006/10/11/windoz-ke-loche/"><img src="http://farm2.static.flickr.com/1056/798312133_e1d1aeb237.jpg" alt="देसी पंडित पर मेरी एक पोस्ट" align="middle" border="0" height="189" width="500" /></a></font></p>
<hr />
<p><b>Technorati Tags:</b> <a href="http://technorati.com/tags/Blog" rel="tag">Blog</a>, <a href="http://technorati.com/tags/Blogs" rel="tag">Blogs</a>, <a href="http://technorati.com/tags/Hindi" rel="tag">Hindi</a>, <a href="http://technorati.com/tags/Desipundit" rel="tag">Desipundit</a>, <a href="http://technorati.com/tags/हिंदी" rel="tag">हिंदी</a>, <a href="http://technorati.com/tags/चिट्ठे" rel="tag">चिट्ठे</a>, <a href="http://technorati.com/tags/चिट्ठा" rel="tag">चिट्ठा</a>, <a href="http://technorati.com/tags/देसीपंडित" rel="tag">देसीपंडित</a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[नारद पर सर्च करें सीधे अपने ब्राउज़र से]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/07/12/searh-direct-from-browser/</link>
<pubDate>Thu, 12 Jul 2007 17:12:45 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/07/12/searh-direct-from-browser/</guid>
<description><![CDATA[आज अनजाने ही इस मजेदार चीज का पता चला। ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3"><img src="http://aaina2.wordpress.com/files/2007/07/search2.jpg" alt="search2.jpg" align="left" border="0" height="1" width="1" /><img src="http://aaina2.wordpress.com/files/2007/07/search2.jpg" align="left" border="0" height="272" width="220" />आज अनजाने ही इस मजेदार चीज का पता चला। यदि आपके पास इंटेरनेट एक्सप्लोरर 7 है तो आप सीधे अपने ब्राउज़र से ही नारद या किसी भी ब्लॉग पर बिना वहां पर गये सर्च कर सकते हैं। बस  नारद या जिस ब्लॉग से <img src="http://aaina2.wordpress.com/files/2007/07/search.jpg" alt="search.jpg" align="left" border="0" height="1" width="1" /><img src="http://aaina2.wordpress.com/files/2007/07/search.jpg" alt="search.jpg" align="left" border="0" height="1" width="1" />आप सीधे सर्च करना चाहते हैं उसे आपको अपने ब्राउज़र मे सर्च प्रोवाईडर के रूप में जोड़ना पड़ेगा।</font><font size="3"> </font><font size="3"> ब्राउज़र में सर्च प्रोवाईडर को जोड़ना बेहद आसान है। पहले आप अपने ब्राउज़र के सर्च इंजन के ड्रॉपडाउन मीनू में जा कर Find more providers क्लिक करें, आप माइक्रोसॉफ्ट की <a href="http://www.microsoft.com/windows/ie/searchguide/en-en/default.mspx?dcsref=http://runonce.msn.com/runonce2.aspx">इस</a> साइट पर पहुंच जायेंगे। यहां  Create Your Own के बॉक्स में यह URL डाल दें। <a href="http://narad.akshargram.com/?s=TEST">http://narad.akshargram.com/?s=TEST</a> अब इसे नाम दे कर Install पर क्लिक कर दें। बस हो गया। अब नारद आपके सर्च इंजनों में जुड़ गया। अब आप सीधे अपने ब्राउज़र से नारद पर सर्च कर सकते हैं।</font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3">ब्लॉगस्पॉट के ब्लॉगर यदि अपने ब्लॉग पर गुगल एड लगाते हैं तो गुगल एड से वे गुगल सर्च अपने चिट्ठे पर लगायें। अब इस सर्च बॉक्स में लिखें TEST और अपने ब्लॉग को सर्च करने का विकल्प टिक करके एंटर करें। अब जो साइट खुलेगी उसका URL कॉपी करके Create Your Own के बॉक्स में डाल दें। इस प्रकार आप अपने चिट्ठे को भी सीधे अपने ब्राउज़र से सर्च कर पायेंगे।</font></p>
