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	<title>क्रिकेट &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/क्रिकेट/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "क्रिकेट"</description>
	<pubDate>Sun, 06 Jul 2008 15:16:21 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[मोबाइल मोहब्बत हो गई-हास्य कविता]]></title>
<link>http://dpkraj.wordpress.com/?p=150</link>
<pubDate>Wed, 07 May 2008 17:50:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
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<description><![CDATA[प्रेमी ने प्रेमिका के मोबाइल की
घंटी ब]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color:#003300;">प्रेमी ने प्रेमिका के मोबाइल की<br />
घंटी बड़ी उम्मीद से बजाई<br />
जा रही थी वह गाड़ी पर<br />
चलते चलते ही उसने<br />
अपने मार्ग में होने की बात उसे बताई<br />
फिर भी वह बातें करता रहा<br />
वह भी सुनती रही<br />
सफर गाड़ी पर उसका चलता रहा<br />
अचानक वह कार  से टकराई<br />
प्रेमी को भी फोन पर आवाज आई<br />
प्रेमी ने पूछा<br />
‘क्या हुआ प्रिये<br />
यह कैसी आवाज आई<br />
कोई ऐसी बात हो तो मोटर साइकिल पर<br />
चढ़कर वहीं आ जाऊं<br />
मुझे बहुत चिंता घिर आई’<br />
प्रेमिका ने कहा<br />
‘घबड़ाओ नहीं कार से<br />
मेरी गाड़ी यूं ही टकराई<br />
अपनी मरहम पट्टी कराकर अभी आई<br />
करा देगा यह कार वाला उसकी भरपाई+’</span></strong></p>
<p><strong><span style="color:#003300;">प्रेमी करता रहा इंतजार<br />
फिर नहीं प्रेमिका की कोई खबर आई<br />
एक दिन भेजा संदेश<br />
‘जिससे मेरी गाड़ी टकराई<br />
उसी कार वाले से हो गयी  मेरी सगाई<br />
बहुत हैंडसम और स्मार्ट है<br />
उसने मुझ पर बहुत दया दिखाई<br />
इन दो पहियों की गाड़ी से<br />
तो अब हो गयी ऊब<br />
चार पहियों वाली गाड़ी में ही<br />
अब घूमने की इच्छा आई’</span></strong></p>
<p><strong><span style="color:#003300;">प्रेमी सुनकर चीखा<br />
‘यह कैसा मोबाइल है<br />
जिसने मोहब्बत को भी बनाया<br />
अपने जैसा<br />
कितना बुरा किया मैंने जो<br />
उस दिन मोबाइल की घंटी बजाइ<br />
..............................................</span></strong></p>
<p><strong><span style="color:#003300;">नोट-यह हास्य कविता काल्पनिक है तथा इसका किसी घटना या व्यक्ति से कोई लेना-देना नहीं है। अगर किसी की कारिस्तानी से मेल हो जाये तो वही उसके लिये जिम्मेदार होगा।<br />
</span></strong></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क्या भारत बदल रहा है?]]></title>
<link>http://amitabhtri.wordpress.com/?p=79</link>
<pubDate>Sat, 03 May 2008 16:28:46 +0000</pubDate>
<dc:creator>amitabhtri</dc:creator>
<guid>http://amitabhtri.wordpress.com/?p=79</guid>
<description><![CDATA[कल सायंकाल जब टेलीविजन सेट खोलकर समाच]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span style="font-size:small;"><span style="font-family:Mangal;">कल सायंकाल जब टेलीविजन सेट खोलकर समाचार देखने का प्रयास किया तो देखा कि भारत का मशहूर रेसमर खली तीन वर्षों के बाद अपने देश वापस आ रहा है। खली को देखने के लिये एयरपोर्ट पर उसके प्रशंसकों की भीड उमड रही थी और टेलीविजन चैनल उस रोमांच का सीधा प्रसारण कर रहे थे। टेलीविजन के इस प्रसारण को लेकर कुछ लोगों की अलग- अलग राय हो सकती है कि यह टीआरपी का चक्कर रहा होगा आदि आदि पर यहाँ मैं इस विषय पर बिलकुल चर्चा नहीं करना चाहता कि टेलीविजन चैनलों का खली की वापसी दिखाना गलत था या सही। मैं यहाँ उस रूझान की ओर पाठकों का ध्यान खींचना चाहता हूँ जो पिछ्ले कुछ वर्षों से भारत में देखने को मिल रहा हैं। </span><span></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span><span style="font-size:small;font-family:Times New Roman;"> </span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span style="font-size:small;"></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span style="font-size:small;"><span style="font-family:Mangal;">इससे पूर्व भारत के एकदिवसीय और टी- 20 टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी के नेतृत्व में जब भारत ने पहला टी-20 विश्व कप जीत था तो उसकी अगवानी में भी भारी भीड मुम्बई में उमडी। यही नजारा एक बार फिर जूनियर क्रिकेट टीम के विश्व कप जीतने और भारत द्वारा आस्ट्रेलिया को एकदिवसीय श्रृंखला में हराने पर हुआ। दोनों ही अवसरों पर भारत के लोग खिलाडियों के स्वागत में उमड पडे और यह वेग असाधारण लगा। आखिर यह घटनायें क्या संकेत देती हैं। यदि यह बात केवल क्रिकेट तक सीमित होती तो शायद यह मानने का कारण था कि भारतवासियों में क्रिकेट को लेकर जुनून है। लेकिन जब यही स्वागत कुश्ती के नायक लिये भी हो रहा है तो इस रूझान पर गौर करना ही होगा। </span><span></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span><span style="font-size:small;font-family:Times New Roman;"> </span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span style="font-size:small;"></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span style="font-size:small;"><span style="font-family:Mangal;">पिछ्ले कुछ महीनों से जब खली को भारत में टीवी चैनलों ने घर घर तक पहुँचाया तो भी आश्चर्य हुआ कि क्या टीवी चैनल के पास खबरों का अकाल हो गया। ऐसा नहीं है। वास्तव में अब भारत बदल रहा है और यह बदलाव पूरे भारत में एक साथ हो रहा है। यह बदलाव है भारतवासियों की आकांक्षा का बदलाव। अब भारतवासी एक ऐसे भारत को देखना चाहते हैं जो दुनिया में अपना रूतबा रखता हो और जिसमें सुपर पावर या महाशक्ति बनने की शक्ति हो। यही कारण है कि अब क्रिकेट में खेल के मैदान में आस्ट्रेलिया के खिलाडियों को स्लेजिंग का जवाब स्लेजिंग से देने वाले खिलाडियों को जनता सर माथे पर बैठाती है। </span><span></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span><span style="font-size:small;font-family:Times New Roman;"> </span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span style="font-size:small;"></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span style="font-size:small;"><span style="font-family:Mangal;">भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने जब टी-20 के नये संस्करण में ढला हुआ आईपीएल का फार्मूला लोगों के सामने परोसा तो उत्सुकता इसी बात को लेकर नहीं थी कि इस खेल के नये संस्करण से मनोरंजन होगा वरन इसके पीछे यह भाव भी सन्निहित था कि अब क्रिकेट जैसे खेल का गुरुत्व केन्द्र भारत में आ गया और जिस खेल पर कभी गोरी चमडी वालों को आधिपत्य हुआ करता था वे ही लोग आज भारतीय क्रिकेट बोर्ड के इशारों पर नाच रहे हैं। क्योंकि आज दर्शक और उससे होने वाली विज्ञापन की आय भारत पर निर्भर है।</span><span></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span><span style="font-size:small;font-family:Times New Roman;"> </span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span style="font-size:small;"></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span style="font-size:small;"><span style="font-family:Mangal;">इसलिये खली हो या क्रिकेट ये तो प्रतीक मात्र हैं जो देश के जनमानस की उस आकांक्षा को प्रकट करते हैं जो भारत को एक महाशक्ति के रूप में देखना चाहती है। </span><span></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span><span style="font-size:small;font-family:Times New Roman;"> </span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span style="font-size:small;"></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span style="font-size:small;"><span style="font-family:Mangal;">भारत में यह आकांक्षा तो सदियों से रही है पर उसका स्वाभिमानी स्वरूप वैश्वीकरण और उन्मुक्त अर्थव्यवस्था के बाद आया है। आज सूचना तंत्रों के व्याप के बीच भारत के हर स्तर के व्यक्ति को पता चल चुका है अमेरिका में नासा में उच्च पदों पर बैठे लोग भी भारतीय मूल के हैं और वहाँ इंजीनियर, डाक्टर और आईटी के लोग भारतीय मूल के हैं और अमेरिका के अर्थव्यवस्था का अधिकाँश भारत पर निर्भर है। आज विदेशों में बैठे भारतीय अपने लिये सम्मान और बराबरी चाहते हैं। सूचनाओं के व्याप से पूरे भारत में ऐसी सूचनायें पहुँचती हैं और इन