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	<title>कमसिन &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/कमसिन/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "कमसिन"</description>
	<pubDate>Sun, 06 Jul 2008 15:17:41 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[इश्क़ सुना है हमने बहुत]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=972</link>
<pubDate>Sun, 11 May 2008 13:33:10 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=972</guid>
<description><![CDATA[इश्क़ सुना है हमने बहुत
ज़रा करके तो देख]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">इश्क़ सुना है हमने बहुत<br />
ज़रा करके तो देखें<br />
मिल जाये कोई कमसिन हसीना<br />
उसपे मरके तो देखें<br />
हाए रे हाए, हाए रे हाए<br />
इश्क़ करके तो देखें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सुना है हसीं होता है इश्क़<br />
इश्क़ में सभी मौसम हसीं हो जाते हैं<br />
ख़ुश्बू है कोई, हाथों से छुई<br />
मुरझाये गुल, ताज़ा-तरीं हो जाते हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मिल जाये कोई कमसिन हसीना<br />
उसपे मरके तो देखें<br />
हाए रे हाए, हाए रे हाए<br />
इश्क़ करके तो देखें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">कोई फुलझड़ी, कोई रूबीना<br />
कभी तो पास आये, लौ से लौ लगाये<br />
आये ज़रा, लगके मेरे गले<br />
दिल की प्यास बुझाये, बे-तस्कीं मिटाये</span></p>
<p><span style="color:#000000;">अब तक हसीं, देखे कई<br />
वह तो इनमें नहीं हैं<br />
हाए रे हाए, हाए रे हाए<br />
वह तो और कहीं हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">कमबख़्त यह दिल परेशाँ<br />
जलता है ख़ुद, मुझको जलाता भी है<br />
ऐ मेरे ख़ुदा क्या मुझसे गिला<br />
तू क्यों मुझको उससे मिलाता नहीं है<br />
</span></p>
<p><span style="color:#000000;">इश्क़ सुना है हमने बहुत<br />
ज़रा करके तो देखें...</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैं हूँ चाँद है तुम भी होगी कहीं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=864</link>
<pubDate>Fri, 29 Feb 2008 15:19:37 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=864</guid>
<description><![CDATA[मैं हूँ, चाँद है, तुम भी होगी कहीं
मैं द]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मैं हूँ, चाँद है, तुम भी होगी कहीं<br />
मैं देखता हूँ जो चाँद को...<br />
तुम भी इसे देखती होगी कहीं</font></p>
<p><font color="#000000">माहे-कामिल ने देखा है मुझे<br />
तेरे पाँव के निशाँ पे सजदा करते हुए<br />
सहर उस वक़्त दरक रही थी<br />
सूरज आ रहा था कमसिन किरनें लिए</font></p>
<p><font color="#000000">यह हवा यह घटाएँ<br />
सभी से मैंने कहा था, कहना<br />
मुझे प्यार है तुमसे<br />
जाने तुमने मेरी सदा को<br />
महसूस किया होगा कि नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">मैं तन्हा ही तन्हाइयों को दोहराता हूँ<br />
दिल की सदाओं से तुमको बुलाता हूँ<br />
तुम चले आओ सुनकर मेरी सदा<br />
मैं रोज़ ही गीली पलकें सुखाता हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी आँखों ने देखे हैं<br />
कई टूटते हुए सितारे<br />
जिनको तुमने भी देखा होगा<br />
जाने उन्होंने तुमको मेरी<br />
क़िस्मत में लिखा होगा कि नहीं</font></p>
<p>माहे-कामिल= full moon, पूर्णिमा का चाँद</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १८ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरा सपना कब होगा पूरा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=779</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 07:12:06 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=779</guid>
<description><![CDATA[मेरा सपना कब होगा पूरा
जो है अब तक अधूर]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरा सपना कब होगा पूरा<br />
जो है अब तक अधूरा<br />
मेरा सपना कब होगा पूरा<br />
जो है अब तक अधूरा<br />
कब कोई आयेगी दिल मेरा चुरायेगी<br />
जाने कब दिल की सदा यह गायेगी<br />
मेरा सपना हो गया पूरा<br />
जो था अब तक अधूरा</font></p>
<p><font color="#000000">फूलों-सी नाज़ुक वह कमसिन हसीना<br />
जिसके लिए दिल चाहे जीना<br />
फूलों-सी नाज़ुक वह कमसिन हसीना<br />
जिसके लिए दिल चाहे जीना<br />
वह परियों की रानी<br />
जो है मेरी ज़िन्दगानी<br />
कब आयेगी वह दिल चुरायेगी जो<br />
मेरा सपना कब होगा पूरा<br />
जो है अब तक अधूरा</font></p>
<p><font color="#000000">महकी हवाओं में चंचल फ़िज़ाओं में<br />
उसके नामो-निशाँ हैं पर वह नहीं<br />
जिसको ढूँढ़ता हूँ हमेशा यहाँ-वहाँ<br />
चाँद से पूछता हूँ राहों में ढूँढ़ता हूँ<br />
कब मिलेगी वह जिसको ढूँढ़ता हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा सपना कब होगा पूरा<br />
जो है अब तक अधूरा<br />
कब कोई आएगी दिल मेरा चुरायेगी<br />
जाने कब दिल की सदा यह गायेगी<br />
मेरा सपना हो गया पूरा<br />
जो था अब तक अधूरा<br />
मेरा सपना कब होगा पूरा...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>

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