<p><font size="3">वर्डप्रैस के चिट्ठाकार सर्च का विजेट लगा कर ऊपर की प्रक्रिया से इसे जोड़ें। वर्डपैस का URL यूं आयेगा <a href="http://aaina2.wordpress.com/?s=TEST">http://aaina2.wordpress.com/?s=TEST</a>  बस यहां <a href="http://aaina2.wordpress.com/?s=TEST">http://aaina2.wordpress.com/</a> के स्थान पर अपने चिट्ठे का पता डाल लें।</font></p>
<hr />
<p><b>Technorati Tags:</b> <a href="http://technorati.com/tags/नारद" rel="tag">नारद</a>, <a href="http://technorati.com/tags/सर्च" rel="tag">सर्च</a>, <a href="http://technorati.com/tags/ब्राउजर" rel="tag">ब्राउजर</a>, <a href="http://technorati.com/tags/Narad" rel="tag">Narad</a>, <a href="http://technorati.com/tags/Search" rel="tag">Search</a>, <a href="http://technorati.com/tags/Browser" rel="tag">Browser</a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[देवनागरी में दिखता है मोबाइल पर ब्लॉगवाणी]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/07/10/blogvani-on-mobile/</link>
<pubDate>Tue, 10 Jul 2007 16:22:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/07/10/blogvani-on-mobile/</guid>
<description><![CDATA[मैं हमेशा से सोचता था कि काश हिंदी चिट]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="+0"><img border="0" align="left" width="190" src="http://farm2.static.flickr.com/1007/769161795_3836642056_m.jpg" height="240" />मैं हमेशा से सोचता था कि काश हिंदी चिट्ठे मोबाइल पर भी पढ़े जा सकते। भोमियो की जब प्रॉक्सी पते पर रोमन में हिंदी पढ़ने की सुविधा मिलने लगी तो <a href="http://aaina2.wordpress.com/2007/05/29/hindi-blog-on-mobile/">मोबाइल पर नारद और हिंदी चिट्ठों</a> को रोमन मॆं पढ़ना आसान हो गया। अब मैं मजे से नारद पर आयी नयी पोस्ट अपने मोबाइल पर रोमन में देख लेता हूं मगर अभी भी एक कसक मन में रहती है देवनागरी में मोबाइल पर पढ़ने की।<img border="0" align="right" width="194" src="http://farm2.static.flickr.com/1339/769161775_1ab9078667_m.jpg" height="240" /></font><font size="+0"> </font><font size="+0">आज मेरी खुशी का उस समय ठिकाना न रहा जब मैंने ब्लॉगवाणी पर साइडबार को देवनागरी में अपने मोबाइल पर देखा। मैंने झट से मैथिली जी को फोन मिलाया और उन्हें बताया कि ब्लॉगवाणी की साइडबार को देवनागरी में मोबाइल पर भी पढ़ा जा सकता है। उन्हों ने खुश हो कर कहा कि हम पूरी साइट को ही इसी फॉट में बदल देते हैं। शाम तक पूरी</font><font size="+0"><img border="0" align="left" width="168" src="http://farm2.static.flickr.com/1008/769161785_cf27150eb1_m.jpg" height="240" />साइट ही मोबाइल पर पढ़ी जा सकती थी।</font><font size="+0"> हमारे देश में जितने इंटेरनेट कनेक्शन हैं उनसे कई गुणा ज्यादा इंटेरनेट एक्सेस कर सकने वाले मोबाइल हैं। फिर क्यों नहीं सारे हिंदी चिट्ठे इसी फॉट से लिखे जाते?  क्या मैथिली जी कैफेहिंदी के</font><font size="+0"> टाइपिंग टूल में यह सुविधा जुड़वा सकते हैं ?</font><font size="+0">यहां यह बताना जरूरी है कि मेरा मोबाइल है I Mate SP3. OS Windows Mobile 3, Browser Intern</font><font size="+0">et Explorer.</font></p>
<p><font size="+0"></font></p>
<p><font size="+0"></font></p>
<p><font size="+0"></font></p>
<p><font size="+0"></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कुछ मजेदार कार्टून]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/07/10/hindicartoon/</link>