उपलब्धियों से प्रत्येक भारतीय अपने आप को जोड्ता है। </span><span></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span><span style="font-size:small;font-family:Times New Roman;"> </span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span style="font-size:small;"></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span style="font-size:small;"><span style="font-family:Mangal;">नयी बाजारमूलक अर्थव्यवस्था के अनेक दोष हमारे सामने आ रहे हैं परंतु इसने हमारे लिये अनेक ऐसे द्वार भी खोले हैं जो भारत के बदलते स्वरूप को दर्शाता है। मध्य वर्ग की बढ्ती ताकत ने राष्ट्रवाद की इस आकांक्षा को और सशक्त किया है। अपने सामान्य जीवन स्तर को लेकर असुरक्षा के भाव से मुक्त होकर वह विदेश नीति, विश्व में भारत के स्तर सहित अनेक विषयों पर अपनी राय और आकांक्षा रखने लगा है और यह राष्ट्रवाद का भाव भले ही मध्य वर्ग में सशक्त हुआ हो परंतु इस नये रूझान से पूरा देश आप्लावित है इसका प्रकटीकरण क्रिकेट में इसलिये हो रहा है कि आज समाज में ऐसे महापुरुष ही नहीं हैं जिन्हें भारतवासी अपना आदर्श बना सकें। </span><span></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span><span style="font-size:small;font-family:Times New Roman;"> </span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span style="font-family:Mangal;"></span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin:0;"><span style="font-family:Mangal;"><span style="font-size:small;">परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है और हम इसे स्वीकार करें या नहीं यह अपने अनुसार स्वाभाविक विकास करता ही है। उसी प्रकार भारत में भी बहुत सी चीजें बदल रही हैं। एक ओर वैश्वीकरण और उन्मुक्त अर्थव्यवस्था से सशक्त हुआ समाज भी है तो वहीं इससे बुरी तरह प्रभावित समाज भी है परंतु इन सबके मध्य भी भारत में राष्ट्रवाद की प्रखरता स्पष्ट दिखाई पड रही है। निश्चित रूप से इस भाव को सकारात्मक स्वरूप तभी मिलेगा जब विश्व स्तर पर हो रहे परिवर्तन के प्रति अपनी नजर रखते हुए हम इसकी निष्पक्ष समीक्षा करें और संक्रमणकालीन स्थिति में भी देश में पनप रहे उत्साह के वातावरण को बनाये रख सकें। समाज में हो रहे परिवर्तनों को कुछ अंशों में स्वीकार भी करना सीखें।</span></span></p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[करते हास्य कविता की पैनी धार]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/?p=360</link>
<pubDate>Sat, 26 Apr 2008 15:40:58 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakraj.wordpress.com/?p=360</guid>
<description><![CDATA[फंदेबाज आया और बोला
‘दीपक बापू, तुम क्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#003366;"><strong>फंदेबाज आया और बोला<br />
‘दीपक बापू, तुम क्रिकेट जरूर देखा करो<br />
अरे, तुम इस बात की चिंता क्यांे करते हो कि<br />
कौन टीम जीत रही है और कौन हार<br />
तुम तो देखो उसमे नृत्य और गाने जैसे चित्रहार<br />
इसीलिये तो क्रिकेट और फिल्म को मिक्स किया है<br />
खेल भी होगा और साथ में मनोरंजन का भी व्यापार<br />
यह क्या रेडियो पर गाने सुनते हो<br />
और ठोकते हो ब्लाग पर हास्य कविता<br />
तुम्हारे पाठक तो उधर ही है<br />
जहां है क्रिकेट की बहार’’</strong></span><br />
<span style="color:#003366;"><strong>अपने चश्में और नाक के बीच से<br />
आंखों से झांकते हुए उसे घूरा<br />
और फिर कहैं दीपक बापू<br />
‘तुमने क्रिकेट कितनी खेली होगी<br />
जितनी हमने झेली होगी<br />
अगर उसमें वक्त नहीं खराब लोग नहीं करवाते<br />
तो हम आज प्रेमचंद जैसे कहलाते<br />
बैट किसी के हाथ में खेलता कोई और है<br />
बाल जिसके हाथ में होती<br />
वह फैंकता नजर आता है<br />
विकेट लेता  कोई और है<br />
जब से सुना यह हमने<br />
उतर गया क्रिकेट का नशा<br />
अब तो हास्य कविता में मन है बसा<br />
यह डांस देखने के लिये बहुत चैनल है<br />
फिर क्रिकेट के साथ क्या देखना<br />
दिखा रहे हैं जो लोग<br />
उनका खेल से क्या वास्ता<br />
उनका तो लोगों की जेब पर जोर है<br />
अब नहीं उठा सकते क्रिकेट के मनोरंजन का बोझ<br />
पाठक जब देख रहे हैं क्रिकेट<br />
तो हम ठोक देंगे कोई कविता<br />
मैच देखने के बाद सबकी हालत तो<br />
वैसे ही हो जाती है<br />
जैसे नाचने के बाद मैले पैर<br />
देखकर रोता मोर है<br />
फिर मन बहलाने के लिये हमारे पास तो<br />
अपने पास शब्दों का है बहुत भंडार<br />
लिख-लिखकर होती जा रही  अपनी<br />
हास्य कविता की पैनी धार<br />
.....................................</p>
<p></strong></span></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[Open Source Education in Public Funded Universities in India]]></title>
<link>http://oslucknow.wordpress.com/2008/03/26/open-source-education-in-public-funded-universities-in-india/</link>
<pubDate>Wed, 26 Mar 2008 13:37:08 +0000</pubDate>
<dc:creator>oskanpur</dc:creator>
<guid>http://oslucknow.wordpress.com/2008/03/26/open-source-education-in-public-funded-universities-in-india/</guid>
<description><![CDATA[भारतीय लाइनक्स उबुँटू शिक्षा - खुला सो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>भारतीय <a title="अपने कम्प्यूटर के लिए आाधुनिक व मुफ्त लाइनक्स उबुँटू डाउन लोड करें" href="http://www.ubuntu.com/getubuntu/download" target="_blank">लाइनक्स उबुँटू शिक्षा</a> - खुला सोर्स कोड - भारत मे सार्वजनिक विग्यान व तकनीकी शिक्षा के आयाम</p>
<p>व्यक्तिगत ग्यान से सामाजिक सम्पन्नता व सक्रीयता की अोर कैसे बढ़े ?</p>
<div class="snap_preview">दक्षिण अफ्रीका में लाइनक्स उबुँटू का अत्याधुनिक व प्रमाणित पाठ्यक्रम - <a title="Obsidian - Certified Linux Ubuntu Training in South Africa" href="http://www.obsidian.co.za/">ओब्सीडियन द्वारा</a> -</div>
<div class="snap_preview"><a title="Ubuntu Linux certified professional training course" href="http://www.ubuntu.com/news/obsidian-linux-training-south-africa" target="_blank">http://www.ubuntu.com/news/obsidian-linux-training-south-africa</a></div>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हॉकी में ओलंपिक से बाहर होने के मायने-आलेख ]]></title>
<link>http://dpkraj.wordpress.com/?p=130</link>
<pubDate>Tue, 11 Mar 2008 15:33:22 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://dpkraj.wordpress.com/?p=130</guid>
<description><![CDATA[ओलंपिक में भारत की हॉकी टीम नहीं होगी।]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>ओलंपिक में भारत की हॉकी टीम नहीं होगी। टीम ओलंपिक जाती थी तो कौनसे तीर मारती थी कहने वाले तो कह सकते हैं। ओलंपिक दुनिया का सबसे बड़ा महाकुंभ है और उसमें भारत की पहचान केवल हॉकी से ही है और किसी खेल में भारत का नाम इतना नहीं है। जब ओलंपिक में  सारे खिलाड़ी हार कर वापस लौटते  हैं पर हॉकी टीम आखिर तक खेलती है और समापन कार्यक्रम में उसके खिलाड़ी भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। अब कौन बचेगा। यह भूमिका निभाने के लिए? तय बात है इसके लिए अब विचार होगा। </p>
<p>हमारी स्थिति अच्छी नहीं है यह सब जानते थे। चक डे इंडिया फिल्म महिला हॉकी पर बनी जिसमें भारत को काल्पनिक विजेता बना दिया। लोग फूले नहीं समाये। जिधर देखो चक दे इंडिया का गाना बज रहा था।  ट्वंटी-ट्वंटी क्रिकेट विश्व कप में जब भारत जीता तो सारे अख़बार और टीवी चैनल इसे बजा रहे थे। मगर जिस हॉकी की पृष्ठ भूमि पर यह काल्पनिक कथानक गढा गया वह खेल सिसक रहा था। मैंने उस समय एक ब्लोग पर इस फिल्म के  कथानक की तारीफ पढी तो मुझे हँसी आयी और मैंने  उस पर खूब लिखा। जिस क्रिकेट खेल पर इस  देश के प्रचार माध्यम  कमा रहे है उसमें विश्व कप में बंगलादेश से हारा था यह भूलने वाली बात नहीं है। यह इतिहास में दर्ज रहेगा कि  २००७ में भारत की क्रिकेट टीम अपमानित रूप से हार कर विश्वकप क्रिकेट से बाहर हुआ और इसे कोई बदल नहीं सकता। </p>
<p>मजे की बात यह है कि  हॉकी की पृष्ठभूमि पर बनी  फिल्म में हीरो की भूमिका निभाने वाला हीरो आज क्रिकेट के बाजार में प्रवेश कर गया है और हॉकी कान तो नाम भी उसकी जुबान पर नहीं  था। आखिर  सवाल यह  है कि चक दे इंडिया को हॉकी की पृष्ठभूमि पर क्यों बनाया गया क्रिकेट की क्यों नहीं? मेरा अनुमान है कि भारत के लोग क्रिकेट देखते हैं पर हॉकी को चूंकि राष्ट्रीय खेल के रूप में प्रचारित किया जाता है  इसलिए लोगों का उससे आत्मिक लगाव है और इसी कारण उनकी भावनाओं का दोहन करना आसान है।फिल्म बनाना एक व्यवसाय है और इसमें कोई बुराई भी नहीं है पर हमारे देश के लोग बहकावे में आ जाते हैं तब उस पर विचार तो करना ही होता है। बहुत दिन तक गूंजा चके दे इंडिया का नारा पर अब क्या?<br />
हॉकी से पूरे विश्व में हमारी पहचान थी। अब चीन में होने वाले ओलंपिक में भारत हॉकी नहीं खेल सकेगा।  इस समय मुझे कोई ऐसा कोई खिलाड़ी दिखाई भी नहीं देता जिसके वहाँ कोई ओलंपिक में पदक पा सकेगा। टेनिस के कुछ नाम चर्चित हैं पर  उनकी विश्व में रेकिंग भी देख लेना जरूरी है। हाँ एक जो मजेदार बात मुझे लगती है और हंसी भी आती है कि भारत में एशियाड, कॉमनवेल्थ और ओलंपिक में  कराने  के प्रयास किये जाते हैं तो किस  बूते पर?केवल पैसे के दम पर न! फिर हाकी पर पैसा खर्च क्यों नहीं करते? हम खेलों के मेले लगाने की बात करते हैं तो पर खिलाडियों को प्रोत्साहन देने के नाम पर सांप सूंघ जाता है।<br />
क्रिकेट हो या टेनिस बहुत लोकप्रिय  हैं  पर हाकी भारत के खेलों का प्रतीक और आत्मा है। यह ठीक है कि वहाँ बहुत समय से कोई पदक नहीं जीता पर फिर भी एक संतोष था कि चलो  अपना प्रतीक बना हुआ है। अब वहाँ से बाहर होने पर जो वास्तव में खेल प्रेमी हैं वह बहुत आहत  हुए हैं और जो केवल आकर्षण के भाव से देखने वाले दर्शक हैं उनको इसका अहसास भी नहीं हो सकता कि भारत ने क्या खोया है? हॉकी हमारे आत्सम्मान का प्रतीक है जो हमने  खो दिया है।</p>
<p>हम अपने आर्थिक विकास और सामरिक मजबूती का दावा कितना भी कर लें पर हमारे पडोसी देश चीन की जनता को अगले ओलंपिक में इस पर हंसने का खूब अवसर मिलेगा। आखिरी बात खेलों के किसी भी राष्ट्र के विकास का प्रमाण माना जाता है और जो ऐसे विकास के दावे करते हैं उन्हें हॉकी में भारत की हार एक आईने की तरह दिखाई जा सकती है। हॉकी खेल में विश्व के मानचित्र में बने रहना ही हमारे लिए ताज था और अब चाहे कितना भी कर लो अब वह आसानी से वापस आने वाला नहीं है अगर ऐसा करने वाले लोग होते तो इतने साल से गर्त में जा रहे इस खेल को बचाने की कोशिश नहीं करते।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कौन जीता कौन हारा-आलेख ]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/?p=295</link>
<pubDate>Tue, 29 Jan 2008 16:33:15 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakraj.wordpress.com/?p=295</guid>
<description><![CDATA[हरभजन सिंह को मैच की पचास फीसदी कमीशन ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>हरभजन सिंह को मैच की पचास फीसदी कमीशन काटने के सजा देकर बरी कर दिया गया है और देश में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जैसे कि कोई कारूँ का खजाना देश के हाथ लग गया है. उनको यह सजा अपशब्द कहने पर दी गयी है. जिस नस्लवाद के आरोप से उनको बरी किया गया है वह वैसे भी भारतीयों पर फिट नहीं बैठता क्योंकि यह गोरों का मुल्क नहीं है-बल्कि इसका पूरा विश्व ही उपहास की दृष्टि से देख रहा था. </p>
<p>अब सवाल  यह है कि आस्ट्रेलिया के उस होग को क्यों माफ़ किया गया जिस पर भारतीय खिलाडियों ने गाली देने का आरोप लगाया  था? उसे भारतीयों ने क्यों माफ़ किया? क्या उसे सजा दिलवाना जरूरी नहीं था? क्या यह सन्देश विश्व में नहीं गया कि गोरों को गाली देने का अधिकार है पर भारतीयों को नहीं?</p>
<p>बहुत बड़ी कूटनीतिक सफलता की बात और लोगों के गले उतर जाये पर अपने तो नहीं उतरी. कहीं ऐसा तो नहीं नस्लवाद के कथित आरोप को भयानक मानकर यह मान लिया गया कि इससे तो गाली की सजा ही हरभजन सिंह  दिलवाकर बरी करवाया जाये. होग ने जो गलियाँ दी थी क्या वह इसलिए इतनी  हल्की थी क्योंकि पश्चिम में वह नस्लवाद से कम मानी जातीं है. हरभजन सिंह ने बन्दर शब्द का प्रयोग किया था इसे पश्चिम में नस्लवाद माना जाता है भारत में नहीं. होग ने जो गालिया दीं होंगी उन्हें भारत में बहुत गंभीर माना जाता है. अगर यहाँ आप किसी के लिए बन्दर लिख दें तो वह हंसकर चुप हो जायेगा और कोई गाली दें तो पलटकर जवाव देगा.  मतलब यह है कि इस मामले में तो हमें गोरे ही एक बार विजेता नजर आ रहे हैं. </p>
<p>अब इस देश का कुछ हाल ऐसा ही है कि आस्कर अवार्ड में भारत की फिल्म पीटकर आती है तो भी उसे हाथोहाथ उठा लिया जाता  है. कुछ ऐसा ही ऐसा लग रहा है.</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आस्ट्रेलिया का कोच नहीं रखने की कहीं  यह  बौखलाहट तो नहीं]]></title>
<link>http://rajdpk.wordpress.com/2008/01/07/austreliya-ka-koch-n-rakhne-kee-buakhlaahat-to-naheen/</link>
<pubDate>Mon, 07 Jan 2008 16:45:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://rajdpk.wordpress.com/2008/01/07/austreliya-ka-koch-n-rakhne-kee-buakhlaahat-to-naheen/</guid>
<description><![CDATA[ऐसा लगता है की बीसीसीआई द्वारा अपनी टी]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>ऐसा लगता है की बीसीसीआई द्वारा अपनी टीम के लिए अभी कोई कोच न रखने का निर्णय बाहर के कुछ लोगों को रास नही आ रहा है कहीं यह वजह तो नहीं है कि इस वजह से भारतीय टीम को अपमानित करने का प्रयास किया जा रहा है और इसके पची कोई सोची-समझी साजिश लगती हैं. अभी मैंने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच ग्रेग चैपल का बयान सुना उसके अनुसार अंपायर की गलतियां तो मानवीय गलतियां हैं. अब क्या यह बता सकते हैं कि<br />
१.बकनर की गलतियां भारत के खिलाफ ही क्यों अधिक रहीं है. क्या अपने कार्यकाल के दौरान उन्होने उनकी गलतियों पर कोई कार्यवाही की.<br />
२.एक खिलाड़ी को एक ही पारी में चार बार आउट न देना और कभी भी तीसरे अंपायर की मदद न लेना किसी व्यवसायिक अंपायर पर संदेह नहीं खडा करता.<br />
३.बकनर एक पेशेवर अंपायर है और क्या उसका आपने मेडिकल टेस्ट कराया है कि उसको आंखों से दिखता है भी के नहीं.<br />
कहते हैं कि आस्ट्रेलिया के खिलाड़ी पेशेवर होते हैं और अगर वह किसी विदेशी टीम के कोच बनते हैं तो  उसके साथ हो जाते हैं और अपने देश का ख्याल नहीं रखते. इतने बरसों तक भारतीय कोच रहे चैपल के बयान से लगता है यह सब दिखावा  है और शायद उन्होने अपने  कार्यकाल के दौरान दुनिया के सबसे शक्तिशाली बैटिंग टीम को इसलिए कमजोर किया कि वह उनके देश को चुनौती न दे सके. शायद यही वजह है कि अब भारतीय क्रिकेट के नियंत्रणकर्ता अब विदेशी कोच-खासतौर से आस्ट्रेलिया का-  रखने से कतरा रहे हैं. अब उनके समझ में आ गया है कि विदेशी कोच कभी उसकी टीम का भला नहीं कर सकता.</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जब बन्दर क्रिकेट खेलने लगे ]]></title>
<link>http://dpkraj.wordpress.com/2008/01/07/jab-bandar-cricket-khelne-lage/</link>
<pubDate>Mon, 07 Jan 2008 16:00:59 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://dpkraj.wordpress.com/2008/01/07/jab-bandar-cricket-khelne-lage/</guid>
<description><![CDATA[मैदान पर खेलते हुए
बोलर ने बैट्समैन से]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>मैदान पर खेलते हुए<br />
बोलर ने बैट्समैन से कहा 'बन्दर'<br />
बैट्समैन ने कहा-''तू होगा बन्दर''<br />
दोनों में झगडा हो गया<br />
साथियों ने सुलझाने की कोशिश<br />
पर नहीं रहा उनके बस के अन्दर<br />
अचानक एक खिलाड़ी चिल्लाया<br />
''भागो, देखो आ रहे हैं झुंड बनाकर<br />
जब हम खेल रहे थे<br />
तब कुछ देख रहे थे बन्दर<br />
और अब झुंड बनाकर लड़ने आ रहे हैं<br />
अब हमें नहीं छोडेंगे  बन्दर </p>
<p>सब भाग गए वहाँ से<br />
सब बंदरों ने जमा लिया अपना खेल<br />
बेट-बल्ला लेकर खेलने  लगे<br />
एक बन्दर ने कहा<br />
''क्या किसी आदमी को अंपायर बना लें<br />
दूसरा बोला<br />
''हमें आदमी की तरह क्रिकेट नहीं खेलना<br />
बेईमानी तो कभी देखी भी नहीं<br />
और वह करता है खूब<br />
उसमें भी कुछ को दिखता नहीं<br />
अंपायरिंग क्या कर पायेंगे<br />
भला क्या हम उनके लिए पहले<br />
आंखों का डाक्टर जुटा पायेंगे<br />
फिर कब खेल पायेंगे<br />
अभी तो मौका मिला है तो खेल लो<br />
हम आदमी नहीं बनेंगे<br />
रहेंगे  तो बन्दर'' </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[Dell Computers launches Ubuntu Linux Laptops / Notebook Computers]]></title>
<link>http://oskanpur.wordpress.com/2007/12/23/dell-computers-launches-ubuntu-linux-laptops-notebook-computers/</link>