<pubDate>Tue, 10 Jul 2007 14:27:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/07/10/hindicartoon/</guid>
<description><![CDATA[मजेदार समाचार पर मजेदार समाचारों के अ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3"><a target="_blank" href="http://hindinewspaper.blogspot.com/">मजेदार समाचार</a> पर मजेदार समाचारों के अलावा मजेदार कार्टून भी कभी कभी देखने को मिलते हैं। हाल ही में छपे कुछ मजेदार कार्टून आपके लिये।</font></p>
<p><img src="http://farm2.static.flickr.com/1219/768452813_43db447764_o.gif" /></p>
<p><img src="http://farm2.static.flickr.com/1266/768452805_25f27f9d25_o.gif" /></p>
<p><img src="http://farm2.static.flickr.com/1409/768452803_35bdf4b5f5_o.gif" /></p>
<p><img src="http://farm2.static.flickr.com/1140/768452819_2cfecbdd11_o.jpg" /></p>
<p><!-- AddThis Bookmark Button BEGIN --><br />
<a href="http://www.addthis.com/bookmark.php" title="Bookmark using any bookmark manager!" target="_blank"><img src="http://s9.addthis.com/button2-bm.png" width="160" height="24" border="0" alt="AddThis Social Bookmark Button" /></a><br />
<!-- AddThis Bookmark Button END --></p>
<hr /><strong>Technorati Tags:</strong> <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/Cartoon">Cartoon</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/Hindi">Hindi</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/हिंदी">हिंदी</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/कार्टून">कार्टून</a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह चिट्ठाचर्चा नहीं है फिर भी...]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/07/03/funny-blogs/</link>
<pubDate>Tue, 03 Jul 2007 09:05:46 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/07/03/funny-blogs/</guid>
<description><![CDATA[आज नारद पर एक बहुत ही मजेदार चीज देखने ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="left"><font size="3">आज नारद पर एक बहुत ही मजेदार चीज देखने को मिली। नारद पर आयी हर पोस्ट का शीर्षक जैसे अपने पहले वाले पोस्ट के शीर्षक का ही जवाब था। यकीन न हो तो यहां देख लीजिये। मजे की बात यह है कि अधिकतर पोस्ट एक दूसरे के साथ साथ हैं।</font></p>
<p align="left"><font size="3"><a href="http://bajaar.blogspot.com/2007/07/blog-post.html">रचनात्मकता नाम की कोई चीज़ नही है।</a> - <a href="http://merasapna.wordpress.com/2007/07/03/narad-ki-monopoly-khatam-hogi/">नारद का एकाधिकार खत्म होगा!</a></font><font size="3"> </font></p>
<p><font size="3"><a href="http://mypoemsmyemotions.blogspot.com/2007/07/blog-post_03.html">हमारा तुम्हारा कोई रिश्ता नहीं है</a> - <a href="http://deveshkhabri.blogspot.com/2007/07/blog-post.html">बडे़ भाई की ब्लोगर मीट </a></font><font size="3"></p>
<p align="left"><a href="http://hgdp.blogspot.com/2007/07/blog-post_5777.html">विकी पर कोई गया तो फिर लौटा<img border="0" align="bottom" width="1" src="http://aaina2.wordpress.com/files/2007/07/narad-1.jpg" alt="narad-1.jpg" height="1" /><img border="0" align="bottom" width="1" src="http://aaina2.wordpress.com/files/2007/07/narad-1.jpg" alt="narad-1.jpg" height="1" /> है? - समीर लाल</a> - <a href="http://merekavimitra.blogspot.com/2007/07/blog-post_03.html">तुम अकेले नहीं</a></p>