<pubDate>Sun, 23 Dec 2007 13:20:22 +0000</pubDate>
<dc:creator>oskanpur</dc:creator>
<guid>http://oskanpur.wordpress.com/2007/12/23/dell-computers-launches-ubuntu-linux-laptops-notebook-computers/</guid>
<description><![CDATA[One of the world&#8217;s biggest computer and laptop manufacturers - Dell - has announced that as pa]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>One of the world's biggest computer and laptop manufacturers - Dell - has announced that as part of its corporate growth strategy - it has begun installing <a title="अपने कम्प्यूटर के लिए आाधुनिक व मुफ्त लाइनक्स उबुँटू डाउन लोड करें" href="http://www.ubuntu.com/getubuntu/download" target="_blank">Ubuntu 7.10 / Gutsy Gibbon</a>, on its Dell consumer Linux PCs in the United States and will also make it available on the Inspiron 530 in England, France and Germany before the end of 2007.</p>
<p>Dell began offering consumer systems running Ubuntu in May 2007. Ubuntu’s Gutsy Gibson has been available on laptops since October.</p>
<p>The OEM and laptop testing teams of Dell have been testing the code and hardware drivers for several weeks and are ready to launch the Ubuntu 7.10 Laptop based on the free and open source Ubuntu Linux operating system.</p>
<p>“<strong>We believe Ubuntu 7.10 is a solid step forward for both Linux enthusiasts as well as the mainstream consumer market</strong>,” wrote Daniel Judd, Product Group Strategist on the Dell2Dell blog on Tuesday. “The answer is simple. With any operating system, we take gold code and take the time to do extensive testing on our systems to make sure that customers have as few issues as possible.”</p>
<p>Daniel Judd, Dell product manager has cited “cool” 3-D visual effects, easier desktop search for applications and the “ability to quickly switch between users and easily share a system with family members” as key new features of Ubuntu’s 7.10 release. He has also cited two minor Dell developed innovations much in demand by younger generation of laptop users — pre-installation of Flash and improved recovery options — as other significant enhancements for Gutsy Gibbon on Dell consumer PCs.</p>
<p>Judd also one key request was the ability to watch DVD movies from the Dell Linux desktop. “We totally agree and that’s why we now include built-in DVD movie playback with all Ubuntu 7.10 systems.The experience we wanted is simple — when you put a movie in, it plays. It is easy enough for a child and an example of the steps we are taking to make Ubuntu as enjoyable as possible.</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[IT InfoTech 800 Pound Gorilla ? - No Ubuntu Download servers in India !!]]></title>
<link>http://nopiracy.wordpress.com/2007/11/29/it-infotech-800-pound-gorilla-no-ubuntu-download-servers-in-india/</link>
<pubDate>Thu, 29 Nov 2007 10:27:59 +0000</pubDate>
<dc:creator>oskanpur</dc:creator>
<guid>http://nopiracy.wordpress.com/2007/11/29/it-infotech-800-pound-gorilla-no-ubuntu-download-servers-in-india/</guid>
<description><![CDATA[
Backwardness of Infrastructure or Backwardness of the Mind ?
For the Indian enthusiasts of Ubuntu a]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p class="itemtext">
<p class="snap_preview"><span>Backwardness of Infrastructure or Backwardness of the Mind</span> ?<br />
For the Indian enthusiasts of Ubuntu and Linux it sometimes comes as a <span>complete shock</span> that a country which bursts into raptures when women are launched into outer space, a country that just freaks out when it sees fillums like Swadesh, Chak de India etc and a country which regards itself as one of the providers of choice of IT services, innovation and IT expertise to many parts of the world - is very silent when it comes to the question of IT infrastructure.<br />
However if you have had ocassion to talk to some of the smartest Indian IT professors, working for well over decades in premier science and technology teaching and research institutes, one cannot help asking them a few questions on Linux and the Indian community :<br />
1. For how many years have you been using Linux ?<br />
2. For how many years have you been teaching Linux ?<br />
3. How many world class conferences you have attended or hosted on Linux with lots and lots of government money ?<br />
4. How many times you have given media interviews regarding IT innovation strategy for this country ?<br />
5. How many years you have spent on accumulating experience on clusters of computing hardware ?</p>
<p>And then if you ask them one simple question as to <span>why - if when a user in an Indian village wants to download Ubuntu Linux from an Indian server there is no Indian server offering free downloads - they just go suddenly quiet</span>.<br />
How long is this state expected to last ?<br />
Just try going to the Ubuntu Linux download page and see (forget the world) - just check out which Asian countries have servers from which common people can download Ubuntu Linux from.<br />
You will be amazed that all these high flying science and technology bureaucrats of India have not even found the time or the resources to offer a server for simple downloads.<br />
And do you wonder what countries figure there ?<br />
Well <span>certainly not the so called big boss of IT - India</span>. Nor the IT capitalists who profess to be socialists at heart.<br />
There is no NASSCOM there. No IIT. No IIIT. No IIM<br />
Then who is there ? - <span><br />
Surprise of surprises</span> - China, Uzbekistan, Thailand, Vietnam.<br />
<span>No Indian servers at all from any of the high flying prestigious IT computing hubs sprinkled all over India</span>.<br />
Is this issue symptomatic about ills and achievements of Indian Science and Technology, some fifty years after the dreams of public sector and science and technology revolution in India ?</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[Internet BSNL broad band installation with Linux Ubuntu - Uttar Pradesh Telecom]]></title>
<link>http://nopiracy.wordpress.com/2007/11/29/internet-bsnl-broad-band-installation-with-linux-ubuntu-uttar-pradesh-telecom/</link>
<pubDate>Thu, 29 Nov 2007 10:25:40 +0000</pubDate>
<dc:creator>oskanpur</dc:creator>
<guid>http://nopiracy.wordpress.com/2007/11/29/internet-bsnl-broad-band-installation-with-linux-ubuntu-uttar-pradesh-telecom/</guid>
<description><![CDATA[कानपुर लखनऊ व सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p class="itemtext">कानपुर लखनऊ व सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में कम्प्यूटर उपयोग कर्ताओं के लिए <a title="लाइनक्स उबुँटू डाउन लोड करें" href="http://www.ubuntu.com/getubuntu/download" target="_blank">लाइनक्स उबुँटू</a> व बी एस एन एल की डाटा वन इन्टरनैट ब्रौडबैण्ड सेवा &#124;</p>
<p class="snap_preview">It seems some kids and even some adult people ( not to talk of ignorant computer, laptop hardware dealers) have difficulties getting their own or customer broadband Internet connection from BSNL India - working with Ubuntu or Kubuntu Linux.</p>
<p>The BSNL Broadband connection costs only Rs 250/- per month and because it is an ADSL connection you can also use the telephone connection on the same phone line. You just need to phone up the BSNL Broadband support and ask them to give you the BSNL LAN details. Usually they are very helpful and will give you :</p>
<p>Gateway Address, Primary DNS and Alternate DNS - All very simple - Just note down on piece of paper</p>
<p>The ADSL modem that they give like Sterlite which is a Chinese modem works very well with Ubuntu Linux in Kanpur Lucknow and all of Uttar Pradesh and no separate drivers are required. Just connect the Ethernet and phone lines to the modem. Connect the Ethernet cable to your AMD or Intel motherboard Ethernet port. A green and yellow light comes on if you see the back of your computer or laptop.</p>
<p>What next ? Once your Ubuntu or Kubuntu is installed from your ISO CD go to Applications - Accessories - Terminal and log in as root user. In Ubuntu root user is sudo</p>
<p>Type in the following in your shell - GNOME desktop shell also called GNOME Terminal :</p>
<p>sudo ppoeconf  - Then enter the username that BSNL gave you. Next enter the password. Keep all the default settings regarding</p>
<p>sudo pon dsl-provider   ( sudo poff dsl-provider - to disconnect Internet connection )</p>
<p>Nowadays most computer dealers will give you a Ubuntu or Kubuntu CD for just Rs 100 and you can install everything yourself. To install printer, keep the printer on while installing your Ubuntu.</p>
<p>Check with : plog ifconfig</p>
<p>Go to any website from your Firefox browser like : http://www.example.com</p>
<p>And hey, your Rs 250/- per month ADSL Broadband connection from BSNL is working at lightning speed in Kanpur Lucknow, Jhansi, Varanasi, Gorakhpur, Patna Moradabad. Nothing else to do. Just tune in to an Internet radio station from Ubuntu and enjoy the latest music and video clips.</p>
<p>Happy Ubuntu !! Everything is working fine !! Free legal Ubuntu !! I’m loving it baby !!</p>
<p>And yes if somebody next door wants your help, please do help them out as wel. This is the spirit of Ubuntu in Kanpur and Lucknow. If your Ubuntu is working fine, please do spend some time to get your neighbours Ubuntu working also. No need to wait for IIT engineers. They will never come to you.</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[स्वभाव से भी 'गंभीर' हैं गौतम]]></title>
<link>http://jagjitsinghnews.wordpress.com/2007/11/26/swabhav-se-bhi-ghambir-hai-gautam/</link>
<pubDate>Mon, 26 Nov 2007 10:25:11 +0000</pubDate>
<dc:creator>Amarjeet Singh</dc:creator>
<guid>http://jagjitsinghnews.wordpress.com/2007/11/26/swabhav-se-bhi-ghambir-hai-gautam/</guid>
<description><![CDATA[





गंभीर ने ट्वंटी-20 विश्वकप में बेहतर]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<table align="right" border="0" cellpadding="0" cellspacing="0" width="208">
<tr>
<td rowspan="2" bgcolor="#ffffff"><img src="http://www.bbc.co.uk/f/t.gif" border="0" height="1" width="5" /></td>
<td><img src="http://www.bbc.co.uk/worldservice/images/2007/11/20071122135414gautam_gambhir300.jpg" alt="गौतम" height="300" width="203" /></td>
</tr>
<tr>
<td class="caption">गंभीर ने ट्वंटी-20 विश्वकप में बेहतरीन बल्लेबाज़ी की थी.</td>
</tr>
</table>
<p><!-- st_story --></p>
<p class="storytext"><strong>टीम इंडिया के चमकते सितारे बन चुके गौतम गंभीर नाम के मुताबिक़ स्वभाव से भी गंभीर हैं और बचपन से ही क्रिकेट बैट के दीवाने रहे हैं. </strong></p>
<p class="storytext">हाल में हुए ट्वेंटी-20 विश्वकप में 26 वर्षीय गौतम की बल्लेबाज़ी भारतीय टीम की जान बनी, और विश्वविजेता आस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेले गए मैच में उन्हें मैन ऑफ़ मैच का ख़िताब भी मिला था.</p>
<p class="storytext">गौतम एक नाती से ज्यादा अपनी नानी के बेटे हैं. पेश है उनकी नानी माँ के साथ <strong>सूफ़िया शानी</strong> की ख़ास बातचीत.</p>
<p class="storytext"><!-- end_story --><strong>कैसा लग रहा है आपको गौतम को इस मुका़म पर देखकर?</strong></p>
<p class="storytext">बहुत खुशी होती है और मेरी खुशी तब और दुगनी हो जाती है जब दूसरे लोग भी उसकी खुशी में शामिल होते है.</p>
<p class="storytext"><strong>कितना बदलाव देखती हैं आप नन्हे गौतम में और गौतम गंभीर में?</strong></p>
<p class="storytext">मुझे तो कोई बदलाव नज़र नहीं आता उसमें मैं शुक्रगुज़ार हूँ ऊपर वाले की कि उसने गौतम को घमंड और नखरों से दूर रखा हैं. हो सकता है मेरे इस नज़रिए में ममता नज़र आए. लेकिन दूसरे और परिवार के लोगों का भी यही कहना है कि गौतम अब भी ज़मीन पर है.</p>
<p class="storytext">
<table align="right" border="0" cellpadding="0" cellspacing="0" width="208">
<tr>
<td rowspan="2" bgcolor="#ffffff"><img src="http://www.bbc.co.uk/f/t.gif" border="0" height="1" width="5" /></td>
<td><img src="http://www.bbc.co.uk/worldservice/images/2007/11/20071122114403gambhir203.jpg" alt="गौतम" height="350" width="203" /></td>
</tr>
<tr>
<td class="caption">गौतम गंभीर बचपन से क्रिकेट बैट के दीवाने रहे हैं.</td>
</tr>
</table>
<p class="storytext"><strong>गौतम खेल में ही 'गंभीर' है या पढ़ाई में भी 'गंभीर' रहे हैं ?</strong></p>
<p class="storytext">क्रिकेट क्लब में भेजने से पहले मेरी शर्त ही यही थी गौतम से, कि तुम पढाई पर पूरा ध्यान दोगे. और गौतम कई क्लासों में फ़र्स्ट डिविज़न आया.</p>
<p class="storytext"><strong>गौतम की सबसे अच्छी बात क्या लगती है आपको?</strong></p>
<p class="storytext">उसका भोलापन--वह दिल में कुछ रखता नहीं है. बल्कि ख़ास बात यह है कि वह कभी झूठ नहीं बोलता.</p>
<p class="storytext"><strong>नन्हें गौतम की कोई शरारत याद है आपको ?</strong></p>
<p class="storytext">बचपन में उसकी एक ही शरारत थी कि वह सब बच्चों के बैट छीन लिया करता था. और जब वह अपने खेलने के लिए बैट मांगता था तो उसे कपड़े धोने वाली थापी दे दी जाती थी.</p>
<p class="storytext"><strong>गौतम हक़ीकत में "गंभीर" है या सिर्फ़ नाम के ही गंभीर हैं ?</strong></p>
<p class="storytext">नहीं वह वास्तव में गंभीर है. न वह बचपन में ज्यादा शरारत करता था न अब ज्यादा बात करता है. बल्कि शर्मीले टाइप का है.</p>
<p class="storytext"><strong>क्रिकेट के अलावा और क्या शौक़ है गौतम के?</strong></p>
<p class="storytext">क्रिकेट के बाद उसे संगीत से बहुत लगाव है. जब फ़ुर्सत में होता है तब या तो पुराने गाने सुनता है या जगजीत सिंह की ग़ज़लें.</p>
<p class="storytext"><strong>आपको क्या कहकर बुलाते हैं गौतम?</strong></p>
<p class="storytext">वह मुझे नानी मम्मी कहता है और हम सब उसे गौती कहते है.</p>
<p class="storytext"><strong>नानी और कहानी का गहरा रिश्ता है आपसे किस तरह की कहनी सुनने की डिमांड करते थे नन्हे गौतम?</strong></p>
<p class="storytext">गौती को चिड़िया की या राजा रानी की कहानी पंसद नहीं थी. बल्कि वह शिवाजी या भगतसिंह की कहानी सुनना पंसद करता था. आज भी वह देशभक्ति के गानों का इतना दीवाना है कि कितनी ही जल्दी हो अगर देशभक्ति का गीत आ रहा हो तो रुक कर सुनता ज़रूर है.</p>
<p class="storytext">
<table align="right" border="0" cellpadding="0" cellspacing="0" width="208">
<tr>
<td rowspan="2" bgcolor="#ffffff"><img src="http://www.bbc.co.uk/f/t.gif" border="0" height="1" width="5" /></td>
<td><img src="http://www.bbc.co.uk/worldservice/images/2007/11/20071122121207gambhir-nani-203.jpg" alt="नानी के साथ" height="152" width="203" /></td>
</tr>
<tr>
<td class="caption">गौतम गंभीर अपनी नानी के बेहद क़रीब हैं, जो उन्हें प्यार से गौती कहती हैं.</td>
</tr>
</table>
<p class="storytext"><strong>गौतम का दिया हुआ सबसे प्यारा तोहफ़ा आपको क्या लगता है?</strong></p>
<p class="storytext">मेरे लिए तो वही अनमोल तोहफ़ा है. वैसे मुझे उसने बहुत सुंदर घड़ी दी है जो वह हमेशा मेरी कलाई में बंधा देखना चाहता है.</p>
<p class="storytext"><strong>हर दादी और नानी की तमन्ना होती है कि नाती-पोते का सेहरा देखे....आपकी यह तमन्ना कब पूरी कर रहे हैं गौतम?</strong></p>