<p align="left"><a href="http://www.shuaib.in/chittha/archives/151">स्वर्ग मे बाथरूम नहीं….</a> - <a href="http://nayagharblogspotcom.blogspot.com/2007/07/blog-post.html">तॊलिया,इजिचेअर ऒर वेटिंग-रूम </a></p>
<p align="left"><a href="http://mamtatv.blogspot.com/2007/07/blog-post_03.html">यादोंके झरोखों से...</a> - <a href="http://visfot.blogspot.com/2007/07/blog-post_03.html">गोत्र को गाली देनेवालों, सुनो </a></p>
<p align="left"><a href="http://hashiya.blogspot.com/2007/07/blog-post.html">नक्सलवाद को समस्या नहीं मानें</a> - <a href="http://mastrama.blogspot.com/2007/07/blog-post.html">बोए पेड बबूल का</a></p>
<p align="left"><a href="http://zerocolumn.blogspot.com/2007/07/blog-post.html">नमक खाओ तो सेंधा नमक खाओ</a> - <a href="http://mediayug.blogspot.com/2007/07/blog-post.html">भूत और कामुकता के बीच विज्ञापन </a></p>
<p align="left"><a href="http://deepakbapukahin.wordpress.com/2007/07/03/%e0%a4%a8%e0%a4%8f-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ab%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%aa-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%95-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b5/">नए और फ्लॉप लेखक हिट्स से विचलित न हौं</a> - <a href="http://www.tarakash.com/index.php?option=com_content&#38;task=view&#38;id=324&#38;Itemid=464">भूख का इलाज</a></p>
<p align="left"><a href="http://naisadak.blogspot.com/2007/07/blog-post.html">गोत्र का स्त्रोत</a> - <a href="http://diaryofanindian.blogspot.com/2007/07/blog-post_9511.html">अंधेरे में झांकती आँखें </a></p>
<p align="left"><a href="http://sushmakaul.wordpress.com/2007/07/02/%e0%a4%88%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/">ईर्ष्या</a> - <a href="http://sushmakaul.wordpress.com/2007/07/02/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-19/">आज का विचार </a></p>
<p align="left"><a href="http://vikashkablog.blogspot.com/2007/07/blog-post.html">मेरा एक गीत सूनें</a> - <a href="http://kashivishvavidyalay.wordpress.com/2007/07/02/kavitahindichhoti-javani/">पहला नशा ,पहला खुमार </a></p>
<p align="left"><img src="http://aaina2.wordpress.com/files/2007/07/narad-1.jpg" alt="narad-1.jpg" /></p>
<p align="left">अन्य प्रविष्टियां</p>
<p align="left"><a rel="bookmark" href="http://aaina2.wordpress.com/2007/06/21/newspaper/"><font size="3" color="#444444">हमहूं छाप दिये अखबार</font></a></p>
<p class="chronodata"><font size="3" color="#444444" face="Helvetica"><a rel="bookmark" href="http://aaina2.wordpress.com/2007/06/04/jhoon-barabar-jhoom-and-ticket-to-hollywood/">गुलजार साहब का ‘झूम बराबर झूम’ और ‘टिकट टू हॉलिवूड’</a></font></p>
<p></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[न्यूयार्क टाइम्स की साइट पर 'हिंदी टूलबार' और 'आईना']]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/06/07/hindi-toolbar/</link>
<pubDate>Thu, 07 Jun 2007 13:44:55 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/06/07/hindi-toolbar/</guid>
<description><![CDATA[पिछले मार्च में मैंने हिंदी टूलबार को ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">पिछले मार्च में मैंने <a href="http://hindiblog.ourtoolbar.com/">हिंदी टूलबार</a> को <a href="http://cnet.com/">http://cnet.com </a>के <a href="http://download.com">http://download.com</a> पर लिस्टिंग के लिये निवेदन किया था। चार जून को <a href="http://www.download.com/Hindi-Toolbar/3000-12777_4-10684038.html?tag=pub">टूलबार वहां लिस्ट</a> होने के लिये स्वीकार कर लिया गया। कल सुबह मुझे देख कर यह सुखद एहसास हुआ कि आईना पर कुछ हिट्स जिस लिंक से आये हैं वह <a href="http://nytimes.download.com/Hindi-Toolbar/3000-12777_4-10684038.html?tag=new">न्यूयार्क टाइम्स की साइट के</a> हैं। वहां जा कर मुझे पता चला कि न्यूयार्क टाइम्स का <a href="http://download.com">http://download.com</a> के साथ सहयोग है इसलिये आईना और हिंदी टूलबार के लिंक <a href="http://nytimes.download.com/Hindi-Toolbar/3000-12777_4-10684038.html?tag=new">न्यूयार्क टाइम्स की साइट </a>पर भी पंहुच गये।</font></p>
<p><font size="3">केवल दो दिन में ही यहां से इस टूलबार को 44 बार डाउनलोड किया गया।</font><font size="3"> </font><font size="3"></p>
<blockquote></blockquote>
<p>इस टूलबार के बारे में <a href="http://www.download.com/HindI-Blog/3260-20_4-6291457.html">download.com  </a> ने यह लिखा:</p>
<blockquote><p>This is a Toolbar made for Users in India who use Hindi on Internet by Hindi lover and Hindi User. As devloper of this Toolbar is interested in promotion of Hindi on the Internet. Hindi is being promoted by the devloper of this Toolbar in many ways.</p></blockquote>
<p></font></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मोबाइल पर हिंदी चिट्ठे पढ़ना हुआ आसान, धन्यवाद भोमियो!]]></title>
<link>http://aaina2.wordpress.com/2007/05/29/hindi-blog-on-mobile/</link>
<pubDate>Tue, 29 May 2007 13:21:08 +0000</pubDate>
<dc:creator>जगदीश भाटिया</dc:creator>
<guid>http://aaina2.wordpress.com/2007/05/29/hindi-blog-on-mobile/</guid>
<description><![CDATA[मोबाइल पर हिंदी चिट्ठे पढ़ना बहुत नामु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">मोबाइल पर हिंदी चिट्ठे पढ़ना बहुत नामुमकिन सा है क्योंकि जो भी GPRS मोबाइल फोन हैं, ज्यादातर में युनिकोड पढ़ पाना मुश्किल है।  हमारे देश में जितने इंटेरनेट कनेक्शन हैं उससे कई कई गुणा ज्यादा मोबाइल हैं। जरा सोचिये यदि मोबाइल पर हिंदी चिट्ठे पढ़ना  मुमकिन हो जाये तो हमें कितने और  नये पाठक आराम से मिल जायेंगे?</font></p>
<p><font size="3">बहुत दिनों से मेरी मंशा थी कि काश मैं भी अपने मोबाइल से हिंदी चिट्ठे पढ़ पाता। असल में मेरा काम ऑफिस में बैठने का कम और बाहर रहने का ज्यादा है। अक्सर जब आईना पर कोई टिप्पणी आती है और मैं उसे मोबाइल पर देख कर बिना पढ़े ही एपरूव कर देता हूं क्योंकि मोबाइल पर यह तो मेल मिल जाता है कि टिप्पणी आई है मगर हिंदी के स्थान पर केवल डिब्बे ही नजर आते हैं। तो हमेशा मैं इमेल के पते से यह अंदाजा लगा लेता कि टिप्पणी किसकी है और जब विश्वास हो जाता कि टिप्पणीकर्ता कोई अनजान नहीं है तो एपरूव कर देता और बाद में  अपने कंप्यूटर पर जाकर पढ़ लेता। </font><font size="3">मगर अब एपरूव करने के बाद मैं मोबाइल पर उस टिप्पणी को पढ़ भी सकता हूं क्योंकि <a href="http://bhomiyo.wordpress.com/">भोमियो </a>के प्रॉक्सी पते पर जो रोमन लीपी से चिट्ठे पढ़ने की सुविधा है उससे मोबाइल पर हिंदी चिट्ठे और टिप्पणियां आराम 