<p class="storytext">वैसे तो गौतम नाती कम बेटा ज्यादा है. तो इन दोनों ही रिश्तों से मेरी दिली इच्छा है उसे दूल्हा बना देखने की. लेकिन गौतम का कहना है कि अभी तो मेरे करियर की शुरुआत है.... मुझे अभी काफी खेलना है.</p>
<p class="storytext"><strong>गौतम को नानी के हाथ की बनी कौन सी चीज़ सबसे ज़्यादा पसंद है?</strong></p>
<p class="storytext">वैसे तो वह हर चीज़ बड़े चाव से खाता है...लेकिन मेरे हाथ के बने राजमा-चावल और कढ़ी-चावल उसे बेहद पसंद हैं.</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क्रिकेट और फिल्म में ऐसा भी  हो सकता है ]]></title>
<link>http://dpkraj.wordpress.com/2007/11/22/cricket-aur-film-men-yah-bhee-ho-saktaa-hai/</link>
<pubDate>Thu, 22 Nov 2007 15:50:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://dpkraj.wordpress.com/2007/11/22/cricket-aur-film-men-yah-bhee-ho-saktaa-hai/</guid>
<description><![CDATA[आखिर झगडा किस बात का है? क्रिकेट वालों ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>आखिर झगडा किस बात का है? क्रिकेट वालों ने  एक्टर से  कहा होगा कि-''यार, क्रिकेट को लोग देखने तो खूब आ रहे हैं पर अभी पहले जैसी तवज्जो नहीं मिल रही है। हमारी टीम ने ट्वेन्टी-ट्वेन्टी मैं विश्व कप जीता है और हमें चाहिए फिफ्टी-फिफ्टी के ग्राहक जिसमें विज्ञापन  लंबे समय तक दिखाए जा सकते हैं। सो तुम भी मैदान मैं देखने आ जाओ तो थोडा इसका क्रेज बढे। ट्वेन्टी-ट्वेन्टी के समय से क्रिकेट पेट नहीं भरना है.''</p>
<p>इधर एक्टर भी फ्लॉप चल रहें हो तो क्या करें? एक दिन फिल्म आयी मीडिया मैं शोर मचा फिर थम गया। अरबों रूपये का खेल है और तमाम तरह के विज्ञापन  अभियान(अद्द cअम्पैं) लोगों की भावनाओं पर जिंदा हैं। विज्ञापन    देने वाली  कंपनिया तो सीमित हैं। फिल्मों के एक्टर हों या क्रिकेट के खिलाड़ी उनके प्रोडक्ट के प्रचार के माडल होते हैं। एक क्षेत्र में फ्लॉप हो रहे हों तो दूसरे के इलाके से लोग ले आओ। समस्या फिल्म और क्रिकेट की नहीं है कंपनियों के प्रोडक्ट के प्रचार की हैं। जब किसी प्रोडक्ट के माडल हीरो और खिलाड़ी एक हों तो उनका एक जगह पर होना प्रचार का दोहरा साधन हो जाता  है। </p>
<p>अब आगे और बदलाव आने वाले हैं। जो युवक और युवतियां फिल्म के लिए इंटरव्यू देने जायेंगे उनसे  अपने अभिनय के बारे में कम क्रिकेट के बारे में अधिक  सवाल होंगे। खेल से संबन्धित विषय पर नहीं बल्कि उसे देखने के तरीक के बारे में सवाल होंगे। जैसे<br />
१. जब मैच देखने जाओगे तो कैसे  सीट पर बैठोगे?<br />
२. चेहरे पर कैसी भाव भंगिमा बनाओगे जिससे लगे कि तुम क्रिकेट के बारे में जानते हो?<br />
३. जब कोई देश का खिलाड़ी  छका लगाएगा तो कैसे ताली बजाओगे?<br />
                इस तरह के ढेर सारे सवाल और होंगे और अनुबंध में ही यह शर्त  शामिल होगी कि जब तक फिल्म  पुरानी न पड़े तब तक निर्माता के आदेश पर फिल्म प्रचार के लिए एक्टर मैच देखने मैदान पर जायेगा।  </p>
<p>क्रिकेट में क्या होगा? लड़के दो तरह के कोच के यहाँ जायेंगे-सुबह क्रिकेट के कोच के यहाँ शाम को डांस वाले के यहाँ। भी रैंप पर भी जाना तो होगा क्रिकेट के प्रचार के लिए। आगे जब स्थानीय, प्रादेशिक और राष्ट्रीय स्तर पर जो चयन करता टीम का चयन करेंगे वह पहले खिलाडियों की नृत्य कला की परख करेंगे। क्रिकेट खेलने वाले तो कई मिल जायेंगे पर रेम्प पर नृत्य कर सकें यह संभव नहीं है-और ऐसी ही प्रचार अभियान चलते रहे तो नृत्य में प्रवीण खिलाडियों की पूछ परख बाद जायेगी। हाँ, इसमें पुराने संस्कार धारक दब्बू क्रिकेट खिलाडियों को बहुत परेशानी होगी। यह बाजार और प्रचार का खेल और इसमें आगे जाने-जाने क्या देखने को मिलेगा क्योंकि यह चलता है लोगों के जज्बातों से और जहाँ वह जायेंगे वहीं उनकी जेब में रखा पैसा भी जायेगा और उसे खींचने वाले भी वहीं अपना डेरा जमायेंगे।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क्रिकेट और गंभीर अफरातफरी ]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/2007/11/14/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a4%82%e0%a4%ad%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%ab%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%ab%e0%a4%b0/</link>
<pubDate>Wed, 14 Nov 2007 15:13:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakraj.wordpress.com/2007/11/14/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a4%82%e0%a4%ad%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%ab%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%ab%e0%a4%b0/</guid>
<description><![CDATA[आखिर वहाँ हुआ क्या होगा? लोग भूल गए पर उ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>आखिर वहाँ हुआ क्या होगा? लोग भूल गए पर उन्हें फिर याद दिलाया गया कि झगडे करने वाले खिलाडी ने माफ़ी मांग ली है। सवाल यह है की क्या वाकई झगडा हुआ होगा या फिर यह कोई नही परंपरा क्रिकेट में शुरू हुई है जैसे हिन्दी फिल्मों के हीरो हीरोइन अपनी फिल्म हिट करने के लिए ''अफैयर' का प्रचार मीडिया में कराते हैं, और अब क्रिकेट के खिलाड़ी भी मैदान में कुछ ऐसी हरकतें करते हैं जो कि दर्शकों को नागवार गुजरें और अखबारों और टीवी पर सुर्खियाँ बने। जिस तरह फिल्म के रिलीज होने के कुछ समय बाद हीरो-हीरोइन अपने अफैयर का खंडन करते हैं या किसी दूसरे से अफैयर का प्रचार करते हैं, वैसे ही खिलाड़ी भी मैच या सीरिज ख़त्म होते ही सारी तोहमत मीडिया पर जड़ देते हैं। फर्क यह है कि फिल्मी कलाकारों के साथ किसी देश के जजबात जुडे नहीं होते इसलिए वह अपने आप को भलेमानस साबित करने के लिए माफ़ी-वाफी जैसे चक्कर में नहीं पड़ते जबकि खिलाडियों को अपने देश के मान-सम्मान के साथ अपने छबि और आई.सी.सी.आई के डंडे का भय भी होता है सो कभी सफाई कभी माफ़ी से काम चलाना होता है। </p>
<p>अपने कप्तान ने कहा-'अगर ऐसा नहीं होता तो आप लोगों को मजा कैसे आता है। शांति से क्रिकेट हो तो भी मजा नहीं आता।' अगर अपने देश का कप्तान ऐसा कहे तो कोई टेंशन नहीं होना चाहिए पर फिर उसने मागी क्यों मांगी? अब सवाल आता है कि आखिर उस दिन हुआ क्या जो कि टीवी और अखबारों में वह वाद-विवाद सुर्खियों में आ गया।<br />
ज़रा दिमाग में जोर डाला। मैंने पहले अखबार में पढा था कि जब बिना आवाज वाली फिल्में बनतीं थीं तब कलाकार शुटिंग में वह डायलाग नहीं बोलते थे जो वास्तव में लिख कर फिल्म पर आते थे, बल्कि आपस में हँसी मजाक करते हुए शुटिंग करते थे क्योंकि दर्शकों के सामने तो वह आता तो था नहीं । यह रिवाज कुछ समय तक सवाक फिल्मों में भी चला क्योंकि आवाज की रिकार्डिंग बाद में होती थी। अब उस दिन क्या हुआ होगा, इस पर विचार करते हैं।</p>
<p> बल्लेबाज गेंद को पुश करने के बाद दूसरे सिरे पर जाना चाहता था गेंदबाज ने अपने कुहनी अडा दी। बल्लेबाज रुक गया और बोला होगा-''क्या कर रहे हो यार?''<br />
गेंदबाज ने कहा होगा-''यार, तुम्हारे यहाँ के कुछ मीडिया वाले कह रहे हैं कि सब कुछ शांति से चल रहा है, कुछ गर्मी लाओ। अच्छा अब तुम अपने चेहरे पर गुस्से के भाव लाओ ताकि टीवी पर लोगों को लगे कि बहुत झगडा हो रहा है।''<br />
बल्लेबाज बोला होगा-'' तुम तो हो अफरातफरी वाले। सब चल जायेगा। मैं हूँ बहुत गंभीर। यार तुम क्यों मेरी इमेज खराब करना चाहते हो। तुम्हें कोई और नहीं मिला। अरे इस काम के लिए इतने सारे युवाओं का राजा हैं। धुनाई करने वाला हैं। इस रोल में वह दोनों फिट बैठते, कहाँ मुझे कामेडी रोल में घसीट रहे हो।''<br />
 गेंदबाज ने कहा होगा-''अरे सब तरह के रोल करना सीखो। तुम्हारे यहाँ लाफ्टर शो होते हैं और उसके लिए नये क्रिकेट खिलाड़ी की जरूरत पड़ेगी। तुम्हारे यहाँ एक सिद्ध बाबा टाईप क्रिकेटर हैं न!यही कर छाया हुआ है कि नहीं।''</p>
<p> तब तक अंपायर आया होगा-''तुम, लोग धन्धेबाजी की बात यहीं करोगे या खेलोगे भी। चलो तुम्हारा यह मिलन समारोह हो गया और टीवी पर सब आ गया, अब खेलो।''<br />
उधर से गेंदबाज का कप्तान भी आया और उसने बोला होगा-''यह तुम लोगों ने क्या गंभीर अफरातफरी मचा रखी है। यार, पोल खुल जायेगी। चलो खेलो।''</p>
<p> उधर टीवी और अखबार वाले इस गंभीर अफरातफरी पर अपने समाचार दे रहे थे।लोग सोच रहे थे' आखिर हुआ क्या'। तमाम तरह के चर्चे थे सब तरफ । बिचारे गभीर खिलाडी से ऐसी अफरातफरी। वह गेंदबाज है ही ऐसा। उधर गेंदबाज के साथी उससे लड़ रहे थे। तुमने गलत खिलाडी चुना इस रोल के लिए। इसलिए तुम्हारा अफरातफरी वाला शो फ्लॉप हो गया। </p>
<p>गेंदबाज सोच में पड़ गया होगा। शाम को पार्टी में मिले। बल्लेबाज से गेंदबाज ने कहा होगा-''यार, वैरी सोरी। मैं तुमसे माफ़ी मांगता हूँ।''<br />
बल्लेबाज बोला होगा-''यार देखो यहाँ कोई शो मत करना।''<br />
गेंदबाज ने कहा होगा-''नहीं, पहले तुम मुझे माफ़ करो।'<br />
'बल्लेबाज ने पीछा छुडाने की गरज से कहा होगा-''किया! किया!अब मैं चलूँ।''<br />
शुक्रिया-''गेंदबाज खुश होकर जाने लगा होगा और फिर रुक गया होगा-'पर यह बताओ, मैंने किया क्या था?"<br />
बल्लेबाज ने कहा होगा-''पहले यह याद करो कि किसने करवाया था। यार, मेरा पीछा छोडो। मैं बहुत गंभीर आदमी हो तुम अफरातफरी करने वाले। मुझे तो याद नहीं आ रहा कि किस वजह से तुम्हें माफी दे रहा हूँ। पर तुम ही याद कर लो कि माफी क्यों मांग रहे हो।''</p>
<p> बल्लेबाज चला गया तो गेंदबाज भी सोच में पड़ गया कि आखिर ऐसी कौनसी गंभीर अफरातफरी हुई थी। </p>
<p><strong>नोट-यह व्यंग्य काल्पनिक है और किसी घटना या व्यक्ति से इसका कोई संबंध नहीं है और अगर किसी की कारिस्तानी से मेल खा जाये तो यह संयोग होगा। </strong></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[गुरु-चेला और क्रिकेट ]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/2007/11/05/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81-%e0%a4%9a%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%9f/</link>
<pubDate>Mon, 05 Nov 2007 17:33:17 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
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<description><![CDATA[गुरु चेले जंगल से निकल कर शहर के मुख्य ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>गुरु चेले जंगल से निकल कर शहर के मुख्य बाजार  में आये, तो देखा सब जगह लोग मूर्तियों की तरह खडे थे. बाजार में सब दुकानों   के बाहर लोग खडे थे और टीवी की तरफ घूर कर देख रहे  थे. </p>
<p>                गुरु ने चेले से पूछा-''यह क्या बात है लोग क्या कर रहे हैं.''<br />
               चेले ने कहा-''गुरु जी, सब क्रिकेट मैच देख रहे हैं.<br />
गुरु जी ने कहा-''पिछली बार आये तो यह बीमारी कम थी, क्या फिर यह वाइरस फ़ैल गया. जाओ पता करो. देखते हैं कि कुछ इसका इलाज हो सकता है. मैं तब तक  यहाँ पेड़ के नीचे बैठकर आराम करता हूँ.<br />
                              'कौनसा पेड़ गुरूजी-'चेले ने पूछा<br />
                 गुरूजी ने इधर-उधर देखा-'यहाँ एक पेड़ था न! मैं उसके नीचे आकर बैठता था. लगता  है  काट दिया. चलो वह दुकान बंद है वहीं बैठकर आराम करता हूँ तब तक तुम पीछे वाली लाइन से जल्दी चाय ले आओ.'</p>
<p>                                  चेला चला गया और गुरूजी वहीं  विराजमान हो गए. थोडी देर बार चेला लौट आया और बोला-''गुरूजी चाय वाला बोला इस समय मैच चल रहा है और अपने बल्लेबाज धुआंधार खेल रहे हैं, थोडी देर बाद आना.''</p>
<p>               गुरूजी-''पिछली बार तो कह रहा था की क्रिकेट मैच नहीं देखूंगा. फिर उसने  देखना शुरू कर दिया.''</p>
<p>                चेला-''गुरूजी!ट्वंटी-ट्वंटी विश्व कप में टीम जीतकर आ गयी है इसलिए उसने दोबारा देखना शुरू कर दिया है.''<br />
                   गुरूजी-''ठीक है! थोडी देर बाद चले जाना. वह चाय अच्छी बनता है इसलिए उसके नखरे झेल लेते हैं.<br />
                    थोडी देर बाद चेला लौट आया और बोला-''चाय वाले का मूड खराब हो गया. अपने खिलाडी की सेंचुरी नहीं हो पायी. कहा रहा है की मूड खराब हो गया घर जा रहा हूँ.''<br />
                  गुरूजी बोले-''ठीक है. अब फिर यह वाइरस फ़ैल गया और मुझे पहले ही लग रहा था कि यह बीमारी फिर फैलेगी. फिफ्टी-फिफ्टी गयी तो ट्वंटी-ट्वंटी फ़ैली और साथ में फिफ्टी-फिफ्टी भी लाई.  चलो कहीं और चलते हैं.''</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[BSNL DataOne Broadband Connection and Linux Ubuntu in Kanpur Lucknow]]></title>
<link>http://ubuntukanpur.wordpress.com/2007/11/02/bsnl-dataone-broadband-connection-and-linux-ubuntu-in-kanpur-lucknow/</link>
<pubDate>Fri, 02 Nov 2007 01:36:46 +0000</pubDate>
<dc:creator>oskanpur</dc:creator>
<guid>http://ubuntukanpur.wordpress.com/2007/11/02/bsnl-dataone-broadband-connection-and-linux-ubuntu-in-kanpur-lucknow/</guid>
<description><![CDATA[कानपुर लखनऊ व सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>कानपुर लखनऊ व सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में कम्प्यूटर उपयोग कर्ताओं के लिए <a title="लाइनक्स उबुँटू डाउन लोड करें" href="http://www.ubuntu.com/getubuntu/download" target="_blank">लाइनक्स उबुँटू</a> व बी एस एन एल की डाटा वन इन्टरनैट ब्रौडबैण्ड सेवा -</p>
<p>It seems some kids and even some adult people ( not to talk of ignorant computer, laptop hardware dealers) have difficulties getting their own or customer broadband Internet connection from BSNL India - working with Ubuntu or Kubuntu Linux.</p>
<p>The BSNL Broadband connection costs only Rs 250/- per month and because it is an ADSL connection you can also use the telephone connection on the same phone line. You just need to phone up the BSNL Broadband support and ask them to give you the BSNL LAN details. Usually they are very helpful and will give you : Gateway Address, Primary DNS and Alternate DNS - All very simple - Just note down on piece of paper<br />
The ADSL modem that they give like Sterlite which is a Chinese modem works very well with Ubuntu Linux in Kanpur Lucknow and all of Uttar Pradesh and no separate drivers are required. Just connect the Ethernet and phone lines to the modem. Connect the Ethernet cable to your AMD or Intel motherboard Ethernet port. A green and yellow light comes on if you see the back of your computer or laptop.</p>
<p>What next ? Once your <a title="अपने कम्प्यूटर के लिए आाधुनिक व मुफ्त लाइनक्स उबुँटू डाउन लोड करें" href="http://www.ubuntu.com/getubuntu/download" target="_blank">Ubuntu or Kubuntu</a> is installed from your ISO CD go to Applications - Accessories - Terminal and log in as root user. In Ubuntu root user is sudo</p>
<p>Type in the following in your shell - GNOME desktop shell also called GNOME Terminal :</p>
<p>sudo ppoeconf  - Then enter the username that BSNL gave you. Next enter the password. Keep all the default settings regarding</p>
<p>sudo pon dsl-provider   ( sudo poff dsl-provider - to disconnect Internet connection )</p>
<p>Nowadays most computer dealers will give you a Ubuntu or Kubuntu CD for just Rs 100 and you can install everything yourself. To install printer, keep the printer on while installing your Ubuntu.</p>
<p>Check with : plog ifconfig</p>
<p>Go to any website from your Firefox browser like : http://www.example.com</p>
<p>And hey, your Rs 250/- per month ADSL Broadband connection from BSNL is working at lightning speed in Kanpur Lucknow, Jhansi, Varanasi, Gorakhpur, Patna Moradabad. Nothing else to do. Just tune in to an Internet radio station from Ubuntu and enjoy the latest music and video clips.</p>
<p>Happy Ubuntu !! Everything is working fine !! Free legal Ubuntu !! I'm loving it baby !! And yes if somebody next door wants your help, please do help them out as wel. This is the spirit of Ubuntu in Kanpur and Lucknow. If your Ubuntu is working fine, please do spend some time to get your neighbours Ubuntu working also. No need to wait for IIT engineers. They will never come to you.</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क्रिकेट में संयत व्यवहार रखना आवश्यक ]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/2007/10/19/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%af%e0%a4%a4-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0/</link>
<pubDate>Fri, 19 Oct 2007 11:55:30 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
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<description><![CDATA[     भारत और आस्ट्रेलिया की बीच हाल ही मे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>     भारत और आस्ट्रेलिया की बीच हाल ही में संपन्न श्रंखला में आस्ट्रेलिया के खिलाड़ी साइमंड पर भारतीय दर्शकों द्वारा नस्लभेदी टिप्पणियों और श्रीसंत के व्यवहार की बहुत चर्चा रही है. वैसे देखा जाये तो इन दोनों मामलों में कोई दम नहीं है क्योंकि इस मामले में आस्ट्रेलिया के खिलाडी अधिक बदनाम रहे हैं.  मैदान  के बाहर  भले ही वह अन्य  देशों  के खिलाडियों से मित्रवत व्यवहार  करते हैं पर मैदान पर उनके बुर व्यवहार की सभी देशों के खिलाड़ी करते हैं और कई बार उन्हें सचिन, सौरभ और द्रविड़ जैसे खिलाडियों के साथ बदतमीजी करते देखा गया है. उनके क्षेत्र रक्षकों द्वारा बल्लेबाजों का ध्यान भंग  किया जाता ताकि वह अपनी एकाग्रता खो बैठे  और उसमें वह सफल भी रहते हैं. </p>
<p>              अब पोंटिंग अगर भारतीय खिलाडियों के व्यवहार से क्षुब्ध होकर यह कह रहे हैं कि मैच रेफरी या आई सी सी आई ऐसे मामलों का नोटिस क्यों नहीं ले रही तो उन्हें यह बताना जरूरी है कि ऐसे मामलों में इन सबकी  दया दृष्टि उनके देश पर ही रही है. अगर कुछ नये भारतीय खिलाड़ी उनके साथ ऐसे व्यवहार कर रहे हैं तो इसके लिए वह और उनकी टीम ही जिम्मेदार  है जो कई सालों से विश्व विजेता है और उनसे नये  खिलाडी प्रेरणा लेते हैं. मतलब ऐसे मामलों में वह उनके गुरु हैं और यह उनके चेले गुरु दक्षिणा में वही व्यवहार लौटा रहे हैं. प्रतिपक्षी बल्लेबाज पर फबती कसने के मामले में ऐसा कोई देश नही है जिसके खिलाड़ी अनौपचारिक रूप से आस्ट्रेलिया की शिकायत न  करते हों . पोंटिंग ने भी अभी अखबार वालों के सामने ही  कहा है पर उसकी शिकायत नहीं की है. पाकिस्तानी और श्रीलंकाई खिलाडियों से तो उनके झगडे तक नौबत आ जाती हैपर पुराने भारतीय खिलाड़ी उन्हें झेलते रहे पर नये भारतीय खिलाड़ी उन्हें अब पलट  कर जवाब देने लगे हैं तो बुरा लग रहा है. </p>
<p>                        वैसे भारतीय खिलाडियों को अपना व्यवहार सौम्य रखना चाहिए क्योंकि इस तरह बुरा व्यवहार करने से उन पर भी तनाव आयेगा और  उनके खेल पर ही बुरा असर पडेगा. अगर आस्ट्रेलिया के खिलाडी को टिप्पणी करते हैं तो उसकी लिखित शिकायत करें पर स्वयं कोई ऐसा व्यवहार न करें जिससे उनका और देश का नाम खराब हो. आस्ट्रेलिया वाले इतने सालों से यही कर रहे हैं भारत के महान खिलाडियों ने  उनको अपने खेल से ही जवाब दिया है.  यह क्रिकेट खेल है इसमें हार जीत तो चलती रहेगी पर व्यवहार से अगर छबि एक बार खराब होती है तो फिर नहीं बनती और भारतीय खिलाडियों की छबि व्यवहार के मामले में उज्जवल है. जहाँ तक सायमंड्स पर दर्शकों द्वारा नस्लभेदी टिप्पणियों का सवाल है तो इतने सारे दर्शकों में कुछ शरारती तत्व हो सकते हैं जो देश का नाम बदनाम करना चाहते है पर अधिकतर दर्शक तो ऐसा करने की सोच भी नही सकते.  वैसे भी क्रिकेट को भद्रजनों का खेल  कहा जाता है और मैदान पर खिलाडियों और दर्शकों के संयत व्यहार करना चाहिए</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[धोनी कप्तान की तरह पेश आये ]]></title>
<link>http://rajlekh.wordpress.com/2007/10/15/%e0%a4%a7%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%b9-%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a5%87-2/</link>
<pubDate>Mon, 15 Oct 2007 14:55:07 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
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<description><![CDATA[          एक दिवसीय मैचों के श्रंखला में आस्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>          एक दिवसीय मैचों के श्रंखला में आस्ट्रेलिया ने भारत को अभी  मैचों में हराकर यह सिद्ध कर दिया है कि अभी भी विश्व में उसके सामने कोई टीम टिक नहीं सकती। बीस ओवर के मैचों में भारत को विश्व विजेता का खिताब क्या मिला लोग फिर एक बार क्रिकेट की तरफ आकर्षित होने लगे थे पर अब इन दो पराजयों से उनकी खुमारी उतरने लगी है। समस्या यह है कि दोनों के खेल नियमों बहुत अंतर है और फिर पचास ओवर में हमेशा खिलाड़ियों के खेल के साथ उनके और कप्तान के रणनीतिक कौशल की भी परीक्षा होती है। इस मामले में भी हमेशा भारतीय खिलाडी कमजोर रहे हैं। कप्तान बनना तो सभी चाहते हैं पर उसके दायित्व को कोई नहीं समझता। सबको यह सम्मान तो चाहिए पर इस पद का निर्वाह कैसे हो यह कोई नहीं जानता। जब टीम जीतती है तो कप्तान वाह-वही लूटने को तैयार है और हारते हैं तो सारा आरोप खिलाडियों पर डाल देते हैं-उसमें भी किसी खिलाडी का नाम लेने से कराते हैं। कभी कोई कप्तान अपने खिलाड़ियों को निर्देश देते नज़र नहीं आते। भारतीय गेंदबाज कभी कप्तान से निर्देश लेकर गेंद डाल रहे हों ऐसा नहीं लगता।</p>
<p>               मैने एक कप्तान को यह कहते हुए सुना था कि 'सभी खिलाडी प्रोफेशनल हैं और कोई चीज समझाने की जरूरत नहीं है, वह सब खुद ही जानते है'। मैं सोच रहा था कि फिर अखिर कप्तान आखिर किस मर्ज की दवा है। क्या वह अपने साथी खिलाडियों को सख्ती से अपने मूल स्वरूप के साथ हालत के अनुसार खेलने का निर्देश नहीं दे सकता? ऐसा लगता है कि भारतीय टीम में सीनियर-जूनियर का कहीं न कहीं भेद चलता है इसीलिये ही सीनियर खिलाड़ी चाहे जैसा खेलने लगते हैं क्योंकि इनको वहां समझ या चेतावनी देने वाला कोई नहीं होता। अगर आज हम धोनी से यह अपेक्षा करें कि वह अपनी से वरिष्ठ खिलाडियों पर उनके निराशाजनक खेल पर नाराजगी जताए तो इसकी संभावना नहीं लगती। शायद यह भारतीय टीम के अभ्यास में ही नहीं है कि उसका कप्तान अपने से वरिष्ठ या कनिष्ठ खिलाडी पर ग़ुस्सा जाहिर करे क्योंकि कब सामने वाला उसका कप्तान बनकर आ जाये और फिर बदला लेने। फिर धोनी तो अपनी सामने ही तीन ऐसे भूतपूर्व कप्तानों के खेलते देख रहे हैं जो कभी भी फिर कप्तान बन सकते हैं और ऎसी स्थिति में 'जैसा चल रहा है वैसे चलने दो' की नीति पर चलने के अलावा उनके पास कोई चारा भी नहीं है।</p>
<p>        बीस ओवर की विश्व कप प्रतियोगिता में धोनी इस मामले में बडे भाग्यशाली थे कि उनके व्यक्तित्व को वहाँ चुनौती देने वाला युवराज के अलावा और कोई नहीं था और उसने भी उनका बखूबी साथ निभाया। पर इन एक दिवसीय मैचों में जिस तरह भारतीय टीम पिट रही हैं उससे तो यह लगता है कि धोनी अपनी ही देश में असफल होने जा रहे हैं और खिलाड़ियों पर उनका कोई नियन्त्रण नहीं है। इस तरह लगतार असफल होने पर अगर वह अपने साथी खिलाडियों पर अगर इस वजह से गुस्सा नहीं हुए कि भविष्य में कोई उनमें से पुन: उनका कप्तान बनकर उनका भी भविष्य चौपट कर सकता है तो इस टीम के खिलाडियों के खेल में कोई सुधार नहीं होने वाला। अगर धोनी चाहते हैं कि उनका नाम सफल कप्तानों की सूची में शामिल हो तो उन्हें वरिष्ठ खिलाड़ियों को भी हालत के अनुसार खेलने के निर्देश देने होंगे।</p>
<p>अभी श्रंखला में हारने से उनकी कप्तानी पर प्रश्न चिन्ह उठना शुरू हो गया हैं-बीस ओवर की विश्व कप  में उनकी जो छबि बनी थी अब वह धूमिल होना शुरू हो गयी है-वैसे वहाँ किसी खास रणनीतिक कौशल का प्रदर्शन नहीं किया था और जो अब मिला तो वह उनके हाथ से जा रहा है. एक मामले में उनके स्थिति अन्य भारतीय  कप्तानों से अलग है कि आज तक किसी भी कप्तान ने तीन भूतपूर्व कप्तानों का संभालने का काम नहीं किया है </p>
<p>कल  ब्लोग पर प्रकाशित कविता यहाँ प्रस्तुत है।<br />
<strong>बीस का नोट पचास में नहीं चलेगा</strong></p>
<p>बीस के शेर<br />
पचास में ढ़ेर<br />
जीतते हैं तो फुलाते सीना<br />
हारें तो कहें’समय का फेर’<br />
समझाया था क्यों करते हो<br />
पचास का आयोजन<br />
जब है बीस का भोजन<br />
क्रिकेट कोई दाल होता तो<br />
पानी मिलाकर चला लेते<br />
कुछ खा लेते तो<br />
बाकी भूखे रह जाते माला फेर<br />
बीस ओवर के खेल पर<br />
बहुत खुश हुए थे कि<br />
दुनिया में जीते अपने शेर<br />
पचास ओवर के खेल में<br />
कंगारुओं की फुर्ती से हुए ढ़ेर<br />
कहैं दीपक बापूलोग पूछ रहें हैं<br />
‘वह मधुर सपना था या<br />
खडा है सामने यह कटु सत्य’<br />
दिन भर पूछने लगे हैं फिर स्कोर<br />
चर्चा करते हैं क्रिकेट की<br />
सांझ हो या भोर<br />
चौबीस साल पुरानी  कहानी<br />
फिर सामने आ रही है<br />
जब विश्व विजेता हुए थे<br />
इसी तरह ढ़ेर<br />
अब इस कहानी पर<br />
अगले चौबीस महीने तक भी<br />
नहीं चलेगा खेल<br />
काठ की हांडी बार-बार नहीं चढती<br />
छोटी जीत पर बड़ी हर नहीं फबती<br />
बीस का नोट पचास में नहीं चलेगा<br />
कितना भी नया हो बीस का ही रहेगा<br />
पोल खुल जायेगी देर-सबेर</p>
]]></content:encoded>
</item>